ख़्वाब की ताबीर
लेखकः अल्लामा मजलिसी
तरजुमाः अमान अली ज़ैदी
नोटः ये किताब अलहसनैन इस्लामी नेटवर्क के ज़रीऐ अपने पाठको के लिऐ टाइप कराई गई है और इस किताब मे टाइप वग़ैरा की ग़लतीयो को सही किया गया है।
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पेश लफ्ज़
काफ़ी अर्से से ये खयाल था कि कोई ऐसी किताब लिखी जो ख़्वाबों कि सहीह ताबीर पर मुश्तिमल हो 1 नीज़ मोमिनीन कराम का इसरार भी नाक़ाबिले बरदाश्त था क्योकि उर्दु ज़बान मे कोई ऐसा मोतबर ख़्वाब नामा मौजूद नही था जो मोमिनीन कि इस़ रोज़मररा- की अहम ज़रूरत को पूरा कर सकता 1 लेहाजा ज़ेरे नज़र किताब ताबीरूरोया कि तरतीबो तदवीन को पुख्ता तालीफिया जो मौलाना नज़र हुसैन साहब ज़फऱ मौलाना जव्वाद उल हुसैन हमदानी मौलाना सैय्यद इकरार हुसैन साहब और मौलाना गुलाम हैदर साहब पर मुश्तमिल है के सुपुर्द कर दिया गया 1 जिन्होने बडी काविश और ज़ाफिशानी से इस ख्वाब नामे को मुरत्तब किया और इस सिलसिले मे मुख्तलिफ कुतुब व तफासीर खूसूसन आयतुल्लाहुल् उज़म मौहिदिदसे आज़म जनाब मौ. बाक़िर साहब कददसल्लाहो की माया नाज़ किताब बिहारूल अननार को पेशे नज़र रखा और उसके अलावा दीगर मशहुरो म्रारूफ कुतुब से इस्तिफादा किया बख़्ता तालीफिया ने अपने तई इन्तिहाई कोशिश की कि कोई ऐसा मवाद इस किताब मे गैर मौजूद हो लेकिन ज़मानए हाल मे शाया किया जा रहा है उम्मीद है कि हिन्दी जानने वाले इस्तेफादा करेगे।
बिस्मिल्ला हिर्रहमानिर्रहीम.
अक़्सामे ख़्वाब. ख़्वाब की चार क़िस्में होती हैं। 1. वो ख़्वाब जो अल्लाह तआला की तरफ से हो और उसकी तावील व तबीर होती है। 2. वो ख़्वाब जो वसावसे शैतान से हो। 3. वो ख़्वाब जो ग़ल्बऐ अग़लात यानी सफ़रा ,सौदा , बल्ग़म या खून में से किसी एक की ज़्यादती की वजह से हो मसलन जिस शख़्स को सौदा का ग़ल्बा हो उसे उमूमम ख़वाब मे स्यिह रंग की ख़ौफनाक चीज़े नज़र आती हैं। 4. वो ख़्वाब जो अफकारो तफक्कुरात की वजह से हो।पहले ख़्वाब के अलावा दीगर ख़्वाब परेशान और मुख़्तलित और मुतलब्बिस बे हकीकत होते हैं(सफीनतुल बिहार)
वैसे मशहूर है कि ख़्वाब वो है जो सुबहे सादिक़ से पहले रोज़ा रखने के वक़्त आये सच्चा ख़वाब वो है जो दिन में आये।
ख़्वाब की पहली क़िस्म
यह ख़्वाब सालेह और सादिक़ होता है उसका तअल्लुक़ अंबिया और अईम्माए ताहेरीन(अ. स.)से है और कभी ये ख़्वाब नेक और सालेह बन्दों को भी देखने मे आता है।जिसमें किसी मुतवक़्क़े अम्र की जानिब इशारा होता है और ये किसी होने वाले खौफ़नाक अम्र से तहज़ीर होती है या किसी मुफीद और अच्छे अम्र की ताबीर होती है।
कुर्आने मजीद में ख़्वाबों का तज़किरा
कलामे पाक में अंबिया और ग़ैर अंबिया के ख़्वाबों का ज़िक्र मौजुद है जिससे मालूम होता है के तमाम ख़्वाब बे हक़ीकत नहीं होते बल्कि अकसर औक़ात सालेह और सादिक़ भी होते है जैसा कि सूराए युसूफ में है. ,,जब हज़रत युसुफ ने अपने बाप से कहा ऐ बाबा में ने ग्याराह सितारों और सूरज और चॉद को (ख़्वाब में देखा है) मैंने देखा है कि ये सब मुझे सज्दह कर रहे हैं।
हज़रत युसुफ के साथ और भी दो जवान आदमी कैंद में दाख़िल हुए उन में से एक ने कहा कि मैंने ख़्वाब देखा है कि मैं शराब बनाने के वास्ते अंगूर निचौड़ रहा हूं और दूसरे ने कहा कि मैने भी ख्वाब मे अपने को देखा है कि मै अपनै सर सर रोटियां उठाये हुऐ हू और परिन्दे उसमे से खा रहे है और (युसुफ) हमे इसकी ताबीरल बताईये क्योकि हम तुम को यकीनन नेकोकार से समझते है 1
इस ख्नाब की ताबीर ऐ मेरे कैदखाने के दोनो रफीको (अच्छा ताबीर सुनो) तुममे एक (जिसने अंगूर निचोड़ा) अपने मालिक को शराब पिलाने का काम करेगा और दूसरा जिसने सर पर रोटियां देखी , सूली दिया जायेगा और परिन्दे उसके सर को नोच कर खायेंगें 1 जिस अम्र के मुतअल्लिक तुम दरयाफ्त करते हो उसका फैसला हो गया (इसी असना मै बादशाह ने भी ख्वाब देखा) और कहा मैने ख्वाब देखा है कि सात मोटी ताज़ी गायें हैं उनको सात दुबली पतली गायें खाये जाती है और सात ताज़ा सब्ज़ बालियां देखी और सात सूखी बालियां ऐ दरबार के सरदार अगर तुमको ख्वाब की ताबीर देनी आती है तो मेरे इस ख्वाब के बारे मे हुक्म लगाओ।
इस ख्वाब की ताबीर (कैदखाने से निजात पाने वाला गया और कहा) ऐ बड़े सच्चे युसुफ ज़रा हमे ये तो बताईये कि सात मोटी ताज़ा गायों को सात दुबली पतली गाये खा जाती है और सात बालियॉं है।हरी सरसब्ज़ और फिर सात सुखी हुई इसकी ताबीर क्या है।ताकि मै लोगौ के पास पलट कर जाऊं और बयान करूं ताकि भी (तुम्हारी कद्र) मालूम हो जाये।युसुफ ने कहा कि (इसकी ताबीर ये है) तुम लोग मुतवातिर सात काश्तकारी करते रहो तो जो फसल तुम काटो उसके बाद बड़े खुश्क साली के सात बरस आयेंगे कि जो कुछ तुम लोगों ने इन सात सालो के वास्ते पहले से जमा कर रखा होगा सब खा जायेंगे मगर कदरे कलील जो तुम बीज के वास्ते बचा कर रखोगे बस उसके बाद एक साल ऐसा आयेगा जिसमे लोग उस साल उसे शराब के लिये निचोड़ेगें।तो एक दफा हज़रत इब्राहीम ने कहा कि बेटा (इस्माईल) मै ख्वाब मे (वही के ज़रिये) क्या देखाता हूं कि मै खुद तुम्हे ज़िब्हा कर रहा हूं तो तुम भी ग़ौर करो इस मे तुम्हारी क्या राय है इस्माईल (अ. स.) ने कहा अब्बा जान जो आपको हुक्म हुआ है।उसे (बेतअम्मुल) कीजियेगा अग़र खुदा ने चाहा आप मुझे सब्र करने वालो मे पायेगे।
बेशक खुदा ने अपने रसूल कोस सच्चा (मुताबिके वाकआ) ख्वाब दिखायात था कि तुम इन्शाअल्लाह मस्जिदुल हराम (मक्का) मे अपना सर मुडवाकर और थोडे से बाल कटवाकर बहुत अमनो इत्मिनान से दाखिल होगे और किसी का खौफ न करोगे।
चन्द अहम ख्वाब का ज़िक्र
उम्मल फज़ल बिन्ते हारिस बयान करती है कि मै पैग़म्बरे इस्लाम की खिदमत मे हाज़िर हुई और अर्ज़ कि मै ऐ अल्लाह के रसूल (स. अ.) मैने आज रात एक बुरा ख्वाब देखा है कि आपके जिस्में मुबारक का एक टुकड़ा कट गया और मेरी गोद मे रखा गया।हुजूर (स. अ.) ने फरमाया तूने अच्छा ख्वाब देखा है मेरी बेटी फात्मा (स. अ.) के यहां इन्शाअल्लाह एक बच्चा पैदा होगा जिसे तू गोद मे उठायेगा।उम्मुल फ़ज़ल कहती है आलिया बीबी के यहां हुसैन(अ. स.) पैदा हुये तो मैने उनहें गोद मेने एक दिन हुसैन इब्ने अली (अ. स.) को गोद मे उठाया नबीऐ करीम (स. अ.) के पास आई और उन्हें आपकी की गोद मे रखा।फिर जो मेरी तवज्ज़ोह किसी और तरफ हुई तो मैने देखा कि रसूल अल्लाह की दोनो आंसऔ से छलक रही है।मैने अर्ज़ की ऐ अल्लाह के रसूल (स. अ.) मेरे मां बाप आप पर फिदा हो गया।फरमाया अभी-अभी मेरे पास जिब्रील मेरे पास सुर्ख मिटटी ले आये है (मिश्कात)
2. हज़रत फात्मा (स. अ.) ने अपनी वफात से कुछ दिन पहले ख्वाब मे देखा आप जन्नत मे दाखिल हई और आपको पैग़म्बरे खुदा (स. अ.) ने गले से लगाया और पेशानी पर बोसे दिये और फरमाया मकान ऐ मेरी बेटी तू मेरे पास चन्द दिन के बाद आ जायेगी।और य़े ख्वाब सैय्यदा (स. अ.) नेअमीरूल मोमिनीन मुझे ख़्वाब में बाबा मिले और वो मुझे अपने यहां बुला रहे है।अब मै इस दारे फानी से चन्द दिन के बाद हमेशा के लिये रूख्सत हो जाऊगी।बिहारूल अनवार मे आलिया बीबी के चन्द और खवाबो का भी जिक्र है (सफीना)
3. जनाबे अमीरूल मोमिनीन ने ख्वाब मे दूखा कि कुछ आदमी आसमान से सरज़मीने करबला पर उतरे है।उन्होने सरज़मीन करबला के आस पास एक ख़त खीचा है और इस ज़मीन मे खजूरो के दरख्त ताज़ा खून मे डूबा हुआ फरयाद करके मदद तलब कर रहा और कोई उसकी मदद नही करता।
4. हुसैन इब्ने अली (अ. स.)ने ख्वाब मे अपने नाना को देखाकि उन्होने मुझे अपने सीने से लगाया और पेशानी पर बोसे दिये और फ़रमाया ऐ हुसैन मरा बाप तुझ पर कुर्बान हो जाये गोया मै तुझ तेरे खून मे ग़ल्तॉ देख रहा हुं।
5. नवी मोहरर्म की अस्र को मज़लूमे करबला ने ख्वाब मे नबीऐ करीम (स. अ।) को देखा आप फ़रमा रहे है बेटा कल तू हमारे पास पहुंच जायेगा।
6, जनाबे सकीना बीबी का एक पुरदर्द ख्वाब किताबे बिहारूल अनवार मे मज़कूर है कि बीबी ने दामिश्क मे देखा कि नूर के पॉच नाके है उन पर पॉच शख्स सवार है और उनके इर्द गिर्द मलाएका हैं औऱ हर नाके के हमराह एक खादिम है तो मैने पूछा ये कौन लौग है।खादिम ने जवाब दिया अव्वल हज़रत आदम सफीयुल्ला चौधे हज़रत ईसा रूहुल्ला है मैने पूछा ये हज़रत कौन है अपने महासिने शरीफ को हाथ में पकड़े हुये हैं और निहायत करबो अलम से कभी गिरते हैं कभी उठते हैं।कहा कि वो तुम्हारे नाना रसबल उल्लाह (स. अ.) हैं।मैने पूंछा ये हज़रत कहॉ जाते हैं तो कहा तुम्हारे बाबा के पास और ज़ल्मो सित्म जो उनके बाद मुझपर गुज़रे हैं बयान करूं।इसी असना में नूर के पॉच हौदज नज़र आये जिन पर पॉच बीबीयॉ बै थी।मैने इस खादिम से पूछा ये कौन है।उसने कहा अव्वल हव्वा उमम्मुल बशर दुसरी आसिया दुख़्तरे मज़ाहिम तीसरी मरयम बिन्ते इमरान चौथी खूवेलद मैने पूछा पॉचवी बीबी कौन है जोअपने हाथ सर पर रखे हुये है जो कभी बैठ जाती है कहा कि ये तुम्हारी दादी फातिमा ज़हरा (स.) दुखतरे रसूल खुदा (स. अ.)है मैने कहा बखुदा मै ज़रूर उनसे अपने मसाएब अर्ज़ करूंगी फिर मै उनके सामने गयी और बकमाले अदब खड़ी होकर रोती रही मौने अज़ की ऐ दादी अम्मा खुदा की क़सम मुस्मानो ने हमारे हक़ का इन्कार किया ऐ दादी खुदा कि क़सम उन लोगो ने हमारी इज़्जत और हुर्मत का ख़याल न किया
दादी अम्मा इऩ लोगो ने मेरे बाबा हुसैन (अ. स.) को शहीद कर डाला ये सुन कर खातून क़यामत ने फरमाया बेटी सकीना ज़्यादा न रो कि तेरे रोने से मेरा दिल टुकड़े और मेरा जिगर ज़ख्मी हो रहा।ये तेरे बाबा हुसैन का कुर्ता मेरे पास है उसको मै जुदा नकरूगी यहॉ तक कि अपने परवरदिगार के सामने जाऊंगी।उसले बाद मेरी ऑख खुल गयी।
7. इसी तरह बिहारूल अनवार में हिन्दा ज़ौजए यज़ीद(ल.)से रिवायत है वो कहती है कि मै अपनी ख्वाबगाह मैने देखा कि आसमान का एक दर गिरोह उतर रहे है और कह रहे है अस्सलामो अलैका या अबाअब्दिल्लाह अलैका यबना रसुलिल्लाह।इसी अस्ना मे एक अब्र नमूदार हुआ उसमें से बहुत से आदमी उतरे और बुज़ुर्ग जिनका चेहरा निहायत ताबिन्दा व दरख़शॉ था दौड़े हुये सरे हुसैन (अ. स.) की तरफ आये और झुक कर दन्दाने मुबारक के बोसे देने लगे और रो रो कर कह रहे थे ऐ मेरे फ़रज़न्द तुझे क़त्ल किया गया तुझको किसी ने न पहचाना तुझे पानी तक न दिया गया ऐ मेरे नाना रसूले खुदा हूं और येतेरा बाप अलीये मुतुर्ज़ा हैं और ये तेरा भाई हसने मुज्तुब और ये तेरा चचा जाफरे तय्यार और अकीलो हम्ज़ा व अब्बास है।इसी तरह हुज़ूरे अपने अहलेबैत मे से एक एक का नाम ले रहे थे।हिन्दा कहती हैं कि मैं इस खवाब को देखकर बहुत डरी औऱ निहायत परेशानी की हालत मे बेदार हुई।अचानक एक नूर देखा कि सरे हुसैन पर फैला हुआ है पस मैंने यज़ीद को ढूडॉ देखा कि वो एक तारीक कमरे मे अपना मुंह दीवार की तरफ किये हुये निहायत ग़म में कह रहा है कि मुझको हुसैन से क्या काम था मैने हुसैन इब्ने अलली को क़त्ल कराके क्या लिया।
8. बसरे के एक आदमी ने ख़्वाब देखा कि वो हौज़े कौसर पर आया और इमाम हसन व हुसैन (अ. स.) से पानी मांगा तो दोनों शहज़ादों को पैग़म्बरे इस्लाम (अ. स.) ने उसे पानी पिलाने से मना फरमाया और हुज़ूर ने उससे फरमाया कि तेरा एक पड़ोसी है जो अली (अ. स.) की शान में गुस्ताख़ियॉ करता है और तूने कभी उसे मना नहीं किया इस मर्द ने अर्ज़ की ऐ अल्लाह के रसूल (स. अ.)वो मेरा पड़ोसी दुनियादार होने की वजह से बड़ा मग़रूर है और मैं एक तंगदस्त और फक़ीर आदमी हूं उसे मना करने की मुझमे ताक़त नही तो पैग़म्बर ने एक तेज़ छुरी निकाली और फरमाया जा और उसे इस छुरी से ज़िब्हा कर दे।वो कहता है कि मैं गया और उसे चारपाई पर लेटा हुआ पाया तो मैने आलमे ख़्वाब में उसे उसकी चारपाई पर ज़िब्हा कर डाला और खून से लथड़ी हुई छुरी लेकर मैं पैंग़म्बरे इस्लाम की ख़िदमत में हाज़िर हुआ।तो हुज़ूर ने हुसैन (अ. स.) से फरमाया उसे पानी पिलाओ पस वो मर्द कहता है कि मैं घबराया हुआ बेदार हुआ जब सुबहा हई तो मैंने रोने पीटने की आवाज़ें सुनी और जब रोने पीटने की वजह पूंछी तो मुझे एक आदमी ने कहा कि फलॉ आदमी अपनी चारपाई पर मकतूल और मज़बूह पाया गया है (सफीना) 9. बिहारूल अनवार में है कि मदायनी ने कहा पैग़म्बरे ख़ुदा (स. अ.) ने उम्मुल मोमिनीन उम्मे सलमा को एक शीशी दी जिसमें ख़ाके करबला थी और पैंग़म्बर (स. अ.) ने फरमाया था कि ऐ उम्मे सलमा जब ये ख़ाक ताज़ा खून हो जायेगी तो समझ लेना कि मेरा फरज़न्द हुसैन (अ. स.) शहीद कर दिया गया सलमा कहती हैं कि एक रोज़ बीबी सलमा के घर से नौहा ओ ज़ारी की आवाज़ बुलन्द हुई पस मैं सबसे पहले वहॉ गयी ,माजरा पूंछा तो आप ने फरमाया कि अभी अभी पैग़म्बरे खुदा (स. अ.) को ख़्वाब में देखा कि आपने फरमाया कि अभी अभी पैगम्बर खुदा (स. अ.)को ख्नाब में देखा कि आप के सर मुबारक और रीशे मुबारक पर गर्दो गुबार है।मैने अर्ज़ की ऐ अल्लाह के रसूल (अ. स.) शहीद कर दिया गया है ये सुन कर मै घबरा कर उठी और शीशी को देखा कि ताज़ा खनू जोश मार रहा था।सलमा कहती है मैने देखा के उम्मे सलमा बीबी उस शीशीको आगे रखे रखे हुए थी।
10 इसीतरहा रोज़े आशूरह अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास ने भी दोपहर के वक्त ख्वाब देखा कि आप परागन्दा मुंह और गुबार आलूद है और आपके हाथ मे एक शीशी है जिसमे खून है तो इब्ने अब्बास ने पूंछा ये क्या है. आपने फरमान ये हुसैन और उस के असाब का खून है इब्ने अब्बास कहते है जिस दिन मैने ख्वाब देखा था (सवाएके मोहरका सफा 191)
11 हिनान इब्ने सदीर सैरनी से रिवायत है कि मैनेअपने बाप से सुना वो कहते कि मैने पैग़म्बर इस्लाम (स. अ.) को ख्वाब मे देखा आपने सामने एक तबक था।मैं हुजूर (स. अ.)के करीब गया और सलाम किया देकता हूं कि उसमे ताजा ख़जूरें थीं हुजूर (स. अ.) उसमे लगे तो मै हुजूर (स. अ.) के करीब हुआ मैने अर्ज़ की ऐ अल्लाह के रसूल (स. अ.) मुझे भी ख्जुर का एक दाना दीजिये हुजूर (स. अ.) ने मुझे एक दाना दिया और मैने उसे खाया फिर मैने अर्ज़ की मुझे एक और खजूर का दाना दिया मैने उसे भी खालिया पस जब दाना खा लेता तो फिर सवाल करता यहां तक कि आपने मुझे ख़जूर के आठ दाने दिये और मैने उन्हे खाया फिर मैने मॉगा तो हुजूर (स. अ.) फरमाया कि यही काफी है वो कहता है कि मै अपने इस ख्वाब से बेदार हुआ तो सुबह को इमाम जाफ़रे सादिक़ (अ. स.) के पास हाज़िर हुआ देखा हुजूर (स. अ.) के सामने देखा था पस मैने इमाम को सलाम अर्ज़ किया तो हुजूर (अ. स.) ने जवाबे सलाम दिया फिर अपने तबक से रूमाल उठाया तो क्या देखता हूं कि उसमे सेखाने लगे मै मुतअज्जिब हुआ और अर्ज़ की मै आप पर कुर्बान हो जाऊं मुझे एक दाना दीजिये हुजूर (अ. स.) ने एक दाना दिया और मैने खायाफिर तलब किया यहॉ तक आठ दानेखाये फिर मॉगा तो आपने फरमाया (अगर मेरे नाना रसूल स. अ. तुझे और खुजूर देते तो मै भी तुझे ज़रूर ज़्यादा देता)इस के बाद मैने रात वाला ख़्वाब सुनाया तो हुजूर इस तरह तुतबस्सिम हुए कि आप इस वाकिए को ख़ूब जानते है।
12. इसी तरह हारून मिसरी जो मुतवक्किल के क़ायदीन में से था ने रसूल पाक (स. अ.) उसको मना फरमा रहे हैं कि वो कर्बला न जाये और मुतवक्किल के हुक्म से क़ब्र हुसैन (अ.) को न खोद।लेकिन वो बाज़ न आया और जिस तरहा मुत्वक्किल ने उसे हुक्म दिया था उस काम को करने के लिये जाना चाहता था उसने दोबारा रसूल पाक (स.)को ख्वाब मे देखा तो आप ने उसे ऐसा तमाचा मारा और उसके मुंह पर थूका पास उसका मुंह तारकोल की तरह सियाह हो गया और उससे काफी मुददत तक बदबू आती रही।
13 खजूरों वाला ख्वाब एक और तरह से मंकूल है कि अबी कि अबी हबीब बनाजी ने पैग़म्बर इस्लाम (स.) को ख्वाब मे देखा कि आपके सामने एक तबक़ है जिसमे सेहानी खजूरें हैं।हुजूर (स.) ने एक मुठठी खजूरो की दी।उसने ख़्वाब मे ही उन्हे शुमार किया तो अठठाराह थीं फिर वो आलमे बेदारी मे इमाम रज़ा (अ.) के पास पहुंचा आप के सामने उसी तर सेहानी खजूरों का तबक था आपने अबी हबीब को उन खुजूर की एक मुठठी दी उसने शुमार किया तो वो इठठाराह थी उसने अर्ज़ किया मौला कुछ और दीजिये तो अपने फरमाया अगर मेरे नाना कुछ और देते तो मै भी ज़्यादा देता (सवाएके मोहर्रेका सफ़ा 203)
14 एक खुरासानी ने नबीये ने नेबीय करीम (स.)को ख़्वाब मे देखा कि आप उससे फरमा रहे है के उस वक्त तुम्हारा क्या हाल होगा जब तुम्हारी ज़मीन में मेरा एक टुकड़ा दफन किया जायेगा और तुम्हारी ज़मीन मे मेरा एक सितारा गायब हो जायेगा (ये इमाम रज़ा अ. की तरफ इशारा है)
15 सवेएके मोहर्रका मे है कि एक कारी जब तैमूर लंग की कब्र के पास गुज़रता था तो इस पकड़ो और जंजीर मे जकड़ो फिर इस जहन्नुम मे दाखिल करो (फरिश्तों से खिताब)- इस आयत को बार बार दोहराता था वे कहता है कि मै एक दफा सोया हुया था मैने ख़्वाब मे रसूल करीम (स.)को बैठे हुये और देखा कि तैमूरलंग भी आप के साथ बैठा हुआ है।कारी कहता है मैने उसे झिड़का और डांटा और कहा कि ऐ अल्लाह के दुश्मन इधर आ गया है और मैने इरादा किया कि उसका हाथ पकड़ कर उसे नबीये करीम (स.) के पहलू से उठा लूं पस नबीये करीम (स.) ने मूझसे फरमाया इसे छोड़ दो क्योंकि ये मेरी ज़्रर्रियत से मोहब्बत रखता थ।मै घबरा के बेदार हुआ और जो कुछ मै उसकी कब्र पर पढ़ता था वो छोड़ दिया।
16 सनाएके मोहर्रेका के मोअल्लिफ इब्ने हजरे मक्की ने इस मज़कूरा बाला ख़्वाब के नीचे तैमूरलंग का एक और वाक़िआ भी लिखा है जिसका यहॉ जिक्र करना मुनासिब है मालूम होता है कि जमाले मुर्सदी और शहाबे कोरानी से रिवायत है के तैमूरलंग के किसी बेटे ने उनसे बयान किया है के जब तैमूरलंग मरज़ुल मौत में मुब्तिला हुआ तो एक दिन बहुत ज़्यादा बैचेन हुआ और जिससे उसका चेहरा सियाह हो गया और रंग तब्दील हो गया फिर उसे इफाक़ा हुआतो लोगो ने उससे उसकी हालत का ज़िक्र किया उसने कहा के मलाएकए अज़ाब मेरे पास आये तो मेरी ये हालत हो गयी फिर रसूले पाक (स.) तशरीफ लाये तो मलाएका से फरमाया इससे दूर हो जाओ और चले जाओ क्योंकि मेरी ज़ुर्रियत से मोहब्बत रखता था और उन पर अहसान करता था (सवाएके माहेर्रेका सफा 244 नयाबीउल्मवद्दत सफा 394) 17. नयाबीउल्मवद्दत मोअल्लिफा सुलेमान कुन्दुजी ने सफा 389 पर लिखा है एक शख़्स अब्दुल्लाह बिन मुबारक एक साल में हज करता और एक साल घर पर क़याम करता था कि एक दफा जब उसके हज करने का साल आया तो वो कहता है कि मैं मरो शाहजहॉसे निकला और उस वक़्त मेरे पास पॉच सौ दीनार थे पस मैं कूफे में ऊंटों के फरोख़्त होने के बाज़ार में ऊंट ख़रीदने पहुंचा तो मैंने एक मुजब्ला पर (कूड़े करकट का ढेर) एक औरत को देखा जो मुर्दा बत्तख़ के परो बाल नोच रही थी मैंने उससे कहा बीबी ये क्या कर रही हैं।उसने कहा इसके मुतअल्लिक़ न पूंछो मैंने इस बीबी से इसरार किया तो उसने कहा कि मैं औलादे अली से एक सैय्यदज़ादी हुं और मेरी चार यतीम बेटियां हैं और अब चौथा दिन है के हमने कोई चीज़ नही खाई और आज हमारे लिये ये मुदार्र हलाल है।रावी कहता है मैंने अपने में कहा ऐ अब्बदुल्लाह तू किस ख़्याल में है पस मैंने तमाम दीनार उसके कपड़े के कोने में लपेट दिये।वो सर झुकाये बैठी थी और ऊपर नहीं देखती थी।पस मैं अपनी मंज़िल पर चल पड़ा फिर अपने शहर मरो शाहजहॉ मैं आया और अय्यामे हज में वही क़याम किया जब दूसरे हाजी हज करके वापस आ गये तो मैं अपने हाजी हमसायों और दोस्तों से मुलाक़ात के लिये निकला जो हाजी मुझसे मिलता था मैं उससे कहता था कि अल्लाह ताला तेरे हज और कोशिशो सई को कुबूल और मंज़ुर फरमाये और वो भी मेरे लिये यही अल्फाज़ दोहराता था कि हम हज के मवाके पर फलॉ जगह जमा हुये (यानी तू और हम)पस मैंने वो रात निहायत फिक्रो परेशानी में गुज़ारी एक दफा मुझपर नींद का ग़लबा हुआ तो ख़्वाब में नबीये करीम (स.)को देखा आप मुझसे फरमा रहे हैं बन्दये ख़ुदा तूने मेरी औलाद में से एक मेरी मिस्कीन और मुफ्लिस बच्ची की फऱयाद रसी की है पस मैंने अल्लाह से सवाल किया है कि अल्लाह तेरी सूरत में एक फरिश्ते को पैदा करे जो रोज़े कयामत तक हर साल तेरी तरफ से हज करता रहे।नयाबीउल्मवद्दत में इस क़िस्म के और भी कई ख़्वाल मज़कूर है जिन से ज़ाहिर होता है के औलादे नबी व अली के एहतराम और उनकी एआनत व इमदाद करने का बहुत ज्यादा अजरो सवाब है एक हदीस मे है. नबीये करीम (स.) ने फरमाया रोज़े कयामत मै चार किस्म के आदमीयों की शफायत करूगा।( 1)जो शख्स मेरी ज़र्रियत की इज्ज़त और ऐहतराम करने वाला हो।( 2) जो शख्स उनकी हाजात को पूरा करने वाला हो।( 3) जिस शख्स के पास मेरी औलाद के अफराद किसी काम मे बामजबूरी और मुज्तर होकर जायें तो उमके उमूर की अन्जामदेही मे जददो जेहद करने वाला हो।( 4) जो शख्स अपने दिल और ज़बान से उनके साथ मोहब्बत करने वाला हो।
दुआ है कि खुदान्दे आलम हर मुसलमान और मोमिन को औलादे नबी का एहतराम करने के लिये तौफीक फरमाये और सादात को भी अपने आबाये मोअल्लिब बिन अजदादे ताहेरीन की सीरतो किरदार को अपनाने की तौफीक मरहेमत फरमाए।ताकि किसी ज़हिरो बय्यन को नके अख्लाको अतवार और आमाल पर नुक्ता चीनी करने और एतराज़ करने का मौका ने मिले।
18. अबुलफ़र्ज इब्ने जोज़ी ने अपनी किताब मुल्तफ़िज़ मे रिवायत की है कि बल्ख़ में एक अलवी सय्यद था उसकी बीवी और बेटियॉ थीं उस सैय्यद की वफ़ात हो गयी और वो सैय्यद ज़ादी आदा से डर कर बेटियों को मस्जिद दाखिल किया और खुद शहर की गलियों मे फिरने लगी।एक जगह लोगों कोए एक शेकुलवद के पास जमा देखा उस सैय्यदज़ादी ने अपनी बीती सुनाई तो शेख ने कहा अपनी सैय्यदज़ादी होना का सूबूत पेश करो पस वो उससे नाउम्मीद होकर मस्जिद की तरफ लौटी तो एक शेख को दुकान पर देखा कि उसके इर्द गिर्द लोगों की एक जमात थी और वो शख्स मजूसी था पस बीबी ने उसके सामने अपने हालात तफसीलन बयान किये। मजूसी ने अपने ख़ादिम से कहा जा कर अपने सरदार से कहो के वो इस बीबी के साथ फलॉ मस्जिद मे जाये और उसे और उसेकी बेटियों को घर ले आये।वो मजूसिया इस सैय्यदज़ादी और उसकी बेटियों को अपने घर ले आई उन्हें रिहाईश के लिये अलाहिदा जगह दी।उनको क़ीमती लिबास दिये और उन्हें उम्दाह खाने खिलाये जब निस्फ़ शब हुई तो मुसलमान शेख़ुलवनद ने अपने ख़्वाब में सब्ज़ ज़मर्रूद का एक महल देखा उसने पूंछा ये किस का महल है किसी ने कहा ये मुसलमान मर्द का महल है उसने कहा या रसुल अल्लाह (स.) मैं मुसलमान मर्द हूं तो आपने फरमाया अपने मुसलमान होने का सूबूत पेश करो और जो कुछ तूने उस सैय्यदज़ादी से कहा भूल गया।ये महल उस शेख़ का है जिसके घर सैय्यदज़ादी मौजूद है। पस वो मुस्लमान मर्द बेदार हुआ और रोता हुआ बाहर निकला। लोगों से पूंछा तो उसे बताया गया कि वो सैय्यदज़ादी मजूसी के घर हैं। मजूसी के पास आया और कहा कि मैं इस सैय्यदज़ादी की ज़ियारत करना चाहता हूं। मजूसी ने कहा ये तू नही कर सकता। उसने कहा हज़ार दीनार लेले और सैदानियों को मेरेसुपुर्द कर दे। जब उस मुसलमान ने इसरार किया तो मजूसी ने कहा के वो ख़नाब जो तूने देखा है मै भी देख चूका हूं और वो महल अल्लाह ने सिर्फ मेरे लिये पैदा किया है और खुदा की कसम मेरे घर में इस वक्त कोई भी ऐसा आदमी नही जो इस सैय्यदज़ादी की बरकत की वजह से मुस्लमान न हो गया हो और मैने ख़्वाब मे नबीये करीम (स.) को देखा है और ये इस एहतराम का बदला है जो मेरी मुसीबतज़दा बच्ची का किया है।
ख़्वाब के मुतअल्लिक चन्द मुफीद मालूमात
हज़रत जाफरे साद़िक (अ.) से मन्कूल है कि ख़्वाब की तीन किस्मे है.
1. मोमिन के लिये ख़ुदा की तरफ से खुशखबरी का आना।
2. शैतान का डराना।
3. परेशान ख़यालात का दिखाई देना।
दूसरी मोतबर हदीस मे फरमाया के झूठू ख़्वाब जिन का असर नही होता वो ख्वाब है जो रात के अव्वल हिस्से मे दिखाई देते हैं ये सरकश शैतानो के ग़ल्बा पाने का वक्त है और चन्द ख़यालात को मुशक्कल करके दिखाते है जिनकी असलियत कुछ नहीं होती। रहे सच्चे ख़वाब तो गिनती के हो है और रात के पिछली तिहाई मे तुलए सुबह सादिक तक दिखाई देते है क्योंकि ये फरिशतों के उतरने का वक्त है। ये ख़्वाब झूठे नही होते सिवाये इसके के मोमिन हालते जुनुब मे या बे वजू सो गया हो या सोने से पहले जो कुछ ख़ुदा का ज़िक्र और उसकी याद करनी चाहिये वो न किया हो इन हालात में उसका ख़्वाब सच्चा न होगा।या उसका असर देर मे ज़हिर होगा।
जनाब रसूल खुदा ने फरमाया कि जिसने मुझे ख़्वाब मे देखा वो ऐसा ही है जैसा कि बेदारी मे देखा क्योंकि शैतान किसी की नींद और बेदारी मे न मेरी शक्ल अख़्तियार कर सकता है। एक हदीस मे है फ़रमाया कि मोमिन का ख़्वाब पैग़म्बरी के सत्तर हिस्सों मे से एक हिस्सा है।
मन्कूल है आप (स.) ने फरमाया आखरी ज़माने में मोमिन का ख़्वाब झूठा होगा। बल्कि जो शख़्स जितना सच्चा होगा उतना उसका ख़्वाब सच्चा होगा।
दुसरी हदीस मे मन्कूल है कि मोमिन का ख़्वाब सच्चा होता है क्योंकि उसका नफ़्स पाक है। और यकीन दुरूस्त है पस जब उसकी रूह तन से निकलती है तो फरिश्तों से मुलाकात करती है इस सबब उसका ख़्वाब बामंज़िलए वही के है।
मन्कूल है पैग़म्बरे खुदा (स.) के बाद सिलसिलये वही मन्कता हो गया मगर खुशख़बरी देने वाले ख़्वाब बाकी है। जनाबे इमाम मोहम्मद बाकिर (अ.)से मन्कूल है एक शख़्स ने सरकारे रिसालत (स.) से इस आयत की तफसीर पूंछी (जो लोग इमान्दार और परहेज़गार है उन के लिये ज़िनदगानिये दुनिया मे भी खुशखबरी है और आखिरत मे भी) आंहज़रत (स.) ने इर्शाद फरमाया कि जिन्दगानिये दुनिया की खुश ख़बरी से मुराद नेक ख़्वाब है जो मोमिन दुनिया मे देखता है और उनकी खुशख़बरी से खुश होता है।
मोअब्बिर ख़्वाब कैसा हो.
ताबीर ख़्वाब का इल्म बहुत दकीक है और ये इल्म अंबिया और औसीया के लिये मख़सुस है ख़्वाबों की ताबीर बयान करना हज़रत युसुफ का मोजिज़ा था हॉ जिन लोगों को इल्मे रोया की किताबों पर उबूर हासिल है औरयही उनका रोज़मर्रा का मशग़ला है वो भी ताबीर ख़्वाब सही बयान करने में कुछन कुछ दस्तरस रखते है।एक मोतबर हदीस में इमाम मोहम्मद बाकर (अ.) सेमन्कूल है कि अपना ख़्वाब सिर्फ उस मोमिन से बयान करो जिसका दिल हसदो अदावत से ख़ाली हो और वो नफ्से सरकश का ताबेदार न हो और नीज़ आंजनाब से मरवी है के रसूले पाक (स.) फरमाया करते थे कि मोमिन का ख़्वाब उस वक़्त तक आसमान व जमीन के माबैन उसके सर पर मोअल्लक़ रहता है जब तक कि वो खुद या कोई और उसकी ताबीर न दे फिर जैसे ताबीर दी जाती है वैसाही वाकेआ होता है इस लिये मुनासिब नही के तुम अपना ख़्वाब किसी अक्लमन्द आदमी केसिवा और से बयान करो।
इन रिवायात से साफ़ वाज़ेह है कि इन्सान अपना ख़वाब हर किसी को न सुनाता फिरे ऐसे शख़्स से अपना ख़्वाब बयान करे जो पाबन्दे नमाज़ रोज़ा और नेक, पाक सीरत, पाकीज़ा किरदार और अक्लमन्द और साहिबे इल्मो हमदर्द हो जैसे कि एक मोतबर रिवायत है मज़कूर है कि रिसालत मआब (स.) के ज़माने में एक औरत का शौहर सफर में गया हुआ था। औरत ने ख़्वाब मे देखा कि मेरे घर का एक सुतून टूट गया वौ और हुज़ूर (स.) की ख़िदमत मे हाज़िर हुई और अपना ख़्वाब अर्ज किया। आपने (स.) ने फरमाया तेरा शौहर सही ओ सलामत सफर से वापस आयेगा चुनाचे ऐसा ही हुआ। दूसरी दफा उस का शौहर फिर सफर पर गया और उस औरत ने वैसा ही ख़्वाब देखा और इस बार हुजूर (स.) ने वही ताबीर दी और उसका शौहर उसी तरह वापस आ गया। तीसरी मर्रतबा वो फिर सफर पर गया। उस औरत ने फ़िर वही ख़्वाब किसी और से बयान किया उसने कहा कि तेरा शौहर मर जायेगा और उसी तरह हुआ। ख़बर हुजूर (स.) तक पहुंची तो आप (स.) ने फरमाया कि ऐ शख्स तूने उसे नेक ताबिर क्यों न दी।
नींद मे डरना और डरावने ख़्वाब देखना
1. हज़रत इमाम जाफ़रे सादिक (अ.)से मनकूल है कि जो शख्स सोते मे डरता हो तो सोने से पहले दस मर्तबा ये कहले लाइलाहिल्लाहो वादहू ला शरीका लहू युहयी ओ वयुमीतो युहयी वहोवा हय्युन ला यमूतो इसके बाद हज़रत फातिमा (स.) की तस्बीह पढा करे और तिब्बुल अईम्मा मे ये और मज़ीद है के आयतुल कुर्सी और सुरऐ कुल हो वल्लाहो अहद भी पढ़ लिया कऱे।
2. हज़रत अमीरूल मोमिनीन (अ.) से मनकूल है कि जो शख़्स सोते मे डरे या नींद न आने से परेशानी होती तो ये आयत पढ़े. फज़रब्ना अला आज़ानेहिम फिल्कहफे सिनीना आददन सुम्मा बअस्नाहुम ले नालमा अय्यहिज़्बैने अहसा लेमा लवेसू अमद (पारा 15 रूकअ 13. 3 सुर कहेफ) अगर बच्चा ज़्यादा रोता हो तो इस पर भी यही आयत पढ़नी चाहिये।
3. हदीस सहीह मे हज़रत इमाम मोहम्मद बाकिर (अ.) से मनकूल है कि जो शख़्स सोते में डरता हो उस चीहिये के सोते वक़्त मअज़तैन और आयतल कुर्सी पढ़े।
4. दूसरी रिवायत में है कि रात को डरने से महफज़ रहने के लिये दस मर्तबा ये दुआ पढ़ लिया करे. अऊज़ो बेकलेमातिलल्लाहे मिन गज़बेही व मिन एकाबेही मिन सर्श इबादेही वमिन हमाज़तिशश्यातीना वा अऊजूबेका रब्बी अय्यहज़रूना फिर आयतल कुर्सी और ये पढ़े इज़युग़शशिकुमुन नाआसो णानत मिनहो वजअलना नौम कुम सुबाता।
5. हदीस में वारिद है कि शहाब इब्नेअब्दुल्लाह ने इमाम जाफ़र सादिक (अ.) की ख़िदमत में हाज़िर होकर अर्ज़ की कि एक औरत मेरे ख़्वाब मे आकर डराती है हज़रत ने फरमाया कि बिस्तर पर अपने साथ एक तस्बीह ले जाया कर और 34 मर्तबा अल्लाहो अकबर 33 मर्तबा सुब्हानल्लाह 33 मर्तबा अल्हम्दो लिल्लाह कहकर दस मर्तबा ये दुआ पढ़ा कर. ला इल्ललाहो वहदहू ला शरीका लहूलमुल्को बालहूल हम्दो युहयी वा युमीतो व युहयी बे यदहिल ख़ैरो वलतुख़्तला कल्ले शैइन क़दीर।ज़ाहिरन तस्बीहे फातिमा ज़हरा (स.) पढ़ें या बाद।
6. हदीस सहीह में इन्ही हज़रत से मनकूल है के जिसे नीद मे एहतेलाम हो जाने का डर हो वह बिस्तर पर लेट कर ये दुआ पढ़ लिया करें (अल्ला हुम्मा इन्नी अऊज़े बिका मिनल एहतेलामे व मिन सूइल अहलाम व मंयतला अबा बियश्शैताने फिल यकतति वल मनाम)।
7. हदीसे हसन में इमाम जाफरे सादिक़ (अ.)से मनक़ूल है अगर कोई शख्स परेशान ख़्वाब देखे तो उसको चाहिये कि वो करवट बदले और कहे (इन्नमन नजवा मिनश्शैताने लेयाजोनललज़ीना आमनू व लैसा बेज़ारहुम शैअनइल्ला बेइज़निल्लाह) इसके बाद ये कहे (उज़तो बिमा आज़त बिहि मलाएकतुल्ला हिल मुकर्रेबूना बा अम्बीयाहुल मुर्ससलूना वा इबादाहुल सालेहूना मिन शर्री मा रऐतो व मिन शर्रीश्शैतानिर्रजीम)।
8. दूसरी रिवायत में इन्हीं हज़रत से इस तरह मनकूल है कि जब कोई शख़्स परेशान ख़्वाब देख कर जाग उठे तो य कहे कि (अऊज़ो बिहा आज़त बिही मलाएकतिल्लाहिल्मुकर्रबूना व अम्बियाए हिल्मुरसलूना व एबादिल्लाहिस्सालेहूना वल्अइम्मतिरेशीदनल्महादैय्यना मिन शर्रे मा रऐतो मिन रोयाया अन तजुर्रोनी मिनश्शैयातिर्रजीम-) इसके बाद बाई तरफ थूक दें।
एक और रिवायत मे वारिद हुआ है कि किसी शख़स ने इन हज़रत से शिकायत की कि मेरी लड़की रात दिन डरती रहती है फरमाया उसे फ़संद करा दे।
10. दुसरी रिवायत मे यूं मनकूल है कि किसी शख़्स ने आंहज़रत से शिकायत की कि मेरी लड़की सोते मे डरती है कभी कभी तो उसकी हालत ऐसी हो जाती है कि उसके आज़ा ढीले पड जाते है।लोगो का कौल है कि ये जिन के तसर्रूफ के सबब है।फरमाया कि इसका फ़सद कर दे और अर्क सोया शहद मे मिला कर पिला दे और तीन दिन पिला।येअमल करना था कि उस लड़की को आराम आ गया।दूसरी हदीस में मनकूल है कि एक शख़्स इमाम जाफरे सादिक (अ. स.) के पास ये शिकायत लाया कि एक औरत मुझेख़वाब मे आ कर डराती है हज़रत ने फरमाया के शायद ज़कात अदा नहीं करता।अर्ज़ किया यब्ना रसूल अलिलाह (स.) मै तो बराबर ज़कात देता हूं तो फ़रमाया मुस्तहक को न पहुंचतीहोगी।ये सुन कर उसने ज़कात की रक़म आंहज़रत (अ.) की ख़िदमत में भेंज दी कि मुस्तहक को पहुचा दे।इसके साथही नो कैफ़ियत भी जाती रही।
11. एक हदीस मे अमीरूल मोमिनीन(अ.)से मनकूल है आप ने फरमाया कि आग से जलने और पानी मे ग़र्क होन से महफय़ूज़ रहने के लिये ये दुआ पढ़ी जाऐ. बिस्मिल्ला होर्रहमानिर्रहीम अल्लाहुल्लज़ी नज़्जललिकताबा व होवा यतवल्लस्सलेहीना वमा क़दरूल्लाहा हक्का क़दरिही सुब्हानहू व तआला अम्मा मुसरेकून — पारा 24 रूकूअ 14 सुर. जुम्र।
12. किताबे खुलासतुल अज़कार मे सैय्यदा आलिया जनाब फातिमा ज़हरा (स.) से रिवायतहै कि एकरात म़ जामए ख़वाब पहन चुकी थी और सोना चाहती थी तो जनाबे रसूले खुदा मेरे पास तशरीफ लाए और फरमाया ऐ फातेमा जब तक येचार अमल न कर लीजिये न सोईये। 1. खत्मे कुआर्न कीजिये 2. तमाम पैग़म्बरो को अपना शफ़ीअ बनाईये 3. मोमेनीन को अपनी तरफ से खुश कीजिये। 4. हज व उमरा कीजिये। पस पैग़म्बर (स.) ये कहकर नमाज़ मे मशगूल हो गये और मैने उनके नमाज़ से फारिग़ होने तक तवक्कुफ किया। जब आप नमाज़ से फारिग़ हुये तो मैने अर्ज़ की या रसूलल्लाह (स.) आपने जिन चार चीज़ो का हुक्म दिया है मै उनको इस वक़्त बजा लाने की कुदरत नही रखती। आंहज़रत मुतबस्सि हुये और फरमाया बेटी जब तू सुरह कुल होवल्लाहो अहद तीन मर्तबा पढ़ेगी तो गोया तूने कुर्आन मजीद खत्म किया और जब तू मुझपर और पहले पैग़म्बरो पर सलवात भेजेगी तो हम तमाम पैग़म्बर रोज़े क़यामत तेरे शफीअ होंगे और बैटी जब तू मोनिनीन के लिये इस्तिग़फार करेगी तो तमाम मोमिनीन तुझसे खुश होगें और बेटी जब तू सुब्हानल्लाहे वल्हमदो लिल्लाहे वला इलाहा इलल्लाहो वल्लाहो अकबर पढ़गी तो गोया तूने और उमरा कर लिया।
13. और रिवायत है कि जो शख़् सोते वक्त तीन मर्तबा पढ. यफअलुल्लाहा मा यंशाओ बिकुदरतिही वा यहकोमो मायुरीदो बेइज़्ज़तिही. तो वो इस तरह होगा गोया उसने हज़ार रकत नमाज़ पढ़ी।
चोरों और दरिन्दो से महफ़ज़ रहने की दुआऐ
हज़रत इमाम मोहम्मद बाकिर (अ.) से मन्कूल है जो शख़्स ये दुआ रात को पढ़े तो मै ज़ामिन हूं कि उसे स़ॉप बिच्छू वग़ैरा से ता सुबहा ज़रर न पहुंचेगा. आऊज़ो बेकल्मातिल्लाहिम्माते कुल्लेहल्लती ला युजाविज़ हुन्ना बररून वला फ़ाजेरून्निवल्लज़ी ला योहक़रो जासोहू मिन शर्रे मा ज़राआ वमिन शर्रेबराआ व मिन शर्रे शैताना व शरकदिही मिन शर्र कुल्ले दाब्बातिन होवा आख़ेजुन बेना सियातेहा इन्ना रब्बी अला सेरातिम्मुस्तक़ीम।
नीज़ जो शख़्स तीन मर्तबा इस दुआ को पढ़े तो इस शब सॉप बिचछू और चोर के ज़रर से महफ़ूज़ रहेगा. अक़दत्तो ज़बानित्अकरब व लिसानिल्हय्याते रयददस्सारके बकौले अशहदो अन ला इलाहा इल्लल्लाहो व अशहदो अन्ना मोहम्मदर्रसूल्लाहे सल्लल्लाहो अलेहे व आलेही व सल्लमा।
जो शख़्स सोते वक़्त दाहिनी करवट लेटे और अपना दायॉ हाथ रूख़्सार के नीचे रखे और एक मर्तबा ये दुआ पढ़े तो अल्लाह ताला चोरों से और मकान के नीचे दबने से और जलने से उसे महफूज़ रखेगा और सुबह तक मलाएका उसके लिये इस्तिग़फार करते रहेंगे. बिस्मिल्लाहे वज़अतो जनबी लिल्लाहे व अला मिल्लते इब्राहिमा व दिने मोहम्मनि सल्लल्लाहो अलेहे व आलेही व विलायते मिनफतरा जल्लाहा अलय्या ताआतो माशाअल्लाहो व मालम यशाओ लम यकुन.।
जो शख़्स रात को दस मर्तबा ये दुआ पढ़ेतो ख़्वाब में न डरेगा. ला इलाहा इल्ललाहो वहदहू ला शरीका लहू युहयी वा युमीतो वहोवा हय्ययुल्ला यमूतो.।
जब कोई शख़्स होलनाक ख़्वाब देखे या सोते में डरे तो बेदार होकर तीन मर्तबा बॉयी तरफ थूके और दूसरा पहलू बदल कर ये दुआ पढ़े. बेरब्बेमूसा व ईसा व इब्राहिमल्लज़ी व नी मोहम्मदेनिल्मुस्तुफा मिन शर्रे हाज़र्रोया व शर्रे मा फीहा.।
जुदूले तारीख़े चान्द और ताबीरे ख़्वाब
तारीख़ शब ताबीरे ख़्वाब
पहली इस शब का ख़्वाब सही नहीं होता।
दूसरी इस शब का ख़्वाब सही नहीं होता।
तीसरी इस शब के ख़्वाब की ताबीर बरअक्स है।
चौथी इस शब का ख़्वाब सही है मगर इसकी ताबीर देर में ज़ाहिर होगी।
पॉचवीं इस शब का ख़्वाब सही है मगर इसकी ताबीर देर में ज़ाहिर होगी।
छठी इस शब का ख़्वाब सच्चा है ताबीर एक दो रोज़ बाद ज़ाहिर होगी।
सातवीं इस शब का ख़्वाब सच्चा है।
आठवीं इस शब का ख़्वाब सच्चा है।
नवीं इस शब के ख़्वाब की ताबीर बर अक्स है और बरिवायते इसकी ताबीर इसी रोज़ ज़ाहिर
होगी।
दसवीं इस शब का ख़्वाब झूठा है और बरिवायते इसकी ताबीर बीस रोज़ में ज़ाहिर होगी।
ग्यारवीं इस शब का ख़्वाब सही है मगर इसकी ताबीर देर में ज़ाहिर होगी और बरिवायते तीन
रोज़ में ज़ाहिर होगी।
बारहवीं ख़्वाब इस शब का सही है मगर ताबीर दोर से ज़ाहिर होगी।
तेरहवीं इस शब का ख़्वाब सही है और ताबीर नौ रोज़ में ज़ाहिर होगी और बरिवायत इस रात का
ख़्वाब झूठा है।
चौदवीं इस रात का ख़्वाब सही है उसकी ताबीर 26 या 40 दिन के बाद ज़ाहिर होगी।और बरिवायत
इस रात का ख़्वाब झूठा है।
पन्द्रहवीं इस शब का ख़्वाब सही है ताबीर तीन रोज़ बाद ज़ाहिर होगी और बरिवायते इसकी ताबीर बर-
अक्स है।
सोलहवीं इस शब का ख़्वाब सही है मगर ताबीर देर मे ज़ाहिर होगी।
सत्रहवी इस शब के ख़्वाब की ताबीर बरअक्स है।
अठठारवी इस शब के ख़्वाब की ताबीर बरअक्स है।
उन्नीसवी इस शब के ख़्वाब की ताबीर बरअक्स है।
बीसवी इस शब का ख़्वाब सही और मोअस्सिर है।
इक्कीसवी इस शब का ख़्वाब झुठा है।
बाईसवी इस शब का ख़्वाब सच्चा है।
तेईसवी इस शब के ख़्वाब की ताबीर बरअक्स है।
चोबीसवी इस शब के ख़्वाब की ताबिर बरअक्स है
पच्चीसवी इस शब का ख़्वाब झुठा है।
छब्बीसवी इस शब के ख़्वाब की ताबीर बरअक्स है।
सत्ताईसवी इस शब के ख़्वाब की ताबीर बरअक्स है।
अठठाईसवी इस शब के ख़्वाब की ताबीर सही है और उसी रोज़ ज़ाहिर होगी और बरिवायते बरअक्स है।
उन्तीसवीं इस शब का ख़्वाब सही है ताबीर इसी ज़ ज़ाहिर होगी।बारिवायते इस शब का ख़्वाब झुठा है।
तीसवीं इस शब का ख़्वाब रास्त सही और मुअस्सिर है।
ख़्वाबों की ताबीर
- बतर्तिब हुरूफ तहज्जी –
(अलिफ-अ)
अमीरूलमोमिनीन या औसिया को देखना।
आईन दीनो इमान से माहिर हो।अदलो इन्साफ ज़ाहिर हो।ख़ैरो बरकत हासिल हो और औलाद से मसरूर दिल हो।
2. अंबिया को देखना
हुकूमत हाथ आये रहमत व इज़्जो शरफ पाये दौलतो नअमत मिले नुसरतो कुवत मिले।
3. इल्यास (अ.) को देखना
उम्र दराज़ हो कौम की हमदर्दी हो दरिया से मंफ़अत हासिल हो और मकसूद को पहुंचे।
4. अय्युब (अ.) को देखना
किसी दर्द से सदमा हो माल तलफ़ हो औलाद से जुदाई हो फिर खुदा तआला के रहमो करम से पहले सेज़्यादा हर चीज़ हाथ आये।
5 इस्हाक (अ.) को देखना
मुसीबतो हलाकत मेगिरफ्तार हो लूकिन जल्द रिहाई हासिल हो
6. इस्माईल(अ।) को देखना
हद से ज़यादा ख़ैरो बरकत वाला हो।मस्जिद बनवाने इरादा हो।
7. इब्राहीम (अ.) को देख़ना
नेक आमाल की तरफ राग़िब हो।हज व ज़ियारते मुक़ददिसा की तौफ़ीक हासिल हो
8. इदरीस (अ.) को देखना
हुक्काम के नज़दीक इज़्जत हासिल हो बुसन्द दर्जा और बुजुर्ग हो कौम की सरदारी मिले
9. आदम (अ.) को देखना
कौम की सरदारी मिले।
10 इसराफील को देखना
उम्र दराज़ हो औऱ ईज़ो मुतआल की रहमत हो।
11. इसराफील को सूर फूँकते हुए देखना
संग दिल आसूदा हाल व मालदार हो और फ़ासिक ज़लीलो ख़्वार हो।
12, आसमान देखना या आसमान पर जाना।
मर्तबा बुलन्द और रोज़ी ज़्यादो हो।
13. आसमान पर जाकर वापस आना.
मौतौ और क़ते ज़िन्दगी की दलील है सदका दे ताकि मुसीबत से निजात मिले।
14. आसमान पर अपने को उड़ते देखना.
हजो ज़ियारात मुकददिसा से मुशर्रश होने का सफर दर पेश है।
15. आशमान से ज़मीन पर गिरना
पहली बीवी को तलाक दे और दुसरी बीवी से इत्तफाक करे।
16. आसमान के दरवाज़े खुलने
रोज़ी मे वुस्अत पाये ख़ैरौ बरकत मे ज्यादती हो।
17. आसमान पर फरिश्तो से बातें करना या तस्बीह पढ़ना
नेकी और साआआदत हासिल हो और हजो ज़ियारत से मुश् — ररफ हो
18. आसमान पर फरिश्तो से इत्तेहाद करना
मुत्तकियों से सोहबत हो।परहेज़गारी की आदत हो।
19. उडना अपने मकान से
घर में ग़म व मुसीबत हो गुनाहो से इस्तिग़फार करे।
20. आसमान पर उड़कर बैठना
हुकूमत मिले या ओहदे मे तरक्की हो दिली मुराद पाये।
21. अबुलहब अबूजेहल को देखना
नहूसतो फितूर की दीललहै सदका दे।
22. उड़ना एक मकान से या दीवार से दुसरी दीवार पर.
दुसरा औहदा मिले किसी शहर बस्ती मे जाये।
23 उड़ना जानवर की शक्ल में.
कौम की सरदारी या खूबलूरत औऱत मिले।
24. उड़कर दरख़्त पर बैठना
बुजुर्गो के साथ सफ़र करे और रूत्बा बलन्द हो मंफअत हाथ आये।
25. उड़ना बॉये हाथ रात को
सफर दरपेश आये कम मंफ़अत हाथ लगे।ज़हमत व रंज और अलम का सामना हो।
26. आफ़ताब और असासुलबैत देखना।
मोमिन दौलतो नफा और इज़्जत पाये काफ़िर या मुखालिफ मुसीबत मे गिरफ़्तार हो।
27. आफ़ताब से पानी पीते देखना
फरज़नद सालेह पैदा हो बरकत औऱ खुशी हासिल हो।
28. अशर्फी पाना
रियासत या सरदारी मिले. ग़म से निजात हो बिमार को शिफा हासिल हो
29. आबसतन (हामिला) होना
औरत देखे तो बीमार हो मर्द देखे तो दौलत हशमत हासिल हो।
30 अल्मास को देखना
हाकिम के दरबार मे रसाई हो आबरू बढ़इज़्ज़त अफ़ज़ई हो।
31. आहु (हिरन) देखना.
बाकेरह औरत मिले
32. आहू छुट जाये
ज़ौजा से रिश्ताये मोहब्बत टूटे।
33. आहू का बच्चा देखना.
फ़रज़न्द मिले दुश्मन बद खवाह पर कामयाब हो।
34. आहू (मादा हिरनी) को ज़िब्हा करना
खुबसूरत बकिरा औरत से मुबाशेरत हो नंगो नामूसो हुरमत ज़ाया हो।
35. आहू (नर)को ज़िब्हा करना
लोगों मे बदनाम हुआ इस्तिग़फार करे।
36. आहु सहराई का राममुतीअ होना
औरत बाकरा ताजदार हो।राहत मिले ऐशो इशरत में इज़ाफा हो।
37. अनन्नास या अख़रोट दोखऩा
आरज़ू बर आय़ए आबरू मिले फरज़न्द मुतवल्लिद हो।
38. अंगूर सफैद रंग देखना या खाना
हाकिम से बेहद फायदा हो कारोबार मे इज़्जत बढ़े औऱ कामयाबी हो।
39. अंगूर सियाह देखना
हाकिम से रंज हो किसी काफ़िर या मुस्लिम से वास्ता पड़े।
40. अंगूर का अर्क निकालना
बादशाहो हाकिम से इनाम मिले फरहतो आराम हासिल हो।
41. इंजीर देखना या खाना
माले हलालो पापिज़ा मिले तआम शीरीं खाये।
42. इंजीर का दरख्त या पत्ता देखना
सख़्तबीमारी मे मुब्तिला हो फिक्र अंदेशे का सामना हो।
43. इलाईची देखना
दौलतों इखबाल मे तरक्क़ी हो दिली खुशी हासिल हो।
44. अमरूद या आम देखना या पाना
फऱज़न्द मिले रोज़ी हाथ लगे।
45. आलू बुख़ारा या आम देखारा या आडू देखना
बीमार क शिफा हो मंफ़अत और खुशहाली हासिल हो।
46. आलु या अरवी देखना या खाना
फरमांबरदार औरत पायेगा।बेटा पैदा होगा।
47. इम्ली या आंवला खाना
वस्ले हबीब हो या बीमारी से शिफ़ायत हो।दौलतो फ़रजंद मिले तकलीफ दूर हो।
48. अनारे तुर्श देखना या खाना
जिस्म आबलादार हो या किसी तकलीफ मे मुबितला हो।
49. अब्रे (बादल) साया किये हुये देखना
बुलन्द दरजा और मालो दौलत मे तरक्की की दलील मे मुब्तिला हो।सख्ती व ग़म से वास्ता पड़े।
50. अब्रे सुर्ख सर पर देखना
किसी बला में मुब्तिला हो।सख्ती व ग़म से वास्ता पड़े।
51. अब्रे (बादल) सफेद देखना
रियासत बढ़े दौलत मे इज़ाफा हो अशिया की कीमतें मे कमी हो।
52. अब्रे सियाह देखना
बुरा है खौफो हिरासत से तकलीफ हो।नहूसत की अलामत है।
53. अब्र पर बैठना या अब्र का हाथ मे होना।
दौलत व इल्म बेहिसाब हो।हुकूमत व आराम मे बेशुमार इज़ाफ़ा हो।
54. ओला खाना या उसका पानी पीना
दौलतो प़रहत हासिल हो जिस्मानी अमराज़ से सेहत हो।
55. ओले आसमान से गिरते देखना
सख़ती व मलाल की दलील है।
56. अश्नान करना या देखना
ग़मो गुस्सा ख़ाये अचानक बीमार हो।
57. आँख से खून देखना
फरज़न्द की तरफ मलाल हो।किसी दूसरी सूरत से माल ज़ाया हो।
58. अंधे होते अपने को देखना
मर्गे फरज़न्द का अलम उठाये बिरदर से छुटने का अलम उठआये बिरादर से छुटने का ग़म
हो मुलाज़मत से मा जूली हो. तंगिये रिज़्क की तवालत हो।
59. अँख बाहर निकलते देखना
मकान या बाग या वतन या फरज़द याबिरादर से जुदाई हो दुसरे मुल्क या शहर मे रसाई हो।
60. आँधी चलते देखना
बलाये नागहानी की अलामत है नुक्सान और तंगदस्ती का बाएस है।
61. अज़दहा देखना
ज़ालिम हाकिम से तकलीफ पहुंचे (सदका मुसीबत से निजात का बाएस है)
62. उँगलियाँ कटती देखना
औलाद या अज़ीज़ से जुदाई हो किसी बड़े काम के सबब ज़िल्लत रूस्वाई हो।
63. अज़दहा काबू मे लाना
मर्दे बुजुर्ग पर काबू पाये दुशमन पर कामयाबी हासिल हो।
64. आँत अशयाए शिकम देखना
मालो हलाल हाथ आय़े कुव्वत व तवंगरी पाये
65. उंगलियाँ मुतफर्रिक देखना
मालो दौलत हाथ से जाये मुफ्लिसी औऱबदहाली का सामना हो।
66. आबरेशम देखना
सफर को जाये दौलत नफा पाये।
67 आईना देखना
कुशादगीए रिज़्क हासिल हो. मुशिकल काम सहलो आसान हो. मुशिकल काम सहलो आसान हो अगर औरत देखे औलाद से गोद भरे।
68. आबदस्त करना
माल या ख़ज़ाना हाथ आये
69 इस्तख़्वॉ (हड़डी) देखना
सालिम देखे कुव्वतो दौलत मिले शिकस्ता देखे तो हलाकतो नुसीबत में पड़े।
70. आग का शोला देखना
माल का नुक्सान हो।
71. आग कबज़े मे पड़े देखना
जिन्स की फ़रोवानी हो नर्ख मे अरज़ानी हो।
72. आतिश बग़ैर धुऐ के देखना
हाकिम के यहॉ रसाई हो मुराद पूरी हो।
73. आतिशकदा या काफिरो का इबादतखाना देखना
खैरो बरकत ज़्यादा हो रोज़ी का दरवाज़ा खुले इबादत की तौफ़ीक हो।
74. इब्लीस को देखना
दुशमन के मक्रो फरेब से ख़ौफ़ हो लाहौल पढ़े।
75. उल्लु को पकड़ना
नहुसत बिमारी ज़्यादा हो फ़ालिक़ो फाजिर अशखास और मुफ़सिदीन से दोस्ती हो।
76. उल्लू उड़ते देखना
बला दुर और बिमारी से शिफा हो अईज़्जता और बीवी से रंजिश हो।
77. आवाज़े अक़ामतो अज़ान
इज़्ज़तो मंफअत मिले शोहरत हो।
78 ऊँट पर सवार होना
सफर दरपेश हो।
79. ऊँट से गिरना
बिमारी की दलील है।
80. ऊँट को देखना या ज़िब्हा करना
सरदारी मिले दुश्मन जलील हो।
81. ऊँट के पीछे चलना या गिर्द फिरना
हलाकतो बिमारी और रंजो ग़म की अलामत है।
82. अंडे अपने पास देखना
अगर अंडा मुर्गी का देखे तो कुश्दगीऐ रिज़्क और चिड़िया का मुनाफे की सबील है।
83. आबदी देखना
काम मे वुस्अत और ज़्यादा मुनाफा मिले।दुनिया की बहतरी औरमकसद मे कामयाबी हो।
84. अंगुठी पहनना
दौलतो इकबाल की दलील।
85. अंगूठी या नगीना गुम होना
हुकूमत में फितूर हो क़द्रो मंजिलत में ज़वाल आये।
86. अंगुठी सोने की देखना
औरत देखे तो खूब है मर्द देखे तो बुरा है।
87. अंगूठी चॉदी की देखना
तवल्लुदे फरज़न्द से दिलशाद हो या मालो मवेशी की कसरत हो।
88. अंधरा देखना
ज़लालतो गुमराही और नहूसत की दलील।
89. इज़ारबन्द देखना
नेक औरत मिले।
90 अरार्ह देखना
मर्द देखे तो फरज़न्द या भाई या दौलत पैदा हो।औरत देखे तो सोकन का ग़म उठाये।
91. आटा गेहूँ बरसते देखना
रिज़्क कुशादा हो बल्कि शहर के लिये मंफअत की दलील है।
92 अंगिया पाकिज़ा देखना
औरत देखे तो इज़जत और मालो रूत्बा मर्द देखे तो तकलीफ पाये।
93. अबाबील देखना या पाना
मुराद मिले ग़म दुर हो महबूब से मुलाक़ात हो।
94. अबाबील का मारना या फैंकना
अपने महबूब से जुदाई।
95. आँख तारीक देखना
आँख की बिनाई ज़्यादा हो फ़रज़न्द की बिमारी से महजून हो।
96. आडू देखना
आडू का दरख्त ख़्वाब में देखा जाय तो माल मिलने की बशारत है।
97. आँसू
सर्द आँसू बहते देखनाशादी या खुशी का मोजिब है और अगर गर्म आँसू देखे तो रंजो अलम की निशानी है।
98. आँख
आँख को रौशन देखना किसी बुजुर्ग से फैज़ हासिल होने के मुतरादिफ है।
99. आम
ख़्वाब मे आम देखना या मिलने की अलामत है।और खाना रोज़गार मिलने की अलामत है।
100. आवाज़
अगर ख़्वाब मे मर्द की आवाज़े बुलन्द सुने तो बुज़र्गी हासिल होने की अलामत है।
101 आईना
ख़्वाब मे आईना देखना मर्तबाए विलायत हासिल होने के मुतरादिक है।
102. आज़न
आज़ान का सुनना परहेज़गारी की अलामत है।
103 अख़बार
ख़्वाब मे अखबार पढ़ना इल्मो अमल की तरक्की का बाएस है।
104. अजवाईन
रंजो ग़म में मुब्तिला होने काबाईस है।
105. इस्बग़ौल
रंजो ग़म मे मुब्तिला होने की अलामत है।
106 इसितिग़फार करना
दिली मुराद बर आने की दलील है।
107. अफ्यून
ग़म व अन्देशां दरपेश आने की अलमत है।
108. अल्सी
माल हलाल की मंफ़अत का बाईस है।
109 इमामत करना
क़ौम का सरदार बनने की अलामत है।
110. इंजन देखना
ताकतवर होने की दलील है।
111. अंगीठी
अंगीठी मे ऊद या अगर जलाना गुलाम या कनीज़ हासिल करने की अलामत है।
112. ऊन
हलाल जानवर की ऊन देखना माल हलाल जमा करने की दलील।
113. - -
हराम जानवर की ऊन देखना नुक्सान का बाएस है।
114. ऐलवा
अगर खाये तो ग़म व अन्दोह में मुब्तिला हो नखाये तो खुशी हो।
115. ईट
पानी या माल जमा करना माल व दौलत जमा करने की निशानी है।
( बे- ब)
1. बरेहना अपने को देखना।
खैरो बरकत ज़ाहिर हो अन्दोह ग़म से निजात हो फ़ासिक देखे ज़लील हो।
2. बरेहना करते अपने को देखना
अक़्रबा से जुदाई हो तन्हाई में मुब्तिला हो।
3. बरेहना किसी को देखना
मर्दे सालेह और वाक़िफ़े असरार हो माल दुनिया की तलब हो।
4. बाल बग़ल के जलते देखना
मेहनतो कदूरत से छटकारा मिले लोगों की मिन्नत से बे परवाई हो।
5. बाल दाढ़ी के लम्बे देखना
मर्दे के सामने इज़्ज़तअफज़ाई हो
6. बाल लबों के चुनते देखना
कर्ज़ से निजात पाऐ, ग़मो अंदोह दूर हो।
7. बाल पेशानी पर उगे देखना
क़र्जदारी के दलील बाएसे मेहनतो मशक़्कत है।
8. बाल सर के मुंतशिर या लम्बे देखना
अगर सफैद बाल देखे तो फ़रहतो शादमानी हो सियाग देखे तो परेशानी।
9. बाल सर के खींच कर लम्बे करते देखना
रंजो ग़म और मुसी बत दर पेश आये।सदका दे।
10. बाल सर के मोड़ते देखना
खुशी हासिल हो परेशानी दूर हो।
11. बाल सर के झड़ते देखना
तकलीफो बीमारी दूर हो क़र्ज़ की अदायगी हो।
12. बाल अपने सर के शौहर को काटते देखना।
शौहर तलाक दे या घर स् निकाल दे।
13. बाल अपने सर के औरत को खुद काटना
औरत शौहर से बेज़ार हो बदकारी मे गिरफ्तार हो या अपना पर्दा फाश करे।
14. बाव सर के मुँढवाना
रंजो मुसीबत से रिहाई हो अमानत से सुबुत्दोश हो कर्ज़ की अदायगी हो औरत देखे फरज़न्दस पैदा हो फरहतो मसर्रत हासिल हो।
15. बाल सर के खुल जाते देखना
शौहर सफर से आये या कुंवारी को शौहर मिले।
16. बिजली गिरते देखना
मर्गे नागहानी का ख़ौफ़ हो बला व क़हत की दलील है।
17. बिजली चमकते देखना
दौलत तवंगरी से परेशान हो मोहताज को तवंगरी मिले।
18. बर्फ गिरते देखना
दौलत की निशानी है।ग़ैर मौसम में नुक्सान और परेशानी है
19. बर्फ देखना या खाना
बीमार को सेहत हो गमग़ीन को फरहतो खुशी हो
20. बाग़ का मैवा खाना
दौलत मे तरक्की ग़म से छटकारा अयाल से आराम मिले उम्र दराज़ हो।
21. बहिश्त मे जाना औऱ फल खाना
दौलत से मसरूर हो रंजो ग़म दूर हो मीरास हलाल पाये वालदेंन को आराम पहुँचाये।
22. बाजु अपना कटा देखना
भाई य़ा कोई दूसरा अज़ीज मर जाये राहतो आराम मे खलल आये।
23. बाजूबन्द लोहो का देखना या पाना
दलीले कुव्वत व तवंगरी है मोजिबे फतहो कामरानी है
24. बाज़बल्द सोने का या चाँदी का देखना
मर्द देखे तो खूबसूरत औरत मिले औरत देखे तो लड़की हो या ज़ेवर बनाए।
25. बुन्दा या बालिय़ॉ देखना
मर्द देखे तो मालदार खूबसूरत औरत मिले औरत देखे तो लड़की हो या ज़ेवर बनाये।
26. बल्ग़म मुँह निकलते देखना
ग़म वअन्दोह से रिहाई मिले इशरत का सामना हो।
27. बर्स अपने या किसी के देखना
माल हराम हाथ लगे खोटा रूपया मिले।
28. बाला खाना या बड़ी इमारत देखना
दौलत पाये ग़म से बेख़ौफ हो।
29. बादाम देखना
फसाद में मुब्तिला हो नुक्सान पाये।
30. बीयर (बूज़हा या शराबब) देखना या पाना
मर्द बख़ील से कुछ हाथ लगे या खुद तवंगर बख़ील हो जाये।
31. बालाई देखना
नेअमत खाने मे आये बेअंदाजा दौलत हाथ लगे।
32 बाजे खुशी के देखना
बलन्द मर्तबा व नफा औऱ कुव्वत है सरदारी की अलामत है।
33. बॉसरी देखना
अगर खुद बजाये तो फक्रो अन्देशा दरपेश हो अगर दूसरे को देखे तो तक़रीब हो।
34. बॉसरी बजाते औरत को दखऩा
पसन्दीदा महबूब कुर्बान हो या किसी खुश आवाज़ गाने वाली पर फ़रेफ्ता हो।
35. बिगुल वगैरा देखना
होलनाक ख़बर सुन्ने मे आए हाकिम का शिकवा ज़बान पर आये।
36. बिगल वग़ैरा की अवाज़ सुनना
फरहतो शादमानी और नामवरीव शोहरत की निशानी है।
37. बेड़ी या तौके आहनी देखना
कुर्फो गुमराही का मोजिब है औऱ शामत व तबाही है।
38. बिस्तर नया देखना
बादशाह का मुकर्रब होना नावरी औऱ शौहरत हो।
39. बाग घोड़े की देखना
दौलत व इल्म हाथ आये अहले दानिश से फ़ायदा उठआये।
40. बागडोर देखना
दौलत ज़्यादा हो तवंगरी से दिल शाद हो।
41 बकरी का खो जाना
फरज़न्द या अज़ीज़ ख़िलाफ हो जाये या नौकर भाग जाये।
42. बकरी खरीदना या चुराना या पकड़े देखना
कौम की सरदारी मिले।
43. भैस का देखना
मर्दको इज़्जत मिले हाकिम की रिफाकत मिले।
44. भैस खञरीदना
एक बड़े गिरोह की सरदारी मिले दौलतमन्द हो।
45. बछड़ा देखना
मालदार और जिविक़ार हो
46. भेड़िया देखना
सख़्त दुशमन से मुकाबला हो या ज़लिम हाकिम की मुलाज़मत मिल।
47. भेड़ियोँ से लड़त देखना
अगर भेड़िया ज़ेर आये तो दुश्मन पर फ़तह हो अगर भेड़िया ग़ालिब हो दुश्मन से शिकस्त
खाये।
48. बन्दर को देखना
किसी लाइलाज जख़्म से अज़ियत उठाये बीमारी या दर्दे सरी में मुबतिला हो।
49. बन्दर को अंपने घोड़े पर सवार देखना
अपनी औरत की बहुत हिफाज़त करे व फासिद मर्द के फ़साद का अन्देशा लाहिक हो।
50. बन्दर या बिल्ली पर सवार देखना
बीमारी नाउम्मीदी. सरगरदानी की दलील है।
51. बिल्ले या बिल्ली को देखना
रिज़्क में कुशादगी हो मालो दौलत में तरक्की हो य़ा घरेलू चोर से नुक़्सान हो
या थोड़े दिनों के लिये बीमारी का सामना हो।
52. बन्दर को घर मे आते देखना
अगर नर है तो मर्द मक्कार कुछ फ़साद करे अगर मादा देखे तो जादुगरनी जादू करे।
53. बिल्ली का कोई चीज़ छीन कर खाना
रिज़्क मे वुस्अत हो ग़ब से माल मिले दुशमन पर कामयाबी हो ज़ालिम हाकिम मेहरबान हो।
54. बिच्छू देखना
ज़ालिम हाकिम मेहरबान हो।
55. बिच्छु का डंक मारना
किसी क़राबतदार या किसी बदतीनत से लड़ाई हो।
56. बिच्छु शलवार में देखना
दुश्मन उसकी औरत या नौकरानी से इत्तिहाद करे या फसादकरे।
57. बिच्छु पकाकर या तल कर खाना
मुखालिफ का माल हाथ लगे या बमिक़्दार गोश्त माल पाये।
58. बिच्छु से बात करना
कोई औरत ज़बानदराज़ी करे नौबत फ़साद पहुँचे।
59. बैल पर घर मे ग़ल्ला लाना
रोज़ी में वुस्अत हो माल मे नफ़ा व बरकत हो।
60. बैल पर सवार होना
मालो नेअमत मिले।
61. बैल का कमज़ोर देखना
तंगदस्ती व क़हतसाली हो बीमारी या परेशानी हो।
62. बैल का सींग मारना
ओहदे से माज़ुल हौना।
63. बैल मोटा या मियाना देखना.
बारिश ज़्यादा हो चीजें सस्ती हों दौलतो माल ज़्यादा हो।
64. बीमार को बेहाल देखना
सेहत व फ़रहतो राहत हासिल हो।
65. बीमार से सख़्ती करते देखना
तमाम कामों मे वुस्अत हौ जिस चीज़ की उम्मीद न हाथ लगे राहतो सेहत हो।
66. बीमार अपने आप को देखना
इबादत में सुस्ती व काहिल हो या दिल मसाफ़रत पर मायल हो।
67. बीमार को सब्रो शुक्र करते देखना
नेअमतो दौलत और सेहतो फ़रहत हासिल हो।
68. बीमार को रोते देखना
पहले क़द्रे नुक्सान बाद में उसका नेअमुल ब़दल हो।
69. बरछी देखना
दुश्मनपर फ़तह और तवंगरी हो खुद ब खुद कोई दुशमन ज़ाहिर हो फिक्रमन्दी का सामना।
70. बजाज़ को कपडा बेचते देखना
दौलतों अज़मत मिले तिजारत मे नफ़ा हो।
71. बजाज़ को देखना
दौलतों अज़मत मिले तिजारत मे नफ़ा हो।
72. भौंरा या भिंगार देखना
रंजो ग़म दुर हो फ़रहतो सुरूर हो।
73. भम्भीरी या बोट देखना
परागंदगी सरगरदानी हो दिल को परेशानी हो।
74. बच्चे को अपने पास देखना
नौकर चोरी करे या बच्चे मालिक का माल चुराय।
75. बुलबुल देखना
महबूबे खुश आवाज़से मलाकात हो।
76. बाज़ के पाँव मे घुंघरू देखना
दुख़्तरे नेक अख़्तर तवल्लुद हो दिल को बेहद फ़रहत मिले।
77. बाज़ का दामन में छुपना
फ़रज़न्द के तवल्लुद की खुशी हो या औहदा मिले।
78. बाज़ पकड़ना हाथ में या बुलन्दी पर देखना
सरदारी या नफा हासिल हो।
79. बाज़ शिकार या शहरी देखना
अपनी क़ौम मे सरदारी मिले
80. बत्तख पकड़ना या खाना
किसी हाकिम या सरदार से मालो दौलत मिले या औरत से मीरास पाये।
81. बत्तख देखना
अगर सफ़ैद देखे तो बेअन्दाज़ा माल पाये अगर सियाह देखे तो सियाह लोंडी से वास्ता पड़े।
82. बटेर का गौश्त खाना
हलाल रिज़्क या औरत का माल मिलना।
83. बटेर पकड़ना या देखना
दिलफ़रेब या जंगजू औरत मिले सेहतो आफित की बाशरत है।
84. बुतकदे मे जाना
मकरूहाते दुनिया मे मुबितला हो ब्राह्मण का मुलाज़िम हो।
85. बुत परस्ती करना
राहे बातिल से से मानूस और हुस्ने आख़िरत से मायूस हो।
86. बुत तोड़ना
दीन क़ायमो साबित हो बुलन्दीये मर्तबा हौ।
87. भीख मॉगना
मंफअत और मर्तबा मिले, इज़्जत बड़े फिक्रे मईशत जाये।
88. बादशाह को देखना
अगर ख़ुश देखे तो दौलतो इज़्ज़त पाये अगर ग़मगीन देखे नुक्सान पाये।
89. मुर्दा बादशाह को जिन्दा देखना
पुराने आईन जारी हों ज़ालिमो बदमाश आरी हों दौलतो नेअमत पाये तकलीफो मुफ्लिसी दूर हो।
90. बादशाह को लड़ते देखना
चीज़े सस्ती औऱ ग़ल्ला (अनाज वग़ैरा) कसरत से हो, मालो कुव्वत मे इज़ाफा हो।
91 बादशाह को शहर या कब्र मे देखना
इस जगह ज़िना या फ़साद हो अहले शहर को मुसीबत का सामना हो
92. बिल्लोर पाना या बेचना
कज़्जाब औरत से माल मिले या उनकी दलाली करे।
93. भाई आते देखना
दौलत की फऱावानी और चीज़ो की अरज़ानी (सस्ती) हो।
94. बैंगन या भिन्डी देखना
मर्द को सरसब्ज़ी और कुव्वत का इशारा औरत को हामिला होने की बशारत है।
95. भिन्ड़ी खाना
तवल्लुदे फरज़न्द हो।
96. बोसा लेते देखना
दलीले मसर्रत कामरानी है और इशरत की निशानी है
97. बारात देखना
शादी की बशारत है
98 बारे मासीयत सर पर देखना
गुनाह से तौबा करे सदका दे इस्तिग़फार करे।
99. भूचाल देखना
ग़म व मेहनत में मुब्तिला हो सदमों से दिल तहो बाला हो।
100. बादबांकुश देखना
उम्र दराज़ ज़ौजा खूबरू मिले मालो नेअमत और ख़ैरो बरकत हाथ आये।
101 बकरी या भेड़ पहाड़ी
अगर नर हो तो मर्द से फायदा उठाये अगर मादा हो तो औरत से मसर्रत हासिल हो।
102 बन्दूक देखना
दुश्मन पर ग़लिब आने से नाम हो या अच्छी ख़बर से खुश हो।
103. बात करना
हरज़बान में बात करना या सुनना खैरो शर में मुब्तिला होने के मुतरादिफ है।
104. बाजरा देखना
बाजरे की रोटी खाते देखना दिली मुराद बर आने की अलामत है।
105 बादाम
बादाम की गरी देखना मोजिब ख़ैरो नेअमत है।
106 बारह बुर्ज
ख़्वाब मे किसी बुर्ज दखने की ताबीर उस बुर्ज की ख़ासियत पर मब्नी है।
107. बावर्ची
अगर ख़्वाब में बावर्ची काम करे तो ख़ैरो बरकत का मोजिब है।
108. बाम
बाम पर देखना बुलन्द मर्तबे की दलील है।
109. बुख़ार
अपने को बुख़ार में देखना तंदरूस्ती और दराज़ीये उम्र की दलील है।
110 बख़्शता
अगर कोई शख़्श बखुशी बहुत से लोगो को कोई चीज़ बख़्शता देखे तो ख़ैरो बरकत का मोजिब है।
111. बदहज़मी
अगर कोई शख़्स ख़्वाब में बदहज़मी होती देखे तो माले हराम खाने और फ़साद करने की दलील है।
112. बरदा फ़रोशी
अगर ख़्वाब में बरदा फ़रोशों में अपने आप को देखे तो माले हराम हासिल करने और उसके बरबाद होने की दलील है।
113. बुढ़ीया
अगर ख़वाब मे बुढिया को देखे तो उम्र तूलानी होने के मुतरादिफ़ है।
114. बगला
ख़्वाब में बगला पकड़ते देखेतो किसी औरत केमाल से नफा पहुँचने की दलील है।
115. बिल्लौर
अगर ख़्वाब में बिल्लौर देखे तो ऐसी औरत से शादी होन् की दलील है जिससे निबाह न हो सकेगा
116 बुनियाद
अगर ख़्वाब मे देखें कि किसी मकान या शहर या क़िले की बुनियाद रख रहा है तो दुश्मनों से अमन में रहने के मुतरादिफ है।
117. बहरापन
ख़्वाब में बहरापन तहीदस्ती और तंगी का बाएस है।
118. भूख
ख़्वाब में भूक लगना बेहतर है।
119 .बेल्चा
बेल्चा देखना याकामकरना इज़्ज़तो विक़ार की दलील है।
120. बेलना
किसी से बेलना मॉगना नफ़ा और कामयाबी की दलील है।
121. बेहोशी
अगर कोई शख़्स अपने आपको ख़्वाब में बेहोश देखे तो किसी काम में हैरानी व परेशानी का मोजिब है लेकिन आख़िर कामयाब होगा।
122. बही
ख़्वाब में बही का देखना फ़रज़न्द होने का बाएस है।
123. भैसा
ख़्वाब में भैसा देखना किसी नौकर रखने या गुलाम ख़रीदने का मोजिब है।
124. बाईसकोप
ख़्वाब में बाईसकोप का तमाशा देखना ग़म से निजात पाने का मोजिब है।
125. बाईस्किल पर सवार हौना
बुलन्द मर्तबा और इज़्ज़त व एतहराम की अलाम़त है।
(पे.)
1. पैग़म्बरे खुदा (स.) को खुश देखना
कर्ज़ की अदायगी. शिफायाबी इज़्ज़ो शरफ में तरक़्क़ी और हाकिम के नज़दीक तक़र्रूब हासिल हो काफिर देखे तो मुसलमान हो दुनिया व आख़िरत में सुर्ख रू हो।
2. पैग़म्बरे खुदा (स.) को गज़बनाक देखना
दौलत को ज़वाल को ज़वाल आये त़हरे खुदा की निशानी है मोरिदे फ़ित्ना व फ़साद और घर की तबाही है।
3. पैमाने से बॉस नापते देखना
ओहदेदार बने।
4. पैमाना तोड़ना या जलाना
ख़ौफ़े मर्ग और हाकिम एताब की दलील देखने नाले के लिये तबाही है।
5. पैमाना देखना
अदलो इसाफ और कामयाबी की दलील है।
6. पील ताज़ा पक्की देखना
बद अस्लो जादूगर मिले और राहतो मंफअत मिले
7. परी देखना
मरातिबे बुलनद और दजतिहिसहो।
8. पिस्सू कपड़े से जुदा करना या देकना
अयाल के मसरफ से निजात पाये खुश हाली और फ़ारिगुल बाली हासिल हो।
9. परवाना देखना
हलाकतो सरगरदानी में मुब्तिला हो किसी शमा शमाएल से इत्तिहाद हो।
10. पशमीना देखना
इज़्ज़तो तैक़ीर पाये मालो मंफअत मिले।
11. पिंजरा देखना
अगर अपने आपको पिंजरे में देखे क़ैद हो अगर दूसरे को देखे तो क़ैद का सदमा उठाये।
12. पुल गिरते देखना
फिक्रो अन्देशें की निशानी हाकिम की तबाही व बरबादी।
13. पुले सिरात से दोज़ख में गिरना
गुनाहे कबीरा और बदकारी में मुब्तिला हो हाकिम जाबिर से खौंफ और जानो माल की तबाही।
14. पुले सिरात से गुज़रना
कुल्फत और बला से निजात पाये ज़िन्दगी भर रंजो ग़म से छुटकारा हो।
15. पुले सिरात को देखना
काम जईफतर हो हाकिम ज़ालिम से ख़तरा लाहिक़ हो।
16. पिस्तान देखना
औरत से घर आबाद हो दौलतो औलाद से दिलशाद हो।
17. पापोश नया पहनना
दुल्हन बाकिरा मिले ऐशो इशरत नसीब हो।
18. पापोश गुम होना
ज़ौजा की जुदाई हो (हुकूक़े शरीया वाजिबुलअदा को न भूलें)।
19. पापोश टूटना
ज़ौजा को रंजो मुसीबत का सामना हो।
20. पंजा कटा देखना
मुसीबत में गिरफ्तार हो।
21. पंजा हाथ का ख़ुशनुमा देखना
शफीक़ भाई खूबसूरत ज़ौजा या बेहतरीन शरीकेकार मिले कुव्वत बढ़े और दोस्तों की इम्दाद करें।
22. पसली देखना
औरत नौजवान से तअल्लुक़ हो फरहतो ऐश बकसरत हो।
23. पसली में सूराख़ या खून देखना
फरज़न्दे दिलबन्द से हमकिनार हो या ज़ौजा को सदमा पहुँचे।
24. पसली टूटी देखना
अगर बॉये हो तो ज़ौजा या लड़की मरे अगर दाहिनी हो तो माँ या बाप या लड़के का ग़म उठाये।
25. पेशानी ज़ख्मी देखना
अज़ीज़ो अक्रबा से रंज उठाये कद्रे नुकसान माल हो।
26. पेशानी पर वरम देखना
माल दौलत और रिज़्क में वुस्अत हो इज़्जो शरफ व रियासत मे इज़ाफा हो।
27. पेशानी बुलन्द देखना
इक्बाल व मुराद को पहँचे तवल्लुदे फ़रज़न्दशाद हो।
28. पा बरेहना पने को देखना
लोगों के एहसान से बेनियाज़ हो दुश्मन या ज़ौजा मरे
29. पॉओ ज़मीन पर मारना
मुददतों मुसीबत मे गिरफ्तार रहे अगर घुँघरू की आवाज हो बेहूदा गोई से राज़ फाश हो
30. पॉव टुटा देखना
रोज़ी तंग हो कौशिश नाकारा रहे।
31. फेफड़ा हलाल जानवर का देखना
कुशादगिये रिज़्क की नीशानी है
32. पॉव बुलन्द जानीबे काबा या आसमान की तरफ देखना
किसी बड़ी मुसीबत में गिरफ्तार हो सदका दफ़्ए बलियात है।
33. पेट देखना
ग़ैब से मदद मिले फ़रहतो सुरबर का सामना हो।
34. पेट ऑतों से खाली देखना
अइज़्ज़ा से जुदाई हो हुज़्नो मलाल का शिददत से सामना हो।
35. पेट शफ़्फ़ाफ़ देखना
माले दुनिया तलाश से मिले ज़नो फरज़द की ज़मीन बढे।
36. पेट निकलते देखना
बीमार को शिफ़ा मोहताज तवंगर दौलत मन्द का माल तलफ हो।
37. पैखाना मजमए आम करना
कहरे इलिही का सज़ावार हो सदका दफ्ए बलियात है।
38. पैखाना कपड़ो मे करना
ज़ौजा या नौकरानी वग़ैरा पर गुस्सा करे आखिर मे परेशानी हो।
39. पैखाना करना
तहसीले उलूम दीनिया से बाज़ रहो नेक कामों से दुर रहे।
40. पैखाना खाते देखना
नजिस या हराम खाना खाये या माले दुनिया हासिल हो दीन की दौलत फ़रामोश हो।
41. पैखाना मे आलूद होना
ज़्यादा तंख़्वाह वाला औहदा मिले मालो दीनार ज़्यादा हाथ लगे
42. पेशाब से धुँआ सा उठना
हद से ज़्यादा ग़नी मालदार और ओहदेदार बने।
43. पेशाब खून का करना
औरत हामिला देखे तो बच्चा शिकम मे मर जाये मर्द देखे तो बीमारीन और तकलीफ़ मे मुब्तिला हो।
44. पेशाब मेहराब में करना
राहे मुस्तकीम से गुमराह हो उसके फ़रज़न्द को हाकिमियत मिले।
45. पेशाब अपनी जा पर करना
दुर्वशी तवंगरी न ग़म से निजात पाये हालिम माजूल और सौदागर को नुक़्सान हो।
46. पेशाब औरत को करते देखना
शहवत मे इज़ाफा हो।
47. पेशाब कपड़ों मे करना
ग़मगीन ग़म से निजात पाये आज़ादी मिले दुर्वश को तवंगरी मिले कैदी रिह्ई पाये।
48. पनचक्की बेकार देखना
रिज़्को ज़िराअत के दजवाज़े बन्द हो हर कामो कोशिश मों रूकावट हो।
49. पनचक्की बग़ैर पानी के चलते देखना
हाकिम के एताब में आये सख़्ती व अज़ाब आये या किसी मोहलिक मर्ज़ मे फँसे।
50. पनचक्की चलते देखना
वुस्अते रिज़्क मिले जिन्दगी तूलानी हो।
51 पसीना जारी देखना
तवंगरी की अलामत है।
52. पसीना बदन से निकलते देखना
हाजत जल्दीबर आये मालो दौलत ख़ातिर ख़्वाब मिले।
53. पेजामा ज़र्री पहनना यादेखना
अययाश औऱत से वास्ता पड़े बीमार सेसेहत मिले दिले खुश हो।
54. पैराहन पहनना या देखना
माल बहुत पाये ऐशो खुशनसीबी हो।
55. पटका बँधा देखना
कबवतो इज़ज़तपाये हलाल मीरास मिले।
56. पटका खुल जाना
आधी उम्र गुज़रे और अगर पटका ज़मीन परगिर पड़े तो उम्र आखिर को पहुँचे।
57. पोस्तीन पाना पहनना
अगर बकरी का है तो औरत मालदार मिले अगर लोमड़ी का है तो औरत फ़रेब वाली मिले।
58. प्यासा अपने को देखना
उमूर दीन मे फित़ूर हो दुनिया की कसरत हो।
59. पानी नाक से निकलते देखना
फ़रजन्द मिले कर्जा अदा हो ग़मसे ख़लासी हो बीमारी से शिफ़ा हो
60. पानी दरया व चश्मे व तालाब से पीना
हाकिम से इनाम पाये लेकिन क़द्रे मशक्क़त करना पड़े सरदारी हासिल हो और कामेलन मुस्तग़नी हो।
61. पानी नहर से शहर आते देखना
खबने नाहक का ज़हूरहो राहतो आराम में फ़ितूर हो।
62. पानी साफदे देखना
उम्रो दौलत मे तरक़् क़ी ऐर नफ़ा व नअमत में ज़्यादती हो।
63. पानी से सेरराब होना
कामिल छुटकारा और हुकूमत हासिल हो।
64. पानी कुऐ से खीचना. या पानी देखना
इल्मो दौलत नफा मिले जाहो हशमत पाये
65. कुँऐ के पानी से बदन धोना
महनत से निजात हो फ़रहतो खुशी पाये।
66. पानी खारा देखना
फिक्र अन्देशा दामनगीर हो दौलतो इज़्ज़त को ज़वाल आये।
67. पानी गंदा देखना
बदख़स्लत औरत से शादी हो चन्द दिन बाद ख़ानाबरबादी हो।
68. पानी जारी देखना
गुर्बत दूर हो मालो दौलत पाये।
69. प्याले दूध या शराब के देखना
नेक औरत से शादी हो कमाले राहतो आराम नसीब हो।
70।प्याला ख़ाली देखना
तंगदस्ती हो राहतो आराम मकसूद हो।
71. प्याला भरा हुआ देखना
हाजत रवाई हो।
72. प्याले से शरबत या दुध पीना
मुबाशरत में खुशी मिले फ़रजन्द सालेह नसीब हो
73 प्याला देखना
ख़दमा से राहत मिले।
74. पुलाऊ खाना या देखना
माल से मुस्तग़नी हो बीमारी से शिफ़ा मिले।
75. प्याज़ खाना
माले हरामकी निशानी है किसी ऐब या पशेमानी की दलील है।
76पनीर खाना या पाना
फक्रो तरददुत मे पड़ जाये।
77. पिस्ता खाते या मिलते देखना
मोजिबे मसर्तोकामरानी औरनेअमतो लड़्ज़त की निशानी है।
78. पालान देखना
औरत से शादी हो और माले दुनिया मिले।
79. पत्थर फैंकना
इत्तेहाम झूंठ से परेशान हो दौलत सेदुशमनी ज़ाहिर हो
80. पत्थर चक़माक़ से झाड़ना
अगर आग सीने मे लगे माल मिले और आग न लगे किसी चीज़ का फायदा न पहँचे।
81 फलीता सुलगा हुआ देखना
हाकिमे वक्त का दोस्त हो आली कद्र और साहेबे फज़ाएल बने।
82. पान खाना
सरसबिज़ी व सुर्ख़रूई की दलील है।
83. पानी खरीदना या देखना
औरत मिलने की निशानी है मोजिबे ऐश है।
84. पतीली पुरानी क़लईदार देखना
मालदार औरत से निकाह करे. राहत आराम और दौलत मिले।
85. पतीली नई खरीदना
नेक सिरत औरत से निकाह हो मालो असबाब खूब हाथ लगे।
86. पीठ सही न सालिम और क़वी देखना
क़वी वअक़्लमन्द फ़रज़ल्द होया भाई से कुछ माल हासिल हो।
87. पीठ दिवार की जानिब करके बैठना
सफ़र को जाये कद्रे माल हाथ आए।
88. पीठ दुश्मन की देखना
फ़तेहमन्द व कामरानी की दलील है।ख़ौप से अमनो अमान की निशानी है।
89. पीठ शिकस्ता देखना
भाई मरे ग. म घुस्सा खाये (सदका बलियात को दूर करता है)
90. पतंग उड़ते देखना
लहब व लाब ओर तमस्खुर पसन्द आये और झुँठ से एतबार जाये।
91. फूल सुर्ख व सफैद देखना
राहतो आराम और बेहतरी हो या तवल्लुदे फ़रजन्द की खुशी हो।
92. पारा ज़मीन से उठना
माल बेमसरफ़ या बूहक़ीक़त चीज़ हाथ लगे।मक्रोफ़रेब में आरजु
ज़ाया हो जाये।
93. पारा हाथ पर देखना
वादा ख़िलाफ़ मशहुर हो तीनत में तमा व फ़ितूर हो।
94. पालक का साग खाना या देखना
दर्द ग़म की निशानी है नुक्साने माल और परेशानी की दलील है।
95. पहाड़ से गिरना या उतरना
मदारिज़ व तनासुब को ज़वाल आये दौलतो इक़्बल मे कमी हो।
96. पहाड़ पर चढ़ना
हाकिम के यहॉ इज़्ज़त पाये बुलनद मर्तबा हो दुश्मन पर फ़तह पाये।
97. पादना (रीह खारिज करना)
बुरी बात कहने और बदनाम होने के मुतरादिफ़ है।
98. पाज़ेब देखना
औरत के शौहर करने की दलील है।
99. पत्ता
पत्ता देखना अचछा नहीं।
100. पत्ते
दरख्त के ताज़ा पत्ते मिलने या तोड़ने मालो दौलत हासिल करने की दलील है।
101. पठठे जिस्म के पठठे देखना
अहलो अयाल से मतरादिफ़ है
102. पर
अगर कोई शख़् अपने बदन या बाजूऔं पर पर देखे और उनसे उड़ता हुये देखे तो कामयाब सफर करने की दलील है
103. परदा
दरवाज़ो पर परदमो का देखना ग़मों अन्दोह मे मुब्तिला होने का बाएस है।
104. पुराना कपड़ा
ख़्वाब में पुराना कपड़ा बनाना ग़म वरंज मे मुब्तिला होने का बाएस है।
105. पशम
अगर कोई शख़्स पशम अपने पास देखे याकिसी से हासिल करे या ख़रीदे और घरमें लाये हर हालत में मालो दौलत हासिल होने की सबब है।
106. प्लेग
ख़्वाब में प्लेग (ताऊन) देखना जंगो जिदाल और मुसीबत का बाएस है।
107. पिंजरा
ख्वाब में पिंजरा देखना क़ैदखाना तंग जगह और बरदा फ़रोशी से ताबीर है।
108. पल्कें
ख़्वाब में पल्कों का हरकत करते देखना बीमार व नुक्सान में मुब्तला होने की दलील है।
109. पौदीना देखना
ग़मो अन्दोह में मुब्तिला होने के मुतरादिफ़ है
110. फिरकी
चर्खे की फिरकी देखना औरत की मोहब्बत का बाएस है।
111. फन्की
ख़्वाब में फन्की या सूफूफ देखना रंजो ग़म में मुब्तिला होने की दलील है।
112. प्यास
ख़्वाब में प्यास लगना दीन में फसाद बढ़ने का सबब है।
113. पीप
ख़्वाब में पीप देखना मालो मनाल के मुतरादिफ है।
114. फिटकरी
ख़्वाब में फिटकरी देखना रंजो ग़म बिमारी और मुसीबत में मुब्तिला होने का सबब है।
115. फोड़ा
जिस क़दर अपने जिस्म पर फौड़े देखे मालो दौलत जमा करने के मुतरादिफ है
116. फूल
ख़्वाब में फूल देखना फ़रज़न्द दोस्त. कम गिम्मत मर्द कनीज़. गुलाम और ग़ायब से ख़तरा होने के मुतरादिफ है।
117. पैकान (तीर)
अगर ख़्वाब में देखे और हासिल हों तो काम की दुरूसत का बाएस है।
118. पहलवान
अगर बादशाह अपने आपको पहलवान बना देखे तो उसकी कुवतो अज़मत का बाएस है।
(ते)
1. ताबूत और ताज़िया देखना
निहायत यमनो बरकत है हजो ज़ियाराते मुक़दिदसा से मुशर्रफ होने की दलील है।
2. ताबूत अपना देखना
दुश्मन क़वी पर कामयाबी उम्र दराज़ और कामयाबी खुशी हासिल हो।
3. ताबुत नया देखना
इज़्ज़तो मर्तबा मिले ज़ने बाकिरासे अल्द़हो।
4. ताबूत जलाना या ज़ाया होते देखना
इज़्ज़तो मर्तबा कम हो या औरतसे जुदआई का ग़म लाहिक हो।
5. तॉबा देखआ
मेहनत से काम सरअंजाम पाये सदमा व मुसीबत दरपेश आये।
6. तीर निशाने पर पहुँचाना
दुश्मन पर ग़ालिब आये तूले हयात हो।
7. तीर टुटे या निशाने पर न लगे
माल तलफ हो ग़मो गुस्सा दरपेश हो।
8. तनूर देखना
औऱत मालदार अक्द मे आये अगर औरत देखे शौहर तवंगर हो।
9. तयम्मुम करना
ग़मो कुल्फत दूर हो दोस्त से आरामो ख़ुशी मिले
10. तावीज़ नया पाना
बीमारी से सेहतो तन्दरूस्ती हो तकलीफ दूर हो।
11. तीतर देखना
लहब लाब में मसरूफ हो हीला ओ मकर व फरेब में मशगूल हो।
12. तेंदुआ देखना
हाकिम वादगर हो ख़ुँख़ार पर फतह पाये।
13. तरबूज़ देखना या खाना
नेअमतो माल हासिल हो इज़्ज़तो तौकीर में इज़ाफा हो।
14. तरंज ताज़ा देखना
कसरत से देखे तो दौलत हो दो चार देखे फरज़न्द पैदा हो।
15. तूत खाना या देखना
शीरीं देखे तो नफा मिले तुर्श देखे तो मुसीबत उठाये।
16. तिल देखना
माल से नफ़ा अयाल से आराम. रोजी का दरवाज़ा खुले।
17. तुख़्म ताल मखाना देखना
कुव्वत ज़यादा हो नेक फ़रज़न्द हो।
18. ताज मुकम्मल औरत देके
बेशौहर हो तो मालदार शौहर मिले शौहरदार हो तो शौहर दौलतमन्द हो जाये।
19. ताज सर पर देखना
साहिबे इल्मों फ़ज़्ल और दौलतमन्द हो हाकिमे वक़्त बने।
20. तमबूर बजाते या बजते देखना
मज़ीद कुव्वत ऐशो इशरत हो।
21. तार खींचना या देखना
रिश्ताए रोज़ी वे आये ख़ैरो बरकत है
22. तौबड़ा बना देखना
अगर कब्जे मे आये ख़ैरो बरकत है अगर ज़ाया हो तो नहुसत की दलील है।
23. तराजू मे अपने आमाल तुलते देखना
अगर नेक आमाल ज़्यादा हों तो कामयाबी है गर आमाले बद ज़्यादा होंतो जहन्नम की निशानी है
24. तराज़ू के पल्ले ऊपर नीचे देखना
काज़ी व मुफ्ती कयामत बरपा करें रिआया पर ज़ुल्मो बिदअत बकसत करें।
25. तराज़ू के पल्ले बराबर देखना
शहरी हुक्काम अद्ल से काम करें।
26. तराज़ू देखना
काज़ीये शहर या आलिम बने रियासत मे सरदारी पाये।
27. तस्वीर देखना
मालो मंफ़अत पाये मर्तबा बुलन्दहो।
28. तलवार टूटना या गिर जाना
नौकरी से बरख़्वास्त हो औरत को तलाक दे या मर्ग फ़रज़न्द का सदमा हो।
29. तलवार पाना
हाकिम बने या फ़ौज का अफ़सर हो औरतहसीन और फ़रज़न्द खुश सीरत हो।
30. तलवार हमाएल देखना
औरत हसीन मिले सरदारी पाये।
31. तौप देखना
दुशिमन पर ग़ल्बा पाने से नाम हो या अच्छी ख़बर खुशी हो।
32. तकिया रूई या दोखना
मर्तबा बुलन्द और दौलतमन्द हो।
33. तकिया अबाबिल के पर का देखना
सर बुलन्द और हक़ पसन्द हो।दुश्मन का दर्दमन्द हो।
34. तख्त पर सोते देखना
सरवतो हुकूमत हासिल हो अदलो इंसाफ से ग़फिल हो
35. तख़्ते मुरस्सा देखना
मालदार और जमील और मिले हुकूमत का लुत्फ उठाये।
36. तख़् रवॉ पर बौठकर आसमान जाना
जामे हयात भर जाये जल्द पैग़ामें अजल आये या मर्तबा बुलन्द हो।
37. तख़्त पर बैठना
रईस कौम बने दौलतो जाह ख़तिरख्वाह हो।
38. तौरात पढ़ना
साहिबे हश्मत से कुव्वत पाये ख़ैरो बरकत ज़्यादा हो।
39. तकबीर कहते देखना।
दुश्मन से बेख़ौफ होने का दरवाज़ा खुले कशाएशे रिज़्क में बरकतहो।
40. तस्बीहो तहलीस मं अपने को देखना
नेअमतो मालो मर्तबा पाये ग़म से निजात हो आबिद बने।
41. तुख़्म अपनी ज़मीन पर बोना
नहुसतो फ़लाकत है (अमले नेक की ज़रूरत है)
42. तेल या तम्बाकू को देखना
नहुसतो फ़रज़न्द पैदा हो माल में खैरो बरकत ज़ाहिर हो।
43. ताज़य़ाना
अगर कोई शख़्स ख़्वाब में ताज़याना देखे या किसी के बदन पर पड़ता देखे तो नौकर के फरार होने की दलील है।
44. तालाब
ख़्वाब मे देखना और उसमे नहाना अहलो अयाल की मुसीबत का बाएस है
45. तॉबा पाना
मालो मनाल हासिल होने के मुतरादीफ़ है।
46. तारीकी देखना
रंजो ग़म मे मुब्तिला होने की दलील है
47. ताड़ी पाना
माले हराम हासिल होने निकाह करने और दुनिया की नेअमतों से मुस्तफीज़ होने का सबब है।
48. तबर (कुल्हाड़ी) देखना
या चलते चलते चलाते देखना अज़ीज़ो अकांरिब से से जुदा होने का सबब है।
49. ताड़ का दरख़्त देखना
अगर कोई शख़्स ख़वाब में ताड़ का दरख्त देखे तो ग़मो तरददुद मे पड़नेका बाएस है।
50. तस्वीर पाना
और पाने की अलामत है।
51. तुर्श
तुर्श चीज़या मेवा खुद. खाते देखे तो लमें कमी कारोबार में नुक्सान होने का सबब है
51. तोड़ना
ख़्वाब में किसी चीज़ का तोड़ना ग़मों अलम मे गिरने और फुल तोड़ना औलाद हासिल करने के मुतरादिफ़ है।
52. तिल्ली देखना
इन्सान या जानवर की तिल्ली देखना माल से ताबीर है।56
53. तवा देखना
घर के ख़ादिम या मुतंज़िमसेताबीर है।
54. तक्ला देखना
ल़ड़की से ताबीर है।
55. तोशक
तोशक फ़राख बिछी हुई देखना फराखिये रिज़्क से ताबीर है
56. तोलना
ख़वाब में सही तोलना नेकी रास्ती हुकूमत और इंसाफ से ताबीर है
57. थूक
ख़वाब में गर्म थूकना तिवालतेउर्म की दलील है।
58. तैरना
ख़वाब मेंपानी में तैरना माल व दुनिया से मुतरादिफ है।
(टे)
1. टिड्डी देखना
कौम का सरदार हो या ओहदा बुसन्द हो।
2. टाट का फर्श देखना
दौलत मन्द और आसुदा हाल हो
3. टोपी अपने सर पर देखना
दौलत बेअन्दाज़ा पाये
4. टाट का लिबादा ओढ़ना
परहेज़गार औरत से नफा मिले राहत उठाये।
5. टोपी अपने सर पर किसी को रखते देखना
मर्तबा बुलन्द हो मरदम पसनद हो दौलत से खुश हो
6. टहलता देखना
हसीन दुल्हन पाये खुद्दाम से राहत मिले उममीद आये।
7. टकसाल में सर्राफी देखना
सख़्तगीरों को नर्मी के साथ ज़ेरदस्त करे कुव्वते बाजू दौलत पाये।
8. टांगा
ख़्वाब मे अगर कोई शख़्स अपने आपको सवार देखेतो मेहनत और मशक़्क़त से रिज़्क हासिल होन् का सबब है।
9. टट्ट
ख़वाब में अगर कोई शख़स दोखे या अपने सवार देखे तो मेहनत और मशक्क़त सेर्ज़क हासिल होने का सबब है।
10. टख़्ना
ख़्वाब में टख़ने को मुख़्तलिफ ताबीर है अगर टखने खेलता देखे तो झगड़ा और लड़ाई पैदा होने का सबब है।
11. टिड्डी दल
टिडडी दल देखना लशकर या फौजसे ताबीर है।
12. ट्राम
अगर ख़्वाब में खुद सवार हो तो इज़्जतो तौकीर बढ़े और मर्तबा बुलन्द हो।
13. टिकट
ख़्वाब मे रेल का टिकट खरीदना रेलवे सफर की निशानी जहाज का टिकट खरीदना जहाज़ के सफर की।
14. टमटम
अगर ख़्वाब में टमटम पर सवार
15. टूटना
अगर ख़्वाब में किसी चीज़ को तोड़ते देखे तोमालो जान के नुकिसान काबाएस है।
16. ठप्पा
अगर ख़वाब में किसी किस्म का ठप्पा या मोहर अपने पास देखे तो सवाब का बाएस है
17. ठोड़ी
ठोड़ी देखना अक़्लमन्दी और सरदारी से तबीर है
18. टहनी
टहनियो का देखना भाईयों बेटो और अज़ीजों से ताबीर है।
19. ठेला
ख़्वाब में ठेला देखे तो नौकर से राहत मिले और शादी होने का सबब है।
(से.)
1. सरवतमन्द होना
औरत हसीन मिले सरदारी या मालो दौलत मिले।
2. सुरय्या देखना
मर्तबा बुलन्द पाये फारिगुलबाल और खुश हो।
3. सौर बुर्ज देखना
काम बुलन्दी पकड़े अहलो अयाल से राहत मिले।
4. सरीद (रोटी शोरबा मिला.
वुस्अते रिज़्क़ और राहत हो फिक्रो तंगी से राहत पाये।
5. समर
ख़्वाब में मीठे और खुश ज़ायक़ा समर देखना औलाद से ताबीर है।
(जीम)
1. जरजीस को देखना
हाकिम की ज़ौजा से तकलीफ उठाये आखिर को ख़ात्मा बिल ख़ैर हो हाजत बर आये।
2. जिब्राईल को देखना
मज़ीद इल्मो अक़्ल और तौक़ीर हो बुज़ुर्ग मर्तबा या हाकिम के यहॉ ओहदा पाये।
3. जिमाअ बादशाह से करना
मुशीर और मरहम हाकिम हो सब तकलीफ और बरबादियॉ दूर हों।
4. जिमाअ बदकार औरत से करना
दानाई और परहेज़गारी बढ़े और माले दुनिया हाथ लगे।
5. जिमाअ मुर्ग या चौपाये से करना
जिससे मामला दरपेश है फतह पाये या हसीन और कमसिन औरत अक़्द में आये।
6. जिमाअ ख़च्चर से करना
सख़्ती से निजात पाये दुश्मन पर फतहमन्द हो।
7. जिमाअ शौहरदार औरत से करना
इज़्ज़त बरबाद हो उम्र कम हो ग़म में मुब्तिला हो और फक़त गल मिले तो उम्र बढ़े खुशी पाये।
8. जिमाअ करते देखना
रियासत दौलत पाये दौलते दुनिया से मालामाल हो।
9. जिमाअ यहूदिया से करना
राहत मिले दिल की मुराद पाये दुनिया की नेअमतों से लज़्ज़त पाये।
10. जिमाअ ज़ौजा से करना
सुर्ख़ रूई और इज़्जत पाये ख़ैरो बरकत और दौलत मिले।
11. जिमाअ मर्द से करना
फाएल को नफा मफऊल का नुक़्सान हो और इज़्ज़त मिले।
12. जिम्अ बाकिरा से कराना
पारसा औरत से शादी हो मक़सद बर आये।
13. जुदई बुर्ज को देखना
बादशाह औरत का आक़िल हो हर तरह राहतो आराम मिले।
14. ज़ौज़ा बुर्ज को देखना
हाकिमे वक़्त का ख़ज़ांची हो या मदफून खज़ाना पाये माले दुनिया से गनी हो।
15. झंडा सुर्ख कपड़े का देखना
हमसरों से मोहतरम हो दौलत बढ़े खुशहाल हो।
16. झंडा सफैद देखना
हाकिम जवॉमर्द या आलिम बातौकिर होऔरत दौलतमन्द मुशीर हो।
17. झंडा सब्ज़ देखना
सख़्त सफऱ का सामना हो मग़र सलामत लौटे फ़ायदा थोड़ो।
18. झंडा नीला देखना
तरक़्कीऐ रिज़्को दौलत व दराज़िये उम्र हो अहले सरवत बने।
19. झंडा सियाह देखना
गैर कौम का सरदार हो जंगली वहशतों से परेशान हो।
20. झंडा आसमानी देखना
साहिबे रिफ़अतो जाह हो बुजुर्ग मतर्बा रास्तग्ह हो।
21. जहाज़ को एक गिरोह के साथ देखना
रईसो बुजुर्ग मिल्लत हो।तुले राहत सेहते नफ़्सो हयात हो।
22. जहाज़ पर सवार होना
ग़म से निजात पाये महनत निडर हो जाये
23. जहाज़ बनाना और सुनना
खुशख़बरी सुननो मे आये मालबेजा मसरफ मे आये।
24 झला देखना या खुद़ झुलना
हवाओ हवस मे उम्र गुज़रे इशरत रोज़ बरोज़ बहतर हो
25. जादूगर को देखना
मोरिदे अन्दोह हो जाल साज़ी में पड़े फित्ना और शौबदाबाजी में फँसे।
26 जाव मे दरिन्दा देखना
कारोबार बन्द होकर फिक्रो हीले मेपरेशान हो।
27. जुर्राब पॉव से निकासना
तकलीफो मुसीबत दुर हो ग़मो गुस्से से निजात मिले।
28. जराब जानवर देखना
हजो ज़ियारते मुकद्दिसा की बशारत है ख़ैरो बरकत पाये।
29. जुल्लाब पीना या देखना
माले हलाल हाथ लगे सेहतो राहते नफ्स नसीब हो।
30. जर्राह देकना
तरक्कीऐ माल हो नफ़ा पाये तव्ल्सुद फ़रज़न्द से खुशी हो।
31. झंडा जर्द देखना
बीमारी व तकलीफ की निशानी है परेशानी व सरदानी है।
32. जवारिशे माजून खाना
ख़ैरोबरकत हाथ लगे सेहत व तन्दरूस्तीपायै।
33. जवॉ मर्द को देखना
दौलत से बेनियाज़ हो कर मक्कारो हीला साज़ हो।
34. जनान औरत को देखना
दौलत से घर भर जाये मसर्तो खूबीऐ दुनिया हासिल हो।
35. जिन्नात को देखना
फित्नओ फ़साद की निशानी है बाएसे तकलीफ़ो परेशानी है।
36. जुब्बा (लिबादा) बदन परपाकीज़ा देखना
अक्लमन्दो खुबसूरत औरत मिले दौलत खुशी व कुव्वत मिले।
37 जुब्बा बोसीदा और मैला देखना
बदमिज़ाजो बदशक्ल रतसे वास्ता पड़े हदसे ज़्यादातकलीफ उठाये।
38 झाडूपने घर मे देना यादेखना
माल तलफो बराबद हो परेशानी मे इज़ाफा हो।
39. झडू हर जगह देखना या देना
हाकिम रईयतपरवर और राहत रस़ाँहो मालो दौलत हाथ लगे
40. जिगर भेड़ वग़ैरा का देखना
फरज़न्दपैदा हो मदफून ख़खज़ाना या मालो दौलत हाथ लगे।
41. जुनुब में अपने आपको देखना
किसी जानिब सफर करे अहलो अयाल से जुदाई हो।
42. झड़ी का पानी देखना
मर्द देखे तो मालो मताअ पाये कमसिन औरत अक्द मे आये औरत देखे तो किसी मालदार से अक्द हो।
43. जुँ या जोक देखना
निहायत नहुसत पलाकत और हिकरत की दलील है।
44. जोंक को मार डालना
दुश्मन पर फ़तह व नुसरतपाये मुफलिसी दुर हो।
45. जान बदन से निकलते देखना
. फ़रज़न्द या अयाल का ग़म हो या माल ज़ाया हो।
46. जुग्नू चमकते देखना
नैक सीरत ज़ौजा या खुशरू महबुब मिले कद्रे जवाहर या माल हाथ लगे।
47. जलेबी देखना या खाना
कोशिशे बलीग़ से मालो नेअमत पाये बहतरी व फरहत पाये।
(च)
1. चाँदी खोटी पाना
बदखस्लत औरत से रंजीदा हो या थोड़े से माल ज़ाया होने का अनदेशा हो।
2. चॉदी का बरतन या ज़ेवर देखना
औरत से माल पाये तकलिफ य़ा मुफलिसी दुर हो।
3. चॉदी पाना या देखना
दौलत से धर भरे शहर में फिज़ूल खर्च मशहुर हो।
4. च़ॉदी को कान या मिटटी से निकालना
किसी औरत को धोखे से काम ला ये फसकी बदोलत हर तरह का अराम पाये।
5. चाँदी पिंखालते देखना
अन्देशानाक और मज्तरिब हाल हो दुश्मन केएनाद से कीलो काल मे मुब्तिला हो।
6. चॉदी ज़मीन पर देखना
हाकिम याबादशाह से फ़यदा मिले शहर के बाशिन्दों से खुरसनद हो।
7. चॉदी गहन देखना
तंगदसती व इफ्लास मों मुब्तिला हो हमल साकित हो या दर्दो ग़म मे मुबतिला हो। ;
8. चॉदी को गोया हात मे सज्दा करते देखना
बादशाही सरदारी मिले या औरत हसीन मिले फरज़न्द तवल्लुदो हो खुशी नसीब हो।
9. चावल देखना याखाना
अर्क़रज़ी से नफा उठाये या काफिर से दौलत हाथ आये।
10. चतर शाही दखना
मर्तबा बुलन्द हो।
11. चर्ख पकड़ना या देखना
अगर वहशी देखे लड़का मजनून हो अगर घरेलू देखे तो फ़रज़द सईद मालदार हो।
12. चीता राम करना देखना
बादशाह या हाकिम से कोई नफा हो या रईसे शहर इनाम दे।
13. चीता हमला आवर देखना
सख़्त दुश्मन ग़ालिब आ जाये
चंडाल पकड़ना या देखना
अगर मादा देखे तो लौन्डी या दुख़्तर नेक अन्जाम पाये अगर नर देखे तो फरज़न्द नरीना हाथ आये।
16. चिँटियोँ का घर से निकलना।
दौलतो इक़्बाल को ज़बाल आये।
17. चील का हाथ से उड़ना
दौसत इक़्बाल को ज़वाल आये
18. चील को ताबेदार देखना
मुकर्रब सरदारे आली जाह हो औरतसे ख़ातिर ख़्वाहफ़ायदा हो।
19. चील को देखना
बीमारी को तूल हो ग़म में मुब्तिला हो।
20 चिमगादड़ देखना
दुश्मन से अज़ियत पहुँचे।
21. चर्ख पकड़ना या देकड़ना या देखना
औऱत बद ज़बान के साथ गुफ्तारहो।
22. चूहे का बच्चा देखना
औरत बदज़बान के साथ गुफ्तार हो शरो फ़साद से ज़िनदगी दुशवार हो।
23. चूहा पकड़ते देखना
ज़ने फ़ाहेशा घर में आये उसके सबब ख़्वाह मख़्वाह नुक्सान उठायो
24. चुहा कुछ काटते या खाते देखना।
माल का नुक्सान और दोस्त बदख़्वाह बीमारी से परेशान।और उम्र कोताह हो।
25. चूहों का ग़ोल देखना
तूले हयात और तरक़्क़ीये दरजात हो।
26. चकोर को मरते या उड़ते देखना
ज़ौजा को तलाक दे या अहलिया मर जाये औरत की जानिब क़ैद का सदमा उठाये।
27. चकोर को पकड़ते देखना
औरत हसिन मिले मक़सदे दिली और माल मिले।
28. चूल्हा देखना
बदज़बान औरत का सामना हो झगड़ा फ़साद मे मुबितला हो।
29. चूल्हा भड़कता देखना
महबूब खुशजमाल पाये दौलतों इक़्बाल हाथ आये।
30. चूल्हा गरम ठंड़ा देखना
दौलत का ज़वाल हो रंजो मुसीबत ज़्यादा हो या ज़नौ शौहर में मिलापहो।
31. चिंगारियं बरसते देखना
फित्ना व फसाद और खूँरेज़ी की अलामत है बलाका सामना औऱ ख़ौफो एताबे इलाही है।
32. चिराग़ रौशन देखना
उम्र बढ़े औलाद से नाम रौशन अगर झिलमिलाहट देखे तो उम्र का जाम लबरेज़ हो
33. चिराग दान देखना
औरत बदसूरत हाथ आये नहुसतो तकलीफ मुब्तिला हो।
34. चूल्हा टूट जाते देखना
औरत देखे शौहर मर जाये मर्द देखे तो मर्ग ज़ौजा का रंज उठाये
35. चश्मे तीरीक देखना
कीरोबार में खलल आये फ़रज़न्दो ज़न की बीमारी का ग़म दरपेश है।
36. चूल्हा किसी से पाना या लेना
पाकीज़ा औऱत गर मे आये राहतो अराम जान पाये
37 चश्मे मायूब देखना
फ़रज़द की बदकारी नाफ़रमानी रंजो ग़म में मुब्तिला करे या बद् अतवार औरत से तकलीफ उठाये।
38. चश्मा पानी का जारी देखना
तरक़्क़ीये मदारिजो नेअमाचत हो मज़ीद माल औरसेहतो तन्दरूस्ती पाये।
39. चश्मा महल या घर में ज़ाहिर देखना
यमनो बरकतऔर दौलत की निशानी है बाअस माल व दफ्ए परेशानी है।
40. चाय का पानी उबलते जेखना
इल्म से बहरावर हो दौलत बे अनदाज़ा पाये आबे रहमत से तमाम कुल्फ़तो तकलीफ दुर हो जाये।
41. चाय देखना
बीमार को शिफा हो दोस्त राहत रसॉ हो दिली आरजू बरआये अयाल की राहत पाये
42. चोबा देखना
औरत हसीनो मालदार मिले हर दिल अज़ीज़ हो दौलत मिले
43. चक्की चलते देखना
सफर दराज़ हमश्मों मे इम्तियाज़ हो मंफ़अत पाये रोज़ी से बेनियाज़ हो
44. चक्की बेदाना चलते देखना
लाफ़ज़नी उसका शआर हो बेहूदा गोई से सरोकार हो।
45. चना खाना य़ा अंबार देखना
मालो अस्बाब हाथआये रोज़ी सख्ती से पाये।
46. छालो दरख्त के पत्ते खाना
इफ़्लास दामनगीर हो बेकार हर तदबीर हो।
47. चुकन्दर खाना
रोज़ी मे बरकत तरक्की न दौलत जिस काम मे शगूल हो नेक उसका नाम हो।
48 चलीपा कब्ज़े में लाकर तोड़ना
अहले इस्लाम की भलाई है कौमे ईसा के लिये भलाई है
49. चुकन्दर देखना
औरत से फायदा पहुँचे दिल को राहत मिले।
50. खलीफा की हुर्मत और तअज़ीम करना
ज़ौफे इस्लाम कुववते नसारा हो सारा इसाई दुर हो
51. छत बुलन्द देखना
आज़माईशे दुनिया में मशगूल हो दौलत हशमत हासिल हो।
52. छत बुलन्द देखना
मर्तबा हम चशमों में बुलन्द हो हाकिम या बादशाह से मुस्तफीद हो।
53. छत से सॉप या बिच्छूगिरते देखना।
रंजो मुसीबत में मुब्तिला हो सख्ती और ग़म का सामना हो।
54. चौखट चुमना या सर पर रखना
इश्क से महबूब की सरगरदानी हो चन्द से वस्ल ले दिल शाद हो रफ़ए परेशानी हो
55. चौखट पुरानी दुर करना नई बनाना।
बीवी को तलाक दे दुसरी औरत से अक्द करे
56. चादर देखना
औरत अफ़ीफ़ से अक़्द करे नेक कामों मे मसरूफ़ रहे।
57. चलता देखना या पहनना
माले ग़नीमत मिले लूट औऱत चोरी से बचे दुशमन मग़लूब हो रंजो बला से मामुन बो।
58. चार आईना दोखना
बादशाह को कुव्वत और दुशमन को हज़ीयत हो।
59. चरवाहा देखना
बादशाह या हाकिम हो और रईसें क़ौम व मुअल्लिम हो।
60. छीकते देखना
बगैर जुस्तजू मतलब बर आय़े जिस काम मे शक हो पूरा हो।
61. छल्नी देखना
औरत बेकारो फूज़ूलहाथ आये लेकिन मर्द सालेह से मंफअत पाये।
62. छल्नी नई खरीदना
औरत सालह से अक्द करे या लौंडी खुश सीरत मोल ले।
63. चूना देखना
ख़बर बदसुखन नाखुश सुनने में आये तामिरो इमारत और सख़्ती हर काम में पाये
64. चूना से बदन के बाल दुर करना
क़र्ज़ की अदाई अन्दोह से रिहाई माल बहुत सापाये इक़बाल की रसीई हो
65 चटाई को देखना
कोई औरत निकाह मे लाये।नफा हो और मालामाल हो।
66. छिपकली को पकड़ना या मार डालना
किसी लरदार को क़ाबू मे लायेया मर्द मुफीद खुदखुद राम हो जाये
67. चोर को पकड कर बाहर ले जाना
फ़ज़ले खुदा से माल दार हो दुश्मन ज़लील ख़वार हो।
68. चाकू देखना वालदेन से ताबीर है
दुश्मन से ताबीर है
69. चबूतरा देखना
वालिदेन से तबीर है।
70. चटनी देखना
चटनी अगर खुश ज़ायका और शींरीं खाते देखे तो ख़ैरो बरकत का बाएस है।
71. चिटठी (ख़त)
ख़त पाना या मिलना किसी खुशखबरी के मिलने का बएस है।
72. चोरी
ख़वाब में किसी का माल चुराना या किसी घर में चोरी करना गिरफ्तारी से ताबीर है।
73. चोगा
ख़्वाब में चोगा औरत से मुशाबे है अगर खूबसूरत और पाकीज़ा चोगा मिले या पहने देखे तो पाक और नेक सीरत औरतमिलने की दलील है।
74. चौंच
ख़्वाब में चौंच देखना औरत से ताबीर है लेहाज़ा ख़्वाब में चौंच देखना औरत से शादी करने के मुतरादिफ़ है।
75. छाल
ख़्वाब मेंकिसी दरख़्त की छाल देखना गुमशुदा चीज़ मिलने से ताबीर है।
76. छॉव
ख़्वाब में छॉव ख़्वाब मे छॉव के नीचे बैठना बुजुर्गी हेबत. मुनाफा और मौत का सबब है।
77. छतरी
ख़्वाब मे छतरी देखना इज़्ज़त हुकूमत मर्तबा रिफ़अत और बुजुर्गी पाने के मुतरादिफ है।
78. छींक आना
क़ौमी दुश्मन के मुतरादिफ है
79. छुरी देखना
फ़रज़न्द से ताबीर है
80. चीता देखना
क़ौमी दुश्मन के मुतरादिफ है
81 चर्बी देखना या खाना
नेअमत तरक़्कीये रिज़्क ज़्यादतीऐ माल और कामयाबी की अलामत है।
82. चिड़िया देखना
क़द्रो मनज़िलत बढ़ने का सबब है अगर किसी चिड़िया को पकड़ते देखे तो किसी औरतपर कामयाब बोनेकी दलील है।
83. चश्म देखना
साहिबे नज़र मर्द से ताबीर है।
84. चश्मा देखना
तरक़्कीऐ रिज़्क और सरदारी से ताबीर है।
85. चमचा देखना
खूँख्वार मर्द और उसकी डंडी तवालते ताबीर है।
86. चमड़ा देखना
तमाम चोपायों का चमड़ देखना माल के मतरादिफहै और ऊँट का चमड़ा देखना विरासतेमाल. बकरी का चमड़ा तहक़्कीऐ रिज़क है।
87. चना देखना
तरो खुश्क देखना रंजोंग़म के मुतरादिफ है।
88. चंबेली देखना
गुलदस्ता देखे तो उस शख़्स से मफ़ारकत होने का अन्देशा है जिसके पास गुल दस्ता है।
89. चौपाये देखना
जो अपना ताबे चौपाया देखे तो उसे किसी जंगल से फ़ायदा पहुँचने की तवक़को है।
90. चूतड़ देखना
अपनों मे से किसी से फायदा होने की दलील है।
91. चीनी
ख़्वाब में कोई चीनी का बरतन देखना ख़ादिमा औरत से ताबीर है अगर ख़वाब में अपने पास चीनी का बरतन पाये तो ख़ादिमा औरत को घर लाये।
(हे.)
1. हव्वा (अ. स.) को देखना
दराज़ीए उम्रो दौलत इक़बाल. ऐशो नेअमत और मरफ़उल हाल हो।
2. हूरैन को देखना
मालो इज़्ज़तो शरफ़ पाये हके ताला गुनाह अफ़ो फ़रमाये
3. हूर से सोहबतकरना
आली ख़ानदान औरत से निकाह हो दौलत बरकतो फ़लाह हो।
4. और बुर्ज को देखना
बादशाह का कुर्बो मुसाहिब हो अमीन मोतमद वासा मनाक़िबहो।
5. हामिलाने अर्श को दोखना
बादशाह के दरबारमें रसाई मुराद बर आये ऐश का सामान हो।
6. हज करना
बादशाह हाकिमे वक़्त मेहरबान हो मुराद दिली बर आये।
7. हरमे महरम मे दाखिल होना।
मर्तबा बुजुर्ग पाये।दो जहान की नेक बख़्ती पाये।
8. हजामत
मर्द के वास्ते इज़्ज़तो शादमानी औरत को मासीयत और ख़िजालत की निशानी है।
9. हल्वा या हंरीरा खाना
उम्र दराज़हो इशरत दमसाज़ हो माले दुनिया से बेनियाज़ हो।
10. हमाम जाना
क़र्ज़ मे मुब्तिला हो ख़ाली देख मुफ़लिसी सवार हो।
11. हमाम में गुस्ल करना
अदाये कर्ज़ होदिल को चैनहो ग़र्म पानी देखे तो ग़म और रंजमें मुब्तला हो और सर्द पानी देखे तो मुफलिसी और तंगी से रिहाई हो।
12. हमाम जदीद देखना
उस क़रिये की औरत अक़्द मेंआये बहुत मालो दौलत साथ लाये।
13. हमाम की बुनियाद डालना
दिली मुराद बर आये औरत हामलाहो माल पाये।
14 हाएज़ औरत का अपने को देखना
गुनाहे अज़ीम में मुब्तिला हो रंजो ग़म का सामना हो।
15. हैज़ से मर्द का आपको देखना
औरत फ़ाहेशा से अत्तिहाद करे याऔरत उसका नंगो नामूस बरबाद करे।
16. हैज़ बन्द होते देखना
कामयाबी व फ़िरोज़ी हो फ़रज़न्द हसीन की बशारत हो।
17. हैज़ का गुस्ल करना
बीमारीको सेहत और गुनाहगार की मग़फिरत हो।
18 हाएज़ अपनी औरतको दैखना
दुनियाके कामों में तंगी और अगर गुस्ल हैज़ करते देखे कुशादगी पाये।
19. हुक्का पीना
किसी महबूब या रईस से हमकलाम हो मर्ज़ से सेहत मिले आराम हो।
20. हिक्ना करते देखना
अगर हिक़्ना से तकलीफ हो तो बदहाली दलील है और जो राहत पहुँचे ख़ैरो मंफअतकी सबील है।
21. हजरे असवद को बोसा देना
दीन की ख़ुबी और बेहतरी सिवा है आलिमोंसे इत्तिहाद पैदा हो।
22. हलाज को देखना
मर्दे बुजुर्गो करीम से सोहबत हो वुसअते रिज़्क़ हो।
23. हौज़े कौसर को देखना या उसमे नहाना
इल्मे दीनी से कामयाबी माल से मंफ़अत हो
24 हौज़ का पानी देखना उसमे नहाना
कुल्फ़तो मुसीबत धुल जाये औहदाऐ जलीला नेअमत पाये अगर पानी से डरे बीमारी दूर हो।
25. हरमे काबा देखना
दीनवी रंजो अलम दुर होने और मसर्रत हासिल होने के मुतरादिफ़ है
26. हराम खाना
हराम जानवर का गोश्त खाते देखना रंजो अलम मे मुबतिला होने की अलामत है।
27. हिसाब करना
ख़वाब मे हिसाब करना फ़िक्रो अन्दोह में मुब्तिला होने ती निशानी है।
28. हसनैन (अ. स.) की ज़ियारत करना
इमाम हसन (अ. स.)इमाम हुसैन (अ. स.) की ज़ियारत करना ख़ैरो बरकत हासिल होने औरलोगों मे बरकत पाने की दलील है।
29. हुक्म
ख़्वाब में हुक्म चलाना अपने औहदे पर बहाल रहने की ताबीर है और लोगों से काम लेने के मुतरादिफ है।
30. हुकूमत करना
सरकशी और आज़ादी की निशानी अगर कोई शख़्स ख़वाब में हाक़िम बने या हुकूमत करता देखे तो ख़ल्क में बदनाम होने की अलामत है।
31. हकीम
ख़वाब में हकीम को बीमार का इलाज करते देखना गुनाहों से तायब होने की अलामत है अगर कोई शख़्स लोगो को इलाज करता देखे तो हिदायत और इल्म सिखाने के मुतरादिफ है।
32. हलाल
ख़्वाब में हलाल माल खाना ख़ैरोबरकत का मोजिब है अगरकिसी हलाल जानवर को हलाल करता देखे तो हाकिमे वक़्त से नफा पहुँचने का सबब है।
(खे.)
1. ख़िज़्र को देखना
तूलानी जिन्दगी पाये बाबे रहमत खुल जाये।
2. ख़तीब को देखना
झिड़कियॉ खाये नसीहत उठाये वो काम करेजिसमें जग हँसाई हो।
3. ख़तीब गैर नस्ल को देखना।
रंजो ग़म पहुँचना तबीअत को परेशानी हो नेक कामों से नफरत व पशेमानी हो
4. ख़तीब से मिलना
रफ़ीक मरदमे हक शनासव आबरूदार हो कोई हाकिमहामी आमद्दगार हो।
5. खुत्बा ख़तीब का पढ़ना
बुजुर्गी व फ़ज़ीलत पाये
6. खुत्बा औरत को सरेमिम्बर पढते देखना मर्द उसका रूस्वा हो जाये हम चश्मों के आगे नसीहत पाये।
7. खुत्बा बादशाह को पढ़ते देखना
अगर बादशाह नेक आमाल है अदलो इन्साफ करे अगर मुफसिदहै तौबा करे।
8. खुत्बा के साथ सीग़ये निकाह पढ़ना
ख़ैरो एहसानमे शौहरत पाये मंफ़अत और बेहतरी दो जहानमे पाये।
9. खत्बा काफ़िर को पढ़ते देखना
दलीलहै कि वो शख़्स इस्लाम लाये फ़ज़्ले हक़ से दौलते ईमान पाये।
10. खुत्बा ग़ैर ख़तीब का पढ़ना
वो शख़्स सफ़र को जाये देर तक रहे ख़तरा पाये।ख
11. ख़ानऐ बाग में जाना
दौलते आराम पाये।
12. ख़नाऐ बाग़ मे जाना
मौत नज़दीक पहुँचे उम्र का जाम लबरेज़ हो।
13. ख़ानऐ तारीक से निकलना
बीमारी से सेहत हो जाये या ज़िल्लत के बाद इज़्जत पाये।
14. ख़ोशे दरख़त से निकलना
अगर बेसुमार देखे तो माला माल हो
15. ख़ोशे सब्ज़ ख़िमर्न या फल देखना
माले दुनिया से तवन्गर हो।तवल्लुदे नेक फ़रजन्दे नेक अख़्तर हो।
16. ख़ुर्मा खाना या देखना
माले हलाल खाने मे आये इल्मे दीनिया से फ़ायदा हो।
17. खुर्मा का दरख़्त यातुख़्म देखना
सफ़र को जाये मशक़्कत से फ़ायदा उठाये और अगर खुर्मा चीर कर निकाले तो फ़रज़नद हो औरत घरमें लाये
18. खुर्मा चुननाया खाना
रोज़ी हलाल पाये बीवी नेक किरदार मिले।
19. खुर्मा ताज़ा दरख्त से तोड़ना
फ़स्ल में देखे तो हाकिम हो जाये और ग़ैर मोसम में देखे तो बीमार पड़ जाये रंज उठाये।
20 खरबुज़ा का खाना या पाना
कुछ दिन रंजुररहे इशरत से दुर रहे।
21. खरबुज़ा देखना
रंज के बाद राहत तरक़्क़ीये मालो दौलत हो।
22. खरबुज़े का खेत देखना
दौलत बेअंदाज़ हो दिलको रहत मिले बुजुर्ग हिम्मत हो औलाद की कसरत हो।
23. ख़रबूज़ा सब्ज़ो शादाब देखना या पाना
औरत मिले या फ़रज़द की विलादत हो तरक़्क़ी मंफअत और जाहो हशमत हो।
24. ख़्यार खाना या पाना
औरत देखे तो लड़की पैदा हो मर्द देखे तो बिमार हो।
25. ख़ुश्बूयात सूघॅना या देखना
अहले दुनिया से नफा हो या दिमाग बूए इल्मो फज़्ल से मोअत्तर हो।
26. ख़्वाब पर तअम खाना
तरक्क़ीए दर्जत फ़राग़िऐ मुंएमात वुस्अतेरिज़क मज़ीद ख़ैरो बरकत हो।
27. ख़च्चर अपने परसवार होना
तूले हयात तरक़्कीये दर्जात हो अगर पालान बँधा देखेऔरत फरबेह या कनीज़ मिले।
28. खच्चर बेगाना पर सवार होने
साहिबे ख़च्चर की औरत तसर्रूफ में आय या अमानत में ख़यानत करे ख़िजालत उठाये।
29. खच्चर पर किसी को सवार देखना
मर्द अजनबी उसकी जोरू से ख़यानत करे नंगो नामूस खोले बे हुर्मत करे।
30।खचट्तर पर बरेहना पीठ बैठना
सफर का इत्तिफ़ाक़ पड़े अगर मादा हो उम्रदराज़ हो शादीकरे।
31. ख़रगोश देखना
औरत सुस्त बुनियाद मिले ज़ाहिर यगाना दिल में बेगाना रहे।
32. ख़शख़ाश देखना
दौलत हशमत से सुरूर हो तीनतमे फ़िस्क़ो फ़िजूरहो।
33. ख़िश्ते ख़ाम देखना
हर ख़िश्तके एवज़ हज़ार दिरहम पाये बेतरद्दुद माल हाथ आये।
34 ख़िश्ते पुख्ता देखना उम्र का पैमाना लबरेज़ हो या बिमारी से नाकाम हो।
35. ख़ुसिया बड़ा देखना
कुव्वतते बाह रूस्वा हो दुख्तर पैदा हो जोरू से रूस्वा हो।
36. ख़त पढ़ना या लिखना
ख़बर अच्छी मिले इर्स का पाये ग़म घटे राहतो अराम बढ़े।
37. ख़त पढ़कर मानी समझना
कोई ऐसा काम सिपुर्द हो जो मुश्किलसे ऱसर् अंजाम हो।
38. ख़त मोहरी पढ़ना
राज़दारो रफ़ीके सुल्तानीहो. सुपुर्द रर्ईयत की हिफ़ाज़तो निगरानी हो।
39 ख़त खुला देखना
कुशादगी ऐ रिज़्क हो राज़ मख़फ़ी खुले दुशमन पर फ़तह हो।
40. ख़ुलअ औरत से करते देखना
तवंगरी की दलील है फ़ारिगुल बाली की दलील है।
41 ख़िलाल करना
काम बेहुदा से शर्मिन्दा हो अज़ीज़ो अक्रबा से छूट जाये।
42. ख़िरका बदन से दूर करना
ग़मो अन्दोहहो फ़क़्रो फाका से भी जुदाई हो।
43. ख़मीर देखना. या करते या खाना
अगर ख़मीर गेहूँओं के आटे का बकद्र इसके माले तिजारत पाये और चने या बाजरे का है थोढञा नफ़ा हाथ आये।
44. ख़न्जर हाथ मे देखना
दलील कुव्वत व शुजाअत है निशाने फ़तह व नुसरत है।
45. ख़नजर का टूटना या ज़ाया हो ना
रफ़ए खूसूमत की दलील है सुलहा कि दलील है।
46. ख़ोद यानी कुलाहेआहनी मिलना
आफ़ातो बलियान से महफूज़ रहे ख़ैरो सआदत मलहूज़ रहे।
47. ख़िलअत पाना
सब्ज़ या सपैद रंग से दीन में इज़्ज़त अफ़ज़ाई हो और रेश्मी हो तो दुनिया में हुर्मत और भलाई हो।
48. खून जारी देखना
अफ़सरी कुछबराये नाम मिले या बहुत माले हराम मिले।
49. ख़ूनआलूदा हौना
मोजिबे मालोदौलत बाएस नफाव राहत है।
50. खून किसी का खाना
माले हराम खाये या लोंडी बाकिरा पाये।
51. ख़ेमा औ खुरगाह देखना
औरत जमीला या लोंडी बाकिरा पाये। बादशाह दादगर या का अफसर हो जाये।
52. खुश्क अनाज खाऐ
मुफ़लिसी का सामना होऱंजोग़ममे मुबतिला हो।
53. ख़ाक बरसते देखना
कदूरत आजाये ख़िफ़फ़तो नक्बत माल हाथ
54. ख़ागीना यानी अंडा तला हुआ खाना.
औरत से फ़ायदा उठाये मुफ्त का माल हाथ लगे
55. ख़त्ना
मुताबके सुन्नत फरज़न्द नेकी आराम और इत्मिनान हासिल होने और फ़रज़न् व ज़न से जुदाई का बाएस है।
56. ख़ाक देखना
दाम और दिरहम की अलामत है।
57. ख़रबूज़ा
मौसमपर खरबूज़ा देखना बीमारी औरत गुलाम मंफ़्त और ऐशो मसर्रत कि दलील है।
58. खच्चर
खच्चर पर सवार होना दुनिया में बदनाम व ज़लील होने की दलील है।
59. ख़रगोश
ख़रगोश का मिलना या पकड़ना बदकार या बदअख़लाक कनीज़ ख़रीदने के मुतरादिफ़ है।
60. ख़रीदो फ़रोख़्त करना
नेक अलामत है।
61. ख़ज़ाना
ख़ज़ाना देखना या पाना बीमार होने और रंजो ग़म में गिरफ़्तार होनेकीदलीलहै
62. ख़ुश्क लकड़ी
अगर कोई शख़्स ख़्वाब में खुश्क लकड़ी देखे तो किसी नामालूम शख़्स से फ़ायदा हासिल होने और माले दुनिया मिलने की दलील है
63. ख़शख़ास देखना
ख़्वाब ख़शख़ास देखना बीमारी और ग़म मे मुबितला होने की दलील है।
64. ख़त पढना
नेकी और खुशी और फ़रज़न्द पैदा होने की अलामत हौ।
65. खुत्बा सुनना या पढ़ना
नेकी और खुशी और फ़रज़न्द पैदा होने की अलामच है।
66. ख़िज़ाब
ख़िज़ाब लगाना ऐबों को छुपाने की ताबीर है।
67. ख़त्मी (दवा)
ख़्वाब में ख़त्मी कां तेखना फ़ायदेमन्द है लेकिन बग़ैर।
68. ख़तीब
ख़्वाब में ख़तीब से मिलना खुश क़िस्मती और किसी मुला काती से फैज़ हासिल होने का मोजिब है।
69. ख़िलाल
ख़्वाब में दॉतो में खिलाल करते देखना अपने ख़ेशो से सोहबतो उल्फ़त बढ़ने और बेगानो से दुशममी पैदा होनेका मोजिब है।
70. ख़िलअत
ख़्वाब में ख़िलअत हासिल करना इज़्ज़तो मर्तबे की बुलन्दी से ताबीर है
71. ख़्वाचा या ख़ान
ख़्वाब में आरास्ता ख़्वाब या ख़्वांचा देखना और उसमें से खाना दराज़ीऐ उम्र व मालो नअमत के हासिल होने का बाएस है।
72. खुश्बू
अगर ख़वाब में खुश्बू सूँघे तो लोगों में उसकी तारीफ होने का मोजिब है।
73. ख़ोशा (बाली)
ख़्वाब में ख़ोशा यानी बाली देखना मालो दौलत हासिल होने की दलील है।
(द)
1. दाऊद (अ. स.) को देखना
दैलतो कुवतो बूज़ुर्गी पाये क़ौमका सरदार हो ज़ोहदो तक़्वा बढ़जाये।
2. दानयाल (अ. स.) को देखना
इल्मे मतबूऊ जह़ॉ मे तलक हो अज़ीज़ अहले शोहरा आफ़ाक हो।
3. दल्व का बुर्ज देखना
मेहतो मशक़्क़त में पड़े जो कुछ दस्तयाब हो औरों को दे
4. दरवाज़ा खुला या खुलते देखना
बाब मक़सदो रोज़ी से कुशाद हो
5. दरवाज़ा बन्द देखना
नक्बत व तंगदस्ती का नूजुल हो बाबे रिज़क़ो खैर मसदूद हो फ़िजूल गोई से चशमे मरदुम में हक़ीर हो।
6. दरवाज़ा का हल्का देखना
बादशाह या सरदार का सफ़ीर हो या फ़िज़ूल गोई से चश्मे मरदुम मे हकीर हो।
7. दरवाज़ा घर सें दुर देखना
औरत फ़ाहेशा से इत्तिहाद हो शग़ले फ़िस्कों फूजूर ज़्यादा हो।
8. दरवाज़ा बुजुर्ग देखना
बादशाह से राब्ता व इत्तिहादहो मम्लिकत का इन्तिज़ाम हासिल हो।
9. दरवाज़े का सिरा खुलते देखना
बादशाह से माल मिले अयाल पर उसको सर्फकरे।
10. दरवाज़े मे दरिन्दा या चौपाया देखना
बीवी या कनीज़ बदकारी करे गैर मर्दो से मिल्लत दारी करे।
11. दरवाजे का कुफ्ल खोलना
औरत बाकिरा से शादी करे।
12. दरवाज़ा बे किवाड़ देखना
औरत बेवा पर रग़बत करे।
13. दफ़ बजाना मर्ज जवान का
स्तों से दुशमनी का ख़याल है बाएस लदमा वमलाल है।
14. दफ़ बजाते औरत या मर्द मुत्वसिसत को देखना।
बाऐसे शादी ओ सुरूर हो।रंजो कुल्फ़त दुर हो।
15. दोशाला या पशमीना पाना
बादशाह का मुसाहीब हो आली क़द्र वाला मनाक्बि हो
16. दवा खाना या पीना
सेहते नफ़्स की निशानी है।
17. दूध औरत का पीना
वो औरत बहुत उल्फत करे मिस्ल ख़िदमतगार खिदमत करे।
18. दूध ऊँटनी का पीना या दोहना
औरत की बदौलत मालदार हो तवाना और फबेह जिस्म राज़ हो।
19. दूध भेड़ का पीना
सुस्ती अन्दाम हो मुब्तिलाए सदमा व आलाम हो।
20. दूध गाय का पीना
मालो नेअमत की निशानी है बाऐसे कामरानी है।
21. दूध माता गर्ग का पीना
अन्दोह ग़म की तेजी हो हम चश्मों में आबरूरेज़ी हो।
22. दूध सुअरनी का पीना
रंजो मुसीबत में मुब्तिला हो ख़िजालत और ज़िल्लत का सामना हो।
23. दूध बिजजु का पीना
बीवी या लौंड़ी हुर्मत गंवाये बदकारी या ख़यानत ज़ाया हो जाये।
24 दूध गधी का पीना
दफ़्ए अमराज की अलामत और कामयाबी की बशारत है
25. दूध ख़च्चरी का पीना
दानिशो अक़्ल में फितूर आये शिद्दते ख़फ़कान हो जाये।
26. दरख्त के पत्ते झड़ते देखना
दौलतो हुर्मतों तदानाई है मिस्ल आईऐ क़ल्ब की सफ़ाई है।
27. दूध हिरनी का दोहना
मर्द देखे तो बादशाही का मुशी या मुसाहिब हो औरत देखे तो तिफ़्लेसुल्तान दाया वाला मुसाहिब हो।
28. दरख़्त बोना
बीवी या कनीज़ दुर हो दौलतो माल से तवंगर हो।
29. दरख़्त फूला फला देखना
माल से नफ़ा पहुँचे रईसो की सोहबत हो लौंडासे राहत मिले औलाद कीकसरत हो।
30।दरख़त नारियल का देखना
तक़रीबे शाद पेश हो।
31 दरख़्त लीमू का देखना
औरत बदमिजाज़ और खुद पसन्दमिले मुनज्ज व जादुगर सोहबत अख़्तियारकरे
32. दरख़् आस का देखना
आदमी सख़्त तबीयत सेसोहबत बढ़े मईशत की मशक़्क़त बढ़े
33. दरख़्त ने का देखना
औरत बदमिजाज़ो बद सीरत मिले हर बातमें नुक्ताचीनी करे।
34. दरखट्त अख़रोट का देखना
मर्दे जव़ॉ मर्द शरीफ से सोहबत होया अहले अजम कुछ मुंफ़अत मिले।
35. दरख़्त इम्ली का देखना
बदमिजाज़ो तुर्श रू औरत मिले या लड़की तवल्लुद हो।
36. दरख़्त आम समर आंवर देखना
औलाद कीकसरत हो बुलन्द , मर्तबत और मंफ़अत हो।
37. दरख़्त से मेवा तोना
नस्ल मे ज़्यादती और बरकत हो औलाद की बदौलत की राहतो मंफ़अत हो।
38. दरख़्त के पत्ते जमा करना
पत्तो के बक़द्र दिर्हम पाये कुल्फ़ल दुर हो मालदार हो जाये
39. दरक़्तो की ड़ालियाँ सर निगूँ देखना
भाईऔर कराबतदार सब इताअत करें त्ज़ीमो तवाज़ो मे कमर बस्ता रहें।
40. दरख़्त के पत्ते गुंजान देखना
हाकिमे वक़्त का सामना हो फ़ायदा हद से सिवा हो।
41. दरख़्त ज़मीन से उखाड़ना
नौकरी से माजुल हो बीमारी की शख़ती उठाये या बीवी छूटे या किसी के मरने का सदमा पाये।
42. दरख़्त को बाते करते देखना
कश्फ़ो करामात में शौहराए आफ़ाक हो मेहरबान सुल्तान खुश अख़्लाक है
43. दरख़्त के साये में बैठना
किसी हाकिम या बादशाह काका दोस्त हो शिकोह व दबदबा और राहत नसीब हो।।
44. दरख़्त बादशाह के घर मे देखना
बादशाह का मुसाहीब या ख़िदमतगार हो या किसी औरत ख़ानदाने शाही से गिरफ़्तार हो।
45. दरख़्त घर में बनाना
बेटी की शादी हो फिक्रो तरद्दु से आराम पाये।
46. दरख्त सर्व, सनोबर का देखना
महबूब सही क़द्र इस्तिबदाद हाथ आये फ़रज़न्द तवल्लुद हो राहत उठाये
47. दरख़्त बेसमर ख़ारदार देखना
किसी मर्ज़ मे मुब्तिला हो रंजो मुसीबत का सामना हो।
48. दरख़्त समरदार देखना
औरत हामिला हो मुराद हासिल हो राहत पहुँचे।
49. दरख़्त काटते या तोड़ते या खोदते देखना
ग़मो मुसीबत बेशुमार हो कुल्तो फ़लाकत में गिरफ़तार हो।
50. दरख़्त पर चढ़ना
मर्तबा बुलन्द दुशमन का ख़ोफ़ दिल से जाये से छूटे।
51. दरख़्त खुश्क देखना
तंगदस्ती से मुसीबत में गिरफ़तारहो निहायत मुफडलिस हो।
52. दाम ज़ाया करना
किसी मर्द जाहिल को नसीहत करे वो कजफ़हमी से जिहालत करे।
53. दरख़्त गुलज़ार या फलदार देखमा
रोज़ी कलील पर क़नाअत करेसवालो शिकायत मायूबसमझे।
54. दरख़्त बेलदार देखना
आलिमे कामिल या तबीबे हाज़िक हो नफ़रस़ॉ बन्दगाने ख़ालिक हो दुनिया में इज़्जतो तौकीर हो पाये अगर बीमार हो तो शफ़ा पाये।
55. दरक़्त कुंजद देखना
मर्द अज़म से नफा व निकाहहो।
56. दरख़्त खुर्मा देखना
इल्म से नफ़ा बेशुमार मिले या महबूब मिले
57. दरख़्त इंजीर देखना
नौकरी या तिजारत से माल मिले ऐश में सर्फ करे
58. दरख़्त शफ्तालू देखना.
माले कसीर मेहनतोमशक़्क़त से पाये औरत के ज़ोरो जुल्म सहे जवानीमे मर जाये।
59. दरख्त सेब का देखना
बिछड़े हुये दोस्त से दोचार हो मोमिन मुत्तक़ी व परहेज़गार हो।
60. दरख़्त आबनूस देखना
मतलब दिल का बर आये औरत काली या लोंड़ी हब्शन पाये।
61 दरख़्त आलू बुख़ारा देखना
तबीब हाज़िक़ हो हो लोगों को नफ़ा पहुँचाये।
62. दरख़्त बादाम देखना
औरत शीरी गुफ़तार खूबसूरत मिले दौलत हलावत मिले।
63. दरख़्ते पिस्ता देखना
मर्द बख़ीलो तवंगर से मंफ़अत पाये या खुद बखीलो तवंगर हो जाये।
64. दरख़्त किशमिश देखना
अजमी औरत से सोहबत बढ़े माल औलाद की कसरत हो।
65. दरख़्त अनार देखना
शीरी देखे तो मालो दौलत मिले अगर तुर्श देखे तो बद मिज़ाज औरत का शौहर हो।
66. दरख़्त पीपल देखना
मर्दे शरीफ़ो बुजुर्ग से फ़ायदा पहुँचे या कोई मुशरिक मद्दगारी वपरस्तारी करे।
67. दरख़्ते इनद्राईन देखना
दुर्वेशो से मुलाकात करे दिन रात बेफ़ाया कामकरे।
68. दरख़ते सेब देखना
उर्म दराज़ हो बिमारी से सेहत पाये इस्लाहकार हो फ़साद रफ़ा हो जाये
69. दरख़्ते ज़र्द आलूदेखना
किसी मर्द बुजुर्ग से मंफ़अत पाये या बीमारी तूल ख़ीचे।
70. दरख़्ते ज़ेतून देखना
मर्द आली खानदान से मंफ़अत हो रोज़ अफ़जूँ क़्द्रो मंज़िलत हो।
71. दरख़्त ऊद देखना
औरत को मर्द ख़ूशखू से क़राबत हो मर्द को ख़ुश मिज़ाज और ख़ूबसूरत औरत से सोहबत हो।
72. दरख़्त फूल का देखना
किसी अमीर खुंश मिज़ाज का नौकर हो जाये या ख़ुश जमाल और खुशतबाअ औरत पाये।
73. दरख़्त गुलाब देखा
महबूब नाजुक अन्दाम व खुश ख़ल्क़ पाये।उसकी बदौलत ज़रदार व तवंगर हो जाये।
74. दरख़्ते चंबेली देखमा
औररत तवंगरऔर बदख़स्लत मिले सुफला मिजाज़ी से उसके हाथ राहत न मिले।
75. दरख़्त फ़न्दक देखना
लहब या तमाशे पर मायल हो या सफ़र की सख़्ती व सऊबत हासिल हो।
76. दिल में दर्द होना और हाथों से पकड़ना
दिल कि मुराद और हाजतें हासिल हों मालों दौलत में नफा हो।
77. दीवार पर चूना पत्थर कीदेखना
दुनिया पर फरेफ़्ता हो आख़िरत को भूल जाये।
78. दीवार पुख़्ता देखना
दलीले नक्बत (मुसीबत) परेशानी है।
79. दीवार घर की गिरते देखना
मॉ या बाप की जानिब से गम़ खाये या कोई बुजुर्गो में मर जाये।
80. दीवार मुहीत बुलन्द देखना
साहिबे सरवत हो हुकूमत हो पुश्त पनाह रईयत हो।
81. दो मंज़ला करना
आली क़द्रो मंज़िलत पाये रहनुमाई हाजत रवाई पसन्द आये।
82. दमदमा या धमस बनाना
बहादुरों में बुलन्द हिम्मत हो तरक़्कीये जाहो जलाल हो।
83 दलदल देखना
मकरूहाते दुनिया में ग़ल्तॉ रहे फिक्रे मईशतमे परेशान रहे।
84. दर्स देते देखना
अगर इल्मे दीन होतो बुजुर्गी व इज़्ज़त मिले और इल्मे दुनिया हो तो दौलतमन्द हो तसर्रूफे बेजा करे।
85. दुब्ला देखना अपने आप को
थोड़ी तंगदस्ती उठाये बीवी नेक मिले माल व दौलत पाये।
86. दाँत अपने गिरते देखना
ऊपर का हो तो बाप या क़राबतदार पदर कोई मर जाये नीचे का हो तो मॉया अज़ीज़ मादरी वफ़ात पाये।
87. दाँत का हाथ में आजाना
कोई मर्ज़ लाहिक हो माल अक्रबा सदका दे ताकि बला दुर हो।
88. दाँत अपना उख़ाड़ना
कत्ए रहम की निशानी. दर्दो ग़म या परेशानी है
89 , दाँत अपना सोने का देखना
कमाले तंगदस्तीव नहुसत है अलामाते बीमारी व निदामत है।
90. दाँत चॉदी या रांग के देखना
दोस्त से फ़साद हो मालो ज़र बर्बाद हो तकलीफ़ उठायेरंजो ग़म खाये।
91. दाँत सियाह लकड़ी चोब या मोम के देखना
वो शख़्स जल्द मर जाये या बीमार हो हर एक उसकी हरकते बाहमी से बेज़ार हो।
92. दाँतो मे मिस्सी मलना
मालो दौलत से फ़ायदा पाये अज़ीज़ो अक़्रबा की बढ़ जाये।
93. दाँतों मे मिस्वाक करना
अज़ीजडो मिस्कीन पर राहम खाये ज़नो फ़रज़द को राहत पहँचाये।
94. दरिन्दों से बातें करना
बादशाह हो या बादशाह का वज़ीर बन जाये या ज़बान दराज़ औरत घर में आये।
95. दरिन्दों को मारना
दुश्मनपर फ़तहो ज़फ़र पाये बहादुरों में नामवर हो जाये।
96. दरिन्दों को बैल या गधा बन जाते देखना
रोज़ी कुशादा होने से मसरूर हो लेकिन थोड़ा सा नुख़्सान ज़रूर हो
97. दालचीनी
ख़्वाब में बिला वजह दालचीनी खाना ग़मों अन्दो में तरक़्क़ी का मोजिब है।
98. ढाढ़ी देखना
मालो इज़्ज़तो ज़ीनत से ताबीर है
99. दाग़
ख़्वाब में दाग लगाना ख़ैरात करना बादशाह की कुर्बत हासिलकरने के मुतरादिफ है।
100. दाल
हर क़िस्म की दाल देखनी या खानी जद्दो जेहद मे मसरूफ होने और उसमें कामयाबी हासिल करने के मुतरादिफ है।
101. दाना या दाने
दाना हाऐ ख़ाम या पुख़्ता देखे तो रंजो अलम में मुब्तिला होने का बाएस है।
102. दुख़्तर
दुख़्तर देखना या दुख़्तर पैदा होते देखना मर्द के लिये मालो दौलत हासिल होने और औरत के लिये औलाद पैदा होने के मोजिब है।
103. दराँती देखना
अगर अपने हाथ में देखे तो ऐसे आले से ताबीर है जिससे मालो दौलत हासिल हो।
104. दरबानी
ख़्वाब में दरबानी करना दिली मुरादबर आने के मुतरादिफ है।
105. दुरूद शरीफ. पढ़ा या सुनना
ख़्वाब में दुरूद शरीफ़ पढ़ना या सुनना दीन की तरक़्की और हुजूर पुरनूर आँहज़रत (स. अ. व.) की ज़ियारत होने की दलील है।
106. दस्ताने
ख़्वाब में जिस क़िस्म के हाथ में दस्ताने देखे उसी क़िस्म की कुव्वत हासिल होने का सबब है।
107. दुश्मन
अगर ख़्वाब में दुश्मन पर ग़ालिब होता देखे तो दिली मुराद बर आने का मोजिब है।
108. दुआ करना
दिली मुराद बर आने का सबब है।
109. दिक़
ख़्वाब में किसी से दिक़ होना या दिक़ करना दीनवी जद्दो जेहद में मुब्तिला होने का बाएस है।
110. दुकानदारी
दिकानदारी करना इज़्ज़तो मर्तबा की तरक़्क़ी का बाऐस है।
111. दिल
ख़्वाब में किसी इन्सान का दिल देखना दिलवारी और अक़्लमन्दी से ताबीर है
112. दलाली करना
लोगों के दरमियान सुलह कराने सीधा रास्ता बताने नेक काम करने से ताबीर है।
113. दलदल देखना
मुसीबत के पेशख़ेमे से ताबीर है।
114. दाम निसार करना
किसी का हक ना माने नेक बात को बर लाने मालो दौलत की तलाश रहे फिक्रोहशमत में दिल फ़राश रहे।
115. दिरहमे कसीर देखना
इज़्ज़तों तौकीरो दौलत पाये हर दिरहम के एवज़ हज़ार मिल जाये।
116. दीनार कसरत से देखना
औरत या लोंडी मिले या फ़रज़न्द पैदा हो दौलत मालो मंफ़अत पैदा हो दौलतो मालो मंफअत सेगनीहो।
117. दीनार किसी को देना
फ़रज़न्द के सबब मुसीबत पहुँचे या बीवीसे कुछ झगड़ा पड़े।
118. दाग़ हैवान को करना ज़कात न देने की दलील है या बादशाह काम में मसरूफ होने की सबील है।
119. दरज़ी को देखना
परेशान अस्बाबो पुँजी पाये माल जमा करे ख़ातिर जमा हो जाये।
120. दुम हैवाने माकूल की देखना
राहत की निशानी है मोजिबे मालो तामरानी है।
121. दुम गीदड़ और जानवर ग़ैर माकूल की देखना
माले मुराद और हराम खाये लोग मलामतकरें और बदनाम हो जाये।
122. दीवाने को देखना
दौलतमंदी मुस्तग़नीयुल माल हो तसर्रूफेबेजा करना पसन्दे ख़ातिर हो।
123. दीवाना अपने आपको देखना
हराम का माल मिलने की दली है सूद या रिशवतखाने की सबील है या लहब में तज़ीए औकात करे।
124. दोशाब सफ़ैद पाकीज़ा पीना।
फ़रज़न्द हसीन पैदा हो ख़ैरो बरकत हवेदा हो।
125. दुश्मन से भागना
ज़िल्लतो क़ज़ा का सामना हो औरबख़ौफ़े दुश्मन भागे तो हाजतरवा हो।
126. दुर्वेश को मनाकिब या कुछ पढ़ते देखे
खुशख़बरी किसी अज़ीज़ की आये मंफ़अत मुज़दए फ़रहत पाये।
127. दुर्वेश मुस्लमानो को ख़ैरात देना
रंजो ग़म निजात हो दीनो दुनिया मे आली दर्जात हो।
128. दुख़्तर पैदा होते देखना
मर्द देखे दौलत पाये औरत देखे तो बच्चा पैदा हो
129. दौज़ख़ से आप को निकलते देखना
सफर से फिरे दोस्तों से मिले रंजो बलादुर हो इशरत का सामना हो।
130. दौज़ख़ के अज़ाब में देखना
जुस्तजू में मालो ज़र की आप सरगरदाँ रहे या अयाल की दुरी से परेशानी हो।
131. दौज़ख मे खुद को दैखना
मकरूहाते दुनिया में फँसे सऊबते सफर या रंजो बला देखे।
132. दरिया देखना
हाकिम दरिया हो और दौलत से आसूदगी हो।
133. दरिया में तैरना
हाकिम पर ग़ालिब आये सारी कुल्फत दूर हो जाये।
134. दरिया से पार होना
कुल्फत से छूटे तहसीले ऊलूमो फूनून पर टूटे।
135. दरिया में ग़र्क होना
बाबत मुहासेबा सरकारी एताब हो मोरिदे सख़्ती व रंजिश व अज़ाब हो।
136. दरिया से फल या जवाहर पाना
दलीले दौलतो इज़्जत है गुस्ल करे तो दस्ती व हलाकत दूर हो जाये।
137. दरिया से सर्द पानी पीना
दौलत मिले ,इज़्जतो सरवत हासिल हो।
138. दरिया से पानी तल्ख़ या शौर पीना
दर्दो अलम दूर हो सरदार हो या हाकिम ,बद मिजाज़ का मामूस हो ग़मख़्वार हो।
139. दरिया से बोतिमार पकड़ना
रोज़ी हलाल खाये ,दरे इशरत वा हो।
140. दरिया को खुश्क देखना
दुश्मन मरे लश्कर हलाक हो रईयत तबाह हो।
141. दरिया से मगरमछ पकड़ना
बादशाह के दुश्मन पर ग़ालिब आये एवज़ में ख़िलअतो जागीर पाये।
142. दरिया से मटकी या घड़ा भरना
बक़द्रे पानी सुल्तान से मुफअत पाये दौलतो ज़र से मालामाल हो जाये।
143. दौलत देखना
औरत की बदौलत तवंगर हो।
144. दाँत देखना
बादशाह या हाकिम से कनीज़ पाये दौलतो मंज़िलत बढ़ जाये।
145. दुल्हन देखना
औरत बाकिरा से शादी हो , दौलत मिले।
146. दुल्हन खुद को बने हुये देखना
नेक बख़्त की शादी व आबादी हौ बेवा देखेतो बर्बादी व ख़राबी हो।
147. दुल्हन बना हुआअपने आपको देखना
नई दुल्हन बनने की निशानी है।
148. दही खाना या देखना
माल में ख़ैरो बरकत और नफ़ा वनेअमत बख़ूबी पाये।
149. धुआँ देखना
अज़ीज़ो मे गुबारो एनाद और मुख़ालेफ़त हो दोस्तों मे फ़ित्ना व फ़साद हो।1
150. देव खूबसूरत देखना
बुजुर्ग मर्तबा हो इल्मो हक़ीकत पाये बला से रिहाई मर्ज़ से शिफ़ा हो।
151 देव बदशक्ल देखना
रंजो ग़म का सामना हो आफ़त मे मुब्तिला हो।
152 दुन्बा ज़िब्हा करना
बुजुर्गी वदौलत हासिल हो औलादसे राहत हो।
153 दुन्बा बकरीके पास देखना
फ़रज़नद साहीब इकबाल पैदा हो रोज़ ब रोज़इज़ज़तो वकार हासिल हो या अशर्फियों की थैली पाये रोज़ी कुशादा हो।
154. दो टुकड़े करतेआपको देखना
औरत की बरख़िलाफ़ी से खिजलानो परेशानी में जाये न तलाक देसके न रख सके।
155. दस्तक देना
नेक कामों से रग़बत हो बुरे कामो से नफ़रत हो.
156. दादगर को झूठ बोलते देखना
रईयत उसकी बदगोई करे आरू और इज़्ज़त जाती रहे।
157. दज्जाल को देखना
फ़ित्ना व फ़साद बरपा हो झूठे लोगों का सामना हो।
158. दूंबल या फौड़ा देखना
माल उसका ज़्यादा हो बकद्रे दंबल नफा पाये
159 दंबल से पीप और खून निकलते देखना
माले हराम पाये या कुछ गिरह से नुक़्सान उठाये।
160. दवात
ख़वाब में देखना या पाना अपने ख़ानदान में झगड़ा होने का बाएस है।
161. दूरबीन
ख़्वाब मे दैखना या इस्तेमाल करना या पाना किसी दूरदराज़ सफ़र करने का सबब है।
162. दौड़ना
ख़्वाब में हर एक काम के मुतअल्लिक दौड़ना काम मे देर होने का लबब है
163. दहलीज़ देखना
ख़ादिम का बाएस है
164. धनिया देखना या खाना
ग़मो अन्दोह का बाएस है।
165. धूनी
ख़्वाब में खुशबूदार धुनी देनी या लेना तरक़्क़ी कस्बे नफ़ा से ताबीर है।
166. धुनिया (रूई पंजे वाला)
धुनिया को ऱूई धुनते देखना परेशान होने का बाएस है।
167. धोबी
ख़्वाब में धोबी को देखना किसी बुजुर्ग बाअमल की ज़ियारत के मुतरदफ है
168. धोना
ख़्वाब मे अपने आप या अपने कपड़ों को साफ़और रवाँपानी में धोना ग़म व अन्दोह में मुबितला होने का बाएस है।
169. दही पाना
सफर में माल हासिल करने के मुतरादिफ़ है।
170 देग़
ख़वाब में नई देग़ देखना औरत से ताबीर है।
(ड)
1. डंका बजते देखना
क़ौम का सरदार हो साहिबे इक़्बाल हो तवंगर हो।
2. डिब्बा टूटना या ज़ाया होते देखना
बीवी छुटे या मर जाये या लौंडी फरोख़्त करके ग़म खाये
3. डिब्बा या डिब्या पाना
औरत अफ़ीफ़ा मालदार और खुश सीरत पाये औरजो डिब्बे में कुछ रहे औरत हामिला हो जाये।
4. डोल देखना
अगर ख़ाली है तो रंजो ग़म कीअलामत है और भरा हो तो दलील कामरानी है।
5. डोर का गोला देखना
औरत कम्सिन अक़्द में आये या बीवी मनकूहा बारआवर हो।
6. डली देखना
दाँतो की उस्तवारी हो रफए कुल्फ़तो बीमारी हो।
7. ढोल बजाते या बजते देखना
हर एक तमन्नाऐ दिली बर आये।नौकरी पेश मुवाजिब हो।
8. डरना दुश्मन या बजाते देखना
मुख़ालिफ फतहमन्द और मंसूर हो ख़ौफ़ो ख़तर ज़रूर हो।
9. डाढ़ी सफ़ैद या दराज़ देखना
तरक़्की दौलत और नेअमत की हो।बुलन्दीए इज़्ज़तो हुर्मत हो।
10. डाढ़ी दराज़ ज़ेरे नाफ देखना
कर्ज़दारी में मुब्तिला हो।मोरिदे कुल्फतों बला हो।
11. डाढ़ी मूँडना या कतरना
नेअमतो ऐश को ज़वाल आये फक़्दे हुर्मत हाथ दे निदामत पाये।
12. डाढ़ी घनी देखना
तवंगर को ज़्यादा दौलतो जाहो जलाल हो मुफलिसी कर्ज़दारी और फलाकत से तबाह हो।
13. डाढ़ी के बाल झड़ते देखना
फिक्रो ख़िजालत से निहायत ज़ीक में दम हो।
14. डाढ़ी अपनी उखाड़ना
माल लहब लअब में खोये सर्फ़े बेजा से परेशान हो।
15. डाढ़ी में ख़िज़ाब करना
लिबास फ़ाख़ेरा पहनने में आये अगर ग़ैर मुअय्यन हो तो कपड़े की तंगी उठाये।
16. डाढ़ी लड़के के मुँह पर देखना
बालिग़ हो तो शादी हो जाये नाबालिग़ हो तो मौत का पैग़ाम लाये।
17. डाढ़ी अपनी औरत को दिखना
बेशौहर हो तौ शौहरपाये , शौहरदार का शौहर सफ़र से आये या फ़रहत हो।
18. डाकू
ख़्वाब मे डाकु देखना झगड़ालू और लड़ाका आदमी से ताबीर है।
19. डिब्बा
ख़्वाब मे रोग़न से भरा डिब्बा देखना अमानत दार शख़्स से ताबीर है।
20. डूबना
ख़्वाब में दरिया में बादशाह के हाथों हलाक होने का बाएएस है
21. डोली
ख़्वाब में डोली देखना या उसमे बैठना बीमारी व रंज में मुबितला होने का सबब है।
22. डोई देखना
घर की ख़ादमा या मल्का से ताबीर है।
23. ढाल देखना हिफ़ाज़त और किसी दोस्त से फ़ायदा पहुँचने की दलील है।
24. ढेर
ख़्वाब में ग़ल्ले का ढेर देखना याख़रीधदना या पाना औरत घऱ में मुतरादिफ है।
(ज़)
1. ज़िब्हा करना हैवाने माकूल का
बादशाह या हाकिम से फ़ायदा पहुँचे फिक्रे माअश व रंज ग़म से छूटे।
2. ज़कर यानी आलत दराज़ देखना
शहवत ज़्यादा , कसरते औलाद मज़ीद इज़्ज़तो तौक़ीर हो
3. ज़कर और अन्दामे निहानी साथ देखना
पारसा औरत से शादी हो रंजो ग़म से दिल को आज़ादी हो।
4. ज़कर को फ़र्ज़ होते देखना
मर्द देखे तो मअशूक आशिक हो जाये औरत देखे तो ख़ुश जमाल बेटा पाये।
5. ज़कर से गुहर और जवाहर निकलते देखना
फ़रज़न्द सआदतमन्द पैदा हो ,ख़ैरो बरकत हवैदा हो।
6. ज़कर से मछली निकलते देखना
तवल्लुदे दुख़्तरे पाकीज़ा गुहर हो , इक़बालो दौलतो बख़्तयावर हो।
7. ज़कर से आग निकलकर मशरिक़ या मग़रिब को जाये।
तवल्लुदे फ़रज़न्द हो।साहिबे इक़्बाल हो फ़ज़्ले हक से मशरिक व मग़रिब का सुल्तान हो।
8. ज़कर बुरीदा या जुदा देखना
माल उसका तलफ़ हो जाये या मर्ग पिसर का दाग़ उठाये।
9. ज़कर से साँप बिच्छू निकलते देखना
फ़रज़न्द बदकार पैदा हो दुश्मनी माँ बाप की उससे हवैदा हो।
10. ज़ाकिर देखना
(इमाम हुसैन का ज़िक्र करने वाला) नेक है और ज़िक्रे हुसैन को सुनना मोजिबे ख़ैरो बरकत है।
11. ज़ायका
ख़्वाब में किसी चीज़ का ज़ायका चखना तलाशे के मुतरादिफ़ है।
12. ज़बीहा देखना
जिब्हा किया हुआ जानवर देखने की ताबीर यही है अगर हलाल जानवर का ज़बीहा देखे तो हराम माल मिलने के मुतरादिफ़ है।
13. ज़ख़ीरा
अगर किसी फल या फूल या अनाज़या किसी हलाल चीज़ का ज़ख़ीरा देखे तो इनाम हासिल करने या ग़ैब से दौलत हासिल करने के मुतरादिफ़ है।
14. ज़िक्र
ख़वाब में किसी का ज़िक्रकरना या सुनना दुनियावी हराम माल की तमन्ना रखने और हराम खाने के मुतरादिफ़ है।
15. ज़ौक़ो शौक.
अगर ख़्वाब में किसी चीज़ का ज़ौक़ो शौक़ देखे उस काम की अन्जामदेही की निशानी है।
16. जेलदार
ख़्वाब में अपने आपको ज़ेलदार देखे तो हाकिमे वक़्त से इज़्ज़त पाये।
(र)
1. रिज़वान से गौहर व याकूत पाना
फ़रज़न्द नेक अन्जाम इल्म हुनर मशहूर उसका नाम हो।
2. रिज़वान को देखना
बादशाह का ख़ज़ांची से इत्तिहाद हो खुर्रमो मसरूर आबाद हो।
3. रोज़ीना मुकर्ररहोना
बादशाह या हाकिम की मेहरबानी आसाईशो बहबुदी व कामरानी हो।पाबन्देराहे शरीयत हो। पर्हेज़गारों की सोहबत रहे।
4. राहे रास्त देखना
पाबन्दे राहे शरीयत हो।पर्हेज़गारों की सोहबत रहे
5. राह कज या नाहमवार देखना
दीन के कामो में ख़लल पड़ जाये सख़्ती व अलम बेहद पायौ
6. राह में गुबार देखना
सफऱ की मसाफतस से मुकददर हो तमन्ना बर आये रहमत वारिद हो।
7. रेत या राख को देखना
मुफ़्त का माल पाये अज़ीज़ों में ज़लीलव हकीर हो जाये।
8. राहज़न को देखना
औरत फ़ाहेशा से आशमाई हो मक्कार से साबेका पड़े दौलत की सफई हो।
9. रूख्सार देखना
अगर हसीन हो तो क़द्रो मंज़िलत ज़्यादा हो और अगर जुश्त होबरअक्सहो।
10. रान को देखना
औरत शीरी गुफ्तार से दिल शाद हो सुसराल वालों से रब्तो इत्तिहाद हो।
11. रानगाह को देखना
बादशाह या रईस सरफराज़ करे माले दुनिया से बेनियाज़ करे।
12. राब या रस देखना
माल में तरक़्की हो दौलत मिले।औलाद में कसरत व राहत मिले।
13. रसावल खाना
नेअमत मिले या औरत शीरीं गुफ्तार मिले।
14. रीसमाँ देखना
कुव्वतो बुजुर्गी में तरक़्क़ी हो शहर की सरदारी मिले या कौम की बहतर मिले
15. रबाब देखना
औरत हसीनो ग़नी पाये मालो दोलत में नफा हाथ आये।
16. रस्सी के बल देना
गुस्से में घर से निकल जाये हज़ारो रज गुर्बत मे पाये।
17. रस्सी किसी के गले में बांधना
ग़ायब सफरसे मुरादे दिली पाये
18. रस्सी लपेटना या आपको बाँधना
घर से सफ़र में जाये गुर्बत में रियासत व हूकूमत पाये।
19. रस्सी किसी के गले मे बाँधना
किसी औरत से इत्तिहाद बढ़े रोटी कपड़ा उसे पहुँचाये
20. रौग़न खुश्बू मिस्ल बेला बनफ़्शा देखना
आराईशे दुनिया रौनक़ दीन की पाये खुश अख़्लाक औरत मिले।
21. रोज़ा आशूरें मुहर्रम का
मुसीबत व ग़म अन्दोह की निशानी है दलील हसरत व अफसोसे जावेदानी है।
22. रोज़ा ए माहे सयाम रखना
कर्ज़ से छुटकारे की अलामत है बड़ाई बुजुर्गीकी निशानी है।
23. रअद की आवाज़ बाराँ सुनना
अदाये क़र्ज़ हो बीमार को शिफ़ाहो जाये कैद सै ख़लासी रंज से राहत पाये।
24. रग लम्बाई से चीरना
कोई ख़बरे ग़म पहुँचे जिसके सबब सदमा हो।
25. रग चौड़ाई से चीरना
कोई अज़ीज़ मर जाये या थुद सफर की तकलीफ़ उठाये।
26. रोटी खाना या पकाना
नेअमत पाये किसी मुल्क का रईस हो जाये।
27. रौशनी बे आग देखना
ग़ैब से दौलतो नेअमत पाये किसी मुल्क का रईस हो जाये।
28. रोटी देखना
कुल्फ़तो रंज दिल से दुर हो।शादी व फ़रहतो सुरूर हो।
29. रोते हुये आपको देखना
कुल्फ़तो रंज दिल से दूर हो।शादी व फ़रहतो सुरूर हो।
30 रोते मुर्दा देखना
खुर्रमो मसरूर रहे हर तरह ऐश का सामारहे।
31 रोज़न देखना
सौदागरी मे नफ़ा पाये या हुकूमत से नफ़ा मिले फित्ना मिट जाये।
32. रफुगर देखना
मुस्लेहे माल सुल्तान यावज़ीर हो दौलत इज़्ज़तो तौक़ीर हो।
33. रफ करते देखना
रईस या हाकिम की गैब पोशी मिले।सिलेमें नेअमतो दौलत मिले।
34. रीछ को देखना
ताकते दुश्मन से ख़ौफ़ खाये फिक्रो मईशत में मुब्तिला हो जाये।
35. रीछ पर ग़ालिब होना
सख़्त दुशमन पर फ़तहो नुसरत पाये कुल्फ़तो बला रद हो ऐश मिले।
36. रीछ मादा कपकड़ना
कमीनी और अहमक़ औरत से सोहबत करे।बद ख़स्लत मिजाज़ से पाला पड़े।
37. राल को देखना
मालो नेअमत ग़ैब से पाये सर्फेअहलो अयाल में लाये।
38. राल को देखना
माले हरम खाने मे आये ग़मो गुस्सा अयाल से पाये।
39. राई को देखना
मक्कार औरत से गिरफ़्तार हो या जादु टोना मों फँसे बीवी से बेज़ारहो।
40. रिश्वत लेना
किसी बदनाम या हराम मे फँस जाये बेहुर्मत हो।
41. रकाबी देखना
लौंडी या ख़ादमा सलीक़ा शेआर मिले।रंजो मुसीबत दुर हो आराम बेशुमार मिले।
42. रंजक उड़ते देखना
दिली मुराद पूरी हो फ़ौज की अफ़सरी मिले।
43. रौशनाई देखना
दौलतो नेएमत पाये रियासत व मुमलिकत हाथ आये।
44. रेशमी जुब्बा या रेशम देखना
इज़्ज़तो ख़ैरोबरकत हो दौलतो हशमतो रियासत पाये
45. रंगरेज़ को देखना
मकरूहाते रंगारग में फँस जाये या किसी रईस मुतव्विनतबा से फ़ायदा हो।
46. रंगरेज़ को सब्ज़ जामा रंगते देखना
दुनिया वदीन में बेहतरी हो मालो दौलत मिले।
47. रंग
ख़्वाब में कपड़ोंपर सफ़ैद रंग देखना दीन की पाकीज़गी की अलामत है।
48. रवानी या रौ.
रौ या सेल बड़े दुश्मन और ज़ालिम से ताबीर है।
49. रूह
ख़्वाब में रूह का देखना फ़रज़न्दो माल से ताबीर है।
50. रूमाल
रूमाल हाथ मे देखना सफ़ाईये क़ल्ब से ताबीर है।
51. रेल
ख़्वाब में देखना और सफ़र का पेश ख़ेमा है।
52. रीट
ख़्वाब में रीट ख़ज़ाने से ताबीर है।
53. रेती
ख़्वाब में रैती देखना और उसको सफ़ा करना मुश्किलात से निजात पाने का सबब है।
54. रीवन्द देखना
ग़म व अन्दोह के मुतरादिफ़ है
55. रकाबदार देखना
सरदारों में क़द्रो मंज़िलत पैदा हो गुरूरो तमकिनत पैदा हो।
56. रकाब मअ ज़ीन देखना
फ़रज़नद दयानतदार हो।
57. रकाब सुनहरी देखना
फ़रज़न्दे महर तिलअत पैदा हो गुरूरो तमकिनत पैदा हो।
58. रेहान को सरसब्ज़ देखना
औरत या लोंडी घर में लाये फ़रज़न्द पैदा हो नेक कामों की तौफ़ीक़ हो।
59. रेहान के फूल चुनना
किसी नाज़ नीन से सोहबत हो औलाद की कसरत रोज़ी की वुस्अत हो।
60. रेहान को ज़मीनसे उखाड़ना
फ़रज़न्द छूटे या बीवी मर जाये या इम्लाक की तरफ से सदमा उठाये।
61. रूपया देखना
वजहे दौलतो अदल कामरानी है।
62. राजा
ख़्वाब में राज देकना तरक़्कीये रिज़्क का बाएस है और राजा से मुलाकात करने की भी यही ताबीर है।
63. रास्ता
ज़िन्दगी का सही तरीके अमल और दीन से ताबीर है
64. रात
ख़वाब में रात देखना ग़म व अन्दोह से ताबीर है।
65. राख
झूठा और ऐसा माल ताबीर है जो ज़ाया होके रहता है।
66. रान
ख़्वाब में रान देखना अपने मुतअल्क़ीन से ताबीर है।
67. रहल देखना
दीन से ताबीर है।
68. रूख
अगर ख़्वाब में किसी का रूख देखे तो कामयाब होने की दलील है।
69. रस
ख़्वाब में मीठारस मालो नेअमत से ताबीर है।
70. रसूत
रसूत और रसूल का पौदा देखना कमीनी ख़ादमा से ताबीर है.
71. रिश्वत
ख़्वाब में रिश्वत लेना और देना बुरा है।
(ज़)
1. जनाबे ज़करिया को देखना
दुआ कुबुल होगी , हक की रहमत होगी , फरज़ंद नेक सीरत होगा , औरत जमीला व मुतर्बा हाथ आऐ , माल पाऐ बहुत सा और राहतो मसर्रत पाऐ।
3. ज़ाफरान देखना
बीमारी की अलामत है लेकिन तआम मे दलीले नफा है।
4. ज़ैतून को देखना
राहत व आराम शादी हो फिक्रो रोज़ी से आज़ाद हो।
5. ज़रबफ्त देखना
मालौ दोलत बेहिसाब पाऐ , ताक़तवर दुश्मन पर हमला कामयाह हो।
6. ज़मर्रूद व ज़बरजद देखना
मुराद को पहुँचे , इज़्ज़त पाऐ , माले हलाल ग़ैब से मिले।
7. ज़मर्रूद का गिर जाना
किसी लोंडी या औरत से बदकारी करे , खिजालत पाऐ बेहुरमती हो।
8. ज़क्कूम (थूहर) को देखना
इल्मे बातिल की तरफ मसरूफ हो जाऐ किसी मुशरिक की बदौलत माल पाऐ।
9. ज़ाहिद या आलिम को देखना
खुशकिरदार या परहेज़गार हो।
10. ज़िराअत को देखना
औरत पारसा अक़्द मे आऐ।
11. ज़िराअत करना।
सेहतो मंफअत की सूरत हो मोतकिद कोई नेक औरत हो।
12. ज़िराअत काट कर खिरमन रखना
मालौ दौलत ग़ैब से पाऐ, नफा खातिर खाह हो।
13. अपना या दूसरे का ज़ख्मी बदन देखना
बादशाह से दौलत या मंफअत हो, कुव्वतो तवंगरी बढ़ जाऐ दौलत बुमार पाऐ।
14. ज़ख्म से खून बहते देखना
दौलतो माल बेशुमार पाऐ या दफीना पाऐ, रोज़गार मिले।
15. ज़ानू देखना
अगर ताक़तवर देखे रोज़ी मे वुस्अत हो, ज़ईफ देखे तो तंगीऐ रोज़ी हो।
16. ज़बान दराज़ को देखना
चर्ब ज़बानी से अपना काम करे दुश्मन को बातों में राम करे।
17. ज़बान को मुँह से बाहर देखना
कोई दुशमन निफ़ाक पर आमादा हो ऐबजू उसका महरमे राज़ हो।
18. ज़बान से कोई चीज़ गिरती देखना
तलबेरिज़्क में परेशानी हो या मर्ज़ के तुलसे नासाँहो।
19. ज़बान अपनी बन्द देखना
किसी काम के हर्ज होने का मलाल करे या जल्दी ही जहाँ से इन्तिकाल करे।
20. ज़बान के पास दूसरी ज़बान देखने
इल्मो दानिश मं निहायत ताक़ होफूजूल गोईमें शोहरा आफ़ाक़ हो।
21. ज़र्शक़ खाना या देखना
औरत तुरशरू घर मे लाये रात दिन गुस्सा खाये माले हराम खाने में आये।
22. ज़रनिगार खाना या देखना
माले हराम खाने में आये।
23. ज़काम देखना
थोड़ी बीमारीके बाद सेहत हो ग़मो गुस्सा खाके राहत हो।
24 ज़र्द आलूद देखना
दोस्त दुश्मन हो जाये या बिमारी से तकलीफ़ पाये।
25. जंबील देखना
मालो दौलत की सबील है।
26. ज़कात देखना
तिजारमसे नफ़ा पाये बारे क़र्ज़ से सुबुक हो जाये दुनिया मे नेक नाम हो।
27. ज़मीन मुस्तअ देखना
माले ग़नीमत जमा करके खाना खा ना सके अगर ज़मीर पर चलेतो आफ़त में फँस जाये।
28. ज़मीन नाहमवार हो
किसी बदसूरत औरत से वास्ता पड़े रात दिन फ़साद बरपा रहे।
29. ज़मीन पर इमारत बनाना
किसी औरत से अक़्द करेफ़रज़न्द सालेह पैदा हो।
30. ज़मीन खोद कर मिटटी खाना
माले हराम से जुस्तजू पाये हीला व मक्र का जाल बिछाये।
31. ज़मीन खोदकर पानी निकालना
महनत से फ़ायदा पहुँचे माले हलाल खुदादाद मिले।
32. ज़मीन खोदकर अपने आपको गाड़ते देखना
घर से परदेस में निकल जाये या अजल पर्दा पोशी को आये।
33. जुबूर के पढना या लिखना
नेक कामो पर रग़बत करे दीनो दुनिया में नफ़ा है।
34. ज़मज़म का पानी देखना
इल्म बढ़े नफ़ा हासिल हो मर्ज़ से शिफ़ाऐ कामिल हो।
35. ज़ंजीर हाथ मे पहनना
किसी बुरे काम में गिरफ्तारह हो हाकिम का मुजरिम व गुनाहगार हो।
36. ज़ंजीर गर्दन में देखना
बुरी औरत से इत्तिहाद बढे बदबख़्ती से फ़िसाद पड़े।
37. ज़ंजीर पाँव मे देखना
कसरते अलायक़ में गिरफ़्तार हो कारोबार कसरत से हो।
38. ज़िन्नात देखना
किसी मुशरिक का रोज़गार मिले या कोई काफ़िर उठाये।
39. ज़ंबूर देखना
औरत मुतलव्विन मिज़ाज हाथ आये रंजो ग़म से तकलीफ उठाये।
40. ज़ंबूर घर में देखना
दुश्मन का घर में गुज़र हो आरत ख़यानत करे
41. ज़ंबूर अंगबीन देखना
अपने दिल की मुराद को पहुँचे दुश्मन पर फ़तह हो बीवी से मोहब्बतकरे
42. ज़िन्दा को मर्दा देखना
मज़ीद सेहत दफ़्ए बला तरक़्कीऐ दर्जाहो।
43. ज़िन्दा को क़ब्र में रखे
थोड़ी सी नहूसत ज़माना दिखलाये रंज के बाद कुछ राहत पाये।
44. ज़हर खाना या खिलाना
दुनिया मे पछताये बुरे काम करने से बदनाम हो।
45. ज़र सिक्कादार देखना
औरत फ़ाहेशा चुस्तो चालाक मिले , मुबाशेरत में ख़फ़ीफ़ हो।
46. ज़ीनते अंगुश्त देखना
फ़रज़न्द मिले या वस्ल दलिस्तान हो जाये झगड़े मियें सुलहा हो।
47. ज़ीन ज़र्रीन देखना
हसीन महबूब मिले राहतो हशमत मिले।
48. ज़ीन का ज़ाया या शिखस्ता देखना
औरत उसकी बीमारी में मुब्तिला हो या जल्द मरजाये।
49. ज़ीन ख़रीदना या मिलना
लोंडी मोल ले या औरत अक़्द मे लाये माल या मीरास मिले।
50. ज़ीन साज़ को देखना
औरत क़ी दलाली करे मक्रो हीले से रोज़ी मिले।
51. ज़ीना देखना
बुजुर्ग औरत मिले जायेदिल राहत और जिन्दगी पाये।
52. ज़लज़ला ज़मिन को देखना
सदमे व रंज की दलील है या कोई शहर में आफ़त आने वाली है
53. ज़ीरेका अंबार देखना
दोजहान में नफ़ा पाये ख़ैरो बरकत ज़्यादा हो जाये।
54. ज़र्रे को देखना
फ़तहो नुसरत की दलील और कुव्वतो निगेहबानी से मोजिबे बेहतरी व मंफ़अत कामरानी है।
55. ज़ेहल सितारा देखना
नहुसत और जुशती की निशानी है परेशानी व सरगरदानी की दलील है
56. जुल्फ बनाते देखना
किसी हसीन के इश्क में मुब्तिला हो ग़मे फुर्कत मिले।
57. ज़ाग़ (कौआ)
ख़्वाब में ज़ाग़ देखना फ़ासिक़ो काज़िब और मुफ़्तरी से ताबीर है।
58. ज़बरजद(पत्थर)
ख़्वाब में देखना ख़ैरो बरकत का बेएस है।
59. ज़र्द रंग
ख़्वाब मे ज़र्द रंग की अशिया देखना बीमारी की अलामत है।
60. ज़र्द आलूद
ख़्वाब में ज़र्द आलूद देखना दिरहमो दीनार से ताबीर है।
61. ज़िन्दान
ख़्वाब में अपने को जिन्दान में देखना किसी मुक़दमे में मुब्तिला होने की अलामत है।
(ज़ै.)
1. ज़िन्द पा ज़िन्द (आतिश परस्तों) की किताब देखना
औरत मुशरिका से गिरफ्तार हो या कोई काफ़िर मुईनो मदद्गार हो।
2. ज़दबीन को देखना
फ़तहो नुसरत की दलील है तवल्लुद फ़रज़न्द की अलामत है।
3. जफ़्त रोही को खाना या देखना
ग़मो अनदेशाए अयाल मिले या बामुश्त माल आये।
4. ज़ोसीदा को देखना
किसीस अमीर तन से नफ़ा हो माली मंफ़अतमिले दिल की उल्झन दूर हो।
5. ज़न्द पोश देखना
म़क्रो फ़रेब से रोज़ी मिले हरीफ़ों पर फ़राज़ी मिले।
(स.)
1. सुलैमान नबी को देखना
सल्तनत की निशानी है कामयाबी की दलील है।
2. सुंबुला बुर्ज देखना
साहिबे हशमतो तवंगर हो सरदारे क़ौम या फ़ौज का अफ़सर हो।
3. सरतान बुर्ज देखना
बादशाह या हाकिम का मुसाहिब हो आलीक़द्र व आली मर्तबत हो।
4. सुबू सय्यारत देखना
ख़ूबसूरत औरत मिले औलाद की कसरत हो थोड़ी मुसीबत सहे बाद में राहत हो।
5. सितारो को गोद में देखना
बादशाह का ख़ज़ांची या शहर का वज़ीर या ज़मींदार का मुख्तार या कारिन्दा हो।
6. सितारा रौशन देखना
बादशाह का मुसाहिब या सफ़ीर बातौक़ीरया मुसाफिर दोस्त या ख़ेशो अकर्बा से बग़लगीर हो।
7. सितारों का गुच्छा रौशन देखना
बादशाह का मदारूलमुबहाम हो मुंतज़िम मशहूर हो जहाँ में नाम रौशन हो।
8. सितारा गिरते या खाते देखना
औलाद की तरफ से अलम हो तलफ होने का ग़महो या शाही एताब हो।
9. सलीस को देखना
मालो मंसब को ज़वाल हो जाये सदका दे तो अमंनो बरकत हो।
10. सुरज या चाँद सितारों को सज्दा करते देखना
सल्तनत या रियासत मिले बिला तकलीफ़के राहत व सुरूर हो।
11. सूरज को देखना
बाएस नेअमत है ज़नोफ़रज़न्द मिलने की बशारत है।
12. सुरज की रौशनी अच्छी देखना
मालो दौलत बे अन्दाज़ा मिले आज़ादी व आराम में रौनक ताज़ा मिले।
13. सूरज को गोद में देखना
मुकर्रबे सुलतान हो महबूब खुश जमाल या फ़रज़न्द हम आगौश हो।
14. सूरज को गरम देखना
रंजो ग़म पहुँचे या बादशाह रईयत पर जुल्म करे।
15. सूरज को बेनुर देखना
मुलाज़मत छूटे रंजो ग़म पाये कोई अज़ीज़ जुदा हो या मर जाये।
16. सूरज की तरह अपना चेहरा ताबनाक देखना
दलील तवानाई व हुक्मरानी है सेहते नफ़्स की निशानी है
17. संबूसा पाना या देखना
औरत हसीन मालो दौलत पायेया लोंडी या गुलाम मिले
18. साक क़वी या दराज़ देखना
महनतो मशक़्क़त करे माल नेअमत रोज़ बरोज़ बढ़े।
19. साक से ख़ून जारी देखना
वुस्अते रिज़्क व रोज़ी की अळामत है लम्बी की दलील है।
20. साँप को देखना
अगर काला देखे औरत से दिलशाद हो कौड़िया देखे औलाद हो।
21. साँप को पाँव मे लिपटे देखना
फ़ातेहा औरतों का दिलवाये मुसीबत से जल्द खलासी पाये।
22. साँप को संदुक मे बन्द देखना।
बादशाह या ख़ज़ाना देखे माले दुनिया से सारा घर भर जाये।
23. साँप को छत पर गिरते देखना।
दिली नेअमत से रंजिश हो जाये या ज़मीनसे खोद कर ख़ज़ाना मिले।
24. साँप से बहुत से गिर्द देखना
सरदारे क़ौम या अमीरे लश्कर हो हुकूमत पाये दौलत से तवंगर हो।
25. साँप का अपने ऊपर खड़ा देखना
बादशाह या हाकिम से सदमा पहुँचे या किसी दुश्मन से रोज़े
26. साँप का मुत्कल्लिम होना
शीरीं कलामी से देखना किसी दुश्मन से सुलह हो।
27. साँप से लड़ना
ग़ालिब दुश्मन पर फ़तह पाये मग़लूब दुश्मन से शिकस्त खाये।
28. साँप गोद में देखना
फ़रज़न्द मर्दुम आज़ार पैदा हो दुशमन के माल से तवंगरी हो।
29. साँप को आस्तीन में देखना
दामाद बदमिज़ाज दौलतमन्द पाये या दफ़ीना मुशरिक ज़ालिम का हाथ आये।
30. सर आदमी का खुशकत़ा देखना
सरदारी व हुकूमत मिले , सरकुशाने शहर की सरकोबी हो।
31. साग या बर्गे दरख्त खाना
औरत बदक़ौम मुबाशेरत से ख़फ़ीफ़ हो कुछ रंज पहुँचे तकलीफ़ हो।
32. सर अपना जुदा होते देखना
अज़ीज़ो अक़ारिब से जुदाई हो मगर दरबारे शाही में रसाई हो।
33. सर अपना छोटा देखना
रौज़गार से बरतरफ , बिमारी भुगते माल तलफ़ हो।
34. सर जानवर का खाना
किसी हाकिम सलीमुंनफ़्स से फ़ायदा पाये इज़्ज़तो तौक़ार हाथ आये।
35. सर अपना चरिन्द या परिन्द की मानिन्द देखना
जिस हैवान के सर से मुशाबेहत हो उसकी मानिन्द कुव्वतो जुरअत हो।
36. सर अपना कटा हाथ
मुसब्बेबुल असबाब ऐसा सबब बनाये कि हाज़ार रूपया या अशर्फी हाथ आये।
37. सर में तेल डालना
अगर बमिख़्दार देखे ज़ौबो ज़ीनत का सामानहो और जो बिला अन्दाज़ा देखे तो परेशानी हो।
38. सरअपना बड़ा देखना सरदार बाहशमतो इक़्बाल होरोज़ बरोज़ दौलत मुयस्सर हो।
39. सरबरेहना आपको देखना
औरत देखे तो इज़्ज़त मे ख़लल आये मर्द देखे तो नुक्सान हो।
40 सीना कुशादा देखन
ख़िस्सत व तरददुद बे अंदाज़ा हो तन्दरूस्ती से मुतफक्किरहो।
41. सीना तंग देखना
खिस्सत व तरददुद बे अंदाज़ा हो , तन्गरूसती से मुतफक्किर हो।
42 सीना बाज़ का देखना
औरत नेक हाथ आये।
43. सूक आबाद देखना
फराख रोज़ी दफा कुल्फत हो काफिर से औलाद हासिल हो।
44. सिंदूरमांग या पेशानी
औरत बढने की शादमानी हमें लगाना है मर्द को शिर्को बिदअत की निशानी है।
45. सुई देखना
आलऐ कस्बो हुनर उम्दा हाथ आये अगर बहुत सुईयाँ देखे रंज उठाये।
46. सार (परिन्दा)
ख़्वाब में देखना चालाक मुसाफ़िर से ताबीर है।
47. सान
ख़्वाब मं सान चाकू छुरी क़ैंचीव ग़ैरा पर लगाना गुनाहों से तायब होने के मुतरादिफ है।
48. सायबान देखना
ज़ालिम और कमीने से ताबीर है
49. साया
अगर ख़्वाब में किसी साये के नीचे बैठै तो मौत की कुर्बत का सबब है।
50. सब्ज़ी देखना
बदमज़ा औरकड़वी जब्ज़ी द्खना ग़मो अन्दोह में मुब्तिला होने और नुक़्सान उठाने की दलील है।
51. सब्ज़ रंग देखना
बदमज़ा और कड़वी सब्ज़ी देखना
52. सब्ज़ा देखना
अपनी ज़मीन को सरसब्ज़ो शादाब देखना दीन की इताअत तरक़्क़ी की अलामत है।
53. सत्तू देखना
या खाना रंजो ग़म की दलील है
54. सज्जाह (जाह नमाज़)
अगर ख़्वाब में सज़जाह जल जाये या गुम हो जाये तो इबादते इलाही में फ़ितूर पड़े।
55. सराब (धोखा)
किसी धोखे में मुब्तिला होने का सबब है।
56. सुरमा फ़रोशी
ख़्वाब में सुरमा फ़रोख़्त करना लोगों की रहबरी करना केमुतरादिफ़ है।
57. शरेश देखना
ग़मो अन्दोह से ताबीर है।
58. सफर करना
अगर कोई ख़्वाब में सफर करे और उस मकान को पहले मक़ाम से बेहतर देखे तो उसकी ताबीर नेक है।
59. सज़ा देना
ख़्वाब में सज़ा देना या हद मुकर्रर करना औरतों के काम पूरे करने पर मब्नी है।
60. संगी लगाना
अगर ख़्वाब में नामालूम जगह पर संगी लगाता देखे तो किसी की अमानत का बोझ उठाने के मुतरादिफ़ है।
61. समन्दर देखना
बहुत बड़े शहंशाह से मुतरादिफ़ है
62. सुन्बा देखना
फरज़न्द से ताबीर है।
63. सवार होना
ख़्वाब में सवारी करना शाही हथियार और इनाम हासिल करने के मुतरादिफ़ है।
64. सुराख देखना
अगर सुराख के अन्दर घुसता देखेतो राज़े शाही से आगाह होने के मुतरादिफ़ है।
65. सुराख देखना
अगर सुराख के अन्दर घुसता देखे तो राज़े शाही से आगाह होने के मुतरादिफ है.
66. सूसमार (कोह)
दुश्मन से मुंतरादिफ है
67. सोसन
सोसन का फूल उसके मौसम में देखना कुछहासिल होने के मुतरादिफ है।
68. सौंठ देखना
ग़मो अन्दोह से ताबीर है।
69. सीप देखना
मंफ़अत का सबब है
70. सीसा देखना
अगर कोई ख़्वाब में सीसा देखे तो दुनिया का ख़सीस माल जमा करने के मुतरादिफ़ है।
71. सींग देखना
किसी बुजुर्ग से ख़ैरो बरकत हासिल करने का सबब है।
72. सेम के फूल देखना
तरक़्क़ीऐ रिज़्क और मालो दौलत हासिल करने के मुतरादिफ़ है।
73. साल को देखना
औरत को चर्ब ज़बानी से दाम में लाये हमचश्मों में इज़्ज़तो तौक़ीर बढ़ जाये।
74. सियार को घर में देखना
चोरो से मालो असबाब ज़ाया हो जाये।
75. समन्दर को आग से बाहर देखना
मुसीबत मे मुब्तिला हो या किसी दिलसोज़ से जुदा हो
76. सूवरो को देखना
मर्दुम बद किरदार का सरदार हो बुख़्ल और ख़िस्सत में गिरफ़्तार हो।
77. सूवर को मार डालना
अगर ग़लिब आये फ़ायादा देखे मग़लूब हो ज़र्रर पहुँचे।
78. सूवर को मार डालना
दुशमन पर मंसूर हो।
79. सीमुर्ग़ हाथ से उड़ जाना
बीवी को तलाक दे रंजो रशेमानी में पड़े।
80. सूवर का बच्चा देखना
दौलतो रियासत हाथ आये औलाद से राहतो नफ़ा हो।
81. सिपाही देखना
खुसूमत में पड़े ख़ारे ग़म दिले में चुभे
82. सिपाही को देखना
दुश्मन पर फ़तहमन्द हो हमजिन्स में रूत्बा बुलन्द हो।
83. सीमुर्ग को मारना
दौलत बे अन्दाज़ा पाये।
84. सीमुर्ग के इस्तखाँ पाना
अगर पुर्गोश्त देखे तो ग़नी हो ख़ाली हड़डी देखे तो बाएस ज़ियाँ है।
85. सीमुर्ग को पकड़ना
हुकूमत या रियासत हाथ आये या किसी रईस या बादशाह का मुकर्रब हो जाये
86. सुर्ख़ाब देखना
रईसे क़ौम या बादशाह हो साहिबे दौलत व माल हो।
87. सलाख बाँध देखना
हुकूमत परगना की पाये या गाँव का कारिन्दा हो जाये।
88. सिनान को देखना
शुजाअ और जुर्रत मे मशहूर हो उम्र दराज़ दुशि. न पर मंसूर हो।
89. सोना देखना
किसी औरत को निकाह में लाये फिक्रो अन्देशा ग़म पाये।
90. सोने का टुकड़ा देखना।
दौलत कुव्वत व दिलेरी पाये हसीन औरत तसर्रूफ में आये।
91. सोना गलाना
कोई औरत रिफ़ाक़त में आये फिक्रो हलाकत से जान बच जाये।
92. सोना बहुत सा पाना
औरत मालदार मिले ख़ैरो बरकत पाये
93. सोना अमानत रखना
अमीन ख़ायन हो ख़यानतदार कामलाल हो।
94. सोना निसार करना
कोई मकरूहबात सुननेमें आये माल तलिफ हो।
95. सुजन बदन में देखना
मंसबे जाहो रियासत पाये लेकिन जिस्म में कुछ नुसान पहुँचे।
96. सूजन आज़ा में पाना
औरत मालदार शैदा हो फ़रज़न्द नरिना पैदा हो ग़म से रिहाई और हाजत रवाई और हाजत रवाई हो।
97. सियाह जामा देखना
तअज़ीयत या बुज़ुर्गी की दलील है।
98. सफैद जामा देखना
मुसीबत का सामना हो अन्देशा व ग़म में मुब्तिला हो।
99. सुर्ख जामा देखना
परसा और पर्हेज़गार हो नेक ख़स्लत नेक अतवार हो।
100. सेब देखना
फ़रज़न्द अर्जमन्द व रोज़ी मिले फ़रहतो फ़िरोज़ी हो।
101. सब्ज़ जामा देखना
साहबे तक़्वा व पर्हेज़गारी हो नेक कामों में उस्तवारी हो।
102. सींचना दरख़्त का या ज़िराअत का
दौलत से नफ़ा या औरत हसीन मिले।
103 सब्ज़वर लगाते देखना
माले हराम की कौशिश मुदाम रहे या ओबाश से सोहबत रहे।
104. सूरत कुर्आनी पढ़ते देखना।
ताबीर मुवाफिके मज़मूने आयात है अगर नेक हैतो मोमिन की सिफ़ात अगर बद है तो काफ़िर की हिकायत।
105. सबील देखना
किसी सरदार का रफीको मुसाहिब हो हो।ख़ैरो बरकत पाये।
106. सक़्क़ा को मश्क भरते या पानी पिलाते देखना
दौलतो हशमत से मालामाल हो हमचश्मों से आबरू कमाल हो।
107. सीढ़ी देखना
औरत मुनाफिक, दोस्त सादिक़ मिले, मर्तबा बुलंद हो या ओहदा बुज़ुर्ग पाऐ।
108. संख फूँकते देखना
मर्द मुनाफ़िक से राह हो या काफ़िक से राह हो या काफिर उस शहर का बादशाह हो।
109. सरा पर्दा व ख़ेमा देखना
शाही या फ़ौज अफसरी हो हर तरह तवंगरी हो।
110. सूतूने ख़ेमा देखना
सरदार गिरोहे पुर शिकोह हो बुजुर्गे मुम्लिक व साहिबे मुरर्ववत हो।
111. सराये कुशादा देखना
शामिले हाल फज़्ले दावर हो दौलत से तवंगर हो।
112. सराये तंग या तारीक देखना
कुल्फ़म व मुफ़लिसी से मुफ़्लिसी से मुज़्तर हो तंवगर हो।
113. समूर देखना
माले मुसाफ़िर या ग़नीमत पाये मुराद दिली ख़ातिर ख़्वाह हो।
114. संजाब देखना
मर्द मुसाफिर ग़नी से सोहबत हो तरक़्क़ीये माल की फिक्र से फ़राग़त हो।
115. संजाब का गला घोंटना और खून बहते देखना
कुँवारी औरत से अक्द करे जब्रसे मक्र उसका दुर करे।
116. सुर्गीन चार पाया की देखना
दौलत फ़रज़न्द की बशारत है अगर कपड़े या जिस्म में लगे फ़िक्र जाहो हशमत हो।
117. सर्गीन फ़ील की देखना
अपने औहदे से माजूल हो दूसरे काम में मशगूल हो।
118. सुर्मा देखना
फ़तहो दानिश से माल हाथ आये फरज़न्द पैदा होने की ख़बर पाये।
111. सुर्मेदानी देखना
औरत हसीन हो हमल रह जाये पैदा सबीहा नेक सीरत हो।
120. सुर्मे की सलाई देखना
फ़रसन्द तवल्लुद हो या दुख्तर पैदा हो।
121. सुर्मा हाथ में देखना
मालो दौलत हाथ आये औल़ाद से राहतो आराम पाये।
122. सुर्मा आँखों में ख़ींचना
दुनिया में हरदिल आज़ीज़ रहे दीन के कामो में तेज़ रहे।
123. सर्द पानी पीना या नहाना।
फर्ते ऐश व काम रानी हो सेहत हमेशा दफ़ा परेशानी हो।
124. सौफ़ खाना या देखना
नुक्साने माल बेशुमार हो ग़मो फिक्र में गिरफ़्तार हो।
125. सरसों देखना
रोज़ी हलाल हाथ आये तिजारत से नफ़ा पाये।
126. सेम देखना
तुख़्म व समर देखे तो नफ़ा पाये दरख़्त देखे तो जुल्मो जोर उठाये।
127. सिरका देखना
अज़ीज़ पैदा हो ख़ैरो बरकत हो दौलत हशमत बढ़े।
128. सक़फ़खाना देखना
किसी सरदार से फ़ैज़याब हो दौलत मन्द हो जाये जाहो हशम हो।
129. सक़फ बुलन्दो मुनक़्कश देखना
बुजुर्गे क़ौम हो तवाना हो इशरत का सामना हो।
130. सक़फ़ बुलन्दो मुनक़्क़श देखना
कोई बुजुर्ग सफ़र से आये या वस्ले महबूब में ज़ेरबारी उठाये।
131. साँचा देखना
मर्तबा बरतर हो दौलते इल्म से मालदार हो
132. सिकंज़बीन शीरीं पीना या देखना
माले हलाल ब आसानी हाथ आये मरीज़ हो तो जलद शिफ़ा पाये।
133. सिकंजबीन तुर्श पीना देखना
बीमारी को बेइन्तहा तूल हो ग़मों में मुब्तिला हो।
134. संगमूज़ा को पकड़ना या गोश्त खाना
किसी सख़्तकाम में पड़े मुश्किल से रोज़ी मिले।
135. सुंबुल ताज़ा देखना या खाना
नेअमत व माल मिलने की दलील है ज़वाले परेशानी है।
136. संगमूज़ा को उड़ते देखना
सख़्ती से निजात हासिल हो आसान उसकी मुशिकल हो।
(श)
1. हज़रत शीस(अ.) को देखना
उम्रदराज़ इल्मो हिकमत ज़्यादा हो और कसरते औलाद हो।
2. हज़रत शुऐब (अ.) को देखना
किसी अहले जवार से इत्तिफ़ाके मामला हो जाये नुक्साने माया शमातते हमसाया हो।
3. शामयाना जर्री देखना
किसी सरदार से फ़ायदा पहुँचे या औरत हसीनो मालदार मिले।
4. शाम याना लम्बा चौड़ा देखना
तरक़्क़ीऐ उम्र हो मर्तबा बढे इज़्ज़तो बुजुर्गी पाये
5. शराब पीना
उम्र थोड़ी कम हो जाये हर तरह ग़मों रंज पाये।
6. शराब पीना
माले हराम पाये मग़रूरहो इज़्ज़त गँवाये।
7. शरबत पीना
उम्रदराज़ हो बीमार शिफा पाये वस्ले महबूब हो
8. शीरा देखना
दौलत माल से हलावत हो बीमार से सेहत हो।
9. शीरे की मश्क देखना
माल हद से ज़्यादा हाथ आये राहतो नफ़ा पाये।
10. शीरा ख़ेरिश देखना
माले हराम पाये ऐश व इशरत बढ़ जाये।
11. शीरा मर्द सालेह से पाना
दोलतो नेअमतो ऐश व कामरानी हो दिन ब दिन लुत्फ़े ज़िन्दगानी है।
12. शीशा रौग़ने बनफ़्शा का देखना।
औरत दीनदार तवंगर मिले दिलको चैन और राहतमिले।
13. शीशा आबगीना मुफ़ीदे ताज़ा का देखना
औरत खुश मिज़ाज और पर्हेज़गार मिले या लोंड़ी बावफा खुशअतवार मिले।
14. शीशा टूटना या ज़यल होना
औरत उसकी हलाक हो या तलाक उसको देकर ग़म खाये।
15. शीशा शरबत बग़ैरा से भरा देखना
औरत खुश मिज़ाज अक़्द में आये वस्ल से उसके ज़िन्दगी का लुत्फ पाये
16. शलवार
ख़वाब में शलवारपहनना या लेना कनीज़ या कम मर्तबा औरत से ताबीर है।
17. शुमार करना
अगर ख़्वाब मे शुमार करना देखे तो मेहनत और मशक़्क़त में
18. शमशीर
तलवार अगर नियाम में हो तो औरत अगर नंगी हो तो माल और हुकूमत से ताबीर है।
19. शुम्ला (दस्तार)
ख़्वाब में पगड़ी का शम्ला रखना या छोड़ना नामो नामूस से ताबीर है।
20. शमादान ख़्वाब में शमदान घर की मुन्तज़ेमा और बीवी से ताबीर है।
21. शहादत
ख़्वाब में शहादत पाना दुनियावी ग़मो अन्दोह से निजात पाने से ताबीर है।
22. शहद की मक्खी
ख़वाब में शहद की मक्खी देखनी तरक़्क़ीये रिज़्क और मेहनती औरत से ताबीर है।
23. शीशे में शराब अंगूर या सेब की उतारना
ज़ने ओबाश हसीन मिले।मुल्क से उसकी उसको लाल मिले।
24. शहद खाना
माले हलाल पर रग़बत हो मंफअत और सेहत हो।
25. शलजम खाना
कुँवारी औरत या ग़मगीन से मुबाशेरत हो बे लुत्फ़ी या नफ़रत हो।
26. शकर व शीरनी देखना
माल हलाल मिले हसीन औरत मिले फरज़न्द की विलादत हो।
27. शफतालू देखना
तंगदस्तीसे दोचारहो कोफ़्त उठाये
28. शेरे बबर को देखना।
बादशाह या रियासत का सर अंजामहो शुजाअत और क़ौम में नाम हो।
29. शेर से जंग करना
अगर शेर पर ग़ालिब आये दुशमन पर मंसूर हो अगर मग़लूब हो दुशमन से आजिज़ हो।
30 शेर का फुज़्ला वगैरा देखना
दोस्त व मफ़अत की दलीलहै फ़रहतो ऐश की सबील है।
31. शतरंज खेलना
बुरे कामों में बदनाम हो अगर बाज़ी जीते मंसूरो शाद काम हो।
32. शमा व चराग़ देखना
औरत हसीन मिले फरज़न्द पैदा हो क़द्रो मंज़िलत बढ़े मर्तबा मिले।
33. शमा ग़ुल होते देखना
उम्रे अज़ीज़ अंजाम को पहुँचे गुनाहो से तौबा करे।
34. शमा रौशन हाथ में आना
कारे बस्ता कुशादा तर हो फ़रज़न्दे अज़ीज़ पैदा हो।
35. शमाए जर्री सर देखना
ओहदाए जलील हाथ आये कद्रो मंजिलत बढ़ जाये।
36. शिकार करना या शिकार दुसरे को देखना
औरत बाकिरा से शादी हो बादशाह की मेहर्बानी से हाजत रवीई हो।
37. शहरियों को बाहम लड़ते देखना
उस शहर में काल पड़े या बादशाह जाबिर से ज़रर पहुँचे।
38. शहाब को देखना
मुनाफ़िक मर्द से ज़रर पहुँचे या बदज़नी से पेचो ताब खाये।
39. शैतान पर फ़रेफ़्ता होना
बीवी बदख़्वाह माल व दौलत तबाह हो।
40. शैतान को मुतीअ देखना
मालो दौलत मिले उलूमे दीनिया की रोज़ी हो रंजो ग़म दुर हो दश्मनो पर फिरोज़ी हो।
41. शैतान का मकहूर देखना।
फ़रहतो राहत बेशुमार हो दुश्मन ज़लील व ख़्वार हो।
42. शोरबा पीना य़ा खाना
नेअमत व दौलत बढे सेहत की खुशी हो।
43. शोलाए आतिश देखना
दीनदार देखे तो औरत मालदार मिले गुमराह पर मुसीबत पड़े माल लुट जाये।
44. शिकंजा देखना
शिकंजा अज़ाबो नहुसत की निशानी है शिकंजा किताब ख़ैरो बरकत और कामयाबी है।
45. शायर मोमिन देखना
दानिशवरो सुखन्दाने ज़माना हो जहाँमें इज़्ज़तो तोक़ीर हो दिल यगाना हो।
46. शीराज़ाऐ किताब बाँधना
बीवी से मोहब्बत बढे दुश्मन से सुलह हो जाये अगर शीराज़ा खुले ज़हूर हो जाये।
47. शोब्दीबाज़ी देखना
कारोबार सुस्त ज़ईफ़ हो हर तरह से तकलीफ. हो।
48. शायर ग़ैर मोमिन देखना
फ़िक्रे मईशत में सरगरदाँ फ़िरे झूठा और बे ऐतेबार मशहूर हो।
49. शुतुर बेमुहार देखना
और न सज़ा मिले फ़रज़न्द खुद राये पैदा हो अन्देशाऐ ग़म हर रोज़ हो।
50. शुतुर मुर्ग़ मादा को देखना
औरत पारसा आली ख़ानदान से मिले कजख़ल्की और नाफ़हमी से नफ़रत हो।
51. शुतुर मर्ग़ नर को देखना
मर्द बुजुर्ग अस्ली नस्ल से साबेक़ा पडे बेवफ़ाई और मक्कारी से पेश आये।
52. शुतुर मुर्ग से लड़ना
अगर शुतुरमुर्ग़ पर ग़ालिब आये तो दुशमन पर फतहा पाये और अगर मग़लूब हो दुश्मन से शिकस्त खाये।
53. शंगरफ से आयत या दुआ देखना
दीनो दुनिया में मंफअत पाये पर्हेज़गार मशहूर हो जाये।
54. शंगरफ खाना
किसी सख्त बीमारी से तूल हो या सरदस्त फक्रो फाका हुसूल हो।
55. शंगरफ से तस्वीर देखना
महबूब वस्ल पाये दुनिया के लहब लअब में पड़ जाये।
56. शाख़ें
ख़्वाब में शाख़ें देखना फ़रज़न्दों और भाईयों से ताबीर हैं।
57. शादी
ख़्वाब में शादी होना और दुल्हन का न देखना और बिहा के घर में न लाना मौत की अलामत है।
58. शाना (कंघी)
ख़्वाब में कंघी करते देखना किसी शफीक़ हमदर्द दोस्त और कुँवारी औरत के मुतरादिफ है।
59. शाहीन देखना
क़द्रो मंज़िलत ,इज़्ज़त , फरज़न्दो माल , नेअमत व हुकूमत से मुतरादिफ है।
60. शर्म
ख़्वाब में ईमान से ताबीर है।
61. शर्मगाह
शर्मगाह देखना राज़ से ताबीर है।
62. शेरो शायरी
ख़्वाब में शेरो शायरी में मशगूल होना बेहूदगी और गुमराही है।
63. शफ़क़ बा आसमान
आसमान पर शफक़ देखना मौसमी ग़ल्ले की फरावानी का सबब है।
64. शिकरा
शिकरा देखना मक्कार और ज़ालिम शख़्स से ताबीर है।
65. शकरक़न्द देखना
औलाद से ताबीर है।
66. शगूफा देखना
मौसमी शगूफा देखे या पाये ख़ैरो बरकत हासिल होने का सबब है।
(साद)
1. हज़रत सालेह (अ) को देखना
किसी ज़ालिम से फित्ना व फसाद में पड़े आख़िर को फतह पाये दुश्मन को हलाक करे।
2. सन्दल देखना
इज़्ज़तो तौकीर हशमत पाये आलम में नेकनाम हो जाये।
3. सुराही ख़रीद करना
औरत अय्याश तसरूर्फ में आये या लोंडी ख़ैर ख़्वाह से राहत पाये।
4. सन्दूक़ देखना
बीवी ताबेदारी करे दुश्मन दोस्त बन जाये।
5. सदफ़ से मोती निकालना
फरज़न्द पैदा हो दौलतमन्द हो आसूदगी हासिल हो।
6. सदफ देखना
दौलत से मालामाल हो फ़ायदा पाये दफ्ए मलाल हो।
7. सैय्याद को देखना
जालसाज़ी से औक़ात बसर करे जुस्तजू में मालो ज़र की दरबदर फिरे।
8. साबुन देखना
बीमारी से सेहत , कदुरत से दिल साफ़ हो ख़लीक़ बामरव्वतो इंसाफ हो।
9. सहनक खाना या देखना
औरत की पारसाई बढे पारसाई बढे माल हलाल खाये मर्द को नेअमत व दौलत बढ़े।
10. सैक़ल करना
इबादतो रियाज़त से मंफअत पाये रंगे इसयाँ दूर हो जाये।
11. सदका देना या लेना
अगर सदका दे तो फक्रो फ़ाके में मुब्तिला हो।
12. सर्राफ को देखना
काम तहसील का हाथ आये खोटे खरे का हाल का जाए।
13. सीग़ए निकाह पढ़ना
मुसलमानों से नेकी और एहसान करना मंफअत दीनो दुनिया की मिले।
14. सहरा को देखना
मुक़र्रबे बादशाह ज़ीक़द्र हो फायदा हर सूरत से पहुँचे हर मुशिकल आसान हो।
15. सुबहा
ख़्वाब में सुबहे सादिक़ देखना अमनो काम रानी से ताबीर है।
16. सोहबत
ख्वाब में अपनी औरत से सोहबत करना औरत के ताबे रहने और उसके मख़्फ़ी राज़ ज़ाहिर होने के मुतरादिफ है।
17. सर्रफ़ी करना
लोगों की ग़ीबत और ख़यानत मेम मशगूल होने के तरादिफ है।
18. सफ़ा व मरवा
ख़्वाब में सफ़ा व मरवा देखना नेकी और पर्हेज़गार अख़्तियार करने का बाएस है।
19. समग़ अरबी (गोंद)
ख़्वाब में समग़ अरबी ब़च्चे कच्चे खाने से मुतरादिफ है।
20. सलीब
ख़्वाब में सलीब का देखना पाना ख़रीदना दीन में खलल पड़ने का सबब है।
(ज़ाद-ज़)
1. ज़मानत देना या ज़मिन होना
किसी को मंफअत या फ़ैज़ पहुँचाय दुसर सूरत में खुद किसी से फ़ायदा उठाये।
2. ज़ियाफत खाना या खिलाना
नअमत व मंफअत का हुसूल हो साहिबे जूदो करम हो हर दुआ कूबूल हो।
3. ज़ईफ आपको देखना
म़र्तबा कम हो ज़वाले हशमतो जलाल हो या शिद्दते अमराज़ हो नातवानी से जी निढाल हो।
4. ज़हाका औरत से सोहबत करना
किसी लोंडी सें बद कारी में गिरफ़्तार हो फरज़न्द ग़ासिबो बद अतवार हो।
5. ज़ाया होना
ख़्वाब में दुनिया का माल ज़ाया हो दीन की तरक़्क़ी का बाएस है।
6. ज़ब्त
मुसीबत में सर्बो ज़ब्त करना ग़मो अन्दोह से निजत पाने की दलील है।
7. ज़िद करना
ख़्वाब में मे किसी बात में ज़िद करना नामों नामों नूमूद और दुनियावी शोहरत की ख़्वाहिश की दलील है।
8. ज़र्ब लगाना
ख़्वाब मे ज़र्ब लगाना अपना फर्ख ज़ाहिर करने के मुतरादिफ है।
9. ज़रूरत पड़ना
ख़्वाब में किसी चीज़ की ज़रूरत का होना हिर्सो तमा से ताबीर है।
10. ज़रीह (ताज़िया) देखना।
फिक्रो आफ़ियत से ताबीर है।
11. ज़ोफ़ पड़ना
इज़्ज़तो मर्तबे की कमी होने के मुतरादिफ है।
12. ज़ईफ देखना
खुद को ज़ईफ देखना दुनियावी कमज़ोरी का सबब है।
(तो-त)
1. तिलिस्यान को देखना
दीन में तरक़्क़ी पाये लेकिन क़रामत शामिल हो जाये
2. तबीब को देखना
दाफे अमराज़ व सेहत की अलामत है मज़ीद मालो राहत की बशारत है
3. तशत व ताऊव व तंबूर वग़ैरा देखना
दोलत व नेअमत फ़रावन मिले लोंडी खूबसूरत या गुलाम ताबे फ़रमान मिले।
4. ताक देखना
बीवी मालदार या ख़ज़ाना हाथ आये नोकरों से राहतो आराम पाये।
5. तवाफ़े काबा देखना
वालिदेन की इताअत अज़ीज़ों की दिलदारी करे राहे रास्त पर चले।
6. ताऊस पकड़ना या देखना
औरत रक़्क़ास मिले शाहे अजम से राहत मज़ीद दौलत व इकबाल ख़ातिर ख़्वाह हो।
7. तायर देखना
औरत और माल मिलने की निशानी है।
8. तूती देखना
औरत बाकिरा मिले दौकलमन्द फ़रज़न्द खुश अतवार मिले।
9. तलाक बीबी को देना
ज़ौजा मंकूहा से सिवा मोहब्बत हो दफ़ए बीमारी और कुल्फ़त हो।
10. तौक आहनी देखना
बला व मेहनत व तबाही है कुल्फत हो।
111. तौके ज़र्री देखना
औरत को शौहर से शादमानी हो फ़तहो कामरानी हो।
12. तिलिस्म देखना
काम ऐसा अजीबो ग़रीब पेस ये जिसकी वजह से अन्देशा व कुलफ़तो माल हो।
13. तबेला देखना
घोड़ों से भरा देखे हासिल कुल्फ़तो माल हो।
14. तुफ़ान देखना
फ़िक्रो तरदुद लाहिक़ हो मालो ज़नो फ़रज़न्द का ख़यालहो।
15. तमंचा देखना
हाकिम जाबिर से मंफअत पाये दुश्मन क़वी व ज़बर्दस्त हो जाये
16. तंमाचा मारते देखना
ओलाद की बदफेली का ग़म खाये या खुद मुत्तहिम हो जाये।
17. तहारत करते देखना
दलीले तन्दरूस्ती व दौलत है बाएस बुज़ुर्गी व रियासत है।
18. ताऊन
ख़्वाब में ताऊन देखना या मुब्तिला होना फ़ित्ना व बला से ताबीर है।
19. तालिबे इल्म होना
ख़्वाब में तालिबे इल्मी करना या किसी उस्ताद से पढ़ना जैसा इल्म पढ़े उसकी ताबीर नेक है।
20. तबाबत (हिकमत)
हिकमत करते देखना इस्लाहो हिदायत के मुतरादिफ़ है।
21. तबला देखना
बेहूदगी और इफ़्तेरा से तबीर है।ख़्वाब में खाना या शराब जो मिले।
22. तआम
बेहूदगी और इफ़्तेरा से ताबीर है।ख़्वब में खाना या शराब जो मिले या पाये रंजो ग़म से मुतरदिफ़ है।
23. तअना
ख़्वाब में तअना देना या सुनना बाहमी दुय़श्मनी और जुदाई से ताबीर है।
24. तुग़यानी
ख़्वाब में तुग़यानी देखना अज़ाबे ईलाही और बलाये आसमानी से ताबीर है।
25. तवाफ़ करना
ख़्वाब में काबे का तवाफ़ करना गुनाहों से तायब होने और बुजुर्गाने इस्लाम का इताअत शेआर होने नीज़ दीन और दुनिया
की भलाई का सबब है।
26. तवायफ देखना
ख़्वाब में तवायफ देखना मक्रो फ़रेब में मुब्तिला होने के मुतरादिफ है।
(ज़ो-ज़)
1. ज़ालिम को देखना
अगर ख़ौफ़ खाये नहूसतो परेशानी हो और निडर हो दौलतो कामरानी हो
2. ज़ुल्म यगाना या बेगाना पर करना
जिस पर ज़ुल्म किया वो बेज़ार हो और खुद बला व ग़म में गिरफ़्तार हो।
3. जुल्मात को देखना
जाबिर बादशाह का मुसाहिब हो उम्र दरीज़ मनाक़िब वाला हो।
4. जूरूफे ख़ानादारी देखना
नौकर चाकर मिलें रात दिन इताअत गुज़ार रहें।
5. ज़राफत
ख़्वाब में ज़राफ़त में मशगुल देखना बेहूदगी और लामानी बातों मे मुब्तिला होने की निशानी है।
6. ज़ोहर
ख़्वाब में ज़ोहर की नमाज़ मे शामिल होना दीनदारी से ताबीर है।
(ऐन-ई)
1. हज़रत ईसा (अ.) को देखना
फरज़न्द पैदा हो जहाँ को नफ़ा पहुँचाये हकीम दाना हो।
2. हज़रत ईज़राईल को देखना
मौत का पैग़ाम समझे गुनाहों से तौबा करे।
3. हज़रत ईज़राईल को सलाम करते देखना
दुनिया में एमन व महफूज़ रहे आक़ेबत सैरेजिनाँ से महफूज़ रहे।
4. ईज़राईल को रूह कब्ज़ करते देखना
उम्र दराज़ दौलत ज़्यादा उम्र भर खुरर्मी व राहत रहे।
5. अलम अब्बास (अ.) का देना या उसे हाथ मे लेना
किसी सरदार से जाहो हशमत हो।
6. अर्शे बरी को देखना
सल्तन या रियासत पाये दुनिया में इज़्ज़त बढ़े।
7. अत्तार देखना
बादशाह का वज़ीर हो या किसी ख़ास बादशाह का दबीर हो।
8. इमारत बुजुर्ग या रज़्मगाह देखना
बड़े मर्तबे को पहुँचे मालो दौलत बे इन्तिहा हाथ लगे।
9. औरत देखना
बुजुर्गी व नेअमत पाये या अज़ खुद माल गुम शुदा ह्थ आये।
10. अज़्वे तनासुल देखना
फ़रज़न्द से ताबीर है।
11. इमारत
ख़्वाब में अगर कोई ख़राब मस्जिद या ख़ानक़ाह की इमारत बनाना या बनते देखे तो दीन की इस्लाह और आफ़ियत बख़ैर होने की अलामत है।
12. उलमा को देखना
या उलमा की सोहबत में बैठना इज़्ज़त ओर तौक़ीर से ताबीर है।
13. उम्र शुमार करना
बीमारी और तंगदस्ती की दलील है।
14. उमरा करना या हज करना
दीनो दुनिया की बेहतरी की दलील है
15. उन्नाब खाना
मालो मनाल के हुसुल की दलील है।
16. अंबर पाना
दीनवी मंफअत की हासिल करने की दलील है।
17. ऊद पाना
बादशाह या हाकिमे वक़्त से अमान हासिल करने का सबब है।
18. ईसाई होना
ख़्वाब में अपने आपको ईसाई देखना दीन से गुमराही का सबब है।
19. ऐनक ख़रीदना या लगाना
इल्म हासिल करने की दलील है।
20. उरूसी (शादी) का सामान देखना
बादशाह से माल पाये इज़्ज़तो तवंगरी बढ़े
21. आलिम को देखना
दुनिया व नेअमतो शादकामी मिले ख़ैरो बरकत फ़रजामी मिले।
22. उक़ाब को उड़ते देखना
रईसे शहर या क़ौमका सरदार हो और अगर घर पर बैठे तो ताजदार हो।
23. क़ीक़ देखना या पकड़ना
किसी बद अहद से मामला पड़े रज पाये तो निजात मिले।
24. अक़ीक़ देखना
रंजो मुसीबत से महफूज़ हो दोलत व दुश्मन को
25. असा देखना
रंजो मुसीबत से महफूज़ हो दौलत व दुशमन को मंज़
26. अमामा देखना
मर्तबा पहले से ज़्यादा हो दिलशाद हो।
27. अमामा सर पर लपेटना
सफ़र को जाने की अलामत है , ख़ैरो बरकत की निशानी है।
28. अमामा सब्ज़ रंग का देखना
मुसीबत से छुटे मुराद बर आये दुरअते रिज़्क हो।
29. उम्रबाल या दाम माही देखना
अगरफलियां से भरा देखे तो तवंगरहो अगर ख़ाली देखे तो तंगदस्त हो।
30. ईद को रोज़ा खोलना
बाबे रोज़ी कुशादा हो उस शहर में ग़ल्ला ज़्यादा हो।
31. ईद बरोज़ जुमा देखना
खुर्रमो मसरूर , रंजो मुसीबत दुर हो।
32. इत्र मलना या इतरदान देखना
औरत खुश अख्लाक और हसीन मिले जानो दिल को फ़रहत हो।
33. औरत जवान जमील देखना
तरक़्क़ीये दोलत व इकबाल फिक्रे मईशत से फ़ारिगुलबाल फिक्रे मईशत से फ़ारिगुलबाल हो।
34. औरत पाकीज़ा सब्ज़ रंग को देखना
कोई महरबा औरत मिले या लोंडी खुश आवाज़ को हम ख़्वाब बनाये।
35. अंदलीब या असफूर देखना
कोई महरबा औरत मिले या लोंडी खुश आवाज़ को हम ख़्वाब बनाये।
36. महबूब को गोद में लेना
दिली मुराद बर आये मुफ़्लिसी रफ़ा हो।
37. महबूबा को बाजू में देखना
आसूदा हाल व फारिगुलबाल रहे
38. औरत अजनबी की कलाई देखना
माले दुनिया से आसूदगी हो बुजुर्गी व बेहूदगी हो।
39. औरत महबूबा के हाथ कटे देखना
दोरंगी दोस्त व दुश्मन से हुसल रहे कभी शाद कभी मलूल रहे।
40. औरत महबूबा के हाथ बँधे या खुश्क देखना
बीमारी की तकलीफ़ शाक़ हो अज़ीज़ो और दोस्तों से निफ़ाक हो।
41. औरत अजनबी की कलाई देखना
माले दुनिया से आसूगी हो बुजुर्गी व बेहूदगी हो।
42. औरत को बेगाना मर्द के पास बैठा देखना
शौहर से दफ्ए फ़साद हो मोहब्बत सिवा हो इज़्ज़त बढ़े फ़रज़न्द पैदा हो।
43. औरत को सहक करते देखना।
उनके मख़्फी राज़ आगाह हो मालो दौलत खातिर ख़्वाह हो।
44. उन्नाब तरोखुश्क देखना
महबूब से मुलाक़ात हो बीमारी जाये दिल को फ़रहत हो
45. अकऱब बुर्ज देखना
दुश्मन क़वी या हासिद हो रंज में मुब्तिला हो।
46. अमारी में बैठे देखना।
बुजुर्गी या रियासत हाथ आये अज़ीज़ो में मर्तबा बुलन्द हो।
47. ऊद सोज़ को देखना
लोंडी अक़्लमन्द गुलाम खुश अखालाक मिले या बादशाह खुर्सनद हो ख़िलअत इनाम दे।
48. आशूराए मोहर्रम देखना और आमाल बजा लाये।
हुज़नों मलाल से निजात मिले , सवाबे आख़रत की उम्मीद हो।
49. आशिक
ख़्वाबमें अपने आपको किसी इन्सान का आशिक देखना हिरसो फ़साद से ताबीर है।
50. आलिम होना
ख़्वाब में आलिम होना बुजुर्गी और पारसाई की दलील है।
51. आमिल
अगर ख़्वाब में किसी काम का आमिल होना देखे तो दिल की मुराद बर आने का मोजिब है।
52. इबादत करना
मस्जिद या झोंपड़ मे इबादत करते देखना दुनिया मे ख़ैरो बरकत हासिल करने का मोजिब है।
53. अरबी ज़बान बोलना
ख़्वाब में अरबी ज़बान में बात करना इल्म हासिल करने और अरबी पढ़ना किसी काबिल औरत से शादी करने के लिये अरबी लिखना नेक
बख़्त औरत से फ़यदा हासिल होने का मोजिब है।
54. अजाएबात देखना
दीनवी तरक़्क़ी का मोजिब है।
55. अर्क व पसीना देखना
ख़्वाब में बदन पर पसीना देखना मतलब हासिल होने से ताबीर है।
(ग़ैन-ग)
1. गुलाम को पास गिर्द फिरते देखना
सरदारी मिले या बादशाह हो मतलब बरआवुरी ख़ातिर ख़्वाह हो।
2. गुस्ल करना
ग़म से रिहाई कर्ज़दारी से फ़ारिग बीमार को शिफ़ा हो।
3. गुस्लखाना देखना
अगर किसी मय्यत में गया तूले हिसाब हो।अगर खुद किया ज़िन्दगी कम मामूरे आफ़ात हो।
4. ग़स्साल को देखना
नहुसत और कुल्फत की निशानी है ज़िन्दगी कम हो या मुसीबत पेश आती है।
5. ग़व्वास को देखना
तालिबे इल्म आरिफे खुदा हो नेक कानो में मुब्तिला हो या बारयाब बारगाहे सुल्तानी हो रफ़ा हर परेशानी हो।
6. ग़श खाना
किसी मुसीबत या रंज में मुब्तिला होने का सबब है।
7. गुस्सा करना या होना
ख़्वाब में अगर दुनियावी बातों पर गुस्सा करे तो दीन की गुमराही और दुनिया पर मग़रूर होने की अलामत है अगर ख़्वाब में वालिदेन
पर गुस्सा होते देखे तो मर्तबा से गिरने का सबब है।
8. गल्ला
ख़्वाब में ग़ल्ले का ढेर देखना मेहनतो मशक़्क़त से रोज़ी हासिल करने की अलामत है।
9. ग़िलाफ (नियाम)
ख़्वाब में ग़िलाफ देखना औरत से ताबीर है।
10. गुल्लए गुलेल
ख़्वाब में ग़ल्ला हासिल करना जुल्मो सितम से ताबीर है।
11. गोता लगाना
मेहनत से रोज़ी मिले मकसूदो फ़िरोज़ी मिले।
12. गुर्फ़ा (कमरा) देखना
औरत पारसा मिले अगर पर्दा खुल जाये जल्द इफ़शाऐ राज़ हो।
13. गुर्फ़ा (कमरे) में जाना
रौशन देखे तो हाजत रवाई हो तारीक देखे तो कुल्फ़तो बीमारी हो।
14. गुबार देखना
फिक्रमन्दी व कदूरतो दुश्मनी पैदा हो या किसी सख़्त बीमारी में मुब्तिला हो।
15. गुब्बारा देखना
फ़रहत की अलामत है बाएसे सरबुलन्दी है।
16. गुब्बारा देखना
फ़रहत की अलामत है बाएसे सरबुलन्दी है।
17. गुलैल से निशाना करना
अगर गुल्ला निशाने पर पड़े मतलब को पहुँचे और अगर ख़ता करे माल का नुसान हो।
18. गुलाम नाबालिग़ का आपको बालिग़ देखना
बन्दगी से जल्द आज़ादी मिले मुराद बर आये दिल को शादमानी मिले।
19. गुल मचाना
अगर दहशत से शोर करे अमनो अमान पाये और मिज़हन शोर मचाऐ ज़लीलो ख़्वार हो जाये।
20. ग़ौरी देखना
तआम लज़ीज़ो नेअमते उज़्म पाये दुश्मन के शर से बचे दुश्मन स् दोस्ती हो जाये।
21. गोले बियाबनी देखना
अगर ख़ौफ़ से भागे बीमारी हो कुल्फ़त घेरे अगर बेखूनी से खड़ारहे बुजुर्गी पाये।
22. ग़ौल जानवरो का दूखना
औरत से मरबूत दिल हो ख़्वाजगी या हुकूमत हासिल हो।
23. ग़िर्बाल देखना
दुख़ितर नेक अख़्तर पैदा हो फिक्रो तरददुद बे इन्तिहा हो या नेक कामों में ऱख़ना पड़ जाये परेशानी हो।
24. ग़ौग़ा न्यूज़ को चचाते देखना।
औरत वहशी लड़ाका राम हो यानी बदतमीज औरत सुधर जाऐगी, महफिले ऐशो तरब जशने आम हो।
25. ग़ार मे मुकीम होना
किसी सख़्त काम में गिरफ़्तार हो कैद में हो तो सख़्त बीमार हो।
26. ग़ार में जाके निकल आना
सख़्त काम में निजात पाये कर्ज़ अदा हो बीमारी रफा हो जाये।
27. गार में मअ असहाब जाना
ग़म्माज़ी से बेख़ौफ दुश्मन से कामयाब और महफूज़ हो।
28. ग़मग़ीन होना
खुशी व खुर्रमी पाये हुज़नो मलाल रफ़ा हो जाये।
29. ग़ासिया देखना या पाना
हज को को जाये इल्मो अदब लोगों को सिखाये किसी सौदागर या औरत ताजिरा से मालो मंफअत पाये।
30. ग़ायब का देखना
ख़्वाब में किसी ग़यब शख़्स का आना उसकी खबर या ख़त आने से ताबीर है।
31. ग़र्क होना
ख़वाब में किसी दरिया में ग़र्क़ होते देखे तो हाकिम वक़्त बादशाह से तकलीफ पहुँचे।
(फ़े-फ)
1. फ़रिश्ते आसमान से उड़ते देखना
मुसलमानो को इज़्ज़तो नुसरत हो काफिरों को ज़िल्लत व हज़ीमत हो।
2. फरिश्तो से जंग देखना
कमाले नहूसत और बददिली की निशानी है या अंक़रीब अजल आनी है।
3. फ़रिश्तों का घेर लेना
घर मे चोरी हो तंगदस्ती से पेचोताब खाये।
4. फ़रिश्तो से जंग देखना
कमाले नहूसत और बददिली की निशानी है या अंक़रीब अजल आनी है।
5. फ़रिश्तो का मजमा होना
किसी आबिद या आलिम की सानानी आये कोई बेगुनाह क़त्ल हो शहादत पाये।
6. फ़रिश्तो के साथ परवाज़ करना।
मकरूहाते दुनिया से बेनिय हो दोबाला क़द्र पाये जल्द वफात पाये शहादत हाथ आये।
7. फ़रिश्तों की सूरत आरको देखना
क़र्ज़ अदा हो तवंगरी व इज़्ज़त हो।
8. फ़रिश्तों को अपना इस्तकबाल करते देखना
दौलते दो जहाँ से सरफ़राज़ हो अमीरोमें मोअज़्ज़िज. और मुम्ताज़ हो।
9. फ़रिश्ते का बशारत देना
नेअमत व माल व ज़र में ज़्यादती हो।
10. फ़रिश्तों का बाहम लड़ते देखना
दुश्मन पर फ़तह व नुसरत पाये।
11. फ़रिश्तों को रूकूअ व सूजूद में देखना
दीन व दुनिया में काम बन जाये मुराद हासिल हो ख़ैरो बरकत पाये।
12. फ़रिश्तों के साथ आसमान पर जाना।
दुनिया से कूच करे लेकिन जहाँ में नेक काम करे।
13. फर्ज देखना
फ़हाश कामो में मुब्तिला हो।
14. फन्दक देखना
माल व दौलत और क़द्रो मंज़िलत बढ़े।
15. फ़ानूस रौशन देखना
मर्द देखे तो फ़रज़न्द नेक पैदा हो औरत देखे तो दौलतमन्द से शादी हो।
16. फ़नूस रौशन करना
दौलतमन्द से शादी हो।
17. फ़ील मुर्ग़ देखना
आफ़त में मुब्तिला हो सदका दे ताकि रददे बला हो
18. फ़र्श को देखना
अगर बिछाये इज़्ज़त पाये दूसरे को बिछाते देखे उस से लुत्फ उठाये।
19. फालूदा खाना या देखना
दौलत ज़्यादा हो बीमार शिफा पाये।
20. फ़सद से खून जारी देखना
अगर कहे कि खून आता है दौलत आये अगर कहे कि खून बहा जाता है तबाह हाल हो।
21. फलद अपनी खुलवाना
फरहते कल्ब व दफाए अमराज़ जिस्मानी हो।
22. फ़लागन देखना
नेकनाम को रूस्वाऐ दीन बदनाम करे।
23. फिरोज़ा देखना
उम्रदराज़ हो दुनिया में कामयाब रहे।
24. फाख़्ता को देखना
औरत फ़ाहेशा से रब्त बढ़जाये मुख़ालेफ़त से रंज उठाये।
25. फव्वारा देखना
दौलत से तवंगर हो औरत अक़ीला मिले फ़रज़न्द नेक पैदा हो इशरत का सामना हो
26. फ़िर्ओन को शहर में मुक़ीम देखना
बादशाह ज़ालिमो जाबिर का दौर हो रईय्यत मुब्तिलाए अन्दोह जुल्मो जोर हो।
27. फ़िर्ओन से ख़िल्अतो इनाम पाना
बादशाह हाकिम का उसपर तुल्फे कामिल हो या किसी सरदार से माले हराम हासिल हो।
28. फ़ाज़िल या फ़क़ीह को देखना
हाकिम के सामाने क़द्रो मंजिलत हो अपने हमचश्मो पर फ़ज़ीलत पाये।
29. फ़क़ीर
ख़्वाब में फ़क़ीर को देखना तंगदस्ती व मुफ्लिसी से ताबीर है।
30. फ़क़ीह देखना
बुजुर्गी से ताबीर है।
31. फ़लालेन (कपड़)
ख़्वाब में फ़लालेन पाना या ख़रीदना खूबसूरत औरत मिलने की निशानी है।
32. फ़ौज देखना
कारोबार और ज़िराअत में फ़ायदा होने की अलामत है।
33. फरज़न्द
ख़्वाब में लड़की पैदा होना या देखना राज़ इफ़शा होने से ताबीर है अगर ख़्वाब में लड़का पैदा देखे तो लड़की पैदा होने की अलामत है
34. फ़ीरीनी देखना
फ़ीरीनी खाना या देखना किसी अज़ीज़ या दोस्त से मुलाकात होने अलामत है।
35. फ़ाहेशा औरत देखना
दीन की गुमराही का सबब है।
(क़ाफ-क)
1. कुर्आन मजीद पढ़ना या देखना
माले मीरास या रोज़ी , ख़ैरो बरकत हो हाफ़िज़ा तेज़ हो
2. कुर्आन मजीद लिखना
इल्मो हिकमत में ताक़ हो ज़ौहद में शोहरा आफ़ाक़ हो।
3. कुर्आन मजीद पाना
इल्मो अमल में उस्तवारी हो शामिले हाल लुत्फे बारी हो।
4. कुर्आन मजीद का वरक़ खाना
मौत से क़रीबतर हो।
5. कसम झूठी खाना
अहले खुदा को तोड़ना हक शनासी से मुँह मोड़ना।
6. कसम लेते देखना
रोज़ी घटे सदमए मर्ग पिसर हो हाल भी बर्बाद हो।
7. कसम रास्त खाना
क़ल्ब को आरम मिले दिल को सुरूर हो रास्तगो मशहूर हो।
8. कुर्बानी करना
मर्द ग़म से छूटे औरत के फ़रज़न्द हो लौंडी गुलाम आज़ाद हो बीमार तन्दरूस्त हो
9. किन्दील रौशन देखना
औरत हसीन मिले औलाद से घर भर जाये।
10. किन्दील को तारीक देखना
तलाश मआश में सरगदाँ हो मुफ़्लिसी व तंगदस्ती से परेशान हो।
11. क़ैंची देखना
बीवी से बदख़याली रहे रहम मंजूर हो दिल को मलाल हो।
12. कहक़हा मारकर हँसना
हरकाते इन्सानी पर हो फ़रहत मिले अगर किसी अजीब चीज़ पर हो तो दौलत मिले।
13. क़फ़िला देखना
अगर आते देखे माली फ़ायदा हो और जाते देखे तो नहूसतो मुसीबत हो।
14. कुमरी या क़ाज़ को देखना
किसी महबूब हसीन पर मुब्तिला होवाये वस्ल में बर्बादो मुज्तरिबुल हाल हो।
15. किला देखना
हिरासतो हिफ़ाज़त की निशानी है।
16. क़हत का देखना
शहर में अर्ज़ानी हो राहत दिल का हर तरफ सामान हो।
17. क़िले पर चढ़ना
बुलन्द मंज़िलत पाये दिली मुराद बर आये सरदारो से इल्लत हो दुशमनों पर फ़तह पाये।
18. किला कोहना देखना
रियासत व दौलत को ज़वाल हो अजरार हो।
19. क़ौस व क़ज़ह को देखना
ग़म दुर हो कामरानी हाथ आये ग़ल्ले की अर्ज़ानी हो।
20. क़ौस बुर्ज को देखना
फ़ौजे शाही का सिपाह सालार हो अजरार हो।
21. क़द अपना बअन्दादा देखना
क़द्रे मंज़िलत की अफ़ज़ाई हो तरक़्क़ी उम्रोदौलत की हो।
22. क़द अपना कोताह देखना
क़द्रो मंज़िलत घट जाये या कोताह फ़हमी से काम में नुक्सान आये।
23. क़द अपना दराज़ देखना
उम्र कम हो रंजों ग़म को तूल हो हिमाकत से हर काम में ग़फ्लत हासिल हो।
24. क़त्ल करना आदमी को
मोरिदे जुल्मो जफ़ा या अयाल अपनी मुसीबत में मुब्तिला हो मगर मक़तूल को नफ़ा पहँचे तरक़्क़ीये दौलत व इक़बाल हो।
25. क़स्साब आशना को देखना
अगर हाथ पकड़े ख़ता में मुब्तिला हो और खुद उसके साथ चले जुल्म आशना हो।
26. कस्साब को पकड़ते देखना
कोई ओहदा या काम ऐसा पाये जिस पर तंबीहो बिदअत पायी जाये।
27. कस्साब अजनबी को देखना
जुल्मो जोर मे मुब्तिला हो हज़रत इज़राईल का सामना हो।
28. कुफ्ल खोलते देखना
काम बंदोबस्त का मिले , हुस्ने तदबीर से अंजाम को पहुँचे।
29. क़लमदान देखना
औरत मिले , वज़ारत या सिफ़ारत हो और अफ़जूँ दौलतो इक़बालो राहत हो।
30. कुफ़्ल खुश क़ता देखना
रोज़ी कुशादा हो और बन्द करना खुशी से आज़ादी हो।
31. क़लम को देखना
हुक्मरानी शहर की या मम्लिकत हाथ आये हाकिम का मुंशी हो या फ़रज़व्द पाये।
32. क़ैद होना या कैद करना
मर्द निकाह करे औरत देखेतो शौहर मिले दौलतमन्द हो जाये रंजो ग़म दूर हो।
33. क़बा पहनना
औरत पारसा से निकाह करे औरत खुश हाल राहत पाये।
34. क़ै करना
सफ़ाई दिल की हो राहत मिले दफेए अमराज़ हो सेहत मिले।
35. क़राबा करना या देऱना
अगर अपने पास देखे बूढी औरत मिले और अगर कराबा से शर्बत या पानी पिये पीरजन से फायदा पहुँचे।
36. कब्र खोदना
नया मकान ख़रीदे या बनवाये दौलत ख़ातिर ख़्वाह पाये।
37. कब्र से बाहर आना
बीमारी जाये सेहतमंद हो फिक्रे तरद्दुद से निजात हो।
38. कब्र से मुर्दे निकलते देखना
गुमशुदगी की खुशख़बरी पाये या ग़ायब आकर खुद मिल जाये।
39. क़रना देखना
मकरूहाते दुनिया में मुब्तला हो या किसी हादसे या खबरे बद का सामना हो।
40. क़नाद देखना
किसी सरदार से दौलत मिले या किसी औरत शीरीं गुफ्तार से हलावत मिले।
41. कन्द का कूज़ा देखना
औरत मलीह शकर गुफ्तार या फ़रज़न्द खुश अतवार मिले।
42. क़ैफ़ देखना
वस्ले महबूब हो नामाबर आये या क़ासिद पैग़ाम रसाँ हो।
43. कयामत बरपा देखना
कामों मे तरक़्क़ी हो मुराद बर आये कतखुदा हो जाये।
44. कसरे शाही देखना
क़सर में दाखिल हो तो जाहो मंसब हासिल हों अगर बाहर आये ओहदा व मरातिब से माजूल हो।
45. क़लईगर को देखना
ज़ेबो ज़ीनत की निशानी है मूजिबे दफ़ए नहूसत है।
46. कम्ची खाना और देखना
अगर ख़ौल निकले या दर्द हो नहूसत की निशानी है अगर बरअक्स हो दलीले फ़रहत है।
47. क़रदिल को देखना
शिकार उम्दा तरीन हाथ आये किसी से माल पाये या निकाह करे।
48. कालीन पर बैठना या देखना
अगर कुशादा देखे वुस्अते रिज़्क हो तूले हयात पाये अगर कोताह देखे रोज़ी घटे।
49. क़बाला मिलना या देखना
रियासत और हूकूमत की दस्तगाह हो कुव्वत व मंफअत ख़ातिर ख़्वाह हो।
50. क़ाज़ी
ख़्वाब में किसी जाहिल का अपने आपको बनता देखना रंजो अलम में गिरफ़्तार होने का सबब है अगर कोई ख़्वाब में क़ाज़ी बने तो
इज़्ज़तो हुकूमत हासिल करने का मोजिब है।
51. क़दम के निशान या कल्बूत
ख़्वाब में कदम के निशान देखना मुताबेअत से ताबीर है।
52. क़ालिब (ढाँचा)देखना
ख़्वाब में जूते या मोज़े का कालिब औरत ख़ादिम पाने से ताबीर है।
53. क़स्द करना
किसी कामका कस्द करना हिम्मतव ताकत से ताबीर है।
54. क़िस्सा बयान करना
बेहूदा और लायानी कामो में पड़ने का बाएस है।
55. क़लिया
अगर क़लिया पानी से रकाया जाये और खुश्क ज़ायका हो तो मंफ़अत का सबब है।
56. क़ै (उल्टी)
अगर खुलकर आती देखे तो तायब होने का बाएस है।
57. कैद
अगर गुनाहगार अपने आपको कैदखाने में देखे तो दीन के गुमराही का बाएस ग़मो अन्दोह में मुब्तला हो।
(काफ़-क)
1. कुर्सी को देखना
बादशाही मिले मज़ीद नेअमत हो तरक़्क़ी व इज़्ज़तो हुकूमत मिले।
2. कुर्सी नशीन आपको देखना
क़द्रो मंज़िलत बुलन्द हो अज़ीज़ हो ख़िदमते ख़ल्क खुदा बेहदो इन्तिहा हो।
3. कुर्सी पर से गिर पड़ना
नैकरी से बरतरफकाम से माजूल हो नुफ़्लिसी से ग़मगीनो मुलूल हो।
4. काबा देखना
सरवतो बुजुर्गी या अमन ख़ौफ से पाये या मीरास का लथ आये।
5. काबे की तरफ या अन्दर जाना
माजूल देखे तो मश्गूले कार हो मुसाफिर को अज़ीज़ों का दीदार हासिल हो।
6. किरामन कातेबीन को देखना
पर्हेज़गार देखे तो नेकी पाये अगर मुफ़सिद देखे ग़मो सख़्ती उठाये।
7. काफूर देखना
मंफ़अत और ख़ैरो बरकत पाये।
8. कबूतर देखना
औरत हो तो इमसाल पर तमीज मिले या दूर से कोई अज़ीज़ आकर मिले।
9. कबूतरो की टुकड़ी देखना
दौलत नफ़ा बेअन्दाज़ा मिले बीमार को शिफ़ा से फ़रहत ताज़ा मिले।
10. कोड़े खाना या मारना
कोड़े खाना और कोड़ों के निशान बदन पर जज़हिर होना रंजो अलम में मुबितला होने का बाएस है।
11. ख़जूर
देखना या पाना माल और मुराद का हुसूल है।
12. खाना
अगर खाना बदमज़ा खाये तो रंजो अलम में मुब्तिला होने ओर बामज़ाऔर शीरीं खाना इशरतो खुशी हासिल होने के मुतरादिफ है।
13. खुर्प का इस्तेमाल
ख़्वाब में खुर्प से घास या खुर्द पौदों को साफ करते देखना गुनाह से पाक होने का मोजिब है।
14. कोयल
ख़्वाब में कोयल की आवाज़ सुनना मुतीअ होने से ताबीर है।
15. खोलना
ख़्वाब में किसी गाँठ या किसी चीज़ का खोलना अंजाम पाने से ताबीर है।
16. कीचड़
ख़्वाब में देखना मसायबो गुनाह से ताबीर है।
17. केसर (ज़आफ़रान)
अपने पास देखना या पाना मशहूरो मअरूफ होने से ताबीर है।
18. केकड़ा देखना
बुज़दिल और कम हिम्मती सें ताबीर है।
19. केला
देखना या खाना दौलतमन्दो किये माल और दीनदारों के लिये दीन से ताबीर है।
20. करगस देखना
दौलत तन्दरूस्ती की दलील है कुव्वत और खुशदिली की दलील है।
21. कबक देखना
मर्द को औरत खुश ख़ल्क़ मिले औरत देखे तो संगदिल मर्द मोम हो जाये।
22. कव्वा देखना
मर्दो औरत खुद कामो मक्कार मिले औरत को मर्द फ़ासिक़ अय्यार मिले।
23. कव्वा यानी तालू बड़ा देखना
तँगीऐ रिज़्क और दलीले कुल्फ़तो परेशानी है।
24. कल्लाग़ को शिकार करते दखना
माले ग़नीमत काफ़िरोँ का हाथ आये मोहताजो को फ़ायदा पहुँचाऐ।
25. कछुवा पाक मक़ाम मेँ देखना
दौलत और दीन से खुर्रमो मस्ररूर हो आलिम बाअमल अहले दिल मशहूर हो।
26. कछुवा नाजिस खाने में देखना
ज़वाले दौलतो इल्मो हुनर हो सदमा व ख़ौफ़ो ख़तर हो हुजूमे सदमा व ख़ौफ़ हो।
27. कलंक को देखना
हाकिमे वक़्त का हबीब रहे फ़ाय़दा मन्द खुश नसीब रहे।
28. कुत्ता देखना दुशमन ज़ईफ़ का सामना हो लेकिन ज़रर से बचे।
29. कलंग का शिकार देखना
कोई सरदार या औरत दाम में आये फ़ायदा उससे उठाये।
30. कुत्ता भौंकते देखना
कमीनों से ख़्वाह मख़्वाह रद्दो बदल रहे बदअस्ल का सरदार हो।
31. कुत्तो को राम करना
औरत सलीमुत्तबाअ हाथ आये।
32. कुत्ते को कपडा फाड़ते या काटते देखना
दश्मन के हाथ से खिफ़्फ़त पाये मालो बर्बाद हो जाये।
33. कुत्ते को सर पर हगते देखना
दौलत हराम की पाये या बद कार औरत घर में में लाये
34. कुत्ते को सर पर पेशाब करते देखना
मालो दौलत तलफ़ हो जाये हुर्मत जाये ज़िल्लत पाये।
35. काँसी खाना
खुद बखुद किसी से दुश्मनी हो जाये ज़रर उठाये।
36. कलीद देखना
बादशाह का ख़ज़ांची या साहिबे खाना हो बन्दा सख़ी यगाना व बेगाना हो।
37. कलीदे आसमान मिलना
मतलबे दिली बर आये तरक़्क़ीऐ रिज़्क हो बीमारी से सेहत पाये।
38. कुंजी से कुफ्ले दर खोलना
औरत बाकिरा से सोहबत हो तरक़्क़ीये दौलतो इक़बाल हो।
39. कुंजी बहिश्त की पाना
काफ़िर देखे ते कल्मा पढ़े दीनदार देखे तो उस्तवारीये दीन व ईमान हो।
40. कुर्ता या पैराहन देखना
किसी औरत से फ़ायदा पहुँचे या कोई नफ़ाए कुल्ली देखे।
41. कपड़ा खून आलूदा
कोई दुश्मन हसद से इफ़्तरा बाँधे वज़ादारी में धब्बा लगे।
42. कपड़ा धोना
रंज से रिहाई हो किसी अज़ीज़ से रंजिश दूर सफ़ाई हो।
43. कफन पहनना या देखना
उम्र दराज़ सरदार से ख़िल्अत पाये ग़म दुनिया से बे नियाज़ हो पोशाक पहनने में आये।
44. कुश्ती लड़ना
अगर मुक़ाबिल को ज़ेर करे फ़ायदा पहुँचे अगर खुद ज़ेर हो तकलीफ़ में पड़े।
45. कश्ती पर सवार होना
सरदार से कोई ओहदा या काम पाये तरक़्क़ीऐ दौलत इक़्बाल हो।
46. कश्ती दरिया में देखना
मुफ्लिसी दूर हो दौलत से फ़ायदा उठाये।
47. कश्ती से किनारे उतरना
माल हाथ आये कुल्फ़त दूर हो दुश्मन पर फ़तहो नुसरत हो।
48. कश्ती समेत आपको डूबते देखना
बादशाही मुहासबे में पड़ जाये दौलत तबाह हो रंज उठाये।
49. कश्ती खुश्की में अटकना
दामे रंजो बला में फँसजाये मकाफ़ात ज़ाया होने का ख़ौफ़ हो।
50. किरन आफ़ताब की देखना
औरत मालदार मिले नेक अख़बार से बिमार को शिफ़ा हो राहत बे इन्तिहा हो।
51. काजल आँख में लगाना
बसारत ज़्यादा हो बच्चो से दिलशाद हो।
52. खाल जानवर की खींचना
अगर गोश्त उसका हलाल हो इज़्ज़तो मंफ़अत हो और अगर मुदार्र या गौश्त उसका हराम हो नुक़्सान उठाये नाकाम हो।
53. कमन्द देखना
सख़्त कामों से दोचार हो या शुजाअत पेशा जुर्अत शेआर हो।
54. काग़ज मिलना या देखना
अगर बा ख़ते नस्ख़ लिखा देखे माले दुनिया से मुस्तफ़ीद हो अगर कागज़ सियाह हो हाजत से ना उम्मीद हो।
55. काकुल बनाना
फ़ाहेशा औरत से इश्क हो सदमए फुर्क़त हो।
56. कलीस देखना
मशरेका औरत से बेहुर्मत हो।
57. कमान खीचना
सफर सख़्त पेश आये दौलतो बुजुर्गी पाये शामिले हाल की नअएमत हो।
58. कमान में तीर लगाना
औरत चुस्तो चालाक पाये खुद सफ़र में जाये या बेटा भाई सफ़र से आये
59. कमान में तीर लगाना
औरत हामिला देखे बच्चा हो मर्द देखे मेहनत में पड़े।
60. कमान व तीर अपने वास्ते बनाना
शाहे अजम या औरत अजमी से फ़ायदा पहुँचे बेइज़्ज़त व तौक़ और दौलत मिले।
61. खाल इन्सान की देखना
किसी बुजुर्ग से मीरास पाये मोहताज हो तो ग़नी हो।
62. खाल इन्सान की देखना
बीवी मिलने की निशानी है मोजिबे आराईशे हुकूमत है।
63. खाल बकरी की देखना
माले हलाल रोज़ो हो दुश्मन पर फ़िरोज़ हो।
64. कंवल रौशन देखना
फ़रज़न्द ऐसा हक शनास पाये जिससे बाप का नाम रौशन हो।
65. खेत देखना
तवल्लुदे दुख़्तर नेक अख़्तर तरक़्क़ीये ज़ैबो ज़ीनत है।
66. खेत को देखना
मज़ीद इल्म व दौलत और नेअमत मिले सुरूरे क़ल्ब व सर सब्ज़ी का असर है।
67. खेत काटते देखना
महबूब से जुदाई क़ताए सोहबत और आशनाई हो।
68. खेत जंगल में हरा देखना
दुश्मनों का हुजूम हो थोड़ी तकलीफ़ के राहत हो।
69. खेत खुशक को हरा देखना
औरत हामिला हो नेअतो इल्मो हुनर हो।
70. कोतवाल देखना
बादशाही फ़ौज का अफ़सर बने ज़र्बदस्त व जुल्मे नाहक करे।
71. कीचड़ में गिरना या फँसना
औरत ज़िश्त ख़ूब को अक़्द में लाये रोज़ की रद्दो बदल से आफियत तंग हो।
72. कबाब खाना
मसरूर हो कुल्फ़ल सारी दूर हो।
73. कबाब भूनना
रंजो मुसीबत चाश्नी मौत की ज़बान पर आये।
74. खिचड़ी देखना या खाना
औरत देखे शादी हो मर्द बीवी पाये आपस में मोहब्बत रहे।
75. कमर देखना
शफ़्ता औरत बदखू हो दोस्तो से तुर्श रू हो।
76. कद्दू देखना
पर्ह़ज़गार बीवी लाये फ़ायदा उसकी ज़ात से पाये।
77. करंकल्ला देखना
नेअमत खाये शुक्रे करे अमीर हो लगर जारी करे।
78. कासूकला खाना
रफ़ए बीमारी हो बख़्त व बारी सरसब्ज़ी पाये।
79. ककड़ी खाना
बुजुर्ग मर्बता हो मालो दौलत पाये इज़्ज़त पाये।
80. किशमिश देखना
शौकतो दबदबा सिवा हो जाये दौलातो नेअमत पाये।
81. कमर का टूटना
भाई मर जाये जैसा कि सय्यदु श्शोहदा (अ.) ने फ़रमाया मेरी कमर टुट गई।
82. कमरबन्द बाँधना
कुव्वत व सेहत पाये हर तरफ़ तवानाई हो।
83. कचनाल की कली पुख़्ता खाना
तआम लज़ीज़ खाये बिमारी रफ़ा हो औरत कमसिन मिलने से नफ़ा हो।
84. कऐ में गिरना या गिरते देखना
हाकिम देखे ओहदे से माजूल हो रईय्यत देखे तो नौकरी जाने से मुलूल हो।
85. कूज़ागर को देखना
मर्द बाख़ैरो बरकत हो तरक़्की जाहो हशमत हो।
86. कूज़ा देखना
औरत नाज़नीन हुक्म बरदारी करे या लौंडी बाकिरा हमबिस्तर हो ग़मख़्वारी करे।
87. कोह का लरज़ना या गिरना
वालीए मुल्क परआफ़त आये या वहाँ का ज़मींदार मर जाये।
88. कोह क़ाफ़ की सैर करना
शाहे हफ़्त किश्वर ,सिकन्दर जाह तसर्रूफ शशजेहत में उसका ख़ैर ख़्वाह हो।
89. कोहे तूरे सीना पर आपको देखना
बादशाह मोतमद हो , मुराद बर आये बुलन्द मर्तबा हो या ओहदाए सिफ़ारत पाये।
90. कंघी बालों में करना
ग़मो रंज दूर हो।
91. कंघी मिलना या देखना
औरत आशुफ़ता दिल से मोहब्त हो दिल से मोहब्बत हो दफ़ा दुशमन हो को राहत हो।
92. कंघी पुरानी गुम होना
ग़म से फ़ारिगुल बाल मर्सरत शामिले हाल हो।
93. कड़ा हाथ का देखना
औरत देखे औलाद मिले ,मर्द देखे जिन्दान से छूटे या पाँव से बन्देगराँ टूटे।
94. कान देखना
निकाह करे या ख़बर नेक सुनने में आये।
95. कान अपना कटा देखना
बहन या फूफी मर जाये ग़मो रंज पाये।
96. कान जुदा देखना
बीवी को तलाक दे या औलाद की मौत का ग़म हो।
97. कान चौड़ा या लम्बा देखना
दास्तान गोयों से सोहबत हो झूठी बातों से दिल को रग़बत हो।
98. काना आपको देखना
मुसाफ़िर होतो राह भूल जाये फ़रज़न्द की मौत का ग़म पहुँचे।
99. काने को देखना
चश्मे बद दूर राहत मिले औलाद की तरक़्क़ी देखे।
100. काना जोया देखना
औरत खुश नसीब व आली नसब मिले औलाद अहल , अल्लाह हो फ़रहतो दौलत पाये
101. काफ़िर होना
तरक़्क़ी माल की हो या कोई मर्ज़ बढ़ जाये राहत रहे ज़हमत उठाये।
102. काँटा देखना
महबूब की बेवफ़ाई ज़ाहिर हो बदकारी व ख़यानत में माहिर हो।
103. कफ़श साज़ को देखना
बड़ीमेहनत से कुछ फ़ायदा मिले तदबीरो मेहनत अक्सर ज़ाया हो जाये।
104. कटनी को देखना
लोगों को फ़िर अज़ीज़ों को आराम रहे।
105. किताब लिखना
शादी व फ़रह और मंफ़अत व माल कीनिशानी है।
106. किताब खोलकर पढ़ना
लोगों से मुबाहेसा व तकरार हो कदूरत और रंजिश में गिरफतार हो।
107. कजावे में बैठना
हुकूमत पहुँचे माल व हशमत मिले।
108. कपड़ा जला हुआ देखना
ख़ैरोबरकत से दूर हो दोस्त दिल सोज़ दुश्मन ज़रूर हो।
109. कपड़ों का बदन या लिबास में देखना
तरक़्क़ी हशमत व जलाल हो ज़्यादती फ़रज़न्द व माल व दौलत हो।
110. कपड़ों का बंदन या लिबास से दूर करना
अहलो अयाल से दूरी हो , तल्ख इशरत रंज व महजूरी हो।
111. कूडा करकट घर में जमा देखना
हूसूले नेअमतो माल की निशानी है दलीले खुर्रमी व शादमानी है।
112. कूड़ा अपने घर का किसी को जलाते या ज़ाया करते देखना।
बादशाह या हाकिम उसका माल छीन ले तंगदस्ती से निहायत रंजो ग़म पहुँचे
113. कुप्पा घी का देखना
उम्र दराज़ हो ख़ैरो बरकत हाथ आये औरत मिले या माल मीरास औरतों का पाये।
114. कज़दम खूराहको देखना
दलील दुश्मन सख़्ती व रंज उठाये।
115. किरन फूल देखना
औरत मालदार मिलने की उम्मीद है और जेवर उसका बनवाने की निशानी है।
116. कुलाह सर पर पहनना
मर्द देखे तोसरदार हो जाये औरत देखे तो शौहर मालदार हाथ आये।
117. कुलाह तितरी देखना
अफ़सरी और बेहतरी पाये मक्रो फ़रेब से रोज़ी हाथ आये।
118. कंबल औढ़ना दुर्वेश दीनदार तारिके दुनियाऐ ना पायेदार हो.
119. कतान को देखना
हसीन लोंडी या बीवी मिले रोज़ी हलाल पाकीज़ा फ़रज़न्द नेक नाम मिले।
120. कमाल देखना
रोशनी आँखों की औरज़्यादा हो इल्मो हुनर वाला हो।
121. कफे दरिया को देखना
बादशाह या किसी बुजुर्ग से नफ़ा हो कुल्फ़तो मुफ्लिसी दुर हो।
122. कलेजा खाना
माले हलाल ब आसानी खाये रोज़ी का दर आसानी खाये रोज़ी का दर खुले।
123. खुर्पा देखना
बेकार लियाकत पसन्द आये मेहनत से रोज़ी कमाये।
124. करबा देखना
किसी औरत सब्ज़ रंग को बहका लाये या बीमारी से सेहत पाये।
125. कतीरह देखना
मर्द बख़ील से थोड़ा नफ़ा हो तकलीफ रफ़ा हो।
126 कनूल गट्रटा देखना
बीमार को सेहत मिले दिल को राहत पहुँचे मुफ़्लिसी से दौलत मन्द या फ़रज़द पैदा हो।
127. कोला खाना या देखना
औरत हसीन और मालदार शैदा हो मालो दौलत मिले या दुख़्तर खुश इक़बाल पैदा हो।
128. कोला देखना
मुब्तिला व बलो मेहनत हो हामिले कुल्फतो नहुसत हो।
129. कातना
ख़्वाब में कातना कपड़ों की तिजारत करना और उससे फ़ायदा हासिल होने की अलामत है।
130. काश्तकारी
. ख़्वाब में काश्तकारी करना तरक़्की इज़्ज़त और किसी बुजुर्ग से फैज़ हासिल करने के मुतरादिफ़ है।
131. काँपना
ख़्वाब में जिस्म कापना अमानत में ख़यानत करने की अलामत है।
132. कागज़ ख़रीदना
इल्म से ताबीर है।
133. कांजी पीना
ग़मो अन्दोह से ताबीर है।
134. खटाई
ख़्वाब में तुर्श चीज़ बिल्खूसूस खटटे मेवो का खाना ग़मो अलम से ताबीर है।
135. किर्केट खेलना
दोस्त में मोहब्बत बढ़े और गुमशुदा अज़ीज़ के मिलने की ताबीर है।
136. कड़क सुनना
लोगों से ख़ायफ होने की दलील है।
137. किसान ख़्वाब में किसान को काम करते देखना मुतवक्किल होने की दलील है।
138. कुल्हाड़ी देखना
ख़ौफ़नाक और मुनाफ़िक़ मददगार के मुतरादीफ है।
139. कौड़ी देखना आवारा और ख़ादमा औरत से ताबीर है।
(गाफ-ग)
1. गाजर देखना
मौसम में मालो दौलत की निशानी है ग़ैर मौसम में अन्देशा व पशेमानी है।
2. गोबर देखना
दौलत पाये फ़रज़न्द तवल्लुद हो हाजत बर आये।
3. गोभी देखना
औरत पाये या दुख़्तर पैदा हो राहत पाये।
4. घास हरी देखना
माले दुनिया से बेनियाज़ रहे जहाँ सरफराज़ रहे।
5. गुलाब देखना
मोहतरम व आली मर्तबत हो माल में नफ़ा हो रफए हाजत हो।
6. गुल सुर्ख बाग में देखना
औरत ज़रदार या लौंडी बाकिरा पाये माले दुनिया से मालामाल हो जाये।
7. गेंद देखना
औरत फ़रबेह परमाया से माल मिले या मकानो ज़मीन का मालिक हो जाये।
8. गाय को देखना
अगर फ़रबेह देखे अर्ज़ानीए ग़ल्ला हो दौलत पाये और अगर लाग़र देखे तो गरानी हो तकलीफ़ उठाये।
9. गधा लदा हुआ देखना
तरक़्क़ी माल व दौलत है मकरूहातसे छूटने की निशानी है।
10. गधा पाना या देखना
औरत ख़ीला से साबेका हो।
11. गघे पर सवार देखना
अगर सुर्ख रंग है इशरत की अफ़ज़ानीए
12. गोटा
ख़्वाब में गोटा देखना ज़ाहिर दारी से ताबीर है।
13. गवईय्या
किसी गवईय्ये को या खुद गाते देखना फ़ित्ना व फ़साद की तरफ मायल होने का मोजिब है।
14. घुटना देखना
ऐशे इशरत से ताबीर है।
15. धघरू देखना
लड़ाई झगड़े से ताबीर है
16. गीदड़े देखना
गीदड़ की तलाश करता देखे और गीदड़ न मिल सके और न पकड़ा जा सके तो बीमार होने की अलामत है।
17. गीरजा
गीरजा में जाना और वहाँ इबादत करना गुनाहों से तौबा करने के मुतरादिफ है।
18. गरजना बादल का सुनना
बीमारी से शिफ़ा होने और किसी अच्छी ख़बर सुनने के मुतरादिफ है।
19. गर्द उड़ना
ख़्वाब में गर्द उड़ते देखना मुसीबत पड़ने के मुतरादिफ है।
20. गुर्द का दर्द
दर्दे गुर्द देखना सफ़ाईये क़ल्ब का बाएस है।
21. गुर्ज़ देखना
दौस्त सादिक से ताबीर है।
22. गिरोह
ख़्वाब में गिरोह देखना या किसी गिराह में शामिल होना फ़ित्ना व फ़साद से ताबीर है।
23. गढ़ा
ख़वाब में ज़मीन का गढ़ा माले मर्करर से ताबीर है।
24. गुलबन्द
अगर ख़्वाब में गुलूबन्द सोने या चाँदी का जिस क़दर बेश कीमत मोतियों से जड़ा देखे उसी क़दर मंज़िलत हासिल करने के मुतरादिफ़ है
25. गुलकन्द
ख़्वाब में जिस क़दर गुलकन्द देखे उसी क़दर मालो नेअमत हासिल होने का सबब है।
26. गुलदस्ता
बनाना फित्ना फ़साद से ताबीर है।
27. गन्ना
अगर कोई शख़्स ख़्वाब में गन्ना पाये या खाये तो मालो नेएमत हासिल करने के मुतरादिफ़ है।
28. गुन्बद
औरत से ताबीर है।
29. गोफिया
अगर ख़्वाब में किसी पर गोफिया चलाये तो उस शख़्स पर नफ़रत करने का सबब है।
30 गोर
ख़्वाब में गोर का देखना दुनिया से नफ़रत और दिन की रग़बत से ताबीर है।(बाक़ी ताबीर कब्रमें देखे)
31. गोदड़ी देखना या पाना या पहनना
बुलन्दीए मर्तबा से ताबीर है।
32. गोंद
ख़्वाब में गोंद बचे कुचे माल से ताबीर है।
33. गूँधना
आटा गूँधना दुरूस्तीए दीन से ताबीर है
34. गोह
ख़्वाब में गोह दुश्मन से ताबीर है।
35. गोह
ख़्वाब में गन्दगी का देखना रिज़्क हासिल होने से ताबीर है।
36. पीले गधे पर सवार होना
रंजूरी (ग़म) की निशानी है। दलील पशमुर्दगी (थकान) व पशेमानी है।
37. गधा ख़रीद के घर मे बाँधना
नेअमत व मालो दौलत ज़यादा हो बाबे ऐशो तवंगरी ज़्यादा हो।
38. गधे से उतरना
दिली मतलब बर आये राहतो आराम पाये।
39. गधा अपना अंधा देखना
माले अमानत ज़या दफ़ीना गुम हो जाये तकलीफ़े मआश से रंजो अलम खाये।
40. गधा अपना खच्चर होते देखना
सफर को जाये मंफ़अत हो माले दुनिया से ग़नी हो खुरसनदी मिले।
41. गधा अपना घोड़ा बनते देखना
बादशाह हो जाये या सरदरीहो या किसी चोर से फ़ायदा पाये।
42. गघ अपना बिलाऊ बनते देखना
माल फ़रेब से हाथ आये या किसी चोर से फ़यदा पाये।
43. गधा अपना बकरी बनते देखना
माले हलाल बिला मेहनत पाये अगर मुफ़्लिस हो तो तवंगर हो जाये।
44. गधा ज़ीब्हा करके गोशत खाने का अज़्म करना
ज़ाया अपनी मआश करे दौलतमन्दी व तवंगरी तलाश करे।
45. गधा अपना बाघ को खाते देखना
बीमार हो मगर जल्दी शिफ़ाए कामिल पाये नुक्सान माल का ज़रर हासिल हो।
46. गधा अपना चोर को ले जाते देखना
बीवी या लौंडी से बदकाम हो औरत को तलाक़ दे।
47. गधे की आवाज़ सुनना
बीवी से बेसबब ख़फ़ा हो बदकारी में खुद गिरफ्तारे बला हो।
48. गधा पीठ पर लादना
दस्तगीरी बख़्त को मंजूर हो तंगदस्ती और कुल्फ़त दुर हो।
49. गेंडा देखना
एताबे शाही मे गिरफ़्तार हो दौलत क़वी और ग़मख़्वारी हो।
50. गेंडा बँधा देखना
किसी सरदार का मुसाहिब हो आली कद्र हो।
51. गद या माशा आमोख़्ता देखना
बादशाही पाये दुशमन पर फिरोज़ी हो मक़सद बर आये फ़रज़न्द की रौज़ी हो।
52. गेंडे पर सवार होना
तरक़्क़ीए दौलत व शुजाअत हो दुमन पर फ़तहो नुसरत हो।
53. घोडी देखना
औरत आली वकार से शादी हो मुराद बर आये
54. घोड़ा देखना
किसी विलायत का फ़रमारवा हो या दरबार का फ़रमारवा हो या दरबार में मंज़िलत हो।
55. घोडे पर सवार होना
महसूले जाहो सरवर हो वफूरे मालो दौलत हो।
56. घौड़ा मश्की देखना
बादशाह या हाकिम आली जाह हो या औरत ताबेदार हो।
57. घोड़ा अशहब देखना
दौलत सरदारी मिले मकरूहाते दुनिया से रस्गारी मिले।
58. घोड़ा अबलक़ देखना
शुजाअत में शेर हो जुर्अत मे सवार बहादुर ख़ल्क में मशहुर हो
59. घोड़ा समन्द या वजदा देखना
ज़ख्म खाये जिस्म पर या बहुत ज़्यादा बीमार हो सदका देने से बला दुर हो।
60. घोड़ा उड़चल देखना
नहुसतो बीमारी या मौत की निशानी है।
61. घोड़े पर किसी के साथ बैठना
हाकिम की पेशदस्ती करे या हुकूमत पाये दुश्मन पर ग़लिब हो या ग़ैर की औरत घर में लाये।
62. घोड़ा दौड़ाना
फ़ौज का अफ़स या नदीमे शाह हो आसमाने दौलतो इल्म का माह हो।
63. गाड़ी या रथ पर सवार होना
मालो दौलत मिले कद्रो मंज़िलत बढ़े।
64. गेंहु देखना
रोज़ी रंजो ख़िफ़्फ़त से पाये माल बड़ी मेहनत से मिले।
65. गिरह नान देखना
दोस्त या भाई से उल्फ़त बढ़े ख़दिमा या रफिक़ मिले।
66. घी खाना या देखना
मालो दौलत की निशानी है बाएस रफ़ए रंज व ख़िफ्फ़त है।
67. गरम पानी पीना
शद्दते तप हो बीमारी तुल खींचे देर मे सेहत हो।
68. गुल देखना या तोड़ना
बच्चा पैदा हो खुशख़बरी की निशानी है मालो दौलत हाथ आये।
69. गर्दन पर सवार होना
औरत अफ़ीफा व जमीला या कनीज़ नेक सीरत मिले।
70. गर्दन कट के सर से जुदा होना
मोमिन को हजो ज़ियारत बीमार को शिफ़ा हो मुराद बर आये क़र्ज़ से निजात हो।
71. गोस्फन्द या गाय कुर्बानी करना
ग़मों अन्दोह सख़्त से रिहई हो कुल्फ़त जाये बीमारी से शिफ़ा हो।
72. गोस्फन्द गुम हो जाना
मालका नुक़्सान ज़्यादा हो रंजो ग़म में मुब्तिला हो।
73. गोस्फ़न्द की कलेजी देखना
मालो दौलत की निशानी है।
74. गोस्फ़न्द का गुर्दा देखना
औरत शरीफ़ कमसिन पाये।
75. गोस्फ़न्द का का गुर्दा किसी से पाना
माले ग़नीमत हाथ आये
76. गाऊ सियाह पर बैठना
सरदारी पाये या मालो दौलत बेशुमार मिले फ़िक्रे मईशत से निजात हो।
77. गौसाला देखना
दौलतो माल बे अन्दाज़ा पाये लोंडी या गुलाम हब्शी या बीवी मालदार मिले।
78. गौसाला घर में ले जाना
मुसीबत में पड़ जाये दिन रात रंजो ग़म खाये
79. गोबर में देखना
हलीलो नेअमत की निशानी है ख़ैरो बरकत की अलामत है।
80. गोश्त ख़ाम देखना
माले हराम खाये भाईयों सें रंजिश हो जाये।
81. गोशत पुख़्ता खान
बादशाह से ईनाम रईयत पेशकशे दैलत करे।
82. गोश्त सीमुर्ग खाना
बादशाह से दौलत या ओहदा पाये मर्तबा बुलन्द काम बाला हो जाये या औरत पारसा से कतखुदा हो दुख़्तर पाकीज़ा उससे पैदा हो।
83. गोश्त गाय का खाना
माले मिरास हाथ आये दौलत बेशुमार मिले।
84. गोश्त गधे का खाना
तर्क अपनी मआश करे दौलत बेशुमार मिले।
85. गोश्त सूवर का खाना
तआम नजिस या माले हराम पीये बेहुर्मतो बेहया मशहूर हो जाये।
86. गोश्त नेवले का खाना
लड़ाई मे नामवर हो बुजुर्गी व इज़्ज़त पाये।
87. गोश्त सूवर खाना
लड़ाई मे नामवर हो जाये।
88. गोश्त मछली या भेड़ का खाना
माल औरत सर्फ़ में लाये बेनियाज़ और मालामाल हो जाये।
89. गोश्त कछुऐ का खाना
मर्दुमेदहकानी से नफा हो।
90. गोश्त शतुरमुर्ग का खाना
मर्दुमे दहकानी से नफ़ा हो मुफ्लिसी रफा हो।
91. गोश्त दुन्ब का खाना
बादशाह ज़लिम रहम खाये दिर्हमो दीनार अता फ़रमाये।
92. गोश्त खरगोश का खाना
किसी औरत से कोई चीज़ पाये या और मालदार हाथ आये।
93. गोश्त साँ का खाना
दुश्मन का माल तसर्रूफ़ मे आये दुश्मन रंगे दोस्ती लाये।
94. गोश्त छिपकली का खाना
माले हराम किसी मुफ़्सिद से आये तसर्रूफ़ में लाये।
95. गोश्त बिल्ली का खाना
माल चोरी का बक़द्र उसके हासिल हो मुर्दार ख़्वारीए मर्दम आज़ारी पर मायल हो।
96. गोश्त अल्कल्क का खाना
किसी ज़मीदार का मदारूल मुहाम हो जाये किसी दहक़ानी का माल खाने में आये।
97. गोश्त उल्लू का खाना
माल चोरी या रिश्वत खाये मुर्दार ख़्वारी ख़ातिर आये।
98. गोश्त कुमरी या बीरन का खाना
किसी हसीन औरत से माल मिले लुत्फे सोहबत से उसकी खुश होवे।
99. गोश्त अबाबील का खाना
माल दुश्मन का जांकाही से पावे या बीमार हो जावे।
100. गोश्त बटैर का खाना
रिज़्क़े हलाल पाये या लड़ाका औरत मिले।
101. गोश्त का खाना
कोई पलीद औरत जादू करे दाम में अपने फरेबो मक्र में फाँसे।
102. गोश्त मुर्गाबी का खाना
बुर्ज़ुगी और सरदारी पाये या कहीं का हाकिम हो पाये।
103. गोश्त हुमा का खाना
बख़्त उसका बुलन्द हो जाये या किसी सुल्तान से नफा पाये।
104. गोश्त चर्ख़ का खाना
फरज़न्द से नुक़्सान पाये सदमा व अन्दोह व ग़म पाये।
105. गोश्त साही का खाना
मुख़ालिफका माल खाये फतहो नुसरत ग़ैब से पाये।
106. गोश्त लोमड़ी का खाना
मकरूहाते दुनिया से रिहा हो लेकिन माले हलाल खाने से रिहा हो।
107. गोश्त नहंग का खाना
माल ज़ाल बेहद व बेइन्तिहा पाये क़द्रो मंज़िलत जहान में बढ़ जाये।
108. गोश्त हाथी का खाना
बादशाह से माल व नेअमत पाये नर्दे मुफ्लिस तवंगर हो जाये।
109. गोश्त रीछ का खाना
कोई सदमा ज़रूर दिल पर हो माले हराम मयुस्सर हो
110. गौरख़र को खाना
किसी अमीरो कबीर से ईनाम मिले।
111. गैरख़र का शिकार करना
बख़्त यावर हो ग़निमत का माल मिले तवंगरो मे इज़्ज़तो हुर्मत बढ़ जाये।
112. गौख़र का मग़ज़ पाना
किसी सरदार से सोहबत बढ़े हज़ार दिर्हम पाये
113. गौरिस्तान देखना
उम्रे रफ़्ता का अफसोस करे अन्देश वपरेशानी हाथ आये।
114. गौरिस्तान पर जाना
मकरूहाते बेजा मे फँसे अपना बेगाना किनाराकश हो जाये।
115. गोश्वारा मिलना
औरत कीज़ीनत बढे फरज़न्द की रोज़ी हो मर्द को माल से नफा व दुश्मन पर फ़िरोज़ी हो।
116. गोशवारए मरवारीद चुनना
मर्द देखे तो हाफ़िज़ कुर्आनो आरिफ़े रहमान हो औरत देखे शौहर से मोहब्बत बढ़े फ़रज़न्द जने।
117. घर ज़मीन पर बनाना
दुनिया मे नेक काम हो दो जहान में नेकी मिले।
118. घर सोने का देखना
माल बर्बाद हो अस्बाबजल जाये मुफ़्लिसी से रंज उठाये।
119. घर नयाकारो मुनक़्क़श देखना
महबूब हसीन से दिल लगाये खुद छुप कर जाये या उसको बुलवाये।
120. घर में ग़ैर का जाना
दुश्मन पर फ़तह व ज़फर पाये दिलेरी और कुव्वत बढ़ जाये।
121. घर में आतिशकदा देखना
बादशाह से बड़े काम निकलें बीमार को शिफा हो राहतो आराम पाये
122. गाजर देखना
सख़्ती व रंज की निशानी है मोजीबे तफक्कुरो परेशानी है।
123. गाजर खाना
फ़रहतो इंबिसात हासिल हो सेहते नफ़्सो कूवते दिल हो।
124. गाली खाना
फ़लाकत से परेशान हाल ,तरक़्क़ी फक्र हो।
125. गुढ़ काला देखना
नहूसत की निशानी है सदक़ा दे ताकि आराम हो।
126. गाँव में जाना
अगर आबाद है रोज़ी व मंफ़अत पाये और वीरान देखे तो परेशानी मिले।
127. गाना सुनना
बेहूदगी और मुसीबत से ताबीर है।
128. गाऊज़बाँ देखना या खाना
जंगो जिदाल से ताबीर है।
129. गतगा देखना तरक़्क़ीए कुव्वतसे ताबीर है।
130. गदाई करना
कोशिशो हिम्मत से ताबीर है।
131. गिध देखना
परिन्दो के सरदार से ताबीर है।
132 गुज़रगाह (रास्ता)
उसपर चलते देखना दीन स ताबीर है।
(लाम-ल)
1. हज़रत लूत (अ.) को देखना
औरत खुदकाम फ़रेब से राम करे पशेमानी व ख़िज़ालत दे बदनाम करे।
2. लूती को देखना
बदकामों पर सबकत हो सर्फ़ बेजा से तंग राहत हो।
3. लौहे महफूज़ देखना
इल्मो हिक्मत से फायदा उठाये खुशनवीसी में नामवर हो।
4. लाल देखना
हसीन औरत शाईस्ता औलाद मिले मुस्तग़नीयुलमाल हो दौलतो नेअमत मिले।
5. लाल को देखना या आवाज़ सुनना
ख़ैरो बरकत और कसरते औलाद हो दौलत ज़्यादा ख़ाना आबाद हो
6. लोहार को देखना
बादशाही मुलक या अफ़सरी फ़ौजहो मालो असबाब से हासिल तवंगरी हो।
7. लोहा या लोहे की चीज़
बख़्त यावर हो रोज़े बद न देखे ऱईस के बाएस बुजुर्ग काम मिले
8. लौंडी ख़रीदना
मालो नेअमत की निशानी है।
9. लीज़म मिलाना
रक़्कासा से मुबाशरत (नाचने वाली से सेक्स करेगा) , कुव्वत हो, दुश्मन का सामना हो, सदका दे बला रद हो।
10. लंगूर देखना
दुश्मन का सामना हो, सदका दे, बला रद हो।
11. लश्कर को देखना
तरक़्क़ीये शिकोह व हशमत या
बाराने रहमत बकसरत हो।
12. लोमड़ी पकड़ना या पाना
औरत या लोंडमक्कार हाथ आये माल का नुक़्सान हो बर्बाद हो आये।
13. लोमड़ी से खेलना
औरत कम्सिन बियाह लाये या लड़की पैदा हो या किसी से फ़रेब करे कसब की उठाये।
14. लड़का छोटा मसरूफ देखना
तवल्लुदे फ़रज़न्द की खुशी हो।
15. लड़का मज़हूल बदसूरत देखना
दुश्मन सख़्त का सामना हो रंजो महनत में मुब्तिला।
16. लड़का हसीन बालिग देखना
तरक़्की ए जाहो जलाल हो।
17. लड़की हसीन देखना
मालो नेअमत की दलील है।
18. लड़की कम्सिन मशहूर को देखना
बादशाह या किसी सरदार का मुशीर हो ओहदए बुजुर्ग और इज़्ज़तो तोक़ीर मिले
19. लोबिया देखना
माल हलाल पाने की निशानी है सेहत होने नेअमत पाने की दलील है।
20. लहसुन और प्याज़ देखना
तरो ताज़ा देखे तो नेअमत और कामरानी खुश्क दोखो तो नाकामी और पशेमानी हो।
21. लौंगचुड़े खाना
औरत खुश अख़लाक बाज़ारी मिले या मर्द खुशबाश से सोहबत हो।
22. लगाम देखना
औरत हमेशा हुक्म बरदारी करे दुश्मन और बदगोयों की ज़बान बन्द रहे।
23. लौंग देखना या बाँटना
नेकनामी में शोहरा आफाक़ हो ख़ल्क़ में मशहूर खुश अख़लाक़ हो।
24. लिबास देखना
रेशमी माल मतलूबा हो सरसब्ज़ी की बशारत है ज़र्द बीमारी आसमानी मुसीबत की अलामत है।
25. लिबास हलावी अरग़वानी या गेरूवा देखना
दौलतो ख़ैरो मफअत पाये कोई मुहिम पेश आये जुमराऐ फुक़रा में दाखिल हो।
26. लिबास धानी पहनना
औरत से सोहबत हो या किसी मर्दे मुक़द्दस से मफंअत हो।
27. लिबास सियाह पहनना
मातमो हुज़्नो मलाल की कामिल दलील है सदमा जानकाहो रंजिशें दिल हो।
28. लिबास सियाह फरोख़्त करना
सौदागरी से मुंफअत पाये किसी अज़ीज़ से रंजिश पैदा हो।
29. कलक को कोठे पर देखना
हाकिम के सामने क़द्रो मंजिलत पाये या कोई सरदार उसके घर में आवे।
30. लिहाफ देना देखना या ख़रीदना
बीवी हामिला हो या कनीज़ बाक़िरा ख़रीदे इज़्ज़त बढ़े मर्तबा बुलन्द हो।
31. लक़वे से मुँह अपना टेढ़ा देखना
राह मनाफी व कजी पसन्द आये
32. लीमू या लऊक चाटना
अगर शीरीं है दलीले ख़ैरो बरकत है और अगर तुर्श है निशानीये शरो कुल्फत है।
33. लड़ना किसी हैवान से और ज़ेर करना
दुश्मन पर मुज़फ़्फर और मंसूर हो रंजो ग़म और फिक्रो तरद्दुद हो।
34. लड़ना अजनबी लोगों से
रंजो ग़म में मुब्तिला हो फित्ना व फसाद बरपा हो।
35. लड़ाई शहर या गाँव में देखना
ताऊन व वबा का शोर हो या मुल्क में ज़ालिमों का दौर हो।
36. लाठी देखना
बाइज़्ज़त और बुज़ुर्ग होने की दलील है।
37. लस्सी
ख़्वाब में लस्सी ख़रीदना ग़मो अन्दोह में मुब्तिला होने और उसका पीना बीमारी में मुब्तिला होने का बाऐस है।
38. लकड़ी से कोई चीज़ बनाना
ख़्वाब में लकड़ी तराशना या लकड़ी से कोई चीज़ बनाना किसी मुनाफिक़ का खैर ख्वाह होने के मुतरादिफ है।
39. लिखना
ख़्वाब में कुछ लिखना मक्र व हीले से किसी का माल लेने से ताबीर है।
40. लंगड़ा
अपने आप को लगड़ा देखना लोगों की नीगाह में ज़लील और मख़्लूत में बदनाम होने से ताबीर है।
41. लूट
अगर ख़्वाब में लोगों को अपना माल लूटते देखे रंजो अलम में गिरफ़्तार होने की अलामत है।
42. लोटा
ख़्वाब में ताँबे या भरत का लोटा ख़ादिम से ताबीर है।
43. लीद
गाये या घोड़े की लीद देखना मालो नेअमत की दलील है।
(मीम-म)
1. हज़रत मूसा (अ.) को देखना
दुश्मन मामून रहे ज़फ़र पाये अदू हलाक हो दिली मुराद बर आये।
2. हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा स. को देखना
शरफ़ दोजहान का मिले सआदत और कद्रो मंज़िलत बढ़ जाये।
3. मीज़ान बुर्ज को देखना
हाकिम या सरदार आलीजाह हो माले दुनिया से नफा मिले।
4. मीकाईल को देखना
रोज़ी कुशादा हो रंजो ग़म से आज़ाद हो रहमते परवरदिगार हो मुस्तग़नी हो।
5. मुश्तरी को देखना
बादशाहका वज़ीर हो दुनिया में इज़्ज़तो तौक़ीर हो या औरत साहिबे जमाल व माल मिले।
6. मिर्रीख़ को देखना
लश्कर का सिपाह सालार हो या क़ौम का सरदार हो , खुश अतवार हो।
7. मस्जिद जामा में जाना
ख़ैरो बरकत हासिल हो हज से मुशर्रफ और काबे में दाखिल हो।
8. मस्जिद बनाना
नेक रोज़ी ख़ैरो बरकत पाये।
9. महराबे मस्जिद मे पुश्त करके बैठना
मंज़िलते दुनिया से रिहा हो।
10. मस्जिद जामा देखना
बादशाह या क़ाज़ी या शहर कोतवाल हो।
11. मस्जिद आबाद या बनते देखना
बुजुर्गो से काम पेशआये बरकत पाये।
12. मस्जिद में नमाज़ पढ़ना
सफ़र को जाये माल बहुत सा पाये।
13. मस्जिद में सवारो को देखना
मुसलमानो पर काफिरों का जुलम हो , शहर में मुशरिकों का दौर हो।
14. मिम्बर या मिनारा देखना
रईसे क़ौम या शहर का क़ाज़ी हो।दौलत से ग़नी हो।
15. मिम्बर या मिनारा पर जाना
मर्तबा बुलन्द हो रियासत पाये अगर अमीर है जाहो हशम फूजूँ हो।
16. मिनारा गिरते या टुटते देखना
बादशाह या हाकिम से ज़रर पाये हुक्कामका हाल जूबूँ और सुस्त हो जाये।
17. मोअज़्ज़िन देखना
मोमिनो परर्हेज़गर हो।
18. मुश्क को देखना
बादशाह की मेहर्बानी हो शोहरतो कामरानी हो।
19. मुश्क को देखना
बुजुर्गो साहिबे अख्लाक हो नामवरी में शोहरा आफ़ाक़ हो और लौड़ी माल शौहरो आक़ा का पावे , अगर सूँघे तो फ़रहते मशाम मिले।
20. मगर को देखना
दुश्मन का सामना हो मुसीबत में मुब्तिला हो।
21. मछलियाँ देखना
औरत मालदार मिले कसरत से दिर्हमो दीनार मिले।
22. मछली का गोद में आना
औरत हसीनो मालदार मिले दौलतो इज़्ज़तो विकार मिले।
23. मछली के शिकम से कुछ पाना
माले दुनिया से तवंगर हो मर्तबा दोजहान में बरतर हो।
24. मार माही (पानी का साँप) को देखना
ज़रर पहुँचे ओहदे से माजूल हो फलाकत से मुलूल हो।
25. मर्ग़ाबी पकड़ना
बादशाह या हाकिम राम हो तरक़्क़ी व इनाम हो।
26. मुर्ग़ाबी देखना
औरत से फ़ायदा पहुँचे तरक़क़ी हो इक़बाल हो।
27. मुर्ग़ाबी की आवाज़ सुनना
खुशख़बरी कोई सुनने में आये या महबूब से पयामे वस्ल आये।
28. मुर्ग़ाबी को ज़िब्हा करना
औरत बाकिरा से मुबाशेरत हो या दरबार में सुर्खरूई व इज़्ज़त हो।
29. मुर्ग़ पर बोझ लादना
कोई मुलाज़िम बेदाद करे या औरत फित्ना व फ़साद करे।
30. मुर्ग दस्तार लिये जाते देखना
बीवी से बेहुमती का काम हो मर्द अजनबी वाला मारा जाये सर उसका बदन से उतारा जाये।
31. मुर्ग को बाँग देते सुनना
तरक़्क़ीये इस्लाम हो।
32. मुर्ग़ज़ार की सैर करना
तिजारत में मंफअत हो उम्र सारी आराम से गुज़रे दुश्मन का सामना हो लेकिन जल्द मग़लूब हो।
33. मच्छर कसरत से देखना
दुश्मन का सामना लेकिन जल्द मग़लूब हो।
34. मोती का दाना बुजुर्ग देखना
औरत पारसा से निकाह हो माल मीरास से फलाह हो।
35. मोती दाना खुर्द देखना
लोंड़ी जमीला हाथ आये या दुख्तर नेक अख़्तर पाये।
36. मोती बेचना
लोगों को इल्म हुनर का शादी हो खुशी पाये
37. मोती बींधना
कुर्आने मजीद का मुफ़स्सिर हो जाये या औरत बाकिरा तसर्रूफ मे आये।
38. मोती की लड़ी बनाना
हाफ़िज़े कुर्आनो सुख़्नदाँ हो तवल्लुदे फरज़न्दान हो।
39. मोती पिरोना शायर मुंशी बेनज़ीर हो बादशाह के दरबार में बड़ी तौकीर हो।
40. मूंगा देखना
दैलत बेअन्दाज़ा पाये कोई नाजुक अन्दाम औरत हाथ आये।
41. मेंहदी हाथ पाँव में लगी देखना
औरतके लिये आरास्तगी व ज़ीनत है मर्द के वास्ते तरक़्क़ीये माल व दौलत है
42. मिटटी को देखना
माल या दफ़ीना हाथ आये बादशाह या अमीर से फ़ायदा उठाये।
43. मूली लेना या देखना
रोज़ी हलाल , दुख़्तर नेक अख़्तर या बीमारी से सेहत तन्दुरूसती पाये
44. मिर्च देखना या खाना
सियाह देखे तो सेहत और राहत हो सुर्ख़ देखे तो मरज़ की निहायत शिद्दत हो।
45. मुज़अफ़र खाना
नेक औरत से शादी हो।
46. मवीज़ मुनक़्क़ा खाना
माल व मंफ़अत कसरत से मिले सेहते इज़्ज़तो तौकीर मिले।
47. माँ के शिकम से पैदा होना
हजो ज़ियारत से मुशर्रफ़ बर तरफ हो जाये रफ़ए दिल से फ़ेलसूनि व मक्कारी हो।
48. मिठाई खाना या पाना
तरक़्क़ीये मालो इज़्ज़ो जाह या तवल्लुदे फ़रज़न्द हो
49. मेहनत को देखना
नहूसतो बला का सामना हो अन्दोहोग़म मेम मुब्तिला हो।
50. मूंग व माशव मसूर को
बीमारी में मुब्तिला हो रंजो अलम का सामना हो।।
51. मेदा वग़ैरा देखना
अन्दोह से रिहाई दौलत व बख़्त की रसाई हो।
52. मेंह बरसते देखना
अपने घर मेम देखे तो दौलतो कामरानी हो और शहर या गाँव में देखे तो दौलत की अर्ज़ानी हो।
53. मकड़ी देखना
ज़ाहिदे गोशानशी हो ख़न्दाए ख़ल्क से हक के क़रीन हो।
54. मुर्दे को देखना
माल नजिस या हराम किसी से पाये या बड़ा काम बिगड़ने से पछताये।
55. मुर्दे से बातें करना
काम बिगड़ा हुआ संवर जाये जिससे मायूस हो मक़सद बर आये।
56. मुर्दे को उठाये जाते देखना
माले हराम किसी से मिले राहतो आराम में फ़ितूर पड़े।
57. मय्यते मारूफ़ के जिन्दा होते देखना
अगर बशक्ले नेक मिले तो खुशी व राहत मिले और जो बसूरते जिश्त पाये रंजीदा व परेशान हो।
58. मुर्दे अजनबी को देखना
माले गुमशुदा या दफीना या कोई चीज़ बेमतलब मिले।
59. मुर्दे अजनबी को देखना
माले गुमशुदा या दफीना या कोई चीज़ बेमतलब मिले जाये।
60 मुर्दो की जमाअत देखना
दलीले तंगदस्ती व परागंदगी है निशान बेनिशानी या कम ज़िन्दगी है निशान बेनिशानी या कम ज़िन्दगी है।
61. मुर्दे की आवाज़ पर चलना
बेवतन हो या हलाकत का सामना हो सदका ज़रूर दे ताकि रद्दे बला हो।
62. मुर्दे को नहलाते देखना।
कुल्फतें दूर हों खुशी पाये या गुमराहो को राहे रास्त बतलाये।
63. मुर्दे का ज़िन्दा से कुछ माँगना
रंजो नहुसत कमाल हो दौलत का ज़वाल हो।
64. मुर्दे को बरेहना सोते देखना
मर्दे की दलीले रस्तगारी है ख़्वाब में देखने वाले की बख़्तयारी है।
65. मुर्दे के पीछे मकान मजहुल में जाना
अगर रह जाये तो कज़ा दरपेश हो और जो निकल आये ग़म से दिल रेश हो
66. मुर्दे को कुछ देना
माल गुमशुदा मिल जाये फ़ायदा हो मुराद बर आये।
67. मुर्दे के साथ खाना खाना
दौलतो नेअमत मिले दीनो दुनिया में राहत पाये।
68. मुर्दे से मुबाशरत करना
बाद मायूसी उम्मीद बर आये अय्याशी से ज़िल्लत उठाये।
69. मुर्दे को अपने साथ करते देखना
औरत देखे तो गौहरे मकसूद पाये मर्द देखे तो हुर्मत ज़ाया हो जाये।
70. मुर्दे को अपने बिस्तर पर देखना
उम्रदराज़हो दौलत से बेनियाज़ हो।
71. मर्दा अपने को देखना
तूले हयात हो तरक़कीऐ दर्जात हो या सफ़र दरपेश आये दौलतो शादमानी पाये।
72. मर्दा दफन करते देखना
अपने हाथों माल जाया करे रौज़े बद देखे।
73. मर्दा फ़रज़नद ज़िन्दा देखना
नेअमुलबंदलमिलने की बशारत है तलाफी दौलत माफ़ात की अलामत है।
74. मर्दे को कुछ देना
ख़ैरौ बरकत पाये फ़ारिगुल बाल हो जाये।
75. मुर्दे ज़वान अजनबी को देखना
बीवी से ख़यानत हो किसी शख़्स से अदावत हो।
76. मर्द अधेड़ या बढ़ा देखना
दौलत इकबाल पाये बख़्तयावर हो बादशाह दोस्त दुश्मन पर जफर हो।
77. मर्द पीर का आपको जवान देखना
सरदारी या बादशाहत पाये दौलत मालो हुकूमत पाये।
78. मुर्दे जवान का अपने आपको बुढा देखना
तरक़्कीओ इक़्बाल हो रोज़ अफ़जूँ हशमतो जलाल हो।
79. मुर्दे पीर को आपको तर्नाक देखना
बादशाह का रफ़ीके सादिक हो सरदारी कीउम्मीदे वासिक हों।
80. मक़ना देखना
दोनों शौहर बीवी शादमान होँ।
81. मक़ना या लिबास जलते देखना
मर्द देखे तो बीवी मर जाये या औरत देखे तो शौहर का ग़म खाये।
82. मक़ना सर बाँधना
मर्द देखे तो बीवी या जारिया हाथ आये औरत को शौहर मिले।
83. मक़नातीस देखना
औरत बुत परसत या मुशरिका का इश्क हो
84. मक़्तल के देखना
मोरिदे बला व आफ़त हो खोफ़ो ख़तर में मुब्तला
85. मज़मीर बजाना या पाना।
बीवी से राहत पाये शग़ले ऐश व तरब में पड़ जाये
86. मुऐ ज़हार देखना
कम देखे तो माले हलाल मिले दिलको फ़रहत हो और अगर दराज़ देखे तो परेशानी और नक्बत हो।
87. मुऐ ज़ेहार मुँडते या उखाड़ते देखना।
ख़्वाहिश औरत की बेइन्ति हो या औरत मालदार बदकार आशना हो।
88. मदीना शरीफ़
ख़्वाब में देखना तरक़क़ीये इल्म और दीनो दुनिया की बेहतरी का बाएस है।
89. मुर्दार संग ख़्वाब में देखना रंजो बीमारी व अज़ाब में मुब्तिला होने का बाएस है।
90. मर्वारीद
ख़वाब में देखना गुलाम या कनीज़ या फरज़न्द से ताबीर है।
91. मरहम
ख़्वाब में ज़ख्म पर लगाना किसी ख़ैर काम की कोशिश और दीन कीइस्लाह से ताबीर है।
92. मुसल्लह
ख़्वाब में मुसल्लह अपने आपक देखना अपने शहर या कस्बे या गाँव के लोगों पर हाकिम होने के मुतरादिफ़ है।
93. मुसलमान होना
आगर ख़्वाब में आपको मुसलमान होता देखे आफ़तो बला से महफूज़ रहने का मोजिब है।
94. मिस्वाक
अगर ख़्वाब में मिस्वाक करता देखेतो माल ख़ैरात करने औप सवाब हासिल करने का मूजिब है।
95. मुश्तज़नी
ख़्वाब में मरने का ग़म पहुँचे।
96. मुस्तगी (गोंद)
खाना गुफ्तगू करने से ताबीर है।
97. मश्क देखना
ख़ाली देखना बुख़्ल और पानी भरीमश्क देखना सखावत के मुतरदिफ है।
98. मक्की
रिज़्क़ से ताबीर है।
99. माजूल होना
किसी मुलाज़ेमत या ओहदे या सरदारी से मैजूल होते देखे तो दीन की ताबीर है।
100. मक्का शरीफ़
अगर अपने को मक्का शरीफ में देखे तो ज़ियारते काबा और हज करने की दलील है।
101. मक्ख़न देखना
नेअमत हासिल होने के मुतरादिफ है।
102. मलमल देखना
और ख़रीदाना औरत से सोहबत से ताबीर है।
103. मंदील (रूमाल)
सर पर बाँधना इज़ज़त हासिल होने का मोजिब है।
104. मोर
नर मोर देखना बादशाहे अजम से ताबीर है।
105. मौठ देखना
तंगदस्ती और तहीदस्ती में मुब्तला होने का मोजिब है।
106. मोज़ा
मोज़ा पहनते देखना पर्दादारी से ताबीर है।
107. मोम
सफ़ैद मोम देखना माल व नेअमत से और ज़र्द मोम का देखना बीमार होने के मुतरादिफ है।
108. मेहमान
ख़्वाब में मेहमानी करना किसी चीज़ के ज़माहोने का सबब है।
109. मीरास
मीरास का झगड़ा तय करना या देखना दीन की गुमराही और दुनिया की मोहब्बत से ताबीर है।
110. मेवा
मेवा तुर्शो शीरीं ख़ैरो बरकत से ताबीर है
111. महर देना या देखना
मर्दौ ज़न को आपसम् राहत मिले अज़ीज़ो को उस्तवीरीऔर कुव्वत मिले।
112 मोहरा मार पाना
औरत दौलतमन्द से सोहबत हो।दिल को फरहत मिले।
113. मिंजनीक देखना
सुखनचीनी या बद़बानी से बदनाम हो ख़ल्क़ नफ़रत करे बेतौक़ीर हो बदनाम हो।
114. मुँह से कुछ निकलते देखना
अगर वो चीज़ हलालो पाक हो नेअमत पाये अगर नजिस हो या हराम तो रंज उठाये।
115. मोहरा कागज़ का देखना
नामा सरबस्ता या कीसा हाथ आये या अख़बारो वहशत के आसार सेघबराऐ।
116. मँह में कुछ जाते देखना
नेअमत व माल ग़ैब से पाये रोज़ी ज़्यादा हो जाये।
117. मनी बदनमें कपड़े में देखना
औरत अय्याश मिले यफ़रज़नद पैदा हो रात दिन ऐशोतरब मे मुब्तिला हो।
118. महाज़ या महल देखना
औरत पर्दानशी से सोहबत हो।
119. मसरह में रहना
औरत पजमीला व शकीला राम हो
120. मवाख़ेज़ा में आपको देखना
बीमार हो या तकलीफ़ पाये या हाकिमे वक्त मुंहरिफ हो जाय़े।
121. मुँछ चढ़ाये देखना
कोशिश से मुराद बर आये दिलेरी से मालो दौलत मिले।
122. मुँछ उख़ाड़ते देखना
फिक्रो तरद्दुद में मुब्तला हो रंजो अलम हो
123. मुँछ अपनी सफैद देखना
जुल्मते कुफ्र दफा हो जाये सुबहे उम्मीद जल्वा दिखाये।
124. मुँछ कतरना
खूबी व बेहतरी की दलील है।
125. मुँछ दराज़ देखना
दौलतो हशमत बढ़े।
126. मेखे आहन पीठ मे चुभते देखना
फ़रज़न्दे आलीजाह हो आलिम या हाकिम पैदा हो।
127. मेख़ दीवार में ठोंकना
मर्दे बुजुर्ग से दोस्ती हो।
128. मीख ज़मीनमें ठोंकना
औरत बाकिरा से मोहब्बतहो पहले कुछ रंज फिर राहत मिले।
129. मशअल अपने हाथ में देखना
बादशाह से मालो दौलत मिले सरफ़राज़ी व राहत व इज़्ज़त मिले।
130. मकतब देखना
इल्मों हुनर में ताक नेक कामों में शौहरा आफ़ाक़ हो।
131. मखियाँ देखना
मकरूहाते दुनिया दरपेश हो या किसी हाकिम का मुलाज़िम हो।
132. मंज़ज पीना
जियार तंदरूस्ती पाये इस्लाहे कारोबार हो जाये।
133. मातम करना
खुशी हासिल होने से ताबीर है।
134. (पेशानी) देखना
इज़्ज़तो मर्तबा से ताबीर है।
135. मारना
किसी को मारनाकिसी अमीर शख्स से नफा पहुँचे।
136. माजू
अगर दरख़्त सेमाजू जमा करता देखे तो रंज और सख़्ती से माल जमा करने के मुतरादिफ है।
137. माल देखना
रंजो ग़म से निजात पाये और खैर व बरकत हासिल होने के मुतरादिफ है।
138. मिटटी का तेल देखना
नाबकार औरत से ताबीर है।
139. मटका देखना
ऐसे मुनाफिक़ से ताबीर है जिससे माल ज़ाया होने का अन्देशा है।
140. मजलिसे इल्मो अदब
अगर ख़्वाब में किसी मजलिसे अदब में देखे तो किसी इमारत की तामीर करने का मोजिब है।
141. मजलिसे शराब
अगर कोई ख़्वाब में शराब की महफिल देखे और शराब न पिये तो हराम और फित्ना व फसाद में गिरफ़्तार हो।
142. महल
ख़्वाब में महल में जाना और मौजूद होना माले मतलूबा हासिल होने से ताबीर है।
(नून- न)
1. हज़रत नूह (अ) को देखना
उम्र दराज़ हो दौलतो औलाद से दिलशाद हो लेकिन कुछ मेहनतो रंज उठाये बाद उसके राहत व आराम पाये।
2. नूर आसमान पर देखना
दोस्त या हबीब से सुलह हो जाये या तवल्लुदे फरज़न्द की खुशी हो।
3. नमाज़ बाजमाअत का पेशवा होना
कौमे शरीफ का सरदार हो जमीयत व दौलत बेशुमार हो।
4. नमाज़ बे तहारत या ख़िलाफे क़िब्ला पढ़ना
बेमसरफ व बेसूद काम करे मेहनत व मशक़्क़त अपनी खो दे।
5. नमाज़ सोते में पढ़ना
सेहत व नेअमत पाये सआदते दारैन हाथ आये।
6. नमाज़ बेतकबीर इशारे से पढ़ना
सफर दूर का करे या बीमारी की सख़्ती उठाये लेकिन अग़लब है इस साल में मर जाये।
7. नमाज़ मशरिक़ की तरफ पढ़ना
इसी साल हज को जाये बुजुर्गी व इज़्ज़ो शरफ पाये।
8. नमाज़ आसमान की तरफ पढ़ना
ग़मो अलम से रिहाई हो फरहतो खुरर्मी हो।
9. नौशाह को देखना
शादी खाना आबादी हो
10. निकाह करना
दौलतो इक़बाल पाये मुफ्लिसी और तंगदस्ती जाये।
11. नाखुन दराज़ देखना
दुश्मन पर ख़ातिर ख़्वाह फतह पाये।
12. नमदा
सफैद या पाकीज़ा नमदा देखे तो माले हलाल हासिल होने की अलामत है।
13. नंगा होना
ख़्वाब में नंगा देखना तालिबे दुनिया होने की अलामत है।
14. नौशादर देखना
ग़मो अन्दोह से ताबीर है।
15. नौकर रखना
अगर किसी का नौकर रखना देखे तो इज़्ज़त और मर्तबा हासिल होने की अलामत है।
16. नहाना
दरिया में नहाता देखे तो उसका रंजो अलम कम होने की ताबीर है।
17. नहर
नहर का देखना हाकिमे वक्त और बड़ी नहर का देखना वज़ीरे सल्तनत से ताबीर है।
18. नई चीज़ देखना
अगर दिलचस्प और नई चीज़ देखे तो ख़ैरो बरकत हासिल होने का सबब है।
19. नीचे उतरना
तनज़्ज़ुल से ताबीर है।
20. नियाज़ देना
किसी खाने पर नियाज़ देना दिली मुराद पूरी होने और कारोबार मिलने की अलामत है।
21. नीलोफ़र
अगर ख़्वाब में मौसम पर नीलोफऱ का फूल देखे तो मंफ़अत का बाएस है।
22. नाखून टूटा देखना
अज़ीज़ो अर्क़बा से रंज पाये आराम में खलल पड़ जाये।
23. नाख़ून टूटा देखना
अज़ीज़ो अर्क़बा से रंज पाये आराम में ख़लल पड़ जाये।
24. नाक हद से बड़ी देखना
फ़र्माबरदार औरत मुनाकेहत हो दौलतो उम्र बढ़े कसरते औलाद हो दौलतो
25. नाक से खून बहना
दौलत बेअन्दाज़ा पाये माले हराम से तवंगर हो जाये।
26. नाक से पानी बहना
औरत हामिला हो फरसन्द मिले अगर ज़मीन पर गिरते देखे दुख़्तर पैदा हो।
27. नाक धोते देखना
औरत देखे तो मर्द फ़रेब दे मर्द देखे तो मक़्कारी करे।
28. नाक कूज़े में रगड़ते देखना
कोई मर्द उसकी औरत को फ़रेब में लाये बेहुर्मती का सामाना हो जाये।
29. नाक से नथ गिरते देखना
शौहर से कुछ रंज देखना या औलाद दूसरे की तरफ मंसूब हो जाये।
30. नाक हद से छोटी देखना
मर्द बेशर्मी अख़्तियार करे।
31. नाक पर नाक या बाल देखना
कुल्फ़तो मुसीबत में मुब्तिला हो अज़ीजों से फ़साद या झगड़ा हो जाये।
32. नाक अपनी कटी देखना
खिफ़्फ़तो शर्मिन्दगी पाये जहाँ में अगुश्तनुमा हो जाये।
33. मनी की जगह खून निकलना
हामिला औरत का पेट गिर जाये माल का नुक़्सान हो।
34. नाक किसी की कटी दखना
दुश्मन की इज़्जत गँवाये खुरर्मी व तैक़ीर बढ़ जाये
35. नेअमत पाना
बादशाह देखे तो मुल्क ताज़ा मिले रइय्यत देखे तो हज़ार या सौ दिरहम हाथ आये
36. नान ख़ताई देखना
माले हलाल से इज़्ज़त मिले
37. नान खुश्क देखना
फ़लाकत में बसर औक़ात हो।
38. नबात खाना या देखना
अमनो बरकत हज़ार दर हज़ार मिले हलावते नेअमत पाये खैर नेक मिले नेअमत पाये।
39. नमक देखना
औरत हसीने बाकिरा मिले तरक़्क़ी माल की हो हम सोहबत से लज़्ज़त और हलावत हो।
40. नमक देखना
दौलतो हशमत बहुत हो रंज से राहत मिले बीमारी से शिफ़ा हो।
41. नमकदान देखना
औरत हसीनो बाकिरा मिले तरक़्क़ी माल की हो हम सोहबत से लज़्ज़त और हलावत हो।
42. नारंज खाना या देखना
बीमारी और दिलरेश की निशानी है।
43. नारियल देखना
मर्द देखे तो शादीहो औलाद से घर आबाद हो औरत देखे तो दुख़्तर जने।
44. नीब के साये में बैठना
माँ बाप के साये में उम्र गुज़ारे रफ़ए अमाराज़हो राहत मिले।
45. नर्गिस के फूल मिलना
किसी महबूब का मुंतज़िर दीदार हो।
46. नर्गिस को बाग़ मेंनीलोफरको तालाब में देखना
बीवी या लौंडी हामिला हो दुख़्तर न्क अख़्तर तवल्लुद हो।
47. नसीमे चमन से फूल खिलना
औरत बाकिरा से शादी हो या किसी महबुब तक रसाई हो।
48. नाज़ब को देखना
साहिबे इक़बाल फ़रज़न्द पैदा हो दौलते दुनिया से मालामाल हो ,
49. नशा शराब से मख़मूर होना
दौलते दुनिया से मालामाल हो ,
50. नर्दबान देखना
बीवी मुवाफ़िक़ और फरमा बरदार पाये मर्तबा बुलन्द हो दोस्तों को फ़ायदा पुँचाये।
51. नशा शराब से बखुद होना
रंजो बला में पड़े ज़िल्लतो ख़्वारी पाये।
52. नर्दबान पर चढ़ना
मर्तबा बुलन्द हो दौलतमन्द या महबूब से विसालत हो मक़सद दरी या राहत हो।
53. नर्दबान से उतरना
ख़ैरो बरकत बेश हो लेकिन कुछ तरद्दुद पेश हो।
54. नक़्क़ारा पाना
वज़ारत या नज़ारत या हुक्मरानी हो या शादी की नोबत पहुँचे दफ़ए परेशानी हो।
55. नक़्क़ारे की आवाज़ सुनना
अजनब औरत से औलाद हो या औरत नामवर मिले या अज़ीज़ो से फ़साद हो या फौज का अफ़सर हो।
56. नेवला देखना
जियाँकारी की इशारत है दुशमन से ज़रर पहुँचने की अलामत है।
57. नहंग को देखना
चोर घर में आये या अक़ारिब से लड़ई हो
58. नेवला पकड़ना या मारना
चोर गिरफ़्तार करके दुश्मन पर फ़तहमन्दी मिले।
59. नहंग के मुँह में जाना
दुशामन से ख़ौफे हलाकत हो अजल नज़दीक पहुँचे।
60. नेज़ा देखना
सरदारी हो या सफ़र को जाये या हसीन औरत पाये
61. नरसंघ देखना या बजाना
फ़लाकत या अजल का सामना हो।या किसी मोहलिक मर्ज़ मे मुब्तिला हो।
62. नरसंघ की आवाज़ सुनना
मुकब्तलाए फ़साद हो।
63. नदी या नाले मे गिरना
तरक़्क़ी व दौलत व इक़बाल हो या हशमतो इजलाल हो।
64. निहाल देखना
औरत राहत रसाँ पहुँचाये।
65. नील बनाना
हाजत रवा हो मतलब बर आये मुशिकल आसान हो मेहनत ज़ाया हो जाये।
66. नब्ज़ को देखन
सुस्त चलते देखे उम्र दौलत की तरक़्क़ी समझे और तेज़ देखे थोड़ी तकलीफ पाये।
67. नील गाये को देखना
बीवी नेक ख़स्लत हो जाये।
नौरह देखना निदामते दुनिया से रिहा हो य़फ़रहत और राहत मिले।
69. नाच देखना
औरत अय्याश मिले।
70. नजासत का देखना
दौलत बेबरकत माले हराम मिले।
71. नामर्द आपको देखना
बदकारी से छूटे मंकूहा बीवी से रंजिश हो।
72. नश्तर से जिस्म चाक करना
औलाद का मलाल पाये बीवी से रंजिश हो।
73. नगीना चाँदी या लोहे का देखना
हुर्मत पैदा हो जाने की अलामत है।
74. नसीहत करना
गुमराहो का रहनुमा हो दुनिया में इज़्ज़त ज़्यादा हो।
75. नट का का बाँस पर चढ़ते देखना
मर्तबा बुलन्द हो लहब लअब से खुर्सनद हो।
76. नाई को देखना
मोम़िनो दीनदार हो दीन के कामों में रहनुमा हो।
77. निशास्ता देखना
माले हलाल तिजारत से हासिल हो रोज़ी महनत से मिले।
78. नौहा मसाईबे अहलेबेत में पढ़ना
ग़मे दुनिया से निजात हासिल हो खुल्द में जागीर हासिल हो शादकाम हो जाये।
79 नाबीना
अगर कोई शख़्स अपने आपको ख़्वाब में नाबीना देखे तो गुमराहीये दीन का बाएस है।
80. नाप
नाप का ख़वाब में देखना एल्ची या बैगामबर से ताबीर है।
81. नापाक देखना
नापाक होता देखे तो हराम कारी मे हैरानो परेशान होने का बाएस है
82. नारंगी देखना
नेक है
83. नाफ़
औरत और उसकी ख़ादिमा से ताबीर है।
84. नान देखना
दोस्तों से मुलाकात और दराज़ीये उम्र का बाऐस है।
85. नूजूमी
अपने आपको नूजूमी देखना हाकिमे वक़्त से इज़ज़त और मर्तबा हासिल होने की दलील है।
86. नअल देखना
माल से मुतरादिफ़ है।
87. नुक्सान
ख़्वाब में नुक़्सान देखना माल के नुक्सान का मोजिब है।
88. नस्वीर
नस्वीर लेना ग़मों अन्दोह में मुब्तिला होने की अलामत है।
(वाव- व)
वजू करना
ग़ैब से हाजत रवाई हो मिन्नते ख़ल्क से रिहाई हो।
2. वज़ीफ़ा पढ़ना
बाएसे अमनो बरकत तरक़्क़ीये दौलतो फ़रहत हो।
3. वस्ली बनाना
इस्लाह कार में मशगूल हो खुशनवीसी में मक़बूलहो।
4. वज़ीर हो जाना
सरदारी व कामरानी की बशारत है तरक़्क़ीये दौलत व इकबाल की बशारत है।
5. वकील को देखना
किसी मक़क़ार से मामला पेश हो मक्रो फ़रेबसे मुक़ाब्ला हो।
6. वादी
ख़्वाब में वादी का नहर में गिरना ग़मो अन्दोह मे गिरफ़्तार होने और उससे निकलना रंजो अलम से निजात पाने की अलामत
है।
7. वारिस बनाना
ख़्वाब में किसी वारिस का माल लेना किसी अज़ीज़या आशना की ख़बरे मर्ग पहुँचें।
8. वायज होना
अगर वअज़ करता देखे तो ज़ाहिर में फ़ायदा
9. वाली
अगर अपने को किसी का वाली होता देखे तो इज़्ज़तो आबरू बढ़ने का बाएस है।
10. वसीका नवीस
अगर वसीक़ा नवीसी करता देखे तो दुनियावी मोहब्बत में फँसने और माले हराम खाने का सबब है
11. वस्मा
लगाना या देखना मक्रो फ़रेब में मुब्तिला होने का मोजिब है।
12. वलीयुल्लाह
वलीयुल्ला को देखा जाये तो ख़ैरो बरकत हासिल होने की अलामत है।
13. वहशी
अपने आपको वहशी देखना माले दुनिया से नफ़रत करने का बाएस है।
14. वोट ख़्वाब मे किसी को वोट देना या किसी की शिफ़ारिश करना या किसी को मशवरा देना दुनिया की मोहब्बत और दीन की
गुमराही का सबब है।
15 वीरानी
वीरानी देखना ग़ मो अन्दोह से ताबीर है।
(हे- ह)
1. हूद (अ) को देखना
दुश्मन क़वी का सामना हो तरद्दुद और तकलीफ़ में मुब्तिला हो लेकिन फ़तहो नुसरत पाये।
2. हाबील को देखना
दुश्मन क़वी का सामना हो तरद्दसो पर्हेज़गार हो लकिन जुल्मो मुसीबत में गिरफ़्तार हो।
3. हाथ क़वी देखना
बरादर या शरीक से राहत पाये औरत या दोस्त शफ़ीक मिलजाये।
4. हाथ अपना कटा देखना
भाई या फ़रज़न्द से जुदाई हो या किसी हमदस्त से रंजिश या लड़ाई हो।
5. हाथ अपना गर्दन से बँधा देखना
लौंडी या गुलाम आज़ाद करे सिलएरहमी वाजिबुल अदा समझे।
6. हाथ से आसमान छूना या तोड़ना
जहान में इज़्ज़तो तौकीर हो ज़बान मे हर तरह तासीर हो दुश्मन शिकस्तो फ़ाश खाये मुश्कल जल्दआसान हो जाये।
7. हाथ दुश्मन का पकड़ना
रफ़ए एनाद दफ़ए बिमारी की अलामत है राहतो आराम की बशारत है।
8. हाथ पाँव धोना
जिस चीज़ की आस हो उससे हिरास हो बीवी या लौंडी को छोड़े भाई या फ़रज़न्द से मुँह मोड़े।
9. हाथ देखना
ख़वाब में हाथ देखना शादी या दोस्त और अमानत दारी से ताबीर है।
10. हाज़मा
ख़्वाब में हाकी का ख़रीदना ज़िराअतो सनअत में कोशिश करने और हाकी से खेलना कारोबारे रिज़्क में तरक़्क़ी पाने
का बाएस है।
11. हाकी
ख़्वाब में हाकी का खरीदना ज़िराअतो सनअत में कोशिश करने और हाकी से खेलना कारोबारे रिज़्क में तरक़्क़ी पाने का बाएस है।
12. हथयार
हथयार बाँध कर बेगानो में जाना बदनाम होने के मुतरादिफ है।
13. हिचकी अगर
अगर ख़्वाब मे हिचकी आती देखे तो पुर्ग़ज़ब होने और गाली बकने की दलील है।
14. हंटर
ख़्वाब में हंटर या कोड़ा मिलना मुलाज़ेमत या रोज़गार मिलने से ताबीर है।
15. हौदज
हौदजमें बैठना मुबारक है और इज़्ज़तो मर्तबा हासिल होने की दलील है।
16. हिजड़ा
अगर अपने आपको हिजड़ा देखे तो ख़ौफ़ो वहशत में गिरफ़्तार होने की अलामत है.
17. हाथा पाई करना देखे
जवान देखे तो शादी करे पीर देखे बदकारी की इशारत है।
18. हाथ नक़शो निगार करना
औरत को राहतो आराम हो मर्द देखे तो फ़िक्रे मईशत में नाकाम हो।
19. हाथों में मेंहदी लगी देखना.
शादी होने की निशानी है औरत मर्द को दलीले शादमानी है।
20. हाथी को दूर से देखना
बुजुर्गाने क़ौम से आशनाई हो बारगाहे शाही में रसाई हो।
21. हाथी सफ़ैद देखना
सरदारी या ओहदाये बुजुर्ग पाये औलाद और माल पाये।
22हाथी को दरवाज़े पर बँधा देखना
दौलतो बख़्तयारी मिले ख़्वाजगी या कौम की सरदारी मिले।
23. हाथी खूबसूरत देखना
दौलत की निशानी है दलीले हाजत रवीई है।
24. हाथी बरहना को राम करना
फ़ारिगुलबालो तवंगर हो।
25. हाथी को हमलावर देखना
हाकिम से ख़तरा हो सदका दे ताकि ख़तरा दूर हो।
26. हथनी को हमलावर देखना
औरत फ़हेशा फ़िसाद करे नंगो नामूस बर्बाद करे।
27. हाथी को मार डालना
सरकशाने अजम से मक़हूर हो या दुश्मन उसका मग़लूबहोने से परेशान हो।
28. हाथी पर सवार होना
अगर शब को सवार हो निकाह करे , दिन को सवार होते देखे तोबीवी को तलाक दे
29. हाथी के पाँव तले अपने को देखना
ज़ुल्मे सुल्तानसे हज़र हो दुश्मन क़वी से पुर ख़तर हो।
30. हाथी का बच्चा देखना
सरदारी व हुकुमत पाये।
31हाथी दूसरे शहर मे जाते देखना
बादशाह को ज़वाल किश्वर हो ख़्वाब देखने वाले को सफ़र पेश आये।
32. हीग देखना
मुफ़्लिसी और अन्दोह की निशाऩी है।
33. हड़डी देखना
औरत को ज़ईफ़ शौहर मिले मर्द को हराम मिले अगर चूसे तो मेहनत में मुब्तिला हो।
34. हदिया पसन्दिदा देखना
बीवी मिले नेअमते दुनिया और फ़रन्द मिले।
35. हार या हैकल मुरस्सा देखना
अपने गले में पहने तो फ़रहत देखे आगर दूसरे को पहनाये उससे मोहब्बत बढ़े।
36. हिन्डोला देखना
औरत शफ़ीक हाथ आये।
37. हुद हुद देखना
सुफ़ारत या वज़ारत पाये या किसी हाकिम का नायब हो।
38. हुमा को सर पर बिठाना
मुल्क की बादशाही पाये ज़िल्ले इलाही मशहूर हो।
39. हिरन देखना
औरत या लोंडी वहशतनाक मिले या महबूब हसिन चालाक़ मिले दुख़्तर पाकीज़ा हो सरूर क़ल्ब का हो।
40. हिरन का भाग जाना
माल का नुक्सान हो बीवी से घोखा खाये खाना वीरानी से रंज हो।
41. हिरन को राम करना
औरत बाकिरा मिले।
42. हँसना किसी अजीब शै पर
फ़रहतो नेअमत हुसुले दौलतो कामरानी है।
43. हँसने में आँसू निकलना
सर्द हो तो यमीनो बरकत गर्म हो तो बदकार की सोहबतं।
44. हवा नरम व मोतदिल चलना
दौलतो इक़बालो नेअमत मिले।
45. हवाए गर्म चलना
परेशानी के मुतरादिफ़ है।
46. हवा पर उड़ना
अग़र ज़मीन नज़दीक हो सफ़र दर्पेश हो बुजुर्गी व मंजिलत पाये अगर आसमान की तरफ हो तो ज़िन्दगी तलक हो जाये।
47. हवा गुबार आलूद चलना
ख़ौफे ताऊन या मरज़ेमेहलिक मे मुब्तिला हो।
48. हवा हौलनाक चलना
माल मेहनत से हाथ आये लहब लअब में सर्फ हो जाये।
49. हवाई छूटते देखना
माल मेहनत से हाथ आये लहब लअब में सर्फ हो जाये।
50. हल चलना
ज़िराअत से मंफ़अत पाये या औरत से राहत मिले औलाद से घर भर जाये।
51 हज़ार दास्तान को देखना
औरत या लौंडी मिले या फ़रज़न्द दानिशमन्दों सुख़नदान मिले।
52. हवाम ज़हरदार देखना
हासिदों और दुश्मनों से ख़तरा हो सद़क़ा दे।
53. हलीला देखना या खाना
हाजतरवा हो फ़रज़न्द खुश सीरत हो।
54. हरलिया देखना
हाजतरवा हो फ़रज़न्द खुश सीरत हो।
55. हिलाल देखना
हाजत रवा हो फ़रज़न्द खुश सीरत हो
56. हालए महरो माह देखना
बीवी से ख़फ़ा हो ख़यानत का गुमान हद से सिवा हो।
57. हँसली को गले में देकना
औरत बाकिरा पाये।
(ये-य)
1. याकूब (अ.) को देखना
दौलत की तरक़्क़ी , थोड़ा सा रंज , उसके बाद राहत हो।
2. यूनुस (अ.) को देखना
तअजीले कार से तंगी में पड़े लेकिन बाद दुआ निजात मिले।
3. यहया (अ.)को देखना
मअसूमो पर्हेज़गार आबिदे शब ज़िन्दादार हो।
4. युसुफ़ (अ.) को देखना
पहले कुछ इफ़्तिरा बँधे रंजो तकलीफ़ से निजात पाये दौलतो इज़्ज़त हाथ आये।
5. याकूत देखना
बीवी जमीलाफ़रज़न्द शाईस्ता पाये मम्लिकता व इल्म फ़ीयदा पहुँचाये।
6. याकूतो मोती पहलू से निकलते देखना
फ़रज़न्द की रोज़ी हो दौलतमन्दी और फ़िरोज़ी हो।
7. योसिया अक़्साम तआम से खाना
नेअमत व माल मिले।
8. यर्क़न देखना
बीमारी को तूल हो तकलीफ़ से मलूल हो।
9. यासीन पढना
ख़ैरो बरकत और सआदते दौ जहान मिले।
10. यतीम आपको होते देखना
रंजो ग़म की निशानी है।
11. बाबू खूबसूरत देखना
औरत अय्यार मिले तरक़्क़ीये रिज़्कसहो।
12. यूरिश देखना
अगर यूरिश अज़ीज़ों का देखे दौलत की निशानी है और हाकिम या दुश्मनों का देखे तो दलीले परेशानी है।
13. यदे बैज़ा देखना
मज़ीद दौलतो इक़बाल हो तरक़्क़ी हशमत हो।
14. यखनी पीना
कुव्वतो तवानाई बढ़े आगर कोई दे उससे फ़ायदा पहुँचे।
15. यशब का नगीना देखना
औरत कमअस्ल से निकाह करे या किसी औरत सुफ़ला से लड़की पैदा हो।
16. यक्का देखना
अगर यकके मे सवार देखे तो किसी बुजुर्ग से मुलाकात होनेकी दलील है अगर यक्के में सवार होते देखे तो किसी अज़ीज़ या आशना
से मंफ़अत हासिल होने की निशानी है अगर यकका खुद चलाता देखे तो मेहनतो मशक़्क़त से रोज़ी हासिल होने की निशानी है।
[{अलहम्दो लिल्लाह किताब ख्वाबनामा पूरी टाईप हो गई । खुदा वंदे आलम से दुआगौ हुं कि हमारे इस अमल को कुबुल फरमाऐ और इमाम हुसैन (अ.) फाउनडेशन को तरक्की इनायत फरमाए कि जिन्होने इस किताब को अपनी साइट (अलहसनैन इस्लामी नेटवर्क) के लिऐ हिन्दी मे टाइप कराया। }]
22 10 .2017
फेहरिस्त
पेश लफ्ज़ 2
ख़्वाब की पहली क़िस्म 3
चन्द अहम ख्वाब का ज़िक्र 5
जुदूले तारीख़े चान्द और ताबीरे ख़्वाब 27
तारीख़ शब ताबीरे ख़्वाब 27
(अलिफ-अ) 29
(पे.) 60
(ते) 76
(टे) 83
(जीम) 86
(च) 92
(हे.) 104
(खे.) 108
(द) 117
(ड) 139
(ज़) 142
(र) 144
(ज़) 152
(ज़ै.) 159
(स.) 160
(श) 177
(साद) 185
(ज़ाद-ज़) 187
(तो-त) 189
(ज़ो-ज़) 192
(ऐन-ई) 193
(ग़ैन-ग) 200
(फ़े-फ) 204
(क़ाफ-क) 208
(काफ़-क) 215
(गाफ-ग) 232
(लाम-ल) 247
(मीम-म) 253
(नून- न) 271
(वाव- व) 281
(हे- ह) 283
(ये-य) 291