रहबर है मुस्तुफा
  • शीर्षक: रहबर है मुस्तुफा
  • स्रोत:
  • रिलीज की तारीख: 23:48:13 29-6-1405

इंसानियत के हादीओ रहबर है मुस्तुफा

दरयाए मारेफत के शनावर है मुस्तुफा

खत्मे रसुल है खास्साऐ दावर है मुस्तुफा

मौलाए जा है शाफाऐ महशर है मुस्तुफा


खल्लाक़े दोजहाँ ने इन्हे मुस्तुफा किया

कौनेन का अमीर किया पेशवा किया
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औसाफ क्या बयां हो रसूले करीम के

परदे उठाऐ कौन अलिफ लाम मीम के

खोऐ हुऐ हवास है फ़िर्के सलीम के

सरकार ताजदार है ख़ुल्के अज़ीम के


अल्लाह मदहा खां है रिसालत मआब का

क़ुरआन पढ़ रहा है क़सीदा जनाब का
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उनकी फ़ज़ीलतो का ठिकाना कोई नही

कौनो मकां मे उनसा नही दूसरा हसीं

उनके लिऐ बिछाई गई मसनदे यक़ीं

ये वाक़ई है बुर्जे शरफ के मऐ मुबीन


चश्मा है ये उलूम का मरकज़ कमाल का

इनका जवाब है न जवाब इनकी आल का
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इस्मत है इनकी लुत्फे खुदा वंदे ज़ुलजलाल

सीरत है इनकी आयते ततहीर का जमाल

इज़्ज़त है इनकी ऐसी के जिसको नही ज़वाल

हुरमत है इनकी ऐसी, नही जिसमे क़ीलो क़ाल


मजमुआऐ सिफात है, रिफअत का बाम है

ये फ़ख्रे काय़नात है आली मक़ाम है
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वासिफ ये मरतबा है रसूले अनाम का

भेजा है रब ने तोहफा दुरुदो सलाम का

इन पर है इख्तेताम इलाही पयाम का

क़ायम है इनसे हुस्न हक़ाए दवाम का


आलम मे इनकी ज़ात सिराजे मुनीर है

ये वो किताब लाऐ के जो बेनज़ीर है