नमज-क-बरबर-कस-भ-इबदत
- शीर्षक: नमाज़ के बराबर किसी भी इबादत
- स्रोत:
- रिलीज की तारीख: 8:17:27 4-5-1405
नमाज़ के बराबर किसी भी इबादत की तबलीग़ नही हुई
हम दिन रात में पाँच नमाज़े पढ़ते हैं और हर नमाज़ से पहले अज़ान और इक़ामत की ताकीद की गई है। इस तरह हम
बीस बार हय्या अलस्सलात (नमाज़ की तरफ़ आओ।)
बीस बार हय्या अलल फ़लाह (कामयाबी की तरफ़ आओ।)
बीस बार हय्या अला ख़ैरिल अमल (अच्छे काम की तरफ़ आओ)
और बीस बार क़द क़ामःतिस्सलात (बेशक नमाज़ क़ाइम हो चुकी है)
कहते हैं। अज़ान और इक़ामत में फ़लाह और खैरिल अमल से मुराद नमाज़ है। इस तरह हर मुसलमान दिन रात की नमाज़ों में 60 बार हय्या कह कर खुद को और दूसरों को खुशी के साथ नमाज़ की तरफ़ मुतवज्जेह करता है। नमाज़ की तरह किसी भी इबादत के लिए इतना ज़्याद शौक़ नही दिलाया गया है।
हज के लिए अज़ान देना