क़यामते सुग़रा
लेखकः सैय्यद मोहम्मद अब्बास क़मर ज़ैदी
नोटः ये किताब अलहसनैन इस्लामी नेटवर्क के ज़रीऐ अपने पाठको के लिऐ टाइप कराई गई है और इस किताब मे टाइप वग़ैरा की ग़लतीयो को सही किया गया है।
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दुष्टिगत पुस्तक क़यामते सुग़रा जो सैय्यद मोहम्मद अब्बास क़मर ज़ैदी द्वारा उर्दू भाषा में संकलित है तथा जिसमें हज़रत इमाम मेहदी (अलै 0) जो रसूल के परिवारजनों में अन्तिम व्यक्ति है तथा जिनके अस्तित्व पर मुसलमानों में भेद नही मात्र विरोधाभास यह है कि शिया इममिया आपके अस्तित्व को स्वीकार्य है तथा जीवित होते हुऐ लुप्त जानते है हज़रत मसीह ,हज़रत इलयास , हज़रत खिज्र की भांति किन्तु कुछ सुन्नी सज्जन यह मानते है कि इमाम का अभी जन्म नही हुआ है बल्कि वह जनम लेगें। जबकि रसूल का प्रसिद्ध कथन है कि मेहदी के अस्तित्व को नकारने वाला नास्तिक है।
इस पुस्तक सहित उन लक्षणों का जो इमाम मेहदी के प्रकट होने के सम्बन्ध में भविष्य में विद्यमान होंगे उल्लेख किया गया है जिसकी जानकारी प्राप्त करना प्रत्यक मुसलमान का कर्तव्य है ताकि इमाम के विषय में ज्ञान वृद्धि हो सके प्रत्येक लक्षण अध्यन कर्ता के ईमान व विश्वास की बढ़ोत्तरी का कारण होंगे तता अन्त में मोक्ष प्राप्ति का माध्यम बन जायेंगे
इस वर्तमान समय में धार्मिक रूचि रखने वालो की कमी नही वरन् उर्दू भाषा जानने वालो की कमी अवश्य है ऐसे व्यक्ति जो धार्मिक बातों विशेष रूप से इमाम मेंहदी के प्रकटन के मुख्य लक्षणों को जाने में अभिरूचि रखतेहै और क़यामते सुग़रा जैसी पुस्तक उपलब्ध है परन्तु उर्दू से अनभिज्ञ होने के कारण उससे लाभ उठाना सम्भव नही मात्र ऐसे लोगों की अभिरूचि के दृष्टिगत मैने चाहा कि प्रस्तुत पुस्तक को हिन्दी में अनुवादित करके प्रकाशित करके प्रकाशित किया जाये।
वास्तव में एक भाषा से दूसरी भाषा में अनुवाद करना कठिन कार्य है परन्तु मैं इस विषय में मौलाना सै 0 गुलाम हुसैन सदफ़ ज़ैदी का ह्रदयगी आभारी हूँ कि उन्होने अपने मूल्यवान समय में से समय निकाल कर भली प्रकार अनुवाद का कार्य सम्पन्न किया। भगवान उनके ज्ञान व बुद्धि में बढोत्तरी करे तथा भविष्य में सफलता प्रदान करे।
अन्त में मैं आप सब के लिये एवं अपने लिये प्रार्थना करता हूँ कि हम सब को सत्यकर्म करने की शक्ति प्रदान हो तथा इमाम के साधारण सेवकों में सम्मिलित हो तथा जब हम प्रलय में भगवान के सम्मुख उपस्थित हों तो उचित इस्लाम के अनुयायी होकर उपस्थित हूँ।
प्राणियों मे अति तुच्छ सै 0 अली अब्बास तबातबाई
बिस्म्ल्लाह हिर्रहमा निर्हीम
वस्तुवाद के इस भयकन् और डरावने काल में जब मनुष्य के जूनम का कारवां विश्वव्यापी युद्ध के शोलों की भेंट होने के लिये अपने अन्तिम चरण के बिल्कुल समीप पहुँच चुका है।
नये युग की उन्नित संस्कृति ने सम्पूर्ण विश्व पर शासन करने की अभिलाषा दृष्टि से चाँद , सूरज और सितारों पर जो कमन्दें डाली है उस ने सम्पूर्ण विश्व को भयावह नरक का रूप दे दिया है।
सभ्यता के ठेकेदारो ने उन्नति के नाम पर प्राणी वर्ग में सबसे श्रेष्ठ मनुष्य को असभ्यता की उस सीमा पर पहुँचा दिया है। जिसे देखकर आदम का मस्तिष्क लज्जा से पानी पानी हो गया।
प्रत्यक्ष रूप से इस धरती पर अंधकार और नास्तिकता के काले साये फैलते जा रहे है। संसार का चप्पा चप्पा अत्याचार से भर चुका है। शैतान की नस्ल ने आदम की सन्तान से अपने अपमान का बदला लेने की तैयारियाँ पूरी कर ली है। खौफनाक़ माहौल और गुनाहों के तूफान ने मनुष्य मुक्ती के सभी द्वार बन्द कर दिये है और मनुष्यता पर चारों ओर निराशा के बादल छा भी चुके है। इस निराशा के दशक में भी अगर कोई आस बाक़ी है तो वह केवल आपके तेजस्वी मुख की प्रकाशमय किरणों से सम्बन्धित है अतः मैं पापी एवं गुनाहगार अपने मन की शुद्धता व सन्तुष्टि निष्ठा के साथ अत्यन्त विनय एंव नम्रता और बेचैनी से निवोदित हूँ कि बस प्रतीक्षा के क्षणों को कम कीजिये क्योंकि सहनशीलता का दामन कमज़ोर हाथों से छूटने ही वाला है।
ईश्वर के लिये शीघ्र परदे की अदृश्यता को उलटकर तेजस्वी चेहरे की हल्की सी झलक से अधंकरमय संसार को न्याय एवो इंसाफ की ज्योति से जगमगाकर संसार के कण कण से सर्वश्रेष्ठ ईश्वर के उस कथन को सत्य कर दिखाइये कि ईश्वरीय आभा चरम सीमा पर पहुँच कर ही रहेगी चाहै कुफ़्फार (ईश्वर में विश्वास न रखने वाले) कितनी ही घृणा एवं उदासीनता प्रकट करें।
निर्मल मन से स्वीकार है यद्दपि आपका प्रकटन क़यामत से कम नही किन्तु न आना भी तो एक क़यामत है और जब क़यामत स्वयं आपकी चरण प्रतिक्षा में है तो बस-अब शीघ्रताशीघ्र प्रलयकारी रूप में ही पधारें।
उत्पीडित मानवता की सहायता और ईश्वरीय उद्देश्य की पूर्ति हैतु अब आप ही की आवश्यकता है क्योकि आपके आगमन का मुझे भी पूर्ण विश्वास है अतः आगमन-घोषणा व स्वागतम् सूचना के कारणंवश यह श्रद्धार्पित पुस्तक , शीर्षक क़यामते सुगरा सार्पत है – इसके बदलें में उम्मीदवार हूँ केवल उस कृपा दृष्टि का जो महाप्रलय के सेवकों की पंक्ति से गुज़रती हुई मेरे पापी अस्तित्व पर क्षणिक ठहरे और मेरी नजात का सहारा बन जाये , मैं अपने दुस्साहस पर लज्जित अवश्य हूँ किन्तु आप ही न्याय करें।
ज़ब्त कब तक करे कब तक कोई ख़ामोश रहे।
हुस्न बे-मिस्ल है फिर किसलिये रूपोश रहे
आप उलटें तो ज़रा चेहर – ए – गैबत से नकाब
मेरा जिम्मा जो जमाने में कहीं होश रहे।
आदरणीय मौलवी सनाऊल हक़ साहब
एम 0 ए 0 (अलीगढ़)
अनुवादकः अलस्टरानामी फ़ार बिगनर्स
मर्टिन डेविडसन ,
बउनवान महोअंजुम , कराची
हर मुसलमान का कर्तव्य है कि वह क़यामत को सत्य जाने और उस पर मन से विश्वात रखे। चूँकि मनुष्य का अन्तकाल (अन्जाम) विचार अमुचित मार्गों पर जाने से रोकता है। इसी कारण प्रलय (क़यामत) का अक़ीदा (विश्वास) ईमान की प्राथमिकताओं में रखा गया है। अल्लाह ने पवित्र कुरान में स्थान पर क़यामत का उल्लेख है कि अर्थ समझे बगैर केवल शब्द ही मनुष्य की अन्तरात्मा को झँकोर देते है। क़यामत को केवल भयभित करने का स्त्रोत न समझना चाहिऐ अपितु इसे जीवन निधि मानते हुऐ इसके सत्य होने का विश्वास करना चाहिए। यदि अक़ीदे से ड़ट कर देखा जाये तो बौद्धिकता की माँग भी यही प्रतीत होती है कि संसार और जीवन जिस का एक आदि है उसका अन्त भी आवश्यक है।
सर जेम्स जेन्सन ने इस विषय पर केवल भौतिकता की दृष्टि से बहस करते हुए अपनी प्रसिद्ध रहस्यमस संसार में इस सत्यता को इन शब्दो सें प्रस्तुत किया है।
हमारी सम्पूर्ण उमंगों को अन्त में असफ़लताओं का सामना करना है और हमारी सारी उपलब्धयाँ तता सफ़लताऐं मनुष्य वंश के समाप्त होते ही समाप्त हो जायेगी और संसार ऐसा हो जायेगा जैसे हम सब जन्मे ही न हों।
क़यामत (प्रलय) किस तरह आयेगी , इसका रुप क्या होगा , इसका घान केवल ईश्वर को है। हमें तो केवल कुछ लक्षण इंगित करा दिये गचें हैं तथा भूकम्पों इत्यादि के उदाहरण द्वारा इसकी भयानकता को बोध कराया गया है। सम्भव है पृथ्वी के आन्तरिक पदार्थों में विक्षोभ उत्पन्न होने से धरातल उलट – पुलट हो जाये या भूमि की ऊपरी तल पर प्राकृतिक या मनुष्य द्वारा ऐसा वातावरण उत्पन्न हो जो इस धरती के थिन्न भिन्न होने के कारण बन जाये या फ़िर आकाशीय पिण्ड़ों की नियतता तथा क्रमबद्धता में ऐसी बाधा उत्पन्न हो जिससे धरातल काल के गाल में समा जाये। स्वयं वैज्ञानिक कई ऐसे कारणों को इंगित कर रहे है जो संसार को तबाही के गर्त में ढकेल देंगे। इनमें से एक यह है कि सूरज , छव्टा (नोवा) सितारों से सम्बन्धित है , अचानक इतनी विशालता ग्रहण करेगा कि पृथ्वी इसकी लपेट में आकर पूर्णतया जीवन विहीन हो जायेगी। सम्भव है इसी घटना का सूर्य के सवा नेज़ा पर आने से मोध किया गया हो। यद्यपि यह बात भगवान ही के ज्ञान में है कि वह इस सुख समृद्धि से परिपूर्ण संसार को किस प्रकार उसके अन्तिम चरण सें पहुँचायेगा। हमारे लिये तो यही अक़ीदा काफ़ी है कि ऐसा होना आवश्यक है। इसलिये हमें उस दिन की खेदजनक स्थिति से बचने के लिये भगवान के आदेशानुसार जीवन-यापन का पूरा प्रयास करना चाहिए। जिस प्रकार अन्य घटनाओं के प्रकट होने से पूर्व कुछ लक्षण प्रकट होते हैं उसी प्रकार क़यामत (प्रलय) जैसी महान घटना के लिये उनके लक्षण हैं। जिनमें से कुछ के संकेत मोहम्मद सा 0 की वाणी से हो चुका है। इन लक्षणों में से कई इस समय हमारी दृष्टि के सम्मुख हैं और अनेकों की सम्भावनाऐं विद्ममान है। वह भी भविष्य के परदे से शीघ्र या देर में प्रकट होकर रहेंगे। वर्तमान लक्षणों में सबसे मुख्य वह नाना प्रकार के अवगुण हैं जिनमें लगभग समस्त मानव समाज लिप्त है। और जिन पर पश्चाताप होने के स्थान पर वह गर्व प्रकट कर रहा है। इसी लक्षण को देखते हुऐ डा 0 इकबाल ने इबलीस की ज़बान से यह वास्तविकता प्रकट कराई है।
उस की बरबादी पर आज आमादा है वह कारसाज़
जिसने इसका नाम रखा था जहाने क़ाफ व नून
यद्यपि यह इतना स्पष्ट लक्षण है कि इसके पश्चात अन्य किसी लक्षण की आवश्यकता नहीं रहती है। तर्क समाप्ति हैतु औऱ भी कई लक्षण बताये गये हैं जो सम्भव है हमारे जीवन में घटित न हुऐं हों बल्कि आगामी संतान मानव वंश उनको देख सकें। यह आवश्यक है कि कुछ कथन जो क़यामत के लक्षण के सम्बन्ध में कहै गये हैं , आलोचना और विवेचना के मोहताज (आश्रित) हैं। संक्षेपण और विस्तारीकण में भी भेद सम्भावना रहती है फिर भी इस से मुख्य उद्देश्य पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। क्योंकि उनके बताने और गिनाने का उद्देश्य क़यामत की याद दिलाना और नसीहत देकर वर्तमान चाल-चलन के सुधार की तरफ आकर्षित करना है और वह उद्देश्य एक या अनेक लक्षणों के प्रकट होने से समाप्त नहीं होता है।
इसी पुनीत उद्देश्य को सामने रखकर आदरणी भ्रातः सै 0 मो 0 अब्बास साहब क़मर जैदी ने कठिन परिश्रम से इन मुख्य-मुख्य क़यामत के लक्षणों को जो हमारे सामने हैं या जिनकी सम्भावनाऐं सम्भव हैं अनेक बड़ी पुस्तकों से उद्धरित करके अत्यन्त सूक्ष्म रुप में एक स्थान पर एकत्र कर दिया , साथ ही यह आभास करके कि वर्तमान समय में कोई भी बात उस समय तक ठोस नहीं समझी जाती जब तक विज्ञान से उसकी पुष्टि न हो उन्होनें बहुधा बातों का वैज्ञानिक ढ़ंग से विश्लेषण करने का सफ़ल प्रयास किया।
ज़ैदी साहब ने क़यामत के दो भाग करके अपने संकल्प को क़यामते सुगरा का शीर्षक दिया है और चूँकि उसे क़यामते कुबरा का प्राक्कथन बताया है इसीलिये दोनों एक ही श्रृंखला की दो कडियां समझना चाहिऐ फिर चूंकि जिस महान क्रांती को उन्होनें क़यामते सुग़रा का नाम दिया है। उसके पश्चात् कुछ समय के अच्छे कार्य भी परलोक के जीवन की अच्छाई के लिऐ होगी जो क़यामते कुबरा के बाद प्रारम्भ होगी इसलिये दोनों अलग-अलग करके नहीं वरन् बल्कि दोनों के सम्पूर्ण चित्रों को एक दर्पण में देखना चाहिऐ।
सम्भव है कुछ कथनों से जो ज़ैदी साहब ने प्रस्तुत किये हैं पाठक को असहमति हो परन्तु जिस उद्देश्य से यह सम्पूर्ण संकलन किया गया है उस पर किसी प्रकार का सन्देह और आलोचना नहीं की जा सकती। उनका उद्देश्य भय दिला कर बुराई से हटाना और भलाई की ओर लाना है , यह उद्देश्य जितना महान है उससे कोई भी असहमति नहीं प्रकट कर सकता अतः इन पृष्ठों को इसी ध्येय के साथ पढ़ा जाये , मात्र मनोरंजन या ज्ञान में वृद्धि के उद्देश्य से नहीं। यदि पाठ्कों ने इस पुस्तक का इस दृष्टिकोण से अध्ययन किया तो संकलनकर्ता के प्रयासों को भी सराहा सकेंगे तथा उनके चाल चलन का सुधार भी हो सकेगा।
ईश्वर सद बुद्धि दे
सनाईल हक़ सिद्दीक़ी
परम आदरणीय ,
श्री अलहाज अल्लामा तालिब जौहरी
(प्रवक्ता गवर्मेन्ट कालिज , नाज़िमा-बाद , कराची)
बिस्ल्लाहिर्रहमान निर्रहीम
क़यामते सुग़रा (लघु प्रलय) सोकलित द्वारा श्री कमर जैदी मेरे सम्मुख है। जिसमें इमामे मेहदी (अ 0) के प्रकटन के लक्षणों को एकत्रित ओर संकलित किया गया है। इमाम मेंहदी (अ 0) का प्रकट होना एक वास्तविक तथ्य है जिस पर इस्लाम के उदभव से आज तक समस्त मुसलमान सहमत रहें हैं। शिया लेखकों ने हज़रत इमाम मेहदी (अ 0) के सम्बन्ध में जिस प्रकार से कथनों का एकत्रीकरण किया है ओर जाँच तथा परख का कार्य सम्पन्न किया है वह आप अपनी मिसाल है। तथा उसके उल्लेख करने की विशेष आवश्यकता भी नहीं परन्तु उसके साथ सुन्नी धर्मशास्त्रीयों तथा पारखियों के विषय में चर्चा भी अपरिहार्य है। इसलिये कि उनकी एक बड़ी संख्या ने अपनी पुस्तको में हज़रत इमाम मेंहदी (अ 0) से सम्बन्धित इतने कथनों का उल्लेख किया है जो विषय के प्रमाण हैतु पर्याप्त हैं। हम उनका संक्षिप्त प्रारूप निम्नवत प्रस्तुत करते हैं।
1. जामये सही मो 0 बिनइस्माईल बुख़ारी 3 हदीसें
2. सही मुस्लिम मुस्लिम बिन हज्जाज 11 हदीसें
3. जमा सहीद्दीन हमीदी 2 हदीसें
4. जमा बैन सहाएसित्ता जैद बिनमाविया अबदरी 11 हदीसें
5. फ़जायलुस सहाबा अब्दुल अज़ीज अबकरी 7 हदीसें
6. तफ़सीरे सालेबी सीलिबी 5 हदीसे
7. ग़रीमुल हदीस इब्ने कतीबा 6 हदीसें
8. अल – फ़िरदैस़ इब्ने शैरविया दैलमी 4 हदीसें
9. मुसन्ते फ़ात्मा हाफिज अबुलहसन दार क़त्नी 6 हदीसें
10. मुसन्दे अली हाफ़िज अबुल हसन दार क़त्नी 3 हदीसें
11. अल – मुब्तदा किसाई 2 हदीसें
12. अब मसाबीह हुसैन बिन मसूद फ़तरा 5 हदीसें
13. अल मसाबीह हुसैन हिम मसैद फ़तरा 5 हदीसें
14. किताब हाफ़िज इब्ने मतीन 3 हदीसें
15. अहलुलखाया मो 0 बन इस्माईल फ़रग़ाफी 3 हदीसें
16. ख़बरे सतीह हमीदी................. 2 हदीसें
17. इस्तेआब युसुफ़ बिन अ 0 अज़ीज नमीरी 2 हदीसें
परन्तु इसके अतरिक्त यह भी एक तथ्य है कि इन तेरह चौदह शताब्दियों में कुछ ऐसे दृष्टिकोण वाले व्यक्ति हुऐ है जिन्होने इमाम मेंहदी (अ 0) की परिकल्पना को सिरे से नकारा है। ऐसे व्यक्ति संख्या में उतने ही कम हैं जितने यज़ीद की ख़िलाफ़त को उचित समझने वाले। हज़रत इमाम मेहदी की परिकल्पना को अस्वीकार करने का कारण वास्तव में दो बाते हैं। एक तो यह है कि यदि उनके अस्तित्व को स्वीकार कर लिया जाचे तो फिर आप के व्याक्तित्व निजी विशेषताऐं , परिवारिक घण , तथा व्यक्तिगत लक्षणों पर भी तर्क वितर्क करना होगा। और फिर अन्ततोगत्वा बातें बहुत दैर तक पहुँच जायेगी। फ़ानी के कथनानुसार
ज़िक्र जब छिड़ गया क़यकमी का।
बात पहुँची तेरी जवानी तक।।
दूसरी बात यह है कि स्वंय बने झूठे मेहदियों की अधिकता से उत्तरहीन हो जाने वालों के पास इसके अतरिक्त और कोई विकल्प नहीं था कि सिरे से इस सम्मान योग्य अस्तित्व की परिकल्पना ही को अस्वीकार कर दिया जाये , यह एक प्रकार से विमुख (भाग जाना) हो जाना है जिसे इसलाम अकीदों के सम्बन्ध में अनुचित समझता है।
इमाम मेहदी के अस्तित्व को न मानने वाले अपने घटिया और सारहीन वितर्कों के कारण , हमारे तर्क का विषय नही हैं उनके उत्तर के लिये मात्र यही बहुत है कि यदि इमाम मेहदी (अ 0) विद्मान होने के मामले में जान न होती तो न तो इतने झूठे मेहदी पैदा होते और न ही उनकी पुष्टि करने वाले। वास्तविक तर्क का विषय तो वह लोग है जिन्होने मेहदियत के पवित्र शरपर से स्पष्ट करने का असफल प्रयास किया है। बनी अब्बास और बनी फ़ात्मा के मेहदियों से लेकर भारतीय एंव पाकिस्तानी मेहदियों तक समय और स्थान की लम्बी दूरी है जिसमें वह बलते और बिगड़ते रहे। मानव प्रवृत्ति हर नयी वस्तु को आश्चर्य और उत्सुक्ता की दृष्टि से देखती है। यह महानुभाव भी जनता की कृपा दृष्टि से लाभान्वित हुए बिना न रह सके कदाचित ,से ही अवसर के लिये कहा गया है कि हल्क – ए – मुस्तजएलून – (जल्दी करने वाला नष्ट हो जाता है)। हज़रत इमाम मेहदी (अ 0) के विषय में भी जल्दी करने वाले नष्ट हो जायेंगे। इसमे कोई सन्देह नही है कि हज़रत मेहदी के सम्बन्ध में इतनी ठोस रचनाए इसलामी पुस्तको में उपलब्ध है कि किसी झूठे मेहदी के बनने की कोई सम्भावना ही न थी। परन्तु झूठे मेहदियों ने इसका अवसर इस प्रकार प्राप्त किया कि मात्र कुछ लक्षणों को अपने व्यक्तित्व में दर्शा कर अपने मेहदी बनने का दावा किया। परिणाम स्वरुप अध्ययन के अल्प भाव में अज्ञानी और साधारण प्रवृत्ति के लोग उनके आस-पास एकत्र हो गये। इसीलिये उर्दू में ऐसी पुस्तकों की अधिक आवश्यकता है जो हज़रत इमाम मेहदी (अ 0) के सम्बन्ध में जनसाधारण को पूर्ण रूप से जानकारी दे सकें अन्यथा भट्कने की श्रँखलाऐं लम्बी होती जायेगी तथा जानकारी कराने के लाभ का एक दृष्टिकोण यह भी है कि मेहदियत को नकारने वालों ने अपनी कुछ विशेष नितियों के कारण जिन मामलों में परिवर्तन तथा परिवर्धन किया है या जिनका अविष्कार किया है उन्हें तर्क-वितर्क का द्वार खोले बिना सरलता से हल किया जा सकेगा। उदाहणार्थ ऐक फ़िरके ने अपनी नीतिनुसार हज़रत ईसा (अ 0) और हज़रत इमाम मेहदी (अ 0) को एक ही व्यक्ति ठहराया है। इसकी तुलना में यदि मनुष्य को इमाम के प्रकट होने के विस्तार का ज्ञाल हो और उसे यह भी बोध हो कि हज़रत ईसा (अ 0) सम्मानित इमाम की सहायतार्थ प्रकट होगें और उनके पीछे नमाज़ पढ़गें तो मामला स्वतः हल हो जाता है। यद्दपि यहाँ पर हज़रत मसीह (अ 0) तथा हज़रत मेहदी (अ 0) की इकाई (वहदत) पर एक संक्षिप्त टिप्पणी उचित होगी। इस दृष्टिकोण के दो मुख्य और मूल भेद हैः
1. जिस मेहदी के हदीस (पै 0 के कथन) में आने की भविष्यवाणी की गयी है वह मेहदी (अ 0) न होगें , बल्कि मसीह तुल्य होंगे
2. महदियत को ला मेहदी इल्ला मसीह (कोई मेहदी नहीं सिवाऐ मसीह के) के अनुसार मसीह में ही निर्भर किया गया है इसलिए मेहदी , मसीह के अतिरिक्त कोई व्यक्ति न होगा , उल्लेखित दृष्टिकोण के प्रमाण स्वरुप जिन अनियमित्ताओं एंव स्पष्टीकरण को मान्यता दी गयी है यदि तर्क और संघर्ष इसकी अनुमति प्रदान करे तो हर सत्य कथन को असत्य से किया जा सकता है। जहाँ जहाँ भी कथनों मे ईसा मसीह (अ 0) के प्रकट होने का वर्णन है वहाँ ईसा पुत्र मरियम के नाम का उल्लेख है। किसी तुल्य या सामान का उल्लेख नहीं है। उस स्थान पर ईसा (अ 0) के जीवन व मृत्यु का विषय इसलिये बेकार और प्रमाण हीन है कि यदि असम्भव परिस्तिथियों में मृत्यु सिद्ध हो जाये जब भी वह कुरान और हदीस के अनुसार उनके गुनः जीवित होने के विपरित न होगी और जहाँ हदीस ला मेहदी इल्ला ईसा का प्रशन है तो यह हदीस शिया पुस्तकों में मूलतः उपलब्ध नही है। हाँ सुन्नी आलिमों ने सल्लेख किया है मगर साथ ही इस कथन को दुबर्ल और इसका सब्बेख करने वाले को अविश्वस्नीय घोषित किया है। इन बातों से हट कर मसीह का इस्रराइली होना तथा हज़रत मेहदी (अ 0) रसूल अल्लाह (स 0) के परिवार से होना इस बात का प्रमाण है कि वह पृथक-पृथक व्यक्तित्व है जिस पर भारी संख्या में कथनों के साक्ष्य उपलब्ध है।
झूठे मेहदियों आधिक्य ते जो असत्य प्रमाण उत्पन्न हुऐ उनसे हट कर सबसे मुख्य बात चह है कि ऐसे व्यक्तियों की निरन्तरता के कारण यदि प्रकट नोने के समय वास्तविक इमाम मेहदी (अ 0) की ओर भी हास्यप्रद दृष्टियाँ उठें तो कुछ दैर नहीं इसलिये विस्तार सहित इस व्यक्तित्द का परिचय कराना हमारे लिये अपरिहार्य है।
आज जबकि बनावटी ग्रहों के युग का संसार अन्याय से पिरपूर्ण होता जा रहा है और तृतीय विश्वयुद्ध की छाया मानव के भाग्य पर गहरी होती जा रही है , ऐसे व्यक्ति का परिचय ह्रदय को शाँति प्रदान कर सकता है जो उन्हें इन समस्याओं से मुक्ति दिलाने वाला है। वास्तव में अध्ययनाधीन पुस्तक हज़रत इमाम मेहदी (अ 0) के परिचय से सम्बद्ध एक कड़ी है जिसके संकलन एंव प्रकलन पर श्रीमान मौला क़मर ज़ैदी बधाई एंव प्रशंसा के पात्र हैं।
जिस कलात्मक दक्षता के साथ श्री ज़ैदी ने अखबारे कथन व सूचनाऐं) की विवेचना की है , और इमाम के प्रकट होने के लक्षण पर आधारित अत्यधिक जानकारियाँ उपलब्ध करायी हैं वह उर्दू भाषा में वास्तव में बढ़ोत्तरी है। इससे पूर्व इस विषय पर उर्दू में संग्रहीत व स्पष्ट पुस्तक मुझे देखने के नहीं मिली। यह भी एक अद्भुत व अनोखी बात है कि मो 0 साहब (अ 0) के परिवारजनों के ज्ञान व बोध के अतरक्त इस जर्चित तथय के विषय पर इतनी सामग्री कहीं और नहीं मिलती जो शिया अख़बार व हदीसों की पुस्तकों में सहस्त्रों पृष्ठ पर फैली है तथा आज भी इसलामी समाज के अचम्भे का कारण है। इस अवसर पर प्राकृतिक रुप से मस्तिष्क में यह प्रशन उत्पन्न होता है कि मात्र रसूल अल्लाह के परिवारजनों के इमामों ने इस विषय पर क्यों इतना प्रकाश डाला अरबी की एक प्रसिद्ध कहावत है घर वालों को घर अन्दर की अधिक जानकारी होती है , चूँकि यह इनके घर का मामला था इसलिये इनसे अच्छा इस विषय पर कौन प्रकाश डाल सकता था इसके अतरिक्त यह तो हज़रत इमाम मेहदी (अ 0) इसी श्रंखला के परिपूर्णकर्ता है जिसे ईश्वर रसूल के अहलेबैत (अ 0) (परिवारजनों) से सम्बध किया है। इसीलिये यह रसैल के परिवारजनों का धर्म सम्बंधी एंव धार्मिक कर्तव्य था कि वह इमाम मेहदी के विषय में अधिक सूचनाऐं एकत्र करें। यह बात भी स्मरणीय है कि वह ख्याति प्राप्त सुन्नी आलिमों जिन्होंने हज़रत इमाम मेहदी के जन्म तथा उनके अस्तित्व को स्वीकारा है कि एक बडी संख्या है जिनके कथनों को अस्वीकार करना वास्तविकता को अस्वीकार करने के समान है। लक्षणों का एकत्रीकरण इतनी विकट समस्या नहीं है बल्कि वह बिन्दु जो वास्तव में कठिन है वह लक्षणों का परीक्षण है। अतः एक पारखी के लिये यह आवश्यक है कि वह लक्षणों सम्बन्ध में निम्नलिखित बातों को दृष्टिगत रक्खेः
कूफ़ी लिपी अपने विभिन्न आकार बदल कर हम तक आयी है , वह अपने प्रारम्भिक आकार में स्पष्ट मात्रओं और शब्दों से ख़ाली थी। तता शब्दों में भेद के गुण बहुत कम पाये जाते थे। हमारी सूचनाओं और हदीसों की पुरातन पूंजी चूंकि कीफ़ी लिपी से बलदल कर हम तक पहुँची है अतः इस्तेनाक़ ( Coby) की कुछ कठिनाईयाँ और भूलचुक का उत्पन्न होना अपरिहार्य था। तहरीक़ (फाडना) और तकरीक़ (जलाना) में सिर्फ़ एक बिन्दु का भेद है , इसलिये लेखकों ने इस शब्द को अपने दोनों रूपों से सुरक्षित किया है। परिणाम स्वरूप यह न ज्ञात हो सका कि कूफे की गलियों में झन्डे फाड़े जायेंगे या जलाये जायेंगे। औफ़ सलमी के विषय में एक कथानुसार (मावाहकरीत) तथा दूसरे कथनानुसार (मावाहदकोयत) दोनों ही अरब इलाकों के प्रसिद्ध नगर हैं। जिसके आधार पर विश्वास के साथ नहीं कहा जा सकता कि इससे किस नगर का बोध है इसलिये कथनों में ( Coby) इस्तेनाक़ की त्रिटियों को निकालना आवश्यक है। यद्पि ऐसी त्रुटियों से मुक्य लेख प्रभावित नहीं होता और वास्तविक्ता प्रत्यक दशा में सुरक्षित रहती है किन्तु एक दृढ़ निर्णय तक पहुँयने के लिये यह अनिवार्य है।
कथनों में बहुधा नगरों स्थानों और जातियों व नाम आये है जो उस समय प्रयेग किये जाते थे परन्तु वर्तमान में उनका प्रयोग नही है। इसलिये बात को सबके समझने योग्य बनाने के लिये भौगोल अनुसार स्थानों एंव नगरों की स्थिति तथा सदरे इसलाम (इसलाम का आदिकाल) के नगरों , जातियों के नाम का नया रुप जानना आवश्यक है।
3. कथनों की पृष्ठभूमि का ज्ञान आवश्यक है कि मासैम ने कथन कहाँ पर कहा , तथा किन लोगों से कहा ताकि उस स्थान से पूरब पश्चिम तथा उत्तर दक्षिण का बोध किया जा सके और जिन लोगों को सम्बोधित किया है उन्हें भा सुगमता से पहचाना जा सके।
4. मासूमों ने अन्तिम काल के सम्बन्ध में उस समय की राजनीति , समाज , रहन-सहन , आर्थिक सभी विषयों पर टिप्पणी की है , उनके भिन्न-भिन्न शीर्षकों से सम्बन्धित पृथक-पृथक एकत्रीकरण पाठक के मन मस्तिष्क हैतु सहायक सिद्ध होगा। इसके अतरिक्त चार और बड़े प्रकार के लक्षण हैं जिनकी विनेचना लक्षणों के साथ ही कर देना आवश्यक है। अटल न टलने योग्य , लक्षण वह है जो परिस्थितियों एंव कार्यों पर निर्भर है। साधारण वह है जो हर स्थान पर दृष्टिगोचर होंगे और मुख्य वह हैं जो किसी क्षेत्र विशेष के साथ सम्बध होगे। इन भेदों को दृष्टिगत रखने से यह लाभ होगा कि जिन कथनों में प्रत्यक्ष रुप से विरोधाभास तथा त्रुटि दृष्टिगोचर है। उनका सन्तोष जनक उत्तर ज्ञात हो जायेगा।
5. लक्षणों में से बहुधा कथनों में किसी प्रकार की टीका-टिप्पणी का कोई स्थान नहीं है जिन शब्दों में उनका उल्लेख है उन्ही शब्दों में वह पूर्ण होंगे अथवा पूर्ण हो चुके हैं। अतः ज़बरदस्ती किसी को इमाम मेहदी सिधद्ध करने से कथनों को घूमा-फिरा कर विसंगतियां लाने की चेष्टा न की जाये अन्यथा यह ज्ञान के साथ खुली धोखाधड़ी होगी।
मैंने अध्यानाद्दीन पुस्तक को अनेक स्थानों से देखा और मेरे लिए प्रसन्नता का अवसर है कि ज़ैदी साहम उपरोक्त कथित अध्ययन से बड़ी सीमा तक उत्तरदायित्य पूर्ण सिद्ध हुए। इससे बढ़ कर उनका यह चयन भी प्रशंसनीय है कि उन्होने अधिक्ता से उन्ही कथनों को एकत्र किया है जिनमें आने वाली भविष्यवाणी है तथा अब तक महदियत के अस्वीकार कर्ताओं की ओर से उन पर किसी प्रकार की टीका-टिप्पणी नहीं की गयी है। उलहारणार्थ , सै 0 हसनी का उठना , सुफ़यानी का आतंक , पूर्वी मध्य के कुध भागों का ध्वस्त हो जाना आदि।
अन्त में पाठकों से यह अनुरोध है कि वह इस पुस्तक क अध्ययन मनोरंजन या समय बिताने की दृष्टि से न करें बल्कि उस उद्देश्य को सामने रखे जो संकलन का वास्तविक ध्येय है। कुरान एंव हदीसों से सिद्ध है कि मानव किसी काल में भी बिना किसी इमाम के नही रहा है और न रह ही सकती है। इस बात को सर्वसहमति प्राप्त हदीस मन माता वलम यारिफ़ इमामे ज़माने हि माता मिल्तन जहिलियत (जिसने अपने समय के इमाम को न पहचाना वह अज्ञानता की मृत्यु मरा) की ओर संकेत है। अतः जब यह स्थित हो मोक्ष समय के इमाम के बोध होने पर ही निर्भर हो तो फिर उसकी अनिवार्यता में किसे सन्देह हो सकता है।
मकतबे मेराजे अदब बधाई का पात्र है कि उसने अपने प्रथम प्रस्तुतीकरण हैतु एक महत्वपूर्ण विषय ढूँढा।
तालिब जौहरी
संसार के बुद्धजीवी इस बात से सहमत हैं कि मानव शर पर में बुद्धि पथ परदर्शक तथा निर्देशक है , जो पग-पग पर मनुष्यों का गथ परदर्शन करती है और बुरी बातों पर अंकुश लगीती है। वास्तव में मनुष्य को सर्वश्रेष्ठ प्राणी के स्तर पर उठाने वाली तथा मनुष्य व पशु में भैद इंगित करने वाली मात्र वस्तु बुद्धि ही है।
इसी कारण सृष्टि के रचियता को अपनी पवित्र वाणी (कुरान) में जगह-जगह बुद्धि से काम लेने , मनन व चिन्तन की ओर ध्यान आकर्षित कराया है। उदाहरणार्थ , नफ़सलुल आयातल्लेक़ौमे-यतफ़कारून चिन्तन व मनन करने वालों के लिये हमने अपनी निशानियाँ सविस्तार वर्णत की है। तात्पर्य यह है कि बुद्धिजीवियों के लिये अल्प कथन में भी विस्तार निहित है। क्योंकि अन्धा अनुसरण करने वाले एंव बुद्धि से काम न करने वाले व्यक्ति मनुष्य के रुप में पशु हैं बल्कि इससे भी अधिक गिरे हुए व तुच्छ हैं , क्योंकि वह भूले हुऐ हैं।
उलायक कलअनाम बलहुम अज़ल्ले उलायेका हुम्मुल ग़ाफ़ेलून
भूले हुए , खोये हुए लोग वास्तव में पशु हैं बल्कि उनसे भी निम्न। यद्यपि विस्तृत ब्रहमाण्ड की तुलना में मानव ज्ञान अत्यंत सीमित व अल्प है , स्वंय ज्ञानदाता का कथन है कि मा ऊतीत मिनल इल्मे इल्ला क़लीला (हमने तुम्हें बहुत थोड़ा ज्ञान प्रदान किया है)। इसलिये त्रुटिपूर्ण व अल्प ज्ञान पर गर्व प्रकट करके उसे ईश्वरीय सिद्धान्तों पर वरीयता देना अत्यन्त नादानी व मूर्खता है तथा भगवान की निशानियों व ईश्वरीय मर्म , प्राकृतिक नियमों तथा धार्मिक ग्रन्थों का सूक्ष्म बृद्धि व समझ के कारण उनका बोध न होने पर न्करना तथा उसे झुठला देना बड़ी अज्ञानता तथा भैल के अतिरिक्त और कुछ नहीं , क्योंकि यह बात सिद्ध है कि किसी वस्तु-विषय का समझ में न आना उसके न होने का प्रमाण नहीं बन सकती है।
ऐसी स्थिति में कोई विषय यदि पूर्ण रूप से प्राकृतिक ग्रन्थों , नियमों , भगवान के आदेशों तथा नबी की हदीसों के अनुरुप सिद्ध हो जाये तो वह किसी व्यक्ति के कथन कि यह बात हमारी समझ से परे है , कदापि असत्य नहीं हो सकता न कि मात्र झूठी परिकल्पनांए तथा मूर्खतापूर्ण पक्षपात उसके असत्यता के कारण मान लिये जाये। प्रत्यक बृद्धिजीवी इस बात को स्वीकार करता है नीरीक्षण व विश्वास की तुलना में अनुमान व कल्पना का कोई स्थान नही है अपितु कुछ अनुमान व परिकल्पनाऐं तो पाप बन जाते हैं। सर्वप्रथम अनुमान करने वाला इबलीस आज तक निन्दनीय है तथा सर्वथा रहेगा।
कल्पना व अनुमान की तुलना में ज्ञान वास्तविक है जिसका केन्द्र व उद्वगम ईश्वर है। जिसकी वाणी इसलाम के अनुयायियों के पास कुरान के रुप में उपलब्ध है तथा उसमें जो कुछ है वह सत्य ही सत्य है। हर वस्तु की व्याख्या उसमें विस्तार से उपलब्ध है परन्तु प्रत्येक व्यक्ति के लिये नही वरन् मात्र उनके लिये जिन पर कुरान उतारा गया ओर वह महानुभाव हजुरे सरवरे कायनात पैग़म्बरे अकरम हज़रत मो 0 मुस्तफ़ा (स 0) और उनके पश्चात कुरान के मर्म के ज्ञाता रासेख़ूना फिल्म इल्म (ज्ञान में डूबे हूऐ) हैं , जिन के ज्ञान एंव विश्वास में परिवर्तन व परिवर्धन नही होता। अतः ऐसे ज्ञानी , वेदाँती , व दाशर्निक जिनके विचार नित्य बदलते रहते हैं। वे रकसूख़ून फिल इल्म नहीं हो सकते बल्कि मात्र वह पैग़म्बर के उत्तराधिकारी हो सकते है। जिन्होनें इस सृष्टि के किसी ज्ञानी से शिक्षा नहीं ग्रहण की बल्कि वह पैगम्बर के ज्ञान के द्वार हैं। जिनका परियच स्वंय हुजूर ने इस प्रकार से करकया है इना मदीनतुल ईल्म व इलीयुन बाहबुहा (मैं ज्ञान का नगर हूँ और इली उसका द्वार) अपके पश्यात् अन्य औलिया की पहयान भी यही रहेगी कि इस संसार में किसी से शिक्षा न प्राप्त की हो बल्कि उनका ज्ञान दैवीय हो , ग्रहण किया हुआ न हो। वह स्वयं ज्ञान ग्रहण हैतू किसी व्यक्ति , बिना आयु के अन्तर के किसी के ऋणी न हो वरन संसार उनके ज्ञान का ऋणी हो। उनका ज्ञान सीमित न हो बल्कि असीमित हो।
ऐसी स्थिति में यदि किसी विशेष शीर्ष् हैतु कुरान में सूक्ष्म संकेत उपलब्ध हो और पैग़म्बर तथा उनके औलिया उनकी व्याख्या कर रहे हों तो मुसलमान होने के नाते हमारा कर्तव्य है कि हम विश्वास के साथ उसका समर्थन करें तथा समझ न पाने के आधार पर उसे नकारने से अपने को बचायें ताकि इस्लामी परिधि से बहिष्कृत न हो जायें। ऐसे ही विषयों में से एक विषय प्रलय है जिस पर विश्वास मुसलमानों के मूल सिद्धान्तों में सम्मिलित है परन्तु प्रलय और उससे पूर्व के कुछ लक्षण निर्धारित है जिनका उल्लेख कुरान तथा पैगम्बर की हदीसों में उपलब्ध है। इन लक्षणों में से एक मुख्य और अनिवार्य लक्षण हज़रत इमाम मेहदी का प्रकट होना एवं उठ ख़डा होना भी है। जिससे समस्त मुस्लिम समुदाय सहमत है क्योंकि इसके विषय में आयते, हदीसे तथा धर्म गुरुओं एवं धर्म दार्शनिकों के कथन उपलब्ध है। ऐसी दशा में यदि कोई मूर्ख निजी स्वार्थ हैतु इमाम मेहदी के प्रकट होने तथा उठ खड़ा होने को नकारे तो वह सिवा भटका हुआ और मूर्ख होने के और कौन हो सकता है।
हज़रत इमाम मेहदी के अस्तित्व के सम्बन्ध में कोई भेद मुसलमानों में नही है बल्कि जुज़यात (आंशिकतः) में कुछ भेद हैं और वह यह कि शिया इमामिया आपके अस्तित्व के समर्थ् मे है तथा आपको जीवित एंव लुप्त जानते है। हज़रत ईसा व इलयास तथा खिज्र के समान परन्तु कुछ सुन्नी महानुभाव इस बात को मानते है कि अभी पैदा नही हुऐ बल्कि पैदा होंगे तथा प्रकट होने के समय आपकी आयु 40 वर्ष होगी। इस प्रकार 40 वर्ष के समय की सृष्टि के यह महानुभाव भी समर्थक हैं। इसके अतरिक्त बधुआ सुन्नी पारखीगण इस विषय में शियों से सहमति रखते हैं।
ऐसी दशा में किसी बेढ़ंगे एंव रास्ता भूले व्यक्ति का आपके अस्तित्व से मुकरना स्वंय उसके काफ़िर होने का प्रमाण है। इसलिये की पैग़म्बर का कथन है कि इमाम मेहदी के अस्तित्व को नकारने वाले काफ़िर है। यदि थोड़ा सा चिन्तन कर लिया जाये तो आपके अस्तित्व का सबसे ब़डा प्रमाण झूठे लोगों का मेहदियत का दावा है।
इसलिये कि नक़ल यर्थाथ मूल की ही बनायी जाती है यदि मूल का पता ही न हो तो नक़ल की आवश्यकता ही क्या है क्योंकि आपके सम्बन्ध में सम्पूर्ण लक्षण एंव निशानियाँ , जाति एंव वंश , रूपरेखा पुरातन काल से पुस्तकों में इंगित है जो झूठों की वास्तविक्ता अतिशीघ्र वस्त्रविहीन हो जाती है।
हाँ ऐसे लोगों से वह बे-पढ़े लोग जल्द धोखा खा जातें हैं। जिनको न इमाम की विशेषताओं का ज्ञान है और न ही वह आपके प्रकट होने के लक्षणों से अवगत हैं। न ही उन्हें इमाम के गुणों का बोध है यद्यपि प्रत्येक मुसलमान का कर्तव्य है कि वह इन बातों को जानता हो और विशेष रूप से वर्तमान समय में जबकि नीचता एंव भ्रांति समस्त संसार पर अपना अधिकार जमा चुकी है और शैतान देखने में अपने उद्देश्य की सफ़लता पर अत्यधिक चैतन्य है मैनें मात्र ज्ञान विचार को दृष्टिगत रखते हुए कि आज के भौतिक युग में जबकि धर्म से विरोध एक फ़ैशन बल गया है और इसलाम विरोधी अन्धकार की घटाऐं सारे संसार को अपने घेरे में ले जुकी हैश समय तीव्रता से विनाश निकट पहुँच रहा है। साथ ही वह समस्त लक्षण जिन की जानकारी पूर्व में दी जा चूकी है शीघ्र वास्तविकता में परिवर्तित होने के निकट हो गये हैं। और ईश्वर ने चाहा तो वह जिसके आने की सब प्रतीक्षा में है साक्षात् रूप में प्रकट होगी इसलिए आवश्यक है कि अपने अध्यनानुसार उन लक्षणों व संकेतों को एक स्थान पर एकत्रित कर दिया जाये जिससे उनका संज्ञान परिचय सुगमता से हो सके और यदि यह पुनीत कार्य भगवान तथा इमाम की ओर से स्वीकार हो गया तो मेरे लिये वह आख़ेरत (परलोक) की पूंजी बन जायेगा। मात्र इसी ध्येय से यह संक्षिप्त पुस्तक पाठकों को समर्पित है विश्वास है कि इन लक्षणों में पूर्ण होने वाले प्रत्येक लक्षण अध्ययनकर्ताओं के ईमान व विश्वास में बढोत्तरी का कारण होंगे तथा मोक्ष प्राप्ति का स्रोत बन जायेंगे।
यद्यपि लगभग 11 वर्ष पूर्व इस विषय पर मैंने प्रथम पुस्तक आसारे क़यामत ज़हूरे हुज्जत तथा दूसरी बार इरफाने इमामत संकलित की। इस्लामी भाइयों ने शीघ्रता से क्रय करके अपनी मान्यता व इस्लाम दोस्ती का परिचय दिया था मगर कालान्तर में ऐसे लक्षण जो उन पुस्तकों में इंगित थे पूर्ण हो गये जब्कि उस समय उनके विषय में सोचा भी नहीं गया था और उसी प्रकार बहुधा ऐसे लक्षण जो उन पुस्तकों के लिखते समय मेरे अध्ययन से परे थे , शेष रह गये थे। मगर इस थोड़े समय में संसार में तीव्रता से परिवर्तन हुआ , यदि आप तनिक चिन्तन करे तो आभास होगा कि बीते दस वर्षों में भूमण्डल में जो परिवर्तन दृष्टिगोचर हुऐ उसका उदाहरण संसार का इतिहास प्रस्तुत करने में अक्षम है।
इसीलिये अब प्रत्येक व्यक्ति यह आभास करने पर विवश है कि ईश्वरीय वचन अवश्य पूर्ण होंगे और कदाचित अब समय तेज़ी से निकट आ रहा है इस परिपेक्ष में देश के अनेक भागों से मेरी पूर्व पुस्तकों की माँग होने लगी परन्तु खेद है कि अब मेरे पास वह पुस्तक शेष नहीं रही। पुनः उनके मुद्रण हैतु मित्रों का आग्रह बढ़ता गया अव्तोगत्वा इसे धार्मिक उत्तरदायित्व समझ कर विवश हो गया। मगर मैनें यह उचित समझा कि एक नची पुस्तक संकलित कर ली जाय जिसमें पूर्व पुस्तकों के आवश्यक उदाहरण के अतरिक्त मात्र प्रकट होने के लक्षण उल्लेखित थे अन्यथा इमाम के विशेष परिचय और अन्य आवश्यक शीर्षकों हैतु हमारी पूर्व पुस्तके पर्याप्त है।
मेरा अक़ीदा है कि एकाग्रचित होकर सत्य मन से आने वाले की प्रतीक्षा की जाये और पहले ही से सद ज्ञान की राह तै कर ली जाये तो फिर यह प्रतिक्षा काल आराधना ही आराधना होगा। चूँकि मेरी वर्तमान पुस्तक ज्ञान बढोत्तरी तथा तीव्र प्रतीक्षा का कारण होगी इसलिये मुझे विश्वास है कि ये तुच्छ संकलन कर्ता तथा पाठ्यकगण इस आराधना में उभयनिष्ट हो जायेंगे।
चूँकि हज़रत इमाम (अ 0) उस समय तक प्रकट न होंगे जब तक कि इस भूमण्डल पर अत्यधिक उथल-पुथल न हो जाये और बुद्धि को आशचर्यचकित कर देने वाली परिस्थितियाँ न विध्यमान हो जाये जिसकी आच कल्पना भी असम्भव है। इसलिये मैंने इस पुस्तक का नाम क़यासते सुग़रा (लघु प्रलय) रखा है क्योंकि आप का प्रकट होना वास्तव में क़यामते कुबरा (महाप्रलय) का पूर्वरूप है , जैसा कि इसके अध्ययन से विदित होगा।
मैं परमात्मा से प्रार्थना करता हूँ कि वह जगस्वामी मुझे तथा आप सब को पुण्य कार्य सम्पन्न करने की प्रेरणा दे और इस योग्य बना दे कि हम इमामे के निम्नकोटि के सेवकों में सम्मिलित हो सकें और प्रलच काल में ईश्वर के सम्मुख सच्चे मुसलमान बनकर उपस्थित हो सकें। या अल्लाहों या रहमाने या रहीमों या मक़ललेबल कुलूब सब्बित क़लवी अला दीन काऐ आमीना (है परमेश्वर है दयालू , है दयावान है ह्रदय परिवर्तित करने वाले , हमारे ह्रदय को धर्म पथ पर रख भगवान ऐसा करे।
मैं उन व्यक्तियों का सह्रदय आभारी हूँ जिन्होने किसी भी रुप से इस पुस्तक के विषय में मेरी सहायती की।
ज्ञान और कुरान के आधार पर कुल इसलाम धर्म मानने वाले तथा दूसरे धर्मों के अनुयायीयों ने इब्लीस (शैतान) के अस्तित्व को माना है। कुरान में बहुधा स्थानों पर शैतान का उल्लेख है। जिसमें इंगित है कि शैतान मानव का शत्रु है तथा खुल्लम-खुल्ला पथ-भ्रष्ट करने वाला है। तथा शैतान ने स्वंय ईश्वर के सम्मुख यह घोषणा की कि मै सिवा तेरे आज्ञाकारी जनों के सभी को बहकाऊगा और सत्य मार्ग से विचलित कर दूँगा। तदानुसार वह मनुष्य की धमनियों में रक्त की तरह प्रवाहित होकर प्रत्येक व्यक्ति को बहकाता रहता है तथा नीचता , घृणा और पथभ्राँति उसकी कार्य सिद्धी है।
मगर यह भी वास्तविकता है कि शैतान को पैदा करने वाला भी ईश्वर है और उसी ने उसे निर्धारित समय तक की छूट दी है। इसलिये बुद्धि अनुसार यह आवश्यक है कि जब तक संसार में पथ भ्रमित करने वाले का अस्तित्व है तब तक संसार में पथ परदर्शक का भी अस्तित्व होना चाहिए। अन्यथा मनुष्य अपनी प्राकृतिक रचनात्मक त्रुटियों के फलस्वरूप दुष्टता और पाप करने पर विविश समझा जायेगा। ईश्वर का शैतान को छूट देना और प्राणियों को बिना किसी पथ परदर्शक के रखना प्राणी जाती के साथ अन्याय के समान होगा तथा जब मनुष्य प्रकृति अनुसार पाप और कुकर्म पर विवश समझ लिया जायेगा तो फिर पुरस्कार , दण्ड , स्वर्ग-नरक यह शब्द निअर्थक हो जायेंगे।
इसीलिये भगवान ने सृष्टि को आदि से कदापि से कदापि बिना पथ-परदर्शक नहीं रखा। इस प्रकार मो 0 साहब (स 0) के विषय में कहा गया कि ऐ पैग़म्बर आप (पुण्य पर) अच्छी सूचना देने वाले (पाप से) डराने वाले हैं और हर जाति (क़ौम) में एक पथप्रदर्शक है। तथापि पथ परदर्शन का प्रबन्ध सदैव ईश्वर की तरफ से है सर्वदा रहेंगा। स्पष्ट है कि जो मनुष्य स्वंय मार्ग ढूँढता हो वह कदापि मार्गदर्शक नहं हो सकता मार्गदर्शक वही हो सकता है जिसे स्वंय पर मार्ग का ज्ञान हो जिसके चरित्र पर पापों की छाया भी न हो और वह केवल मासूम ही हो सकती है , पथ भ्रष्ट और पापी कदापि मार्गदर्शन नही कर सकते क्योंकि ओ ख़ेश्तन गुमअस्त किरा रहबरी कुनद (वह तो स्वंय मार्ग भूला है वह क्या मार्गदर्शन करेगा) इस प्रकार यह बात स्पष्ट है कि मार्गदर्शक वही होगा जो प्राकृतिक रूप से जन्म जन्मान्तर से शिक्षित ज्ञानी और सदमार्गो का जानने वाला होगा और जो सदमार्ग का होता है उसी को महदी कहते हैं तथा से मेहदी के अस्तित्व से बौद्धिक रुप से कोई काल किसी समय ख़ाली नहीं रह सकता। इसी प्रकार मानव उत्पत्ति के प्रारम्भ से यह प्रथा प्रचलित है बल्कि प्रथम मनुष्य ने मार्गदर्शक के रुप में पृथ्वी को सुशोभित किया तथा आदम से लेकर अन्तिम नबी तक नबूवत के मार्गदर्शन की श्रंखला निरन्तर चलती रही। जिसमें हर नबी का पाक रहित जीवन मार्गदर्शन की आवश्यकती पूरी करता रहा। इसलिये नबैवत के समापन पर जबकि संसार विद्मान है और उसे प्रलय तक रहना है तो आवश्यक है कि ऐसी दोष रहित श्रंखला बनी रहे परन्तु संसार को तो विदित है कि ऐसा मौसम व्यक्ति नबी के बाद , उनके मुख्य परिवारजनों में से ही होगे। जिनका अस्तित्व तय और सिद्ध है। रसूल के परिवारजनों में जो इमाम हज़रत हुज्जत इब्ने असकरी (अ 0) का अस्तित्व है तथा वह दृष्टि से ओझल है वह शिक्षा दीक्षा की प्रक्रिया को लुप्त होकर उसी प्रकार पूर्ण कर रहे है जिस प्रकार शैतान छिप कर पथ भ्रष्ट करने तथा बहकाने में कार्यरत है।
प्रसिद्ध हदीसे सक़लैन जो रसूल ने अन्तिम हज यात्रा के अवसर पर कही। लग-भग पूर्ण इसलाम के मानने वाले सहमत हैं कि हजूर अपने बाद के हैदायत (मार्गदर्शन) के प्रबन्ध को स्पष्ट करते हुऐ कु कि ऐ मुसलमानों मैं अपने बाद तुम्हारे मध्य दो भारी वस्तुएं तुम्हारी देख रेख शिक्षा दीक्षा हैतु छोड़े जा रहा हूँ , जिनमें एक कुरान (ईश्वर की पुस्तक) तथा दूसरी मेरे अहलेबैत (घरवाले)। तुम इन दोनों से अपना सम्बन्ध जोड़े रहोगे तो कभी भटकोगे नहीं तथा यह एक दूसरे से अलग नहीं होंगे यहाँ तक कि कौतर के तट पर पहुँय जायें। इस हदीस से बात स्पष्ट है कि रसूल के बाद मुसलमानों के लिये अनुसरणीय रसूल के परिवार जह एंव अनुकरणीय दैवीय पुस्तक कुरान है और इनसे बिना सम्बद्ध हुऐ मोक्ष प्राप्ति संभव नहीं है। इसी लिये इन दोनों का अस्तित्व प्रलय काल तक रहना अनिवार्य है। देखने में दैवीय पुस्तक अर्थात कुरान तो मुसलमानों के पास उपलब्ध है परन्तु रसूल के परिवारजनों में से कोई व्यक्ति स्पष्टता प्रतीत नहीं होता परन्तु कथन उस महान व्यक्तित्व का है जिसकी ओर झूठ व अस्त्य की शंका भी नहीं हो सकती बल्कि कुरान के अनुसार उसका कथन भगवान का कथन है , अतः धर्म व ज्ञान की दृष्टि से मानना पड़ेगा रसूल अल्लाह के परिवारजनों में से किसी भी व्यक्ति का होना अनिवार्य है तथा उस समय तक आवश्यक है जब तक कुरान संसार में है और रसूल के परिवारजनों में ऐसा ही व्यक्ति मार्गदर्शक होगी तथा और कोई मार्गदर्शक (हादी) हो नही सकता जब तक मेहदी न हो इसलिये आज जो कोई ऐसे इमाम को नकारे जो रसूल के परिवारजनों में से ही हो , तो फिर उसे धार्मिक दैवीय पुस्तक कुराल के अस्तित्व को भी नकारना पडेगा क्योंकि हजूर का कथन है कि यह दोनों कदापि पृथक नहीं हो सकते बल्कि साथ ही साथ रहेगे अतः स्पष्ट है कि जब कुरान उपलब्ध है को परिवारजनों में से कोई न कोई ऐसा अस्तित्व अवश्य है जो कुरान के साथ हो रसूल अल्लाह के परिवारजन उनके सहित चौदह मासूम हैं जिनमें रसूल की पुत्री के अतरिक्त बारह इमाम सम्मिलित हैं उनमें से वर्तमान समय तक ग्यारह इमाम हज़रत अली से हज़रत इमाम मेहदी शेष है जिनका अस्तित्व भगवान की पुस्तक के साथ शेष है। उन्ही के कारण कुरान का अस्तित्व भी सुरक्षित है उनका दृष्टिगोचर न होने का प्रमाण नहीं हो सकता। इसलिये समस्त मुसलान विश्वास रखते है कि इमाम मेहदी रसूल ही के परिवारजनों में से हैं तथा निश्चित समय पर प्रकट होंगे उनके अस्तित्व को नकारा नहीं जा सकता।
टिप्पणीः
कथित हदीस की पुष्टि इतनी पुस्तकों में उपलब्ध है कि मुझे इस सम्बन्ध में लिखने की कुछ आवश्यकता नहीं। साधारण मुसलमानों की पुस्तकों का अवलोकन किया जा सकती है , इसके अतरिक्त अन्य अनेकों हदीसें व आयतें प्रयोग स्वरुप इस विषय में उपलब्ध हैं। इस पुस्तक का संक्षेपण सविस्तार उल्लेख करने में बाधक है। अध्ययन में रुचि लेने वाले एंव सत्य आकाँक्षी , सिरात आसूवी फ़िल एहवाले मेहदी तथा किफायुत तालिब , मो 0 इब्ने शाफेऱ का अध्ययन कर सकते हैं। उदाहरण स्वरुप केवल दो हदीसें प्रस्तुत हैं।
इब्ने अब्बास – अनस जाबिर – इब्ने माजा – अहमद बिन हम्बल आदि ने उल्लेख किया है कि रसूल अल्लाह का कथन है कि यदि संसार के जीवन में मात्र एक दिन शेष हो तो भी ईश्वर मेरे अहलैमेत (परिवार जनों) में से एक को बाक़ी रखेगा जो पृथ्वी को न्याय से उसी प्रकार परिपूर्ण करेगा जिस तरह वह अत्याचार व अन्याय से भरी हुई है।
टिप्पणीः- इस हदीस पर समस्त मुस्लिम समाज सहमत है।
बुख़ारी शरीफ़ व सही मुस्लिम एंव अन्य पुस्तकों में है कि हजूर का कथन है कि यकुना बादि असना अशर अमीरन कुल्लहुम मिन कुरैश तथा कुछ संस्करणों में मिन बनी हाशिम है अर्थात मेरे बाद बारह अमीर होंगे जिनमें के समस्त कुरैश से होंगे फिर विशेष रुप से कहा वह बनी हाशिम में से होंगे।
यह हदीस बुख़ारी में तीन प्रकार , सही मुस्लिम में नौ प्रकार , अबुदऊद में 3 प्रकार , तिरमिज़ी में एक प्रकार से उल्लेखित है। इसलिये ज्ञात होता है कि पैग़म्बर ने ई बार इस हदीस का वर्णन किया है , उसमें कहीं पर शब्द , कुरैश कहा है तथा किसी स्थान पर विशेष रुप से बनी हाशिम के शब्द का प्रयोग किया है परन्तु बारह की संख्या हर स्थान पर है अब यह पूर्णतया स्पष्ट है कि यह बारह अमपर-ख़लीफ़ा हाकिम या इमाम रसूल के परिवार जनो के अतरिक्त अन्य नही हो सकते क्योंकि न किसी दूसरी कड़ी का कोई ख़लीफ़ा व अमीर ऐसा आज उपलब्ध है जसका अस्तित्व कुरान के साथ माना जाये और न ही कोई अमीर या हाकिम कड़ी बारह पर समाप्त होती है। अब सहाब – ए – रसूल (रसूल के मित्रों की सूची) जो ख़लीफ़ा कहलाये वह बारह न थे , न बनी उम्मैया के शासको से संख्या पूरी होती है और न ही बनी अब्बास के राजाओं से। अतः सत्य मात्र यही है कि इन बारह अमीरों का तात्पर्य केवल बनी हाशिम तथा रसैल के अहलेबैत (परिवारजनों) ही से है तथा रसैल के परिवार जनों में से बारह इमाम ही हो सकते हैं जिनके प्रथम हज़रत अली (अ 0) अन्तिम इमाम मेहदी (अ 0) जिनका अस्तित्व है। भगवान तथा रसूल के प्रतिनिधी है जिनके कारण अब तक रसैल के धर्म अस्तित्व है तथा प्रलय को भी उन्हीं की प्रतीक्षा है।
अनेक पुस्तकों अध्ययन से ज्ञात होता है कि लगभग संसार के समस्त धर्म एंव ज्ञानी इस बात पर सहमत है कि अन्तम समय में एक ऐसा विलक्षण अस्तित्व अव्श्य प्रकट होगा जो सासार से अन्याय व अत्याचार को समाप्त करके न्याय सम्पन्न बना दे तथा संसार के बिगड़े समाज और आचरण को सुधारे। हाँ इस अस्तित्व का नाम हर एक धर्म व साज में पृथक बताया है। इस प्रकार फ़ाजिल बरुजरदी में नूरूल अनवार नामी पुस्तक जो ईरान से प्रकाशित हुई है , में विस्तार पूर्वक लिखा है कि आप के पृथक-पृथक नाम पर धर्म और समाज में भिन्न भिन्न लिये जाते रहे हैं तथा समस्त काफ़िरों की पुस्तकों एंव तौरेत़ जुबूऱ इंजील व कुरान में अलग-अलग आपका उल्लेख है , जिसकी प्रति (नकल) सिरातु-सन्मुवी फ़िल अहवाल-मेहदी नामक पुस्तक में भी प्रस्तुत की है। किन्तु आपके प्रसिद्ध नाम , मेहदी , मुन्तज़िर , साहैबुल अम्र , हुज्जत , बुरहान आदि है। इब्राहीमी ग्रन्थों में आपका नाम साहिमुल अस्र , ज़बूर में क़ायम , तौरेत में ओक़ील मो , एंव इन्जील में महमेज़ है , ज़रतुश्ती पुस्तकों में ख़ुसरो और कुछ आसमानी पुस्तकों में कल्मतुल हक़ लिखा है। पुस्तक हज़ार नामा हिन्द में लन्दयतार कहा गया है। ब्रह्मणों के वेद में मन्सूबे के नाम से पुकारा गया है। ऊरफ़ा और सूफिया में आपका नाम कुतुब प्रसिद्ध है। गौस आपकी विशेष उपाधि है तथा जंगली अरब बद्दू आपको अबू सालेह के नाम से स्मरण करते है और आप इसी नाम से अधिक प्रसिद्ध है किन्तु यह निश्चित है कि नाम की भिन्नता से व्यक्तित्व में कोई अन्तर नहीं हो सकता।
बहुधा सुन्नी आलिमों एंव समस्त शिया आलिमों का विस्तार सहित कथन है कि आपके पूज्य पिता इमाम हसन असकरी , इब्ने मो 0, इब्ने अली , इब्ने मुसा , इब्ने जाफ़र , इब्ने मो 0, इब्ने अली , इब्ने हुसैन (अ 0) हैं और इब्ने शाज़ाँ के सन्दर्भ से स्वंय इमाम हसन असकरी का कथन है कि वलीये ख़ुदा हुज्जते इलाही व इमामे वक़्त मेरे बाद मेरा बेटा है जो पन्द्रहवी शाबान 255 हि 0, जुमे के दिन सूर्योदय के समय सामर्रा में ख़तना किया हुआ पैदु हुआ जिसके लिये गैबत (लुप्ति) है। गैबते कुबरा (दीर्घ लुप्ति) के पश्चात् वह प्रकट होगा तथा पृथ्वी को न्याय उसी प्रकार भर देगा जिस प्रकार वह अत्याचार व अन्याय से परिपूर्ण होगी।
टिप्पणीः-
विस्तार हैतु इरफानुल इमामत नामक हमारी पुस्तक का अवलोकन करें।
जारूद का बाकिरूल उलूम के सन्दर्भ से कथन है कि अमीरूल मोमनीन हज़रत अली (अ 0) ने मिम्बर से बताया है कि एक ब्लक मेरी सन्तान से अन्तिम समय में उठ खड़ा होगा जिसका रंघ सफ़ेदी लिये लाली युक्त पेठ तथा जाँघे चौड़ी भुजाओं की हडिडयां बड़ी तथा माँस से भरी और पीठ पर दो तिल , एक त्वचा के रंग का दैसरा पैग़म्बर साहब के तिल के समान , उनके दो नाम है एक स्पष्ट और एक अस्पष्ट जो अस्पष्ट है वह अहमद और जो स्पष्ट है वी मीम , है मीम , दाल।
अन्य पुस्तकों के अध्ययन तथा इमामों के कथनानुसार आपके आकार प्रकार का विस्तार निम्नवत है। जिस का स्मरण रखना हर प्रतीक्षक मुसलमान के लिये आवश्यक है।
सर गोलाकार , बाल सुन्दर , कन्धों तक लटके हुऐ सर के बीच में माँग़ मुख़ड़ा तेजस्वी श्वेत ललाट चौड़े व चमकदार , दाढी काली घनी , नाक पतली लम्बी , आँखें सुरमई प्रकाश मान किन्तु ऊपर को निली हुई नहीं , बल्कि नीचे की ओर दबी हुई भाँहें चौड़ी तथा धनुष समान दोनों भवों के मध्य कुछ उभार , दाँत खुले हुऐ चमकदार , गालों पर माँस कम तथा एक पर काला तिल मुखडे और सर पर कोई चिन्ह नहीं , विसाल भुजाऐ भरी हुई , दोनो वक्षों के मध्य विशालता , कद सामान्य न लम्बा न छोटा , शरीर भरा हुआ , दाहिनी जाँघ पर तिल , घटने नीचे तक झुके हुऐ हथेलियों पर माँस , लाली तीव्र श्वेत रंग , आचरण व व्यवहार रसूले ख़ुदा के अनूरूप।
ग़ैबत (लुप्तिता) समस्त इतिहासकारों का मत है कि 8वीं रबी अव्वल सन् 260 हि 0 के इमाम हसन असकरी शहीद हुऐ अतः नवीं रबी अव्वल 260 हि 0 से आप स्पष्ट रुप से दैवीय खिलाफ़त की गद्दी पर विराजमान हुए। इसीलिये संसार के शिया प्रत्येक वर्ष इस तिथि को प्रशंसा का प्रदर्शन करते हैं। इसी दिन आपकी ग़ैबते सुगरा (लघु प्रलय) प्रारम्भ होती है और सत्य कथनों के अनुसार 389 हि 0 से आपकी ग़ैबते सुगरा के काल में आप के चार मुख्य विश्वसनीय व्यक्ति थे जो हववामे अरबा (चार उत्तराधिकारी) के नाम से प्रसिद्ध है। जिनमें प्रथम उसमान इब्ने सईद , दिव्तीय अबूजाफ़र बिन उसमान , तृतीय अबुल क़ासिमुल हुसैन बिन रौह तथा चतुर्थ अबुल हसन अली इब्ने मोहम्मद समरी थे। इन सब की समाधिया इराक़ की भूमि पर आज भी लोगों की अध्यात्मिकता का आकर्षण है। आप के चतुर्थ नायब मो 0 समरी के विषय में अबी मो 0 हसन इब्ने मकतब का कथन है कि मै बग़दाद में आपके चौथे नायब के समक्ष उपस्थित था तो देखा कि वह इमाम का लेख जो (तौक़ीय) के नाम से प्रसिद्ध है लोगों को दिखा रहे हैं उसके शब्द यह थे
अनुवाद , ऐ अली इब्ने मोहम्मद समरी ईश्वर तेरे भाईयों को तेरे दुख में अधिक पुण्य प्रदान करे क्योंकि तू छज् दिन में मरने वाला है अतः तैयार हो जा और किसी अन्य को अब वसीयत न कर कि वह तेरा उत्तराधिकारी हो क्योंकि ग़ैबते ताम्मा कुबरा (पूर्ण दीर्घ लुप्ति) का समय आ गया अब मैं प्रकट नहीं हूँगा। भगवान की आज्ञा के बाद तथा एक बड़े लम्बे समय के पश्चात ऐसा होगा जबकि लोगों के ह्रदय कठोर हो जायेंगे और पृथ्वी अत्चाचार से परिपूर्ण हो जायेगी। निकट भविष्य में कुछ व्यक्ति मेरे देखने का दावा करेंगे तो जो सुफ़यानी और आकाश की चीख़ से पूर्व मेरे देखने का करे वह झूठा द फसादी है , वलाहौल वलाकूवत इल्ला बिल्लाहै ईश्वर के सिवा कोई शक्तिशाली नही
आवश्यक टिप्पणीः-
चूँकि इस पुस्तक मे अति संक्षेपण को दुष्टिगत रखा गया है अतः विस्तृत शीषर्क उदाहरणार्थ ,ग़ैबत का फलसफ़ा स्थान , काल , लाभ , लम्बी आयु , मार्गदर्शन के कार्य , एंव अन्य विस्तृत बिन्दुओं के लिये अन्य पुस्तकों को देखा जा सकती है। इन सभी शीर्षकों को हमने आसारे क़यामत एंव इरफ़ने इमामत नामक अपनी पुस्तको में एकत्र कर दिया है।
(दावते फिक्र व तअक्कुल)
आवश्यक बातेः-
अब इस तथय को पृथ्वीवासियों में से कोई बुद्धिजीवी नकार हहीं सकती कि बीते समय के कुछ वर्षों में भूमण्डल में जो घटनाए परिस्थितियां एंव उथल-पुथल दृष्टिगाचर हुऐ हैं विशेष रुप से मानव की भौतिक उन्नति चिस चरम सीमा तक गयी है सम्भवता उसका उदाहरण संसार के विगत इतिहास में मिलना कठिन है , सभ्यता संस्कृति समाजिक व व्यवहारिक देखने योग्य परिवर्तन सैक़ड़ों आश्चर्यजनक मामलात तथा विश्व स्तर के रकजनैतिक परिवर्तनों ने अब जो रुपधार लिया है इन सब ते यह सिद्ध हो चुका है कि वास्तव में समय तीर्वता से परिवर्तनशीब है। नित्य समाचार पत्रों के अध्ययन एंव आकाश वाणी से विश्व सूचनाएँ समाचार अपनी चरम सीमा पर पहुँच गया है पापों के अधिक्य ने अब जो रुप धार लिया है वह सोच से परे है और अत्यंत खेदजनक है। अपराध की स्थिति ने जो रुख़ अपनाया वह अत्यंत ही आश्चर्यजनक है , कि अब अपराध ने कलात्मक रुप धारण कर लिया है। तथा प्रशासन उसका संरक्षण करते हैं। आज पाप और अपराध का बोध समाप्त हो गया है। पाप , पाप नहीं रहा बल्कि प्रत्येक आने वाला दिन बीते हुए से अधिक बुरा आता है ऐसे आतंक युत समय में क्या मुसलमान के रुप में हमारा यह कर्तव्य नहीं कि हम अपने मार्गदर्शकों और पूर्वजों के कथनों पर मनन एंव चिंतन करें जिन्होनें लगभग 1350 वर्ष पूर्व अपने शब्दों में इस समय का चित्रण करते हुए इस संसार के परिणाम से सचेत किया हो और सदाचारी बनकर जीने का निर्देश दिया है ईश्वर के लिये न्याय की दृष्टि से सोचिये कि क्या हमारे ईमान में बढ़ोत्तरी के लिये यह बात पर्याप्त नही कि पैग़म्बर साहब व अन्य मासूम इमामों ने जिलको विशेष ज्ञान भगवान से प्राप्त हुआ था उन्होने जो कुछ कहा था वह आच अक्षरशः ठीक नहीं सिद्ध हो रीक है और क्या यह इस बात का प्रमाण नहीं कि ईश्वर वाणी रुपी कथन जो कुछ भविष्य के लिये कहा है वह शब्दतः ठीक एंव उचित होगा।
यदि हम पक्षपात से ऊपर उठकर सोचें कि जिनमहापुरूषों ने हमें भविष्य सम्बन्धी समाचार दिये हैं यद्पि देखने में वह हमारी तरह के मनुष्य थे वरन् भगवान ने उन्हे विशेष ज्ञान प्रदान किया था जिसके कारण उनकी दृष्टि प्रलय तक होने वाली घटनाओं को लेख रही थी तो यह कोई आश्चर्य की बीत नहीं और किसी को यदि अपनी संकिचित दृष्टिकोण तथा अन्धविश्वास के कारण आश्यर्य हो तो उसके लिये यह पर्याप्त है कि जो लक्षण उन महानुभाव ने बताचें हैं पूर्व काल से पुस्तकों में उनका उल्लेख है और एक लम्बा समय पीत जाने पर भी आच ठीक-ठाक पूर्ण रूप से विदित हो रहे हैं तथा जो शेष है वह भी ईश्वर ने चाहा तो होकर रहेगा। यदि हमे उनसे कितनी ही घृणा क्यों न हो इन लक्षणों का पूर्ण होना स्वंय उन मुहानुभवों के सत्यवादी होने का प्रमाण है और जब उनका कथन सत्य ही सत्य है तो अवश्य ही वह हमसे उत्तम एंव श्रेष्ठ हैं और भगवान की ओर से विशेष ज्ञान लेकर आये थे अन्यथा हमारी दशा तो यह है कि हमको अपने एक दिन बाद का ज्ञान नहीं कि क्या होगा दिन तो दैर एक पल का भी पता नहीं कि क्या कुछ होने वाला है। यह कहकर किसी बात की उपेक्षा करना तो बड़ा सरल है कि यह बातें एक विशेष प्रकार के विश्वास रखने वाले व्यक्तियों की ओर से लिखी जाती है या कुछ हदीसें वर्ग विशेष के सिद्धान्तनुसार उल्लेखित है , किन्तु मुझे खेद है कि ऐसे लोगों पर कि यदि वह निर्मल मन व ह्रदय से और श्रद्धापूर्ण मन से पक्षपात से परे हकर तनिक देखें कि इस वर्ग के पथ पर दर्शक कितने उत्तम व श्रेष्ठ थे तथा उनका ज्ञान कितना वृहत था जिन्होनें अपने ज्ञान से एक-एक बात से हमें अवगत करा दिया तथा अन्धकार के परदे फाड़ दिये। अब यदि चह कहा जाये कि इन वर्णित कथनों का प्रमाण क्या है इस सम्बन्ध में मैं संक्षेप उत्तर यह दूँगा कि आप प्रमाण न ढूँढे वरन् यह देखें कि उन्होने तेरह सौ वर्ष पूर्व जो कहा था वह आज हो रहा है या नहीं यदि आज वह सब कुछ हो रहा है तो यह स्वंय इस बात का प्रमाण है कि यह उन्ही का कथन है सम्भव है कि क्षणिक समय हैतु या आस्था की तीव्रता के कारण यह बात इस समय स्वीकार्य न हो किन्तु हर आने वाला लक्षण जो इस पुस्तक में इंगित है वह भगवान ने चाहा तो पूर्ण होने पर विवश कर देगा तथा उनके उत्तम व श्रेष्ठ होने एंव अद्भुत ज्ञानी होने का विश्वास करा देगा। इर प्रकार तर्क समाप्ति की श्रेणयाँ इमामे मेहदी के प्रकट होने के पूर्व ही सम्पनन हो चुकी होगीं। यदि इतनी स्पष्ट व प्रज्वलित संकेतों को भी कोई अस्वीकार कर दे और प्रकाश प्राप्त करने का प्रयास न करे तथा स्वयं को अन्धकार का बंदी बनाये रखे तो फिर सादी के कथनानुसार
गर नबीनद बरोजे शीर – ए – चश्म
आफताब रा चे गुनाह
यदि कोई दिन के प्रकाश को देख न पाय तो सूर्य के प्रकाश का क्या दोष वास्तव में इन लक्षणों के उल्लेख करने का मात्र यह ध्यये था कि प्रत्येक मुसलमान ऐसे आतंक युक्त समय में अपने को पापों से बचाये रखते हुऐ पवित्र जीवन व्यतीत करने का प्रयास करे ताकि प्रलय के दिन भगवान एंव रसूल के सम्मुख लज्जित न होना पड़े किन्तु खेद है कि हमने सब कुछ बिसार के धर्म ज्ञानियों से इतना बेगाने हो गये कि मानों हमारा उनसे दैर का भी सम्बन्ध नहीं , इसी कर्म का फल पिछले थोडे दिनों में संसार ने लेख लिया कि वह भाग जहाँ से इसलाम को उन्नति प्राप्त हुई थी , जहाँ इस्लाम के नूर की किरनें फैली थीं वहीं क्षेत्र अपने दुराचारों के कारण इतना अपमानित हो गया कि मुट्ठी भर यहूदियों ने वहाँ के बसने वाले नाम मात्र मुसलमानों के ह्रदच में नासूर का कार्य करेगा। एक सम्मानित मुसलमान के लिये बैतुल मक़दस (मुसलमानों का प्रथम किब्ला) और इसराईल की मिली जुली कल्पना ह्रदय और मन के लिऐ दुःखद सिद्ध होती रहेगी। जब तक कि बैतुल मुक़द्दस पर मुसलमानों का पुनः अधिपत्य नहीं होता जो अवश्य होकर रहोगा। इसलिए कि यह सूचना दी जा चुकी है कि इमाम मेहदी बैतुल मुक़दस में नमाज़ पढेंगे और वहाँ ठहरेगें।
किन्तु प्रश्न तो यह है कि मुसलमान अपने समय के इमाम को गहचानने की ओर ध्यान क्यों नहीं देता जबकि कुरान तथा हदीसों में उनका उल्लेख है क्या मुसलमानों को पैग़म्बर की इस हदीस का स्मरण नहीं कि जो मनुष्य अपने काल के इमाम को पहचाने बिना मृत्यु को प्राप्त हुआ तो वह कुफ़्र और अपमान की मृत्यु मरा। अर्थात दिखावटी रुप में मुसलमान होते हुए काफ़िर मरा। अब अगर इस हदीस के सत्य होने का प्रमाण माँगा जाये तो तहस्त्रों प्रमाण के अतरिक्त इस हदीस का कुरान से सम्बन्धित होना इसके सत्य होने का सबसे बड़ा प्रमाण है। कुरान का स्पष्ट कथन है कि हम प्रलय में हर मनुष्य को उसके इमाम के साथ बुलायेंगे , से ज्ञात होता है कि हर काल के लिये कुरान और हदीस के अनुसार इमाम का अस्तित्व आवश्यक है तथा पिछले व्यक्तव्य से स्पष्ट हो चुका है कि इस युग के इमाम हज़रत मेहदी (अ 0) के अतिरिक्त कोई अन्य नहीं , इस पर अधिकतर मुसलमान सहमत हैं। फिर मुसलमान उनके परिचय ते क्यों अनभिज्ञ हैं , कहीं ऐसा न हो कि वह प्रकट हो जायें और हम ज्ञान के अभाव के कारण उन्हें पहचान न सके तथा ऐसी दशा में हम यदि संसार से उठे तो मुसलमान होने के स्थान पर काफिर उठें और दोनों लोकों में घाटे में रहे। मुसलमानों का इमाम से अनिभज्ञ होने तथा उनकी अज्ञानता का निष्कर्ष है कि दुनिया के विभिन्न कोने से इमाम मेहदी बनने की सूचनाऐ सुनी जाती हैं तथा विभिन्न रंग रुप में झूठे व्यक्ति इमाम मेहदी बनने का प्रयास कर रहे हैं और मैं उल्लेख कर चुका हूँ कि झूठों का बनना ही किसी मूल मेहदी के होने का प्रमाण है। कहीं क़ादयान से मिर्ज़ा गुलाम अहमद का नाम लिया जा रहा है तो कहीं वाबी व बहायी बों दावा कर रहे हैं कि वह तो ईरान में जन्म बे चुके तथा समाप्त भी हो गये। लेकिन इन सब का झूठ इससे स्पष्ट हो जाता है कि मूल इमाम के आने के जो लक्षण पुस्तकों में जो उल्लेखित हो चुके हैं उनमें से अभी अनेकों शेष हैं जैसे कि इस पुस्तक में मैनें लिखी है तथा लक्षणों को एकत्र किया है। अतः उक्त समय से पूर्ण जितने भी बनने वाले बनते रहेंगे वह झूठे होंगे।
किन्तु सत्य असत्य के समझने तथा सज्चे झूठे को पहचानने हैतु प्रत्येक मुसलमान का कर्तव्य है कि वह सन्देह से ऊपर उठ कर विश्वास एंव श्रद्धा पूर्वक अपने युगके इमाम की विशेषीतांए , परिस्तिथियाँ , उनका हुलिया , उनके प्रकट होने के लक्षणों का जानकारी प्राप्त करके उनकी प्रतीक्षा करें तथा अपने को कुफ़्र की मौत से बचा बे। मैनें इस संक्षेप पुस्तक अत्यंत प्रयास किया है कि प्रकट होने के विशेष लक्षण एकत्र कर दिये जायें ताकि कुरान हदीस - - पैग़म्बर के आदेशों का पालन हो सके और हमारे ज्ञान की जिज्ञासा व प्रतीक्षा में बढोत्तरी का कारण बन जाये तथा निष्कर्ष में संकलन का उद्देश्य प्राप्त हो जाये।
प्रलय इसलाम के अनुयायियों के मूल सिद्धाँत में सम्मिलित है तथा प्रलय को असत्य समझने वाला भगवान के आदेशानुसार नरक का अहार है जिस व्यक्ति ने प्रलय को नसत्य समझा उसके लिये हमने नरक तैयार कर रखा है। प्रलय का एक दिन निर्धारित है जिसका ज्ञान भगवान तथा उसके विशिष्ठ जनों के अतिरिक्त किसी अन्य को नहीं परन्तु प्रलय होने के पूर्व कुछ लक्षण पैग़म्बर ने बताये हैं जिनमें से एक प्रमुख तथा प्रसिद्ध हजूर का यह कथन है कि दस लक्षण प्रलय से पूर्व आवश्यक हैं , सुफ़यानी का उठ खड़ा होना , दज्जाल का उठना , आग तथा धुँआ , दाब्बा (भूकम्प) , इमाम मेहदी का उठ खड़ा होना पश्चिम से सूर्योदच होना , ईसा मसीह का आकाश से आना , अदन की गहराई से आग निकलना जो लोगों को प्रलय का एक दिन निर्धारित है जिसका ज्ञान भगवान तथा उसके विशिष्ठ जनों के अतिरिक्त किसी अन्य को नहीं परन्तु प्रलय होने के पूर्व कुछ लक्षण पैग़म्बर ने बताये हैं जिनमें से एक प्रमुख तथा प्रसिद्ध हजूर का यह कथन है कि दस लक्षण प्रलय से पूर्व आवश्यक है , सुफ़यानी का उठ खड़ा होना , दज्जाल का उठना , आग तथा धुँआ , दाब्बा (भूकम्प) , इमाम मेहदी का उठ खड़ा होना पश्चिम से सूर्योदय होना , ईसा मसीह का आकाश से आना , पूरब में पृथ्वी का धंस जाना , अदन की गहराई से आग निकलना जो लोगों को प्रलय की ओर ले जाने वाली होगी।
टिप्पणीः-
पैग़म्बर की हदीसों में चूँकि संकेत हैं तथा परिणाम बताऐ गचे हैं किंतु उनके कारण नहीं स्पष्ट किये गये हैं तथा आधुनिक युग की परिस्थितियों के सम्मुख हम कह सकते हैँ। हुजूर का सम्भवता यह तात्पर्य था एतैव इन लक्षणों में-
इस कथन से सम्भवता यह संकेत है कि बमों के प्रयोग पर उनके द्वारा धुँआ औल जाये तथी बहुधा क्षेत्रों में आग लग जाये जैसा कि वर्तमान युद्ध 1967 ई 0 इसराईल एवं अरबों की लडाई में इसराईल ने नैपाम बमों के प्रयोग किये जिनके धुँऐ से सैकड़ों स्थानों पर आग बग गयी और अधिकता से मनुष्य जल गये।
इसकी व्याख्या का आगे कथनों एंव लक्षणों में उल्लेख किया जायगा। सुफ़यानी व दज्जाल के सम्बन्ध में भी लक्षणों का उल्लेख अग्रसर होगा। अदन की गहराई से अग्नि उद्गर तथा उसके तीव्र होने तात्पर्य यह है कि अदन के पेटोल भणडारों में आग लगना कुछ दूर नहीं तथा सम्भव है कि इस क्षेत्र के निवासी के लिये यही अग्नि प्रलय की पृष्ठभूमि सिद्ध हो जाये।
इससे तात्पर्य इमाम मेहदी का प्रकट होना है। इनमें बहुधा लक्षण आपके प्रकट होने के पूर्व विदित होंगे अतः वास्तव में आपका प्रकट होना ही पृष्ठभूमि है क़यामते सुग़रा (लघु प्रलय) की। अब बची क़यामते कुबरा (दीर्घ प्रलय) तो यह न जाने प्रकट होने के कितने लम्बे समय के पश्यात होगी इसकी जानकारी मात्र ईश्वर को है हाँ आपके प्रकट होने के पूर्व जो लक्षण दिखाई देगे उन्ही का उल्लेख इस पुस्तक में किया जायेगा।
यह बात स्मरणीय है कि कुरान में जिस स्थान पर शब्द साअत (समय) प्रयुक्त हुआ है बहुधा व्याख्या कर्ताओं की दृष्टि से साअत से तात्पर्य हज़रत इमाम मेहदी के प्रकट होने के समय से है और उसी समय से सम्बन्धित लक्षणों का उल्लेख किया गया है इस संक्षिप्त लेख में यह तथ्य स्पष्ट हो चुका है कि क़यासते सुग़रा (लघु प्रलय) एंव समय साअत का सम्बन्ध आपके प्रकट होने से समबद्ध है इसीलिये हुजूर तथा अन्य इमामों व उल्लेमा है आप के प्रकट होने से सम्बन्धित लक्षणों का अधिक मात्रा में उल्लेख किया है और वास्तव में हमारी पुस्तक का यह शीर्षक है अतः इस परिपेक्ष में हमने अति संभेप से क्रमानुसार खुत्बे , हदीसें व कथन लिख दिये है। अन्यथा पुरानी पुस्तकों में बहुत कुछ सामग्री उपलब्ध है। इन लक्षणों के लिखने का मात्र ध्येय यह है कि पाठ्यकगण इसे याद रख सके तथा भविष्य में देखते रहें कि कितने लक्षण पूर्ण हो चुके हैं तथा कितने अभी शेष है। इन प्रमाणों से बहीत बड़ा लाभ यह हो सकती है कि यदि ह्रदय ने इन लक्षणों की सत्यता को स्वीकार कर लिया और विवश होकरकरना ही पड़ेगी तो एक समय अवश्य ऐसा आ सकता है कि मनुष्य घबरा कर अपने पापों की क्षमा माँगने लगे तथा स्वंय को भगवान की ओर जाने को तैयार कर ले। इस प्रकार यदि एक व्यक्ति का ह्रदय इन लक्षणों से प्रभावित हो जाये और एक मनुष्य में भी ईमान की बढोत्तरी हो तो मेरे इस संकलन का उद्देश्य सिद्धि प्राप्त है।
इसके अतरिक्त जो मुसलमान नहीं हैं उनके लिये भी यह लक्षण चिन्तन का आमंत्रण है। इस्लाम की सत्यता का स्पष्ट प्रमाण मैने अनेकों स्थान पर जहाँ आवश्यक समझा मूल अरबी लिगी में लिख दिया।
अन्यथा अधिकता अनुवाद पर निर्भर रहा तथा जिन पुस्तकों से मैनें यह सब कुछ एकत्र किया है उनके नाम भी लिख दिये मूल लेख उन पुस्तकों में देखे जा सकते हैं सम्भव है ज्ञान अभाव के कारण लेखों का अनुवाद विकसित न हो जिसके लिये खेद व्यक्त करता हूँ एंव सुधार आकाँक्षी हूँ।
लक्षणों से सम्बन्धित ऐसे तो उलेमा ने अनेकों भेद लिखे हैं कि संक्षेप को दृष्टिगत रखते हुऐ मैनें इन लक्षणों को इस पुस्तक में कुछ प्राकर से प्रस्तुत कर दिया है जो उद्देश्य की सिद्धि हैतु पर्याप्त वास्तव में प्रकट होने के लक्षण के दो भेद हैः ( 1) हतमिया या अनिवार्य (अटल) , (2) ग़ैर हतमिया या शर्तिया (टलने योग्य शर्तों पर आधारित)
वह लक्षण जो इमाम मेहदी (अ 0) के प्रकट होने से पूर्व अवश्य विद्यमान होंगे अन्यथा आराधना कर्ताओं की प्रार्थना एंव सज्जनों की क्षमा याचना के भल स्वरुप निरस्त कर दिये जायेंगे।
टिप्पणीः
चूँकि समाज पूर्णतया दूषित हो चुका है अतः सम्भव है कि मात्र वह स्थान इन लक्षणों से बच सकें जहाँ ऐसे सज्जन एंव आराधना कर्ता हों अन्यथा पूर्ण संभावना है कि ऐसे लक्षण भी अवश्य पूर्ण होंगे। शीघ्रता या दैरी सम्भव है जैसा पिछली उम्मतों पर प्रकोपों को एक निश्चित समय के लिये स्थगित किया जाती रहा है।
वह लक्षण जो अन्तिमकाल के रुप को इंगित करने आचरण व्यवहार रहन-सहन एंव धर्म के बदलने के सम्बन्ध बताये गये हैं।
वह लक्षण जो प्रसिद्ध स्थानों और प्रसिद्ध समुदाय एंव विशेष क्षेत्रों के सम्बन्ध में वर्णित है।
बीते हऐ लक्षणः
वह लक्षण जो इस पुस्तक के संकल्न तक समाप्त हो चुके है तथा किसी ह किसी समय में पूर्ण हो चुके है।
भविष्य में आने वाले लक्षण जो इस समय तक पूर्ण नहीं हुऐ तथा आने वाले युग में उनके पूर्ण होने की पूर्ण सम्भावना है।
टिप्पणीः
चूँकि लक्षणों के उल्लेखकर्ता समाज के पथ परदर्शकगण एक विशेष क्षेत्र (अरब) के निवासी थे और अपने समय के लोगों के शैक्षिक ज्ञान से पूर्णयता परिचित थे। वह जानते थे कि यदि पृथ्वी के अन्य क्षेत्रों के सम्बन्ध में उनसे यह बातें कहीं गची , तो चूकि अभी तक उनको उन क्षेत्रों की जानकारी नहीं है अतः वह क्या समझ सकेंगे चूंकि प्रश्नकर्ता भी उसी भूमि से सम्बन्धित थे। इसलिये उनकी योग्यता को दृष्टि-गत रखते हुऐ उत्तर भी सीमित दिये गये और अधिकता से लक्षण पूरब मध्य के विषय में कहे गये हैं। हाँ कुछ स्थान पर अर्थ (पृथ्वी) श्ब्द का प्रयोग हुआ है जिसका अर्थ समस्त पृथ्वी है। इसके अतरिक्त यब बात भी स्मरण योग्य है कि कुछ देशों की सीमा रेखाऐं तथा कुछ के नाम रसैल और इमाम के समय में अन्य थे और इस समय कुय़ और हैं। बहुत ऐसे स्थान है जो नष्ट हो जुके हैं और आज उनका नाम भी नहीं है किन्तु इन सब का ज्ञान उस समय के भौगोलिक चित्रों में तथा उस युग ऐतिहासिक प्रमाणों से आज हो सकता है सन्दर्भ हैतु प्राचीन भौगोलिक पुस्तकों को देखा जा सकता है। चूँकि अरबों के किसी व्यक्ति या समाज के परिचय व जानकारी प्राप्त कराने का सिद्धान्त यह था कि व्यक्ति विशेष के साथ उसके पिता का नाम और समाज के साथ उसके पूर्वज का उल्ले होता था। जिसके वंश से सह समुदाय बना है या क़बीले बसे है। सम्पूर्ण इसलामी इतिहास इस से परिपूर्ण है। व्याख्या की आवश्यकता नहीं समझने के लिये बनी उमैय्या या बनी हाशिम पूरे वंश के लिये आज भी प्रयोग होता है। और इसी प्रकार सैकडों समाज व उपसमाज आज भी उपलब्ध है , उन सबको बीती हुई वंशावली और उसके इतिहास से जाना जा सकता है किन्तु मैने यथा सम्भव स्वंय परख कर हर स्थान की व्याख्या कर दी है और जो बात समझ में न आ सकी उसको ज्ञानियों और पारखियों के लिये छोड़ दिया।
लक्षणः
हम सर्वप्रथम सामान्य लक्षण लिखेंगे ताकि यह अनुमान हो सके कि पूर्वजों की दृष्टि अन्तिम काल की परिस्थितियाँ वह परिवर्तन को किस प्रकार इतने समय पूर्व देख रही थी और आज जब वह सब कुछ हो रहा है जो उन महानुभवों ने उल्लेख किया था। जबकि उस समय उनकी कल्पना भी न थी। इसलिये विश्वास है कि उसके पश्चात् जो कुछ कहा है वह भी अवश्य पूर्ण रहेगा। भले इस समय हम उसे न स्वीकार करें।
बेहारुल- अनवार तथा अन्य पुस्तकों में हुजूर का निम्नलिखित खुत्बा उल्लेखित है किन्तु मैं बेहारुल अनवार के सन्दर्भ से लिख रहा हूँ। इस को पुस्तक जमिऊ-ल- अख़बार , जनाब सद्दूक़ अलैहिर रहमा ने भी लिखा है तथा दूसरी पुस्तकों में भी उपलब्ध है।
जाबिर इब्ने अब्दुल्लाह अन्सारी का कथन है कि मैनें रसाल अल्लाह के साथ अन्तिम हज किया। अतः जब पैग़म्बर हज कार्य कर्म से निपट चुके तो आपने कहा कि ऐ लोगों विश्वास है कि आज मैं काबे को विदाई दै रहा हूँ , तदेपरान्त काबे के दर को घेरे मे लिया और उच्च स्वर में लोगों को पुकारा। समस्त मस्जिद वाले एकत्र हो गये तथा बाज़ार वाले भी आ गये। उस समय आपने कहा जो कुछ मैं तुमसे कहना चाहत हूँ उसको सुनो तथा जो लोग यहाँ उपलब्ध नहीं हैं उन तक पहुँचा दो। तदपश्चात् आपने रोना प्रारम्भ किया जिस पर समस्त उपस्थितगण भी रोने लगे फिर आपने कहा , ऐ लोगों , ईश्वर तुम पर दया करे तुम इस युग में उस वृक्ष के पत्ते के समान हो जिसके मध्य कोई काँटा न हो तथा चालीस वर्ष यही दशा रहेगी तदोपरान्त दो वर्ष तक पत्ते तथा काँटे मिले जुले होंगे फिर उसके बाद काँटे ही काँटे दिखाई देंगे जिसमें कोई पत्ता न होगा , वह ऐसे व्यक्ति होंगे जिनमें दिखाई पड़ेंगे , अतरिक्त अन्यायी राजा , कंजूस , धनवान , धन की और रुचि रखने वाले ज्ञानी , झूठे भिखारी। इसके पश्चात आपने फिर रोना आरम्भ किया , तब सलमान उठे और कुहा , ऐ अल्लाह के रसूल , यह सब किस समय होगा हज़रत ने उत्तर ऐ सलमान , यह उस समय होगा जब उलेमा कम हो जायेंगे , ज़कात देना बन्द हो जायेगा , नकारने वाले प्रकट होंगे। मस्जिद से चीख पुकार उठेगी। संसारिक हितो को वरीयता तथा ज्ञान को पैरो तले रखा जायेगा , आपसी बात चीत के मध्य झठलाया जायेगा , उन लोगों की बैठकों में मिथ्या का आधिक्य होगा , एक दूसरे की ग़ीबत (पीठ पीछे बुराई करना) कर्तव्य होगा। हराम को उचित माना जायेगा , बड़ा छोटों पर दया न करेगा और , छोटा बड़े के आदर को दृष्टिगत न रखेगा। अतः उस समय उनकी निन्दा की जायेगी , उनके मध्य शत्रु उत्पन्न हो जायेंगे। और दीने इसलाम से शाब्दिक इसलाम अतरिक्त कुछ न शेष रहेगा। उस समय उनकी निन्दा की जायेगी , उनके मध्य शत्रु उत्पन्न हो जायेंगे। और दीने इस्लाम से शाब्दिक इसलाम के अतरिक्त कुछ न शेष रहेगा। उस समय लाल हवाओं के चलने की प्रतीक्षा करना चाहिऐ , आकाश से पत्थर बरसना , मुखडों के कीर्तिहीन हो जाने और पृथ्वी के धंस जाने और इस बात की पुष्टि भगवान के उस वचन से होती है जो दैवीय पुस्तक में उपलब्ध है। उस समय जबकि कुछ असहाब ने पुनः कहा कि या रसूल अल्लाह यह सब कुछ कब होगा तब आपने कहा की उस समय जब नमाज़ों को छोड़ दिया जायेगा , काम वासनाओं का अनुसरण किया जायेगा। विभिन्न प्रकार के कहवे पिये जायेंगे , चाय , काफी , क़हवा आदि। माँ-बाप को गालियाँ दी जायेंगी , पुरुष अपनी स्त्री के आदेशों का पालन करेंगे , पडोसी अपने पड़ोसी पर अन्याय करेगा , बड़ों के ह्रदय से दया समाप्त हो जायेगी , बालकगण निर्लज्ज हो जायेंगे , मकानों की नींव मज़बूत रखी जायेगी , सेवकों तथा सेविकाऩों पर अत्याचार होगा , अपनी इच्छानुसार गवाही दी जायेगी , प्रशासन अन्याय व अत्याचार में लिप्त होगा , भाई भाई से जलन करेगा , साझेदार चोरी करेंगे , प्रेम का अभाव होगा , व्यभिचार खुब कर किया जायेगा , पुरुष स्त्रीयों के वस्तत्र से अपने को सुशोभित करेगा , स्त्रियां निर्लज हो जाचेंगी , लज्जा का आँचल स्त्रियों से अलग हो जायेगा , लोगों ह्रदय घमंड से परिपूर्ण होंगे , भलाई कम बलात्कार अधिक दृष्टिगोचर होगा , महान पाप सरल माने जायेंगे , मनुष्य मालदार होने के कारण प्रशंस्नीय होंगे , गाने बजाने में अधिक धन का प्रयोग होगा (सिनेमा आदि) , परलोक का कुछ भी ध्यान न होगा , मनुष्य दुनियादारी में लिप्त होगें , सदाचारी कम , प्रलोभन अधिक , उत्पात और समस्याये अधिक हो जायेंगी , मोमिन अपमानित तथा मुनाफ़िक को मित्र जाना जायेगा , मस्जिदें अज़ानों के स्वर से भरी परन्तु ह्रदय इमान रहित होंगे , कुरान को हल्का समझा जायेगा , मुखडा मनुष्य तुल्य तथा ह्रदच शैतान तुल्य होंगे , जैसा कि भगवान की वाणी है , मुझे धोखा देते हैं क्या तुम हमारी ओर पलटने वाले नहीं थे मुझे सौगन्ध है अपने तेज व प्रताप की यदि तुम्हारे मध्य आराधना करने वाले वह सज्जन पुरुष न होते तो निश्चित ही मैं तुम पर वर्षा की एक बूंद भी न बरसाता तथा भूमि पर घास का एक तिनका भी न उगता। आश्चर्य है उन व्यक्तियों पर जिनका धन उनका भगवान है , आशाँए लम्बी तथा आय कम है , वह अपने उद्देश्य प्राप्ती की लालसा करते हैं किन्तु पहुंच नहीं सकते। बिना कर्म और कार्य नहीं सम्पन्न होगा बिना बुद्धि , पुनः कहा , लोगों , वह समय आने वाला है जब कि उनके पेट उनके भगवान होंगे (पेट पूजा) अर्थात मात्र इसी चक्कर में रहेंगे तथा उनकी स्त्रिया उनका किब्ला व काबा होंगी एंव उनका माल व धन उनका धर्म होगा। उनमें शाब्दिक इसलाम के अतरिक्त कुछ न शेष होगा। कुरान का मात्र पाठ होगा , मस्जिदें भी होगी किन्तु दिल सद्भावना से ख़ाली होंगे अर्थात वह लोग सद्भावना रहित होंगे उनके युग के उलेमा लोगों मे सबसे अधिक पाखंडी होंगे। उस समय भगवान चार-चार वस्तुओं में लिप्त करेगा , (1) राजाओं का अन्याय ( 2) आकाल ( 3) अधिकारियों व सरदारों द्वारा शोषण ( 4) बुतों पूजा।
सहाबा ये सुनकर आश्चर्य विस्मित हो गचे और कहा या रसूल अल्लाह मुसलमान होकर बुतों की आराधना कैसे होगी आपने कहा उनके निकट धन दौलत एक बुत होगा।
टिप्पणीः
यदि एकाग्रचित और गहन ह्रदय से इस खुत्बे का अध्ययह किया जाये , तो क्या अचूक रुप से ह्रदय साक्षी न बनेगा कि लगभग चौदह सौ वर्ष पूर्व जो कुछ हुजूर ने कहा था वह आज शब्दतः पूर्ण हो रहा है हुजूर की पैग़म्बरी दृष्टि भली प्रकार इस समाज को देख रही थी।
संकलन कर्ताः
हज़रत अली ने अपने प्रसिद्ध ख़ुत्बे अलब्यान में सविस्तार लक्षणों का उल्लेख किया है एंव अद्भुत प्रकार से भविष्य के वृतान्त की विवेचना की है। मैंने इस कारण उक्त ख़ुत्बे को नहीं लिखा कि उसे अल्लामा मजलिसी ने अपने द्वारा संकलित ख़ुत्बों में सम्मिलिती किया है जिज्ञासा रखने वाले यना बिउल मोवद्दत तथा किताबे बशारतुल इसलाम जो सै 0 मुस्तफा आले सै 0 हैदर काजमी द्वारा संकलिती है तथा बग़दाद में मुद्रित हैं , में देख सकते है। मैं आपके दैसरे व्याख्यानों के अंश बाद में प्रस्तुत करुँगा। अन्तिम काल सम्बन्धी हजरत इमाम जाफ़रे सादिक़ (अ 0) का कथन प्रस्तुत हैः
दारुसलाम नामक ग्रन्थ में अल्लामा निराक़ी ने तथा बेहारुल अनवार व किताबे रौज़तुल काफ़ी में शेख़ कुलैनी ने अपनी सनद (प्रमाण) से हमरान के कथनानुसार , प्रलय के लक्षणों के परिपेश में , एक विस्तृत वार्तालाप के मध्य , इमामे जाफरे सादिक (अ 0) ने कहा कि ए हमरान , जिस समय हक़ (सत्य) शिथिल हो जायगा तथा इसके मित्र हममें से हठ जायेंगे उस समय तू देखेगा कि हगरों में अन्याय व अत्यचार का बोल बाला होगा कुरान पुराना हो जायेगा अर्थात कोई इसके आदोशों का पालन नहीं करेगा , कुछ वस्तु इसके सार में अपने मनोभावों के आधार पर बढ़ा ली जायेगी जिनका सम्बन्ध मूल कुरान से न होगा फलतः कुरान उलट पलट हो जायेगा। है व्यक्ति फिर तू देखेगा कि मिथयवानों (झूठों) ने सत्यवानों को पराजित कर के श्रेष्ठता प्राप्त कर ली तथा प्रत्येक दिशा में आतंक दिखाई देने बगा , दुरगुण और दुराचार ने समान रुप धार लिया। पुरुषों ने पुरुषों और स्त्रियों ने स्त्रियों से सम्बन्ध बना लिये , मोमिन तिरिस्कृत तथा झूठे और दुराचारी सम्मानित बन गये , छोटे बड़ों का आदर वर्जन किया , गर्भ गिराये जाने बगे। पपी व दुराचारी की उसके दुरायरण पर प्रशंसा होने लगी और कोई टोकने वाला भी नही , पुरुष वह कार्य करने लगे जो स्त्रियों से सम्बन्धित थे यानि मफ़ऊल (कर्म) से सम्बोधित सम्बोधक उस समय स्त्रयाँ स्त्रियों से विवाह करने लगेंगी। अप्रशंसनीय व्यक्तियों की प्रशंसा की जायेगी , लोगों का धन भगवान की अवज्ञा में अधिक ख़र्च होंगे और कोई उन्हे रोने वाला न होगा। अमोद-प्रमोद मदिरा व्याभिचार सामान्यता प्रचलित हो जायेगा। तू देखेगा कि मोमिन को भगवान की वन्दना से रोका जा रहा है और ईश्वर की आराधना पर उसे बुरा भला कहा जा रहा है , पड़ोसी अपने पड़ोसी को कष्ट पहुँचा रहा है , काफ़िर पृथ्वी पर विकार उत्पन्न करके प्रसन्न हो रहे हैं , जो सदाचार का मार्ग प्रशस्त कर रहा है अपमानित हो रहा है , दुराचारी शक्तिशाली हो रहा है , सदाचार अवरोधित तथा दुराचार का पत प्रशस्त हो जायेंगा , ईश्वर का घर (ख़ाना – ए काबा) हजकर्ताओं से रोका जायेगा। हज – साधारण जो कहेंगे उसे पूरा नहीं करेंगे। पुरुष – पुरुषों के साथ दुराचार करने हैतु पौष्टिक आहार लेंगे तथा स्त्रियों के साथ दुराचार हैतु पौष्टिक भोजन का प्रयाग करेंगे। बहुदा पुरुषों का गुज़ारा उनकी पूठ (गुदा) होगा और बहुधा स्त्रियों का जीविका अपार्जन उनके अगले भाग (योनि) द्वारा होगा। स्त्रियाँ अपने संघ तथा सभाएं स्थापित करेगी तथा पुरुषों में स्त्रियों की विशेषताऐं उत्पन्न हो जायेगी अर्थात स्वंय को स्त्रियों के समान इस प्रकार सुशिभत करेंगे जिस प्रकार स्त्रियाँ पतियों के लिये श्रँगार करती है। जन-साधारण में गुदा मैथून का प्रचलन हो जायेगा (इस विषय में एक व्यक्ति दूसरे को संदिग्ध दृष्टि से देखेगा।)
बनी अब्बास लोगों को इस लिये धन देंगे कि वे उनके साथ गुदा मैथून करे या स्वंय कराये। स्त्रियाँ व्याभिचार पर गर्व व वैभव प्रकट करेगी और अपने पुरुषों को घूस देंगी ताकि दूसरी स्त्रियों के साथ काम भोग में लिप्त हों या दूसरे पुरुषों से व्याभाचार करायें। वह घर सबसे अच्छा माना जायेगा जिसमें स्त्रियां पुरुषों के प्रत्येक दोष व अवज्ञा में सहयोग करें।
फिर कहते है कि धनवान ईमान वाले से अधिक प्रिय होगा खुले आम तैद खाने का रिवाज होगा। तथा कोई निन्दा करने वाला भी न होगा। झूठे साक्ष्य (शहादत) स्वीकार किये जायेंगे , ईश्वर की ओरहराम वस्तुओं को हलाल तथा हलाल को हराम माना जायेगा। धार्मिक आदेशों का इच्छानुसार निष्कर्षण किया जायेगा , अधिकारीग केवल काफ़िरों को नकटतम करेंगे तथा मोमिनों को दैर करें तथा आमतौर से घूसघ़ोर होंगे अधिकारी बनने के लिये अत्यधिक धन खर्ज किया जायेगा। पुरुष स्वंय अपनी स्त्रियों से गुदा मैथून करेंगे , झूठे आरोपों व दोषारोपण के कारण लोगों की हत्या की जायेगी , पुरुषों की स्त्रियों के साथ संभोग करने पर निन्दा की जायेगी तथा कहा जायेगा पुरुषों के साथ गुदा मैथून क्यों नहीं करते। पुरुष अपनी स्त्रियों की व्याफिचार की कामाई पर जीविका निर्वाह करेंगे तथा दोनों प्रसन्न रहेगें। पत्नियाँ उपने पति की इच्छा के विरुद्ध कार्य करेगी , किन्तु पति उनसे भयभीत रहेंगे इसलिये कि स्त्रियाँ स्वंय उनकी जीविका (रोज़ी रोटी) का साधन रहेंगी , मात्र जीविका उपार्जन हैतु भगवान की झूठी सौगन्ध ग्रहण की जायेगी , जनसाधारण में प्रचलित होगी मदिरा सेवन तथा मदिरा विक्रय पर प्रतिबन्ध नही होगा , मुसलमान नारियाँ काफ़रों के साथ होंगी तथा लेखने वाले मुसलमान आपत्ति न कर सकेंगे और न आपमानित करने की शक्ति रखते होंगे।
आधिकारीगण के समीप वह होगा जो हम अहलेबैत (अ 0) रसूल के परिवार जन) का शत्रु होगा तथा शत्रुता पर गर्व करता होगा। हमारे मित्रों की गवाही स्वीकार न की जायेगी मब्कि समस्त बोग झूठ एंव धोखाधड़ी की ओर आकर्षण व्यक्त करेंगे। कुरान का पठन एवं सुनना भारी पड़ेगा। झूठी कहानियों का सुनना सहज हो जायेगा। पड़ोसी अपने पड़ोसी के साथ ईश्वर के लिये कई दया न करेगा किन्तु पड़ोसी कटुवाणी के भय से कुछ भलाई करता रहेगा। भगवान द्वारा निर्धारित प्रतिबन्ध समाप्त हो जायेंगी और विषय वासना काम ईच्छा के अनुसार कार्य सम्पन्न होगा , दिषियों को नियमानुसार दण्डित नहीं किया जायेगा , परोक्ष निन्दा खुलेआम होगी तथा अन्याय प्रदर्शित होगा परोक्ष निन्दा लोगों को भली लगेगी , हज एंव धार्मिक युध (जिहाद) ईश्वरीय नियमों से हट कर किये जायेंगे , मस्जदें सोने से सजायी जायेंगी और सम्राट व अधिकारी आस्तकों को नास्तिकों की इच्छानुसार तिरस्कृत करेंगे और कुरीतियां अच्छाईयों पर विजयी होती दृष्टिगोजर होंगी , कम बेचना एंव कम तोलना लोगों का आचरण होगा। रक्त पात अत्यंत सरल माना जायेगा कटुभाषिता को ख्याति दी जायेगी ताकि लोग भयभीत हो।
फिर कहा कि है सम्बोधि , जब मूसलमान नमाजों के सरल व हल्का मानेंगे , अध् धन के उपरान्त ज़कात न देंगे। मृतक के कफ्न क़ब्र से निकाल कर बेच डालेंगे , हरज मरज अर्थात हत्या विनाश अत्यदिक होगा , पशु भी एकत्र होकर आपस में एक दैसरे के टुकडे-टुकड़े करने लगेगे नमाज़ , नमाज़ रहित वस्त्रों में पढ़ी जायेगी ह्रदय कठोर तथा आँखे शुष्क हो जायेगी लोग अवैध जीविका की ओर आकर्षत होंगे म्करी के साथ आराधना होगी , उलेमा व दार्शनिक संसार हैतु धार्मिक ज्ञान प्राप्त करेगे , पार्टी व समूह बना कर जीवन व्यतीत किये जायेंगे , अवैध चाहने वालों की प्रशंसा की जायेगी , मक्का तथा मदीना से कुकर्म अच्छाईयो का मार्गदर्शन तथा कूरीतियों का मार्ग अवरोध कर दिया जायेगा , दुराचरण व दुरव्यवहार करनें में ए , दैसरे पर दृष्टि रखी जायेगी मृतकों की इंसी उड़ाई जायेगी तथा मृत्यु के पश्चात् उन्हे बुरा भला कहा जाचेगा और हर आने वाले वर्ष में बीते वर्ष की तुलना में संसार में अधिक उत्पात प्रदर्शित होंगे धनवानों का अनुकरण एंव अनुसरण किया जायेगा , धनविहीनों एंव दुर्बनों की इंसी उड़कई जायेगी , आकाश पर प्रकोप के लक्षण विद्यमान होंगे (जैसे बिजली गिरना , भूचाल वृष्टि आदि) किंतु उनसे भयफीत हुआ जायेगा खुले रास्ते कुकर्म किये जायेंगे (चौपयों की सन्ताने माता-पिता को तुच्छ समझेंगे , स्त्रयों में काम वासना प्रबल हो जायेगी तथा पतियों आदेश का कोई मुत्व न रहेगा , सन्तान माता-पिता से घृणा करने लगेगी तथा उनकी मृत्यु पर प्रसन्न होंगे , यदि एक दिन भी पाप न करें तो लोग दुखी प्रतीत होंगे कि आज पाप क्यों नहीं किया , सफलता प्राप्त लोग अनाजों को एकत्र करेंगे एंव बढे हुए मूल्य पर बेचेगे , साधू झूठे एंव धोखाधडी करने वाले वयक्तियों के साथी बनेंगे , और उके साथ जूए- शराब में लिप्त होंगे , मदिरा से चिकित्सा की जाने लगेगी और रोगियों हैतु उसकी प्रशंसा की जायेगी तथा उसके द्वारा आरोग्य चाहा जायेगा , कपटाचारी लोकप्रिय होंगे तथा आस्तिक प्रास्त और शांत तथा उनक् कथन अस्वीकारनीय होगा , अजडान व नमाजड हैतु पारश्रमिक प्राप्त किया जायेगा , मस्जदें ऐसे व्यक्तियों से परिपूर्ण होगी जो ईश्वर का भय न रखते होंगे , विचेतन उन्मत्त व्यक्तिचों को पोश नमाज़ बनाया जायेगा , जब कोई उन्नमत दिखई पडेगा तो उसका आदर किया जायेगा तती उसे अयोग्य न समधा जाचेगा ओरउसकी प्रताड़ना न की जायेगी।
विशेष लक्षण (बवासीर व सफेद दाग)
हुजूर ने कहा है कि प्रलय के नकट तीन वस्तुओं की अधिकता हो जायेगी , बवासीर दुर्घटना से मृत्यु (मर्गेमफा-जात) तथा शरीर पर सफेद दाग़ व कोढ़ , वातज रोग।
अग्नि ही अग्निः
रसूल अल्लाह का कथन है कि प्रसय की शर्तों में से आग है जो पूरब से पश्चिमतक फैल जायेगी।
टिप्पणीः
यहाँ पूरब का शब्द पहले है अतः पूरब की ओर से अर्थात पूरबी देशों से प्रारम्भ होना और सम्भव है कि यह युद्ध की आग हो।
हुजुर ने कहा कि प्रलय के समीप मूल ज्ञान समाप्त हो जायेगा तथा मूढ़ता प्रकट होगी। मदिरा का अधक प्रयोग होगा तथा व्यक्ति तथा व्याभिचार सामान्य हो जायेगा। पुरुषों की संख्या कम हो जायेगी एंव स्त्रियां अधिक होंगी , यह सीमा इस स्तर तक जायेगी कि पचास स्त्रियों के मध्य एक पुरुष शेष बजेगा।
विभिन्न देशों की तबाही सुन्नियों के मतानुसारः मोहियूद्दीन इब्ने अरबमहाज़ैतुल अबरार मोहाज़रतु अबरार में लिखा है , कथह की कड़ी हैः हुज़ैफा यमानी सहाबी तक समाप्त होती है जिसमें पैग़म्बर का कथन है एक लम्बी हदीस में , कि मिस्त्र उस समय तक नष्ट होगा ईराक़ के कारण तथा मिस्त्र नष्ट होगी नील नदी के कारण तथा मक्का नष्ट होगा हब्शा के हाथों और मदीना नष्ट होगा बाढ़ या चेचक से तथा यमन नष्ट होगा ऐसा घेराव किया जायेगा यहां तक क्रमशः समस्त देशों के विषयों में व्याख्या की है एंव उनकी तबाही की सूचना दी है इसके अतरिक्त अन्य खुत्बों में भी कथन उपलब्ध है।
अब्दुल्लाह इब्ने उमर के सन्दर्भ से का कथह है कि प्रलय उस समय तक न आयेगी जब तक मेरी संतान में से मेहदी (अ 0) प्रकट न हो जाये तथा उनका प्रकट होना उस वक्त तक सम्भन न होगा जब तक साठ एसे झूठे न प्रकट हो जाये जो अपने आपको नबी कहते हों (यह हदीस सही है)
टिप्पणीः रजम , पत्थर से हत्या , मृत्यु तलवार द्वारा ताउन द्वारा मनी असगर , मुलुकुलरोम क़ायूस दोत बिन ऐसबुर बिन इसहाक़ यूरोपियन)।
अनुवादः
किताब अक़युल दर में औफ़ बिन मालिक से कथन है कि मै पैग़म्बर के पास उपस्थित हुआ उस समय आप मंटयाले रंग की छोलदारी में थे उस समय आपने धैर्यपुर्वक वजू किया तथा मुझे सम्बोधित करके कहा कि प्रलय के आने में छः की संख्या है , मैने पूछा या रसूल अल्ला , वह क्या है पहले तो पत्थर बरसने से मृत्यु है (आकाश से पत्थरों की वर्षा सम्भवतः बम्बारी का बोध) आपने कहा कि यह एक हुआ मैने भी स्वीकारा कि हाँ एक हुआ तब आपने कहा कि दूसरा बैतुल मुक़दत की विजय है , तीसरे दो मृत्यु इस प्रकार की हो कि व्यक्तियों का बध ऐसा हो जैसे भेड़ों बकरियों के समूह काटके समाप्त किये जायें। चौथे धन की वृद्धि वह भी इस प्रकार की कि लोग सौ दीनार रखते है किन्तु उससे उनकी आवश्यकता पूरी न हो पुनः एक उपद्रव उत्पन्न हो जिससे किसी अरब का कोई घर सुरक्षित न रहे और यह उपद्रव तुम्हारे औऱ बनु असग़र (अँग्रेजों) के मध्य होगा। वह मुझसे विश्वासघात करेंगे और अस्सी भागों में विभाजित होर आयेंगे जिनके प्रत्येक भाग में बारह हज़ार व्यक्ति होंगे (अर्थात 80 बटालियन प्रत्येक एक हज़ार की) तुम पर आक्रमण करेंगे। इस हदीस को बुख़ारी ने भी अपनी सही में लिखा है। वर्तमान परिस्थितियों में यह खुत्बा विचारणीय है।
मनाक़िम इब्ने आशेप क़तादा से कथन है जिन्होनें सईद इब्ने मुस्सयब से कहा कि हज़रत अली (अ 0) से प्रशन किया गया आयत मन करपयतिन के सम्बन्ध में उसके उत्तर में आपने विस्तृत सूचना देते हुए अनक हगरों की बरबादी की सूचना दी और कहा अन्तिम समय में जाज , ख्वारज़म तथा असफ़हान व कूफ़ा नष्ट होगी तुर्कों के हाथ (तुर्कों से रुस वालों का बोध है) हमादान और रोम (ईरान) दैलम क़ज़वीन वालों द्वारा और तबरता मदीना व फारस की खाड़ी का क्षेत्र अकाल और भूखमरी से मक्का हब्शा के हाथों , बसरा और बल्ख़ डूबकर सिऩ्ध भारत से और शाम के कुछ क्षेत्र मेना के पैरो तले रौंदे जायेंगेहत्या व विनाश की अधिकता होगी तथा यमन शासकों द्वारा सेजिस्तान और शाम के कुछ क्षेत्र वायु द्वारा (अर्थात गैस इत्यादि) शूमान ताऊन के कारण और मररो टिड्डियों द्वारा और हरात में सर्पों द्वारा प्राणि समाप्त होंगे नेशापूर तबाह होगा दरया ए नील के कटाना से पूर्व में आजरमाईजान घोड़ों की टापों (सेनाओ के आने जाने एंव युद्ध) और विद्युत द्वारा (अर्थात एटम बम आदि) , बुख़ारा ग़र्क होगा तथा अकाल पड़ेगा और सलम व बग़दाद भी नष्टहोगा डूबहै से।
अवैध रक्त का बहना धरती का पवित्र होना सैय्यद हसनी का किरमान व मुल्तान आना मायुद्ध (हज़रत अली (अ 0) द्वारा वर्णित)
अनुवादः
अबी अब्दुल्लाह जाफ़र इब्ने मोहम्मद से इमाम हुसैन के हवाले से कहा गया है कि आपने हज़रत ऩली अलैहिसलाम से मालूम किया कि यह मताएं कि ईश्वर पृत्वी को अत्याचारियों से कब पवित्र करेगा तो अपने उततार में कहा कि पृथ्वी को अत्याचारियों से कब पवित्र करेगा तो अपने उत्तर में कहा कि पृथ्वी उस समय तक पवित्र न होगी जब तक अवैध तक पूरी तरह न बह जाये फिर आपने बनी उमैया बनी अब्बास के प्रशासक का उल्लेख किया एक विस्तृत व्याख्या में पुनः कहा कि क़ायम के प्रकट होने के समय ख़ुरासान में सैय्यद हसनी , (विस्तार बाद में दिया जायेगा) नामक व्यक्ति उठ खड़ा होगा जो किरमान एंव मुल्तान पर प्रभुत्व प्राप्त करेगा और फिर यहां से बनी करवान के द्वीप तक जायेगी (अर्थात हवालिये वसरा) तथा उस समय हम में से अएक क़ायम प्रकट होगा जीलान में जिसका अनुकरण किया जायेगा अस्तराबाद व क़ज़बीन वाले (सैय्यद सनी के) उस समय प्रकट होंगे तुर्कों के झन्ड़े (तात्पर्य रुस वाले विस्तार अग्रतर है) जो अनेकों स्थान एंव मार्गों मंद तथा पवित्र स्थानों पर और फिर उनके मध्य घोर युद्ध होगा यहाँ तक कि बसरा नष्ट हो जायेगा और अरमों के सर्वोच्च् अधिकारी मिस्त्र में स स्थापन होगा तत्पश्यात एक लम्बी कथा एक घटना का आपने उल्लेख किया और कीक कि जब भाले गतिशील हो जाये और पंक्तियाँ सुद्ध पर तैय्यार हो जाये और नीच सज्जनों की हत्या करने लगे (अधर्मी अर्थात रुसियों के हाथों मुसलमानों की हत्या होने लगे) इत्यादि।
हज़रत अली (अ 0) का कथन है कि हज़रत क़ायम के प्रकट होने से पूर्व दो प्रकार की मौतें होगी लाल मौत और सफ़ेद मौत। लाल से तात्पर्य रक्त तथा तलवार द्वारा मौत (युद्ध जिसमें लोगों का रक्तपात हो) और श्वेत मृत्यु ताऊन जो युद्ध के पशचात् फैल जायेगा।
टिप्पणीः
इन संक्षिप्त लक्षणों में स्पष्ट कर दिया गया कि पहले भूमण्डल पर विशेष रुप से पूरब मध्य में मुहायुद्ध होगा फिर यहां ताऊन जायेगा।
हज़रत अली का कथन है कि जिस समय शाम में मतभेद हो जायेगा अर्थात चुद्ध प्रारम्भ हो जायेगा तो यह अल्लाह की निशानियों में से एक निशानी है पूछा कि फिर क्या होगा तो आपने कहा कि शाम पर पत्थर बरसेगें (सम्भव है बम गिराये जायेगे) जिसमें लगभग एक लाख व्यक्ति होंगे। ईश्वर दया दृष्टि करेगा अस्तिकों पर और प्रकोप (यातना) होगा नास्तिकों पर बस जब ऐसा घटित हो तो तुम ध्यान देना अशहबी अशवरोहियों और पीले झन्डों की और जो पश्चमी क्षेत्र में आयेंगे (शाम के पश्चिम में ईराक़ है) यहाँ तक कि वह शाम में पहुँच जायेंगे। बस जब ऐसा हो जाय तो तुम प्रतीक्षा करना शाम का एक ग्राम जिसका नाम हरसा ख़रशा है ज़मीन में धंस जायेगा और जब ऐसा होगा तुम प्रतीशक्षा करना सुफ़याही के उपद्रव की जो फिलिस्तीन की शुष्क घाटी से प्रकट होगा।
टिप्पणीः हरशा- ख़रशा पुराने भूगोल से पती चलता है कि इसकी स्थित दमिश्क़ के निकट है (इब्ने आफला अर्थात् सुफ़ायनी के विद्रोह का हाल विस्तार से अग्रतेर आयेगा)
अनुवालः असबग़ इब्ने नबाता का कथह है कि मैने इन आयतों के सम्बन्ध में सुना तो था आपने कहा कि इसमें निशानियाँ है औऱ कुछ लक्षण है। जिसमें सर्वप्रथम कूफ़े का घेराव है शत्रु के भय से खाई के द्वारा तथा कूफे की गलियों में झन्डों का फाडा जाना जलाया जाना है , और कूफे की मस्जिद का चालीस रातों तक निलम्बित (मुअत्तल) हो जाना अर्थात कोई नमाज़ को न जा सकेगा और हैकल का निकलना (नसरानियों के कुछ चिन्हों का स्पष्ट होना) या नसारा का छा जाना है। इस क्षेत्र पर मस्जदे बुजुर्ग अर्थात कूफ़ा की मस्जिद के जारों ओर झन्डों का गतिशाली होना है वहां हत्यारे तथा हत्या किये गये दोनों नरकीय हैं , और बड़ी हत्या व लैट का संचार होना और एक पवित्र जीव मनुष्य का मस्जदे कुफ़ा के पीछे हत्या किया जाना अन्य 70 वयक्तियों के साथ तथा एक पवित्र मनुष्य का रुकन व मुकाम के मध्य।
टिप्पणीः
कुछ कथनानुसार कूफ़े की राहों और कोनों में आग लगाना लिखा है जिसका अर्थ यह कि युद्ध के मधय कुफ़े के प्रत्येक स्थान पर आग लगेगी।
यदि विस्तार पूर्वक लक्षणों के देखना चाहें तो हज़रत अली (अ 0) के अल मख़जून नामक व्यख्यान का अध्ययन अति उचित है जो पुस्तक बशरतुल इसलाम जो बग़दाद ते मुद्रित है। संक्षेप में उल्लेख है , इस खुत्बे में हज़रत अली (अ 0) ने आयतों की विवेचना की है और अद्भुत खुत्बा है।
अनुवादः आपने इमाम के उठने के लक्षणों के सम्बन्ध में बताया कि इसके दस लक्षण हैं , जिनमें सबसे पहले कूफ़े तथा उसकी गलियों में झन्डों का विनिमय एंव कूफ़े की मस्जदों का निलम्बन तथा हाजियों का रास्ता बन्द होना (ख़ुरासान) ईरान में ज़मीन धंसना और लोगों का व्याकुल होकर अन्या स्थानों पर अस्त व्यस्त हो जाना फिर एक पच्छल तारे का र्तपात का होना तत्पश्चात सार्वजनिक हत्या होना जिसके बाद भय व लक्षण तक आश्चर्य है। जब यह पूर्ण हो जाये तब इमाम मेहंदी हममे से हैं प्रकट होंगे।
अनुवादः हज़रत अली (अ 0) का कथह है कि इमाम मेहदी उस समय तक प्रकट न होंगे जब तक एक तिहाई जनसंख्या की हत्या न हो जाये तथा एक तिहाई अपनी सामान्य मृत्यु मर जायें एंव एक तिहाई मात्र शेष रह जायें।
हज़रत इमाम हुसैन (अ 0) का कथह है कि ईरान में किसी प्रमुख मुद्दे पर दो समुदायचों में परस्पर युद्ध होगा जिसमें अधिक रक्तपात होगा व सहस्त्रों की संखया में लोगो की हत्या होगी।
हज़रत अली जाफर अर्थात इमामे मोहम्मद बाकिर (अ 0) का कथन है कि इमाम मेंहदी (अ 0) के प्रकट होने के दो प्रमुख संकेत हैं अर्थात प्रवृत्ति के विपरित चाँद ग्रहण पाँचवी तिथि को एंव सूर्य ग्रहण 15 वीं तिथि को। यद्यपि हज़रत आदम के पृथ्वी पर आने के बाद से अब तक ऐसा नहीं हुआ ऐसा हो जाए तो ज्योतिष विज्ञान की गणना का अभिपात हो जायेगा।
इमाम मोहम्मद बाकिर (अ 0) का कथह है कि इमाम क़ायम उस समय तक न प्रकट होंगे जब तक कि संसार में अत्याधिक भय न व्याप्त हो जाये अधिकाअधिक भूकम्प न आये और प्राणी दुख न भोग ले तथा इससे पूर्व ताऊन न फैल जाये तथा अरबों के मध्य भयंकर युद्ध न हो ले। लोगों में अत्याधिक भैद भाव न उत्पन्न हो जाये और धर्म जर्जर और उसकी दशा विकृत न हो जाये यहाँ तक कि जीवित लोग प्रातः व सायँ अपनी मृत्यु की इच्छा न व्यक्त करने लगें।
इमामे जाफ़रे सादिक (अ 0) ने कहा कि इमाम मेहदी उस समय त् व उठेंगे जब तक बनी हाशिम में से बारह झूठे (सैय्यद) लोगों को अपनी तरफ आमंत्री न कर लें।
अनुवादः हज़रत इमाम जाफर सादिक़ (अ 0) का कथन है। आपने किसी व्यक्ति के लड़के को सम्बोधित कर के कहा कि तुम्हारी मस्जिद के निकट अर्थात कुफ़े में एक घटना उस समय घटित होगी जब अरब डे मनाया जा रहा होगा उस दिन चार हज़ार व्यक्ति जो असहाबे साबून में से होगे बाबेफ़ील के निकट उनकी हत्या होगी। बस जब वह लोग उस पथ से आयें तो तुम उनसे दूर रहना।
टिप्पणीः
अरब दिवस का शब्द विचारणीय है चूँकि दिवस मनाना मात्र इस युग में प्रचलित है।
अनिवार्य और निसन्देह वह लक्षण है जो इमाम के प्रकट होने के अवसर पर अवशयमेव विद्यमान होंगे उनमें कुछ क्रमशः निम्नलिखित हैं अग्रतर लक्षणों में भी उनका उल्लेख बहुधा आता रहेगा का अतिसूक्षम रुप में हम यहाँ उल्लेख कर रहे हैं अरबी के मूल लेख नहीं दिये जा रहे है वर्न वर्तमान लेख वास्तव में अरबी व फारसी लेखों का अनुवाल हैं। मूल लेख संदर्भित पुस्तकों में देखें जा सकते है।
एक अशुभ व्यक्ति अवूः सुफ़ियान बिन हरब की संतान इसका नाम सुफियान पुत्र क़ैस होगा इस्क मूल नाम उसमान इसके पिता का अतबा या अशबा है यह बड़ा कुरुप मुखड़ा फफोलायुक्त नीली आँखों वाला देखने में फिगा रजब मास में जलन्तृण रहित वन कु शुष्क घाटी अर्थात फिलित्तीन के आस पास से उठेगा किन्तु उसका उठाना घोर आतंक के पश्चात् होगा (अर्थात उसके उठने से पूर्व पृथ्वी पर महायुद्ध हो चुका होगा) उसके साथ अत्यंत हिंसक एंव अत्याचारी व्यक्ति होंगे। जिनमें लगभग सत्तर हज़ार यहूदी सम्मिलित होंगे उनकी समस्त संख्या अवैध संतान होगी अर्थात यह सब व्याभिचारियों की संताने होगे आठ मास उसका शासन काल है वह उसी वर्ष सठेगा जिस वर्ष इमाम मेहदी (अ 0) प्रकट होंगे तत्पश्चात इमाम मेहदी के हाथों उसकी हत्या होगी किन्तु इससे पूर्व इतने अत्याचार उसके द्वारा किये जायेंगे कि वह कथन से परे है संक्षेप यह कि उसकी सेनायें मदीन-ए-मुनव्वरा को तहस नहस कर देगी शाम और ईराक़ तक उसके कारण लूटमार का बाज़ार गर्म होगा। किन्तु उसकी सेना जब काबे को नष्ट करने हैतु म्क की ओऱ प्रस्थान करेंगी तो वेदा के स्थान पर (मक्का तथा मदीने के मध्य एक मैदान) पृथ्वी में धंस जायेगा और तब उसके आतंक से छुटकारा होगा (इस सम्बन्ध में अग्रतर लक्षण संकेत आते रहेगे)
अर्थात एक चीख की ध्वनि आकाश से रमज़ान मास की तेइसवीं (शुक्रवार रात्रि) में ऐसी तीर्व उठेगी कि पूरब तथा पश्चिम के लोग उसे सुन सकें व इसके उठाने वाले जिबरईल होंगे जो भोर के निकट स्पष्ट स्वर में इमाम के प्रकट होने की सूचना देंगे और प्रत्येक व्यक्ति उसे अपनी भाषा में सुनेगा।
किन्तु उसी दिन अस्त्र के समय ठीक उसी प्रकार की एक शैतानी वाणी जो पहली वाणी के समान होगी उत्पन्न होगी अतः अधिकता से लोग सन्देह एंव तर्क वितर्क में पड़कर भ्रमित हो जायेंगे इस चीख को उठाने वाला शैतान होगा आवश्यक है कि इस लक्षण को मुख्य रुप से याद रखा जाये क्योंकि इसमें तिथि वह समय सविस्तार उपलब्ध है।
टिप्पणीः-
इस लक्षण से यह स्पष्ट हो रहा है कि सम्पूर्ण भूमण्डल में एक ही समय यह आवाज़ सुनाई देगी अब यह कोई आश्यर्य की बात नहीं क्योंकि भोतिक साधनों द्वारा आज हम एक ही क्षण में किसी विशेष घटना से पूरे संसार में अवगी हो सकते हैं तो फिर इसमे क्या आश्चर्य कि जब उसका प्रबन्ध भगवान की ओर से हो दूसरी आपत्ति की एक वाणी जो विशेष रुप से भाषा में है किन्तु सुनने वाले उसे अपनी अपनी भाषा में सुने भी व्यर्थ है इस युग में यह कठिन हही है उत्तर चयह है कि आज भौतिक साधनों की सहायता से जब यह सम्भव है कि एक व्यक्ति यदि किसी एक जगह पर वक्तव्य देता है तो वह उसी समय दैसरी भाषा में समझ लिया जाती है तो फिर ईश्वर के लिये चह बात कैसे असम्भव होगी हाँ इस लक्षण के वर्णन से इसका अवश्य ज्ञान होता है कि वर्णनकर्ता ईश्वर के प्रतिनिधि की दृष्टि में अन्तिम समय की उन्नति अवश्य है अन्यथा उस युग के अरबों के द्यान में यह बात आक ही नहीं सकती थी किन्तु आज आश्चर्य का अवसर नहीं (इस प्रकार यह लक्षण विशेष है)
पृथ्वी पर इस प्रकार का लगातार सुर्यग्रहण पड़ना कि पहले पूरब देशों में पूरा ग्रहण हो फिर पश्चिमी देशों में तदापरान्त अरब द्वीप में (पिछले वर्ष इसी क्रम में दो स्थानों पर ग्रहण लग चुके हैं) कुछ कथनों में यह उल्लेख है कि कुछ क्षेत्रों का इस क्रम से धरीप में धंस जाने का बोध है भगवान ही ठीक जानीक है
टिप्पणीः-
यह दोनों बाते सम्भव है चूंकि गहन क् अनुभव हो जुका अरब क्षेत्रों का धरती में धंसना भूकम्पोंके कारण हो सकती है तथा आकाशीय आपात तथा गोलाबारी से सम्भव है यदि भूकम्प ही बोध है तो इस क्रम में भूचाल भी अरब द्वीप के अतरिक्त आ चुके है।
कुछ लोगों ने इसे क़यामते कुबरा (दीर्घ प्रलय) का लक्षण माना है किन्तु अन्य़ लक्ष्णों के अध्ययन से ज्ञात हीक है कि सूर्य इमाम के प्रकट होने के काल में एक दिन ज़ोहर के समय धरती के निवासियों को स्थिर दिखाई देगा तथा अस्र के समय तक उसी दशा में रहेगा और फिर उसी दिन उसी दिशा में उदय हीक दिखेगा। देखने में यह बात बुद्धि में नहीं समाती कि ऐसा कैसे हो सकता है इस प्रकार तो सौर मण्डल में अंतर आ जायेगा तथा उसी अन्तर में संसार अस्त व्यस्त हो जायेगा किन्तु यह बात अज्ञानवंश है अन्यथा न जाने नित्य संसार में कितने परिवर्तन होते रहते हैं।
जिनका हमें आभास तक नहीं होता बल्कि इसी प्रकार यह विचार भी है कि वर्तमान हथियारों के प्रयोग से सम्भव है धरती पर ऐसी घटनाऐं घटित हो कि उसकी चाल में अन्तर पड़ जाये और कुछ समय हैतु देखने में पृथ्वी स्थिर होकर पुनः किसी विशेष झटके के कारण चलने लगे जिससे उसकी गति व उदय एंव अस्त में अन्तर हो सकीक है कुछ लक्षण भी नक्षत्रों तथा पृथ्वी के गति परिवर्तन की ओर संकेत करते हैं चूँकि खगोल विज्ञान मेरा विषय नहीं है अतः इस सम्बन्ध में अधिक विस्तार से नहीं प्रस्तुत कर सकता किन्तु मेरा विश्वास है कि जब हुजूर ने तथा इमामों ने बताया है तो निसन्देह ऐसा होर रहेगा। भले आज समझ में आये या न आये।
परन्तु यह बात सिद्ध है कि पृथ्वी का पिरभ्रमण तथा आकाश की गति अथवा ग्रहों नक्षत्रों की गति में परिवर्तन होता रहता है और किसी समय नक्षत्रों के निकटतम एकत्र होने के कारण विशेष घटनाएँ भी सम्भव हैं। जैसा कि वर्तमान में एक अमरीकी नक्षत्र के ज्ञाता ने यह घोषणा की कि कई ग्रहों के परस्पर मिलने के कारण यह सम्भावना है कि नक्षत्रों का कोई भाग भूमि पर गिरेगा फलस्वरुप दक्षिणी अमेरिका नष्ट हो जायेगा (पाकिस्तान जंग नामी समाचार पत्र के अगस्त 1967 ई 0 में यह सूचना प्रकाशित हुई) अतः पृथ्वी की गति परिवर्तन भी आश्चर्य का विषय नहीं हो सकता किन्तु रसूल अल्लाह के कथनानुसार यह लक्षण अटल है जो परिवर्तनशील नहीं है अतः सम्भव है कि यह लक्षण बिल्कुल अन्तिम समय में पूर्व
पूर्णतया नियमों के विपरित रमाज़न मास की पन्द्रवी में सूर्य ग्रहण पडने और रमज़ान के अंत में या कुछ कथनानुसार पाँचवी को चन्द्रग्रहण लगना भी उल्लेखित है तथा यह परिवर्तन भी गति पर आधारित है और मुझे इस विषय में विवेचना नहीं करनी है क्योंकि इससे पूर्व इस लक्षण के विषय में मैं कह जुका हूं मगर अधिक मात्रा में हदीसों व अख़बारों में इस हदीस का उल्लेख है अतः ऐसा अवश्य हगा तथा यह लक्षण इमाम के प्रकटन से पूर्व होगा। अथवा उन्हीं के काल में हो अन्त में इसके आगे संकेत किया जायेगा।
यह लक्षण भी इमाम के प्रकट होने से सम्बन्ध है विभिन्न पुस्तकों में दज्जाल का हाल विस्तार से उपलब्ध है किंतु मैं संभेप में लिख रहा हूँ कथनों के अध्ययन से ज्ञात होता है कि दज्जाल का अर्थ सत्य को असत्य में मिला देना है जिसका उद्देश्य धोखा छल कपट है। अतः लोग परिचय में प्रत्येक उस व्यक्ति को दज्जाल कहते जो धोखाधड़ी को अपनी कृत्य बना ले। अतत्र कुछ स्थानों पर बहु वचन (दज्जालो) का प्रयोग हुआ है और इससे तात्पर्य अधिकता से धोखा देने वाले व्यक्ति एंव शासन है। अनेको महानुभावो ने अपनी इच्छा अनुसार विवेचना की है किन्तु यह सत्य है कि जिस दज्जाल का उल्लेख प्रलय के लक्षणों में है वह एक व्यक्ति है जिसका नाम रसूल ने सायद पुत्र सैद बताया है तथा उसकी उपाधि दज्जाल है तथा वह बहुत बड़ा जादूगर है क्योंकि शब्द दज्जाल स्वंय अतिश्योक्ति की श्रेणी का है जिसका अर्थ है कि अत्यंत धोखाधड़ी वाला। यह व्यक्ति पहले नबी होने का फिर भगवान होने का दावा करेगा यह उस काल और समय में प्रकट होगा जिसमें पूर्व मध्य अत्याधिक आकाल की कठिनाईयों में पड़ा होगा और इसी कारण अपनी असमर्थता तथा कठिनाईयों के कारण उस का अनुकरण सर्वप्रथम बहुधा स्त्रियाँ , यहूदी एंव अरब बद्दू करेंगे। यह बड़े ही आतंक का उत्तरदायी होगा। जादूगर होने के फलस्वरूप इसकी सवारी के गधे के रोम रोम से गाने बजाने की ध्वनि उत्पन्न होगी जिसे देख कर बों आश्चर्य चकित रह जायेंगे यह यहूदी वंश में होगा जिसे वह लोग क़तामा कहते है तथा उसका उपनाम अबूयूसुफ़ है अतः यहूदी वंश के लोग इसे नबी स्वीकार कर लेंगे। उसके उठने के पूर्व संसार में तीन साल कठिन अकाल पड़ेगा और तीसरे वर्ष एक हरी पत्ती भी खेतों में नही रहेगी और आकाश से एक बूंद भी पानी न बरसेगा। उसके पाँव मक्का मदीना तक पहुँच जायेंगे।
उसका वाह्य स्वरुप इस प्रकार है लगभग 20 ज़रअ - क़दरे देखने में काना दाहिनी आँख इस प्रकार की कि देखने में लाल रंग के माँस के लोथडे के समान तथा बाँयी आँख माथे पर चमकती हुई अपने निर्धारित स्थान से हट कर होगी। उसका गदहा लाल बाल तथा लाल त्वचा वाला तथा उसके चारों हाथ पैर घुटनों तक काले घुटने से खुर तक श्वेत चूँकि उसको 70 हज़ार सशस्त्र यहूदियों कि सहायता प्राप्त होगी इसलिये उसके द्वारा तीव्र घटनाएं घटित होगी उस समय मात्र बैतुल मुकद्दस सुरक्षित स्थान माना जायेगा क्योकि हज़रत ईसा प्रकट होंगे इमाम मेहदी (अ 0) भी इस अवसर पर वहाँ पहुँच चुके होंगे। यही पर दज्जाल से युद्ध होगा हज़रत ईसा उसे समाप्त करेंगे तत्पश्चात यहूदियों का समापन हो जायेगा सलीब का चिन्ह व सूअर का माँस छूट जायेगा तद-उपरान्त संसार में केवल एक ही धर्म शेष रह जायेगा उसी धर्म का नाम है इस्लाम और केवल वास्तविक इसलाम इस संदर्भ में अलमलाहिम वल फ़ितन पुस्तक में सविस्तार वर्णन है। हुजूरे अकरम (स 0) ने जो कुछ दज्जाल के लिये और उसके भविष्य के लिये कहा है वह सविस्तार इस पुस्तक में उपलब्ध है कुछ प्रमुख एंव संभिप्त संकेत मैं भी मूल लेख के साथ किताम के अंत में दर्शाऊंगा।
प्रत्येक मुसलमान का विश्वास है कि हज़रत ईसा (अ 0) जीवित है न उनको सूली दी गची न उनकी हत्या की गई बल्कि उन्हे आसमान पर उठा लिया गया तथा निश्चित समय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। आप इमाम मेहदी (अ 0) के समय में दमिश्क़ में पाकतः काल उतरेंगे (इमाम से कहेंगे कि आप आगे आये ताकि इम नमाज़ पढ़ सके अतः इमाम मेहदी नमाज़ पढायेंगे हज़रत ईसा उनके पीछे नमाज़ पढ़ेगे और फिर आप इमाम के साथ दज्जाल से युद्ध करेंगे और उसका वध करेंगे उस समय शेष भटके हुएं ईसाई व यहूदीगण मुसलमान हो जायेंगे , कुरान में हज़रत ईसा के सम्बन्ध में विस्तार पूर्वक तथ्य उपलब्ध हैं और बहुधा हदीस में भी आपके उतरने का उल्लेख है। पूरे इस्लामी समाज में केवल मिर्ज़ा गुलाम अहमद क़ादयानी ऐसे एक अदभुत व्यक्ति हुऐं है जिन्होनें ईसा मसीह के जीवित होने को अस्वीकार किया है। बडे बड़े दावे किये है जो सबके सब असत्य और तथ्य से परे सिद्ध हुए उनके लेख ही उनके दावे की सत्यता से विपरीत है मेरा शीषर्क उनके विरूध्द प्रमाण प्रस्तुत करना नही बल्कि धर्म की सीधी राह पर चलने वाला मुसलमान उनके दावे की असत्यता से अवगत है अतः उनके फैलाये हुए पथभष्रटता से मात्र वही वर्ग प्रभावित हो सकता है जिसकी दृष्टि कुरान एंव हदीसो पर न हो इस विषय पर बहुधा पुस्तकों में सामग्री उपलब्ध है मेरी इस पुस्तक के शीर्षक से यह तर्क अलग है मात्र इतना याद रखना आवश्यक है कि मिर्ज़ा साहब ने स्वंय को मसीह कहा है किंतु हदीसो मे हर स्थान पर ईसा पुत्र मरयम का शब्द है और मिर्ज़ा साहब की माताश्री का नाम मरयम नहीं था और न वह स्वंय ईसा इब्ने मरिया कहलाने के भागी थे इसलिये उनका बोध नहीं हो सकता अन्य जो परिस्थितियाँ और दशांए ईसा पुत्र मरियम की बतायी गई थी जो झूठे मसीह अर्थात मिर्ज़ा साहब पर पूरी नहीं उतरती है बल्कि झूठे मसीह के सम्बन्ध में जो लक्षण मुसलमानों की पुस्तकों एंव अन्य पवित्र पुस्तकों में वर्णित है वह मिर्जा साहब पर पूरे उतरते है अतः कोई मुसलमान उनके दावे से धोखा नहीं खा सकता प्रत्येक दशा में यह एक अटल लक्षण है जो पूर्ण होकर रहेगा। और ईसा पुत्र मरियम जो भगवान के नबी है अवश्य उतरेंगे और उस समय भगवान चाहैगा तो धोखा युक्त विश्वास की वास्तविकता भी प्रकट हो जायेगी (भगवान का शुक्र है कि शासन ने इस वर्ग को नास्तिक घोषित कर दिया)
बहुधा हदीसों मे इस लक्षण का उल्लेख है जिसका विस्तार उनके हदीसों के सम्बन्ध में अग्रतर दर्शाए जाते रहेंगे किन्तु यह लक्षण अटल है देखने में ज्ञात होता है कि संसार में धुँआ अध्क हो जायेगा फलस्वरुप अनेको स्थानों पर आग भी लगेगी सम्भवतः इससे यहाँ पर तात्पर्य नाना प्रकार की गैसों का प्रयोग हो जो इस काल में विभिन्न प्रकार के बमों में प्रयोग हो रही है परिणाम स्वरुप बहुधा स्थान पर आग लगा करती है अतः अंतिम काल में विभिन्न प्रकार की गैसों का अधिक्य एक विशेष लक्षण है कि आजकल जिसका प्रत्यक्ष दर्शन भी हो रहा है इसी क्रम में विशेष लक्षण प्रमुखता अदन की गहराईयों से आग का फैलना है। इस लक्षण से यह संकेत भी स्पष्ट हो जाता है कि अन्तिम काल में अदन के पेट्रोल के भण्डार में आग लगेगी या लगायी जायेगी। जो वास्तव में उस क्षेत्र विनाश की पृष्ठि भूमि सिद्ध होगी इस सन्देह और विचार की उपेक्षा नहीं कि जा सकती क्योंकि हदीस के शब्द स्पष्ट हों अदन की गहराईयों में आग उत्पन्न होगी जो लोगों को प्रलय हैतु चलने को आमंत्रित करेगी।
बहुधा हदीसों में अनेक नगरों विनाश का उल्लेख है किन्तु बग़दाद के विषय में इस विश्वास के साथ उल्लेख है कि आलिमों ने इसे भी अटल माना है इस प्रकार हज़रत इमाम जाफ़रे सादिक़ (अ 0) ने एक सविस्तार खुत्बा इस सम्बन्ध में दिया है जो आसारे क़यामत नामक पुस्तक में उल्लेखित है साथ ही हज़रत अनी है भी अपने ख़ुत्बे में इस ओर स्पष्ट संकेत किये हैं संक्षेप में यह कि ऩनेको हदीसों से यह सूचना प्राप्त हुई है कि अन्तिम काल में एक नगर आबाद होगा जिसका नाम बग़दाद होगा (सम्भवतः इससे वर्तमान नये बग़दाद का बोध है) इस नगर में पाप का इतना अधिक्य होगा कि यह भगवान के प्रकोप का केन्द्र बन जायेगा तथा इस नगर पर ऐसे अद्भुत प्रकोप होंगे जो लोगों ने इससे पूर्व न लेखे होंगे , ताऊन आकाल लजला नदी पकी बाढ़ तूफ़ान वायू तथा वृष्टि आदि इस नगर के विनाश का आरम्भ उस समय से प्रारम्भ होगा जब वहाँ तीन प्रकार के झन्डे परस्पर मतभेद हैतु एकत्र होंगे एक पीले रंग का , दूसरा पश्चिमी दिशा का और तीसरा पास पड़ोस के झन्डे , सम्भवतः यह परस्पर युद्ध का घोतक है , भगवान को ही इसका ज्ञान है , प्रत्येक दशा में यह अटल लक्षण है।
यह सुन्दर नौजवान हैं , इमाम हसन से सम्बन्ध वश इन्हे हसनी कहा जाता है दूसरे अनेको कथनानुसार आपका ही नाम हसन है या आप की उपाधि हसनी है। आग ईरान में दैलम व क़ज़वीन के आस-पास से उठेंगे आप न इमामत का दावा करेंगे , न ख़िलाफ़त न उत्तराधिकार का और न मुदियत का बल्कि वह बड़े आतंक का समय होगा अतः आप अच्छे कार्य करने एंव बुरे काम छोड़ देने हैतु लोगों को आमंत्रण देंगे गुहार करेंगे इस अवसर पर सर्वप्रथम तालेक़ान निवासी आप की याचना पर उपस्थित होकर आप के साथ एकत्र होंगे तथा आप उनके समूह के साथ वहाँ से चलेंगे और आस-पास में अपने संदेश का प्रचार करते हुए किरमान के मार्ग से मुल्तान में पधारेंगे और फिर मुल्तान से कावान द्वीप अर्थात बसरा तक पहुँच जायेंगे यह समस्त क्षेत्र आपके प्रभाव में आ जायेगा और यहाँ से कूफ़े की और प्रस्थान करेंगे यहाँ पर आप को सूचना प्राप्त होगी कि इमाम मेहदी प्रकट हो जुके हैं और मक्का और मदीना की ओर से ईराक़ गधार रहे हैं। कूफ़ा निवासियों पर यह समय बड़ा कठिन होगा कूफ़े ही के आस-पास आप इमाम मेहदी (अ 0) के दर्शन से लाभान्वित हों और आप से ईश्वरीय चमत्कार की माँग करेंगे जब चमत्कार का प्रदर्शन हो जायेगा तो आप इमाम से कहेंगे कि ऐ रसूल के पुत्र अपना हाथ बढ़ाईये ताकि बैअत (भक्ति प्रतिज्ञा) करु बस आप इमाम के हाथ को चूमेंगे तथा एक बड़ी संख्या सहित भक्ति प्रतीज्ञा (बैअत) करेंगे। इमाम जाफ़र सादिक़ (अ 0) का कथन है कि भगवान की सौगन्ध हसनी इमाम मेहदी से परिचित है किन्तु मात्र लोगों की संतुष्टि हैतु ईश्वरीय चमत्कार की माँग की थी इस अवसर पर ज़ैदिया समुदाय के चार हज़ार जवान जो यमन के निवासी होंगे और जैद- शहीद को अपना इमाम मानते होंगे वह ईमाम की भक्ति प्रतिज्ञा (बैअत) को अस्वीकार करेंगे। यह समस्त नौजवान पहले सै 0 हसनी की सेना के सिपाही थे अतः ईमाम , सैय्यदहसनी को उन्हे समझाने के लिये आदेश दें मगर उन पर किसी शिक्षा का प्रभाव न होगी इस प्रकार तीन दिन तक उन्हे समझाया जायेगा किन्तु जब उस का कोई प्रभाव न होगा तो इमाम उनके वध का आदेश देंगे और उन सबका वध कर दिया जायेगा।
टिप्पणी
सैय्यद हसनी के विषय में विस्तार उपलब्ध है हज़रत अली के खुत्बे में भी वर्णन है मैने संक्षेप में लिख दिया है
11. दाब्बतुल अर्ज़ उठना-
बहुधा विश्वस्नीय हदीसों मे दाब्बतुल अर्ज़ के उठने का उल्लेख है परन्तु इतनी विवेचना की गई है कि मैं स्वंय पूर्ण रुप से समझने में सक्षम नही रहा हैँ चूँकि यह लक्षण इमाम मेहदी के प्रकट होने के बाद का है और इसे क़यामते कुबरा (दीर्घ प्रलय) के लक्षणों मे माना गया है अतः इस स्थान पर इसकी व्याख्या निष्फल होगी ज्ञान की जिज्ञासा करने वाले किताम नरुला अनवार तथा अलमलाहिम वलफ़ितन में अध्ययन कर सकते हैं।
इस विषय में अनेकों लक्षणों का उल्लेख किया जा सकता है किन्तु पहने मैं उल लक्षणों का जो इस समय तक पूरे नही हुए बल्कि भविष्य में पूरे होंगे का वर्णन करुँगा इन्हे इस शीर्षक में इसलिये इंगित कर दिया कि चूँकि इनका समय नियत नहीं बल्कि समय में परिवर्तन व विलम्ब भी सम्भव है यह भी हो सकता है कि अनेक लक्षण ईश्वर के सज्जन पुरुष की प्रार्थना व सदाचार वश देर तक प्रकट हो किन्तु यह सभी लक्षण प्रकट अवश्य होंगे और वास्तव में मेरी वर्तमाह पुस्तक के लेख का उद्देश्य यही लक्षण है समप्रति उर्दू अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ किन्तु पुस्तक के अन्तिम भाग में महुधा अरबी पंक्तियाँ। भी प्रस्तुत कर दिये जायेंगे जिन लेखों का अनुवाल किया जा रहा है उनकी मूल पँक्तियों का मैं उत्तरदायी हूँ। यदि मूल लेख से अभिरुजि है तो नूरुल – अनवार मुद्रित है ईसा देखने हैतु पर्याप्त है इसके अतरिक्त अलमलाहिम वलफ़ितन अध्कतर विवेचना उपलब्ध है।
इन लक्षणों का स्मरण रखना अति आवश्यक है
1. शोएब इब्ने सालेह का निष्क्रमणः
यह महानुभाव अन्तिम काल में समरकन्द से उठेंगे और अत्यंत ही विशेष घटना , इनसे प्रकट होंगी। हदीसों के अध्ययन से विदित होता है कि यह वास्तव में सेनालायक है या तो सैय्यद हतनी की सेना के या फिर हज़रत हुज्जत की सेना आपके नियंत्रण में होगी अधिक सम्भावना यह है कि आप सैय्यद हसनी की सेना के सेनानायक होंगे।
टिप्पणीः
हमारी जानकारी के अनुसार अब तक इस नाम के किसी महानुभव ने निष्क्रमण नहीं किया।
2. औफ़ का निष्क्रमणः
यह मुसलमान व्यक्ति कोयत द्वीप से दमिश्क़ तक लोगों को अपने दृष्टिकोण पर आमंत्रित करते हुऐ और परिवर्तन लाते हुऐ पहुँजेंगे और वही पर उनकी हत्या कर दी जायेगी।
3. यमानी का निष्क्रमणः
यमन से एक अज्ञात व अप्रसिद्ध व्यक्ति विद्रोह करेगा जो यमन तथा उसके आस-पास मं आतंक का कारण होगा (कुछ का विचार है यह हो चुका तथा कुछ का कहना है कि निकट ऐसा होगा)
4. पश्चिमी मिस्त्र में निष्क्रमणः
पश्चिमी क्षेत्र का कोई व्यक्ति निष्क्रमण करके मिस्त्र आयेगा। वह शाम के आस-पास उसके निकटवर्ती क्षेत्र पर अधिकार प्राप्त करेगा।
टिप्पणीः यहाँ पश्चिम से यूरोप वालों का बोध नहीं बल्कि मिस्त्र के पश्चिमी क्षेत्र अबजज़ायर व मराकश इत्यादि हैं। सम्भवः इस क्षेत्र का कोई व्यक्ति मिस्त्र पहुँच कर इन्कलाब पैदा करेगा और फिर शाम के निकट प्रभुत्व स्थापित करेगा। मराकश व लीबिया के सम्बन्ध मिस्त्र पर प्रभावशील होंगे।
5. नफ्से ज़किया की हत्याः
हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ (अ 0) का कथह है कि रसूल के परिवारजनों मे से एक व्यक्ति की हताया होगी जो पवित्र आत्मा वाला होगा और उसकी काबे के निकट रुकन व मुक़ाम के निकट सऊदी अरब में हत्या की जायेगी उनका नाम मोहम्मद बिन हतन ज़किया होगा तथा आपने चह भी बताया कि नफ्से ज़किया की हत्या और इमाम मेहदी के प्रकट होने में 15 दिन से अधिक की दूरी नहीं है यह नफ्से ज़किया वास्तव में हज़रत इमाम मेहदी (अ 0) के प्रमुख सहाबियों में से एक महान पुरुष होंगे।
6. बनी अब्बास का मतभेदः
बनी अब्बास का जो वंश अन्तिम काल में शेष रहेगा या सत्तारुढ़ होगी उनमें परस्पर मतभेद हो जायेगा। यह पूर्व में हो चुका है तथा अब भी सम्भव है।
7. मस्जिदे कूफ़ा के पीछे सैय्यद सालेह की हत्याः
यह पवित्र आत्मा सैय्यद जिनका नाम नफ़्से ज़किया बताया गया है अन्य सतातर सत्तर सजाजनों साथ मस्जिदे कूफ़ा के पीछे क़त्ल किये जायेंगे यह घटना भी इमाम के प्रकटन से समीप होगी कुछ लोगों ने इससे इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के क़त्ल किये जाने का अर्थ लिया है क्योंकि करबला कूफ़े के पश्चिम में है परन्तु वास्तविकता यह है कि सुफ़यानी के कूफ़े में आ जाने के पश्चात यह घटना घटेगी तथा उस समय जो हत्या होगी उसमें इन सज्जन की हत्या भी होगी।
8. महान आत्मा सैय्यद की मक्के में हत्याः
नफ़्से ज़किया के अतरिक्त एक अन्या सज्जन पुरुष मक्के में क़त्ल किये जायेंगे यह हाशमप वंश के सरदार होंगे।
9. मस्जिदे कूफ़ा की दीवार का नष्ट होनाः
कूफ़े का रकजभवन नष्ट हो जायेगा उसके साथ मस्जिदे कुफ़ा की दीवार भी ध्वस्त होगी यह पहले भी हो जुका है मगर दाबारा मरम्मत हूई है अतः भविष्य में भी इसकी सम्भावना है।
10. राम के द्वीप में ओला वृष्टिः
रोम द्वपप के क्षेत्र में आकाश से मुर्गी के अन्डे के समान ओलों की वर्षा होगी जिससे उक्त क्षेत्र के निवासी आश्चर्यचकित होंगे (अनेकों बार ऐसा हुआ है)
11. विचित्र दुमदार सिताराः
पूर्व की दिशा मे आकाश पर ऐसा तारा उदर होगा जिसका प्रकाश चन्द्रमा के समान होगा। यह तारा पुच्छल होगा और धीरे-धीरे इसकी दुम सिकुडना आरम्भ होगी फिर यह लुप्त हो जायेगा (पुच्छल तारे बहुधा उदित होते हैं परन्तु जैसे प्रकाश की बात पर विचार योग्य है)
12. पृथ्वी व आकाश के मध्य अग्नि ही अग्निः
आकाश व पृथ्वी के मध्य आग इस प्रकार प्रज्वालितहै जायेगी कि लोग उसे देखकर कित रह जायेगे यह आग 3 या 7 दिन तक प्रज्वलित रहेगी। यह आग उत्पन्न करने वाले पदार्थों का प्रयोग हो।
13. आकाश में लालीः
उपरोक्त से मिलता जुलता दूसरा लक्षण है आकाश के चारों और तीव्र लाली का दिखाई पड़ना और उसका आकाश पर यू व्याप्त होना जैसे कि सम्पूर्ण आकाश पर छा जायेगी।
14. आग ही आग
विश्व में साधारणतयः तथा विशेष रूप से पूर्व मध्य में ऐसी आग प्रकट होगी जिसको देख कर समस्त स्त्री पुरुष भयभीत हो जायेंगें तथा अपने पापों से लज्जित होकर काँपने लगेंगे।
15. अरबों का निरंकुश होनाः
समस्त अरब देश की दशा यह हो जायेगी कि बिना किसी ध्यये के और सोच विचार के जो चाहेंगे करेंगे इनका कोई पूछना वाला नहो (जैसा कि आजकल हो रहा है)
16. ईरान में साम्राज्यवाद का समापनः
ईरान के राजाओं का वैभव और शक्त पतन शीघ्र हो तथा साम्राज्यवाल ही समाप्त हो जाये (बल्कि कोई अन्य शासन तन्त्र सत्ता में आ जाये)
17. मिस्त्र के अमीर की हत्याः
मिस्त्र का अमीर जो बडी शक्ति एंव वैभव प्राप्त कर चुका होगा की हत्या कर दी जायेगी।
टिप्पणीः
यहाँ सुल्तान या मुल्क का शब्द प्रयुक्त न करके अमीर का शब्द प्रयुक्त किया गया है तात्पर्य यह है कि अन्तिम समय में राजतंत्र न होकर मिस्त्र में प्रजातंत्र या अन्य किसी प्रकार अमीरी का पद प्राप्त किया जायेगा तथा फिर वह अमीर क़त्ल किया जायेगा।
18. शाम में झंडों का एकत्रीकरणः
शाम में दो झन्डे मिस्त्र की ओर से एंव एक खुरासान की और से आयेगा और तीनों झंडों के स्वामी शाम का शासन प्राप्त करना चाहेंगे इसी कारण इनके मध्य परस्पर युद्ध व रक्तचाप होगा फलस्वरुप शाम का अधिक क्षेत्र नष्ट हो जायेगा।
19. पश्चिमी आरोहियों का दमिश्क़ में प्रवेशः
दमिश़्क के पश्चिम की ओर से आये आरोहीगण (सवारों) दमिश्क़ व अरब द्वीप में प्रवेश करेगें एंव वहाँ अपना प्रभुत्व स्थापित करेंगे (यहाँ दमिश्क़ से पश्चिमी क्षेत्र से तुर्की का अभिप्राय है इससे सम्भवता पश्चिम वालों का बोध है)
20. खुरासान से काले झन्डों का स्पंदन (गति)
ख़ुरासन से कुछ आरोही काले झण्डे लेकर निकल आयेंगे और उनके द्वारा विशेष घटनाँए घटित होंगी। (सम्भव है इसमें सैय्यद हसनी के सैने के झण्डों का सोकेत हो जिनके विषय में हम पूर्व में लिख चुके हैं)
21. शत्ते फ़रात में नई नहरः
फ़रात नदी से नयी नहर निकाली जाये जो बहती हुई कूफ़ा की गलियो तक आ जाये उस समय पुनः कूफ़ा बस कर विस्तृत हो जाय (यह लक्षण धीरे-धीरे पूरा हो रहा है)
22. साठ झूठे नबीः
साठ झूठे दुराचारी पापी व्यक्ति नबी होने का दावा करेंगे उनमें से अधिकतर अपने जादै द्वारा अन्धविश्वासियों को अपनी ओर आकर्षित कर लेंगे (अब तक की खोज के अनुसार 58 व्यक्ति दावा कर चुके हैं)
23. बारह झूठे सैय्यदः
ऐसे बारह सैय्यद जो अपने को हज़रत अबूतालितब (अ 0) के वंशज हों झूठा इमामत उत्तराधिकारी प्रतिनिधित्व व सेय्यदीयत का वाद (दावा) करें (इनमें से भी अधिकतर हो चुके है। कुछ शेष हैं कराची में एक साहब है जो स्वंच को अबूतालिब रज़ा लुक़मान कहते हैं)
24. महानुभाव पुरुष आग की लपटों मेः
बनी अब्बास का कोई महान पुरुष जलौला और ख़ानेकीन के मध्य जलाया जायेगा (संभव है ये संकेत अब्दुस्सलाम आरिफ़ की तरफ़ हो जो वायुमान की दुर्घटना में इसी स्थान पर जलकर हताहत हुऐ थे।
25. दजला नदी पर एक नया पुलः
बगदाद में मुहल्ला करख़ की और दजला नदी पर नये पुल निर्माण हो।
टिप्पणीः
यह पुल आभी कुछ वर्ष पूर्व पूर्ण हुआ है सम्भव है कोई अन्य पुल भी बनाया जाये।
26. बगदाद का पतनः
प्रथम दिन बग़दाद में तीव्र भूकम्प आये जिससे बड़ी जनसंख्या समाप्त हो जाये और इस घटना से समस्त ईराक़ निवासी व्याकुल हो जाये तथा दोपहर को कालप आँधी यलहै हगे (नयी नयी यातनाओं का प्रर्दशन) संम्भद है ऐसा पूर्व में हो चुका हो एंव अब भी इसका विश्वास है।
27. बसरा का डूब जानाः
कोई एक समूह पहले बसरे में धरती में धंस जाये तत्पश्चात नदी में ऐसी बाढ़ आये कि बसरा डूब जाये (नहजुल बलाग़ा में हज़रत अली ने विस्तार पूर्वक मसरे को डूबने को बताया है)
28. ताऊन महामारी का रूप धार लेः
साधारणतया सारे संसार में ताईम महामारी के रूप में फैल जाये और विनाश कर दै इससे अत्यधिक मृत्यु होगी और इस प्रकार भी एक बड़ी जनसंख्या ताईन की भेट चढ़ जाये (इसकी अब भी संभावना है)।
29. टिड्डियों की अधिकताः
संसार में टिड्डियाँ इस अधिकता से प्रकट हो कि इससे पूर्व कभी न देखी गयी हो।
30. ईरान में युद्धः-
साधारण समस्त संसार में रक्तपात व हत्या का बाज़ार गर्म हो जाये और दुनिया भर में आतंक उत्पन्न हो जाये विशेष रुप से (अजम) ईरान के दो समूहों मे इस प्रकार का युद्ध आरम्भ हो कि लगभग अस्सी हज़ार व्यक्ति हताहत हों।
31. मनुष्य रुप भ्रष्ट होकर बंदर व सुअर हो जायेः
संसार के कुछ क्षेत्रों में कुछ समूह तथा व्यक्ति बंदर एंव सूअर के आकार में रुपभ्रष्ट कर दिये जायें।
32. सूर्य के निकट मनुष्य का हाथ (मुख्य)
सूर्य के निकट संसार वालों को एक हाथ दिखाई पडेगा जो अधिक समय तक उसी प्रकार विद्यमान रहेगा जिसे देखकर दुनिया वाले आश्चर्य चकित हो जायें किन्तु उसका कारण न समझ सकें (ये भी प्रकट होने के अति निकट का लक्षण है)।
33. 24 दिन तक निरंतर जलवृष्टिः
प्रवृत्ति के विपरित निरंतर जलवृष्टि इस प्रकार हो कि जमादि उस्सानी मास की 16 वीं तिथि से प्रारम्भ होकर रजम मास की 10 वीं तिथि तक जारी रहे। ऐसी वर्षा हो कि इससे पूर्व संसार वालों ने कभी न देखी हो (कुछ कथनों से ज्ञात होता है कि यह समय भी प्रकट होने के लक्षणों में से है)
34. मुर्दों का जिंदा होनाः
कुछ ऐसे व्यक्ति जिनकी मृत्यु हो चुकी है। पुनः जीवित किये जायें (ये भी प्रकट होने के निकट तथा प्रकट होने पर होगा कुछ पुस्तकों में जीवित होने वालों के नाम दर्शायें गये हैं।)
35. मस्जिदों की स्वर्णकारी तथा कुरान का सुनहरे तारों से लिखा जानाः
मस्जिदों में सुनहरा काम किया जाये तथा स्वर्णकारी से उन्हें शोभायमान किया जाये और कुरान को सुनहरे तारों से लिखवाया जाये (जैसा कि आजकल हो रहा है)।
36. तीन क्षेत्र धरती में धंस जायेः
संसार के तीन क्षेत्र इस क्रम से जनसंख्या सहित धरती में धंस जाये कि पहले पूर्वी भाग़ फिर पश्चिमी भाग और फिर अरब द्वीप में।
37. नास्तिक का अधिपत्यः
समस्त संसार में विशेष रुप से मुसलमानों में नास्तिकता फैल जाये और समस्त इसलामी देशों में विश्वास सभ्यता – संस्कृति समाजिकता के अधार पर नास्तिकता का अनुकरण होने लगे और मुसलमान अपनी आवश्यकता हैतु नास्तिकों एंव विरोधियों पर आश्रित हो जाये। और ऐसे देशों की मित्रता पर गर्व व्यक्त करें जो ईश्वर को नकारने वाले हों (क्या आजकब ऐसा नहीं हो रहा है)
38. इसलाम धर्म जर्जर हो जायेगा
इसलाम धर्म ईतना दुर्बल व जर्जर हो जाये कि मात्र इसलाम का नाम ही शेष रह जाये और इसलामी रितियाँ समाप्त हो जायें। नास्तिकता और इसलाम परस्पर इस प्रकार से एक में घुल-मिल जायें कि नास्तिको एंव मुसलमानों में अन्तर कठिन हो जाये लोग तीव्रता से विश्वास बदलने लगें।
39. बनी हाशिम का बालक शासकः
हज़रत अली अलैहिस्सलाम ने एक कविता में इस लक्षण की और संकेत करते हुए कहा है कि संसार से बनी हाशिम का शासन समाप्त हो जायेगा और अंत में एक ऐसे बालक पर उसका समापन होगा जो स्वंय अनुभवहीन दूसरों की राय , दया व कृपा पर जीवन बिताने वाला होगा उसके बाद फिर कोई राज्य बनी हाशिम का संसार में शेष न रहेंगा। (इस समय सम्पूर्ण संसार में उरदुन के राज्य के अतिरिक्त अन्य किसी स्थान पर बनी हाशिम का शासन शेष नहीं है) हाँ सम्भव है वर्तमान शाह के बाद जो सम्राट हो उसमें ये गुण पूरे उतरें भगवान ही जाने। कविता की कल पंक्तियाँ आगे लिखी जायेगी।
40. शताब्दी के अंतिम तीस वर्ष
जिस शताब्दी की समाप्ति पर हज़रत मेहदी प्रकट होंगे अर्थात अंतिम तीस ( 30) वर्ष सत्तर ( 70) से सौ ( 100) अद्भुत होंगे उन तीस वर्षों के मध्य संसार में अनुठी परिस्थितियाँ विद्यमान होंगी जिनको भगवान के अतरिक्त कोई नहीं जानता।
टिप्पणीः
यदि वर्तमान शताब्दी के 1370 से हम आज तक देखें तो विचार व चिंतन के उपरान्त चकित हो जायें कि संसार इतने समय में क्या से क्या हो गया और और अभी इस शताब्दी के कुछ वर्ष शेष हैं जिसमें न जाने क्या-क्या हो जायेगा।
41. तुर्कों का द्वीप में उतरना (मुख्य)
हदीसों में शब्द तुर्क स्वतंत्र प्रयोग हुआ है तथा शब्द जज़ीरा भी स्वतंत्र प्रयोग हुआ है किन्तु हदीसों के अध्ययन के क्रम एंव अवलोकन से ज्ञात होता है कि शब्द तुर्क से रुस वालों का बोध है और शब्द जज़ीरा से अरब द्वीप का तात्पर्य है। मैं पुस्तक के अंत में प्रमाण स्वरुप कुछ हदीसों का उल्लेख करुँगा परन्तु ये लक्षण अत्यंत मुख्य है। तात्पर्य ये है कि रुस वाले अरब देश में प्रवेश करेंगे चूंकि कथह में नुजूल का शब्द प्रयोग हुआ है अतः इसका अर्थ ज़ोर ज़बरदस्ती के भी है एंव मूल मित्रता के आधार पर भी हो सकती है और इन तुर्कों का क्षेत्र में उतरना वास्तव में आतंक व अत्याचार के प्रारम्भ होने का लक्षण है कुछ हदीसों में इन तुर्कों की विशेषतायें भी उल्लेखित हैं (यह लक्षण इस समय पूर्ण रुप से प्रकट हो रहा है) आज कब रुस अपना प्रभाव बढ़ाता जा रहा है और अरम बिल्कुल उसकी शरण में आता जा रहा है विस्तार बाल में प्रस्तुत होगा वास्तव में वह काल प्रारम्भ हो चुका है जिसकी सूचना दी जा चुकी है और इससे पूर्व यह क्रम कभी पूर्ण नहीं हुआ अतः आवश्यक है कि अब दुनिया वाले सचेत हो जायें क्योंकि लक्षणों का श्रीगणेश हो चुका है और वह आतंक काल निकट हो चुका है जिससे अरब का कोई घर सुरक्षित न रहेगा।
42. रोम वालों का रमला में उतरना
(मुख्यतः मुख) या (अंग्रेजों का फिलिस्तीन में आ जाना) रोम वालों से अर्थ अंग्रेज़ है अर्थात सैर-ए-रोम के प्रारम्भ और हदीसों की व्याख्या से विदित है कि रोम वालों से अंग्रेजों का बोध है तथा रमला फिलिस्तीन के क्षेत्र में है अतः इस लक्षण से स्पष्ट हो रहा है कि जिस प्रकार पूर्न लक्षण में ये बताया गया है कि अरब द्वीप में रुस वाले घुस जायेंगे और वास्तव में इल दोनों शक्तियों के इस क्षेत्र में आ जाने से विपत्तियों और उपद्रवका आरम्भ होगा (ये लक्षण इस समय बिल्कुल स्पष्ट है यही आतंकवाद प्रारम्भ होने की सूचना है इसके बाद जो कुछ होगा उसकी सूचनायें अनेकों हदीसों में उपलब्ध है)
43. सम्मानित महापुरुष का डूबनाः
बनी अब्बास का कोई महापुरुष दजला नदी में बग़दाद के किनारे मुहल्ला कर्ख़ की और जहाँ आजकल नया पुल बना है डूब जायेगा (ये लक्षण अभी पूर्ण नहीं हुआ)
44. जाबिया मुहल्ले का धरती में धंस जानाः
शाम क्षेत्र में दमिश्क के निकट एक देहात जिसका नाम जाबिया बताया गया है , जमीन में धंस जायेगा।
टिप्पणीः पुराने भूगोल में इस स्थान का पता चलता है और इस समय तक दमिश्क़ में जाबिया द्वार उपलब्ध है जो उस देहात की दिशा बतातात है।
45. सावा नदी में पानीः
ईरान में कुम नगर के निकट साबा नदी में पुनः पानी का दिखाई पड़ना (ये नदी हुजूर के जन्म के समय शुष्क हो गयी थी) पुनः इसमें पानी उत्पन्न हो रहा है मासुमये कुम के दर्शन करने वाले लोग इस की पुष्टि करेंगे।
46. स्त्रियों एंव बालकों का शासनः
संसार के बहुधा स्थानों में स्त्रियों व बालक जो ज्ञान की दृष्टि से कम सूझ बूझ वाले हैं शासक हो जायेंगे जैसा कि आजकल हो रहा है।
47. प्रशासन में परिवर्तनः
प्रशासक स्वतंत्र न होंगे बल्कि जनतंत्र के आधार पर राज्य स्थापित होंगे और साम्राज्यवाद शनैःशनै सम्पूर्ण संसार से समाप्त हो जायेगा।
48.लम्बवत आकार मे आग
तीन दिन तक प्रथ्वी व आकाश के मध्य लालीमा दिखाई देगी जो संसार के लोगो के लिऐ आश्चर्य का कारण हो विशेषताः पूर्व मध्य के लिऐ।
49. सउदी अरब व अन्य अरब देश
क्षेत्रों के मध्य एक ऐसी जाति उत्पन्न हो जाये जो भगवान को नकारे (सम्भवतः इससे तात्पर्य रुस व चीन वाले हैं) रुस वाले प्रवेश कर चुके हैं (इराक़ आदि साक्ष्य)
50. चीन वालों का अरब में प्रवेशः
बिल्कुल अंत में अरब द्वीप में चीनियों का प्रवेश है तथा उनका प्रवेश महायुद्ध व विनाश की पृष्ठभूमि है उनके प्रवेश के उपरान्त इस प्रकार से नरसंहार होगा जो व्याख्या से परे है (विस्तार का मूल लेखों में वर्णन होगा)।
51. आज़रबाईजान से उपद्रव आरम्भ होनाः
आज़रबाईजान और आरमीनिया से एक उपद्रव आरम्भ होगा तथा उसका कोलाहल व निनाद , वहाँ से लाल पर्वत की ओर बढेगा जहाँ बड़ी घटना घटित होगी जो इतनी भयानक होगी कि बच्चे भय से बूढ़े हो जायेंगे , बूढ़े मृत्यु के समीप हो जायेंगे फिर ये उपद्रव मधय ईराक़ तथा वहाँ से कूफ़े तक पहुँच जायेगा जहाँ घोर युद्ध होगा) नजफ अशरफ के निकट तीव्र युद्ध होगा जिसे सोचकर दिल घबराता है। रै नगर अर्थात तेहरान के निकट भी घोर युद्ध होगा।
52. संतान की हत्याः
माता पिता अनेकों प्रकार के भय के फलस्वरुप स्वंय अपनी संतानों की हत्या करने लगेंगे या संतानोतपत्ति में बाधक होंगे इसके अतिरिक्त अन्य लक्षण मूल अरबी लेख में है जो सब मुख्य और विचारणीय हैं। सम्भव है मनन व चिंताकर्ताओं के ह्रदय उनके अध्ययन से उनकी सार्थकता से प्रेरित हो जायें फलस्वरुप अपने आचरण व व्यवहार में सुधारोपरान्त वह हज़रत हुज्जत के सहायकों में सम्मिलित हो सकें।
मैं नीचे वह लक्षण इंगित कर रहा हूँ जो अली इब्ने मूसा इब्ने जाफ़र इब्ने मोहम्मद , इब्ने ताउस हसनी वल हुसैनी द्वारा 664 हिजरी में संकलित पुस्तक अल मलाहिन वब फ़तन जो अंतिम बार नजफ़े अशरफ़ ईराक़ से 368 हि 0 में मंशरातूल मुतबइयय्यना उल-हैदर से मुद्रित हो चुगी है से लिये गये हैं।
टिप्पणीः
ये समस्त लक्षण लगभग 723 वर्ष पूर्व एकत्र किये गये हैं। तथा उसी प्रकार आज भी उपलब्ध हैं अतः ये संदेह नहीं हो सकता कि परिस्थितियों से प्रभावित होकर एकत्र किये गये हैं।
काले झंडेः
हुजूर ने कहा है कि जब काले झंडे प्रकट हो जायें तो ये जान लोना कि इसका आरम्भ विद्रोह है तथा उसके मध्य पथ भ्रष्ट और उसके अंत में नास्तिकता।
काले झंडो के सम्बन्ध में व्याख्याः
हुजूर क कथह है कि जब काले झंडे दृष्टिगोचर हो तो पृथ्वी पर स्थिर , गतिहीन हो जाओ तथा अपने हाथों का स्पंदन न करो तथा बरछो को रोक लो (तात्पर्य ये कि कोई क्रिया मत करो) तब दिखाई देगी दलित जाति जिसके लोग अविश्वस्नीय तथा उनके ह्रदय लौह तुल्य कठोर होंगे ये धनवान होंगे किन्तु अपनी प्रतिज्ञा प्रण तथा वचन पर स्थिर न होंगे उनके नाम उनकी उपाधि से प्रारम्भ होंगे और उनका वंश अल-गुर्रा होगा तथा उनका विवेक , बुद्धि व समझ स्त्रियों के समान होगी इस सीमा तक कि उनके कार.ण परस्पर विरोध उत्पन्न हो जायेगा फिर ईश्वर सत्य को प्रकट करेगा।
मिस्त्र में पीले झंडेः ह्स्सान का कथह है कि हुजूर है कहा कि जब पीले झंडे मिस्त्र तक पहुँच जायें तो तम पृथ्वी पर तीर्वता से दौड़ जाओ (स्थान छोड दो) और जब शाम में पहुँच जायें मुख्यतः उसके मध्य अर्थात दमिश्क़ में तो यदि तुम्हें आकाश की और जाना सम्भव हो तो उधार चले जाओ अन्य़था पृथ्वी पर किसी स्थान पर शरण ले लो।
काले और पीले झंडों की दिशाः
उल्लेखकर्ता का वक्तव्य है कि मैनें अब्दुल्ला इब्ने उमर ते तुना उस समय कि जब वह काबा में उपस्थित थे तो उन्होंने कहा कि जब काले झंडे पूरब की ओर से तथा पीले पश्चिम की ओर से स्पंदन करें तथा वह दमिश्क में आकर मिल जाये तो एक विपत्ति व संकट एंव तीव्र विपदा है।
टिप्पणी यहाँ पूरब और पश्चिम से अर्थ सऊदी अरब की ओर से दिशा ली , जायेगी क्योंकि कथनकर्ता महानुभाव काबा में हैं। इस प्रकार मिस्त्र पूरब में व पश्चिम में ईरान हुआ।
काले झंडों की व्याख्या और शोएब इब्ने सालेहः
तमीमीः- हतन बसरी है कहा कि रै नगर अर्थात तेहरान के निकट (ईरान) तसे एक व्यक्ति जिसका रंग गेहुआँ तथा सीना चौड़ा होगा , उठेगा जो बनी तमीम से होगा तथा उसकी दाढ़ी छितरी होगी एंव नाम शोएब इब्ने सालेह है चार हज़ार व्यक्तियों के साथ निकलेगा जिनके वस्त्र श्वेत एंव झंडे काले होंगे वही इमाम मेहदी का ध्वजदाहक होगा उसके सम्मुख कोई न आ सकेगा किंतु ये कि इसकी हत्या हो जायेगी।
काले झंडे की अधिक व्याख्याः
जनाब मोहम्मद हनफिया ने कहा कि काले झंडे तो पहले बनी अब्बास के निकलेंगे मगर अंत में ईरान व खुरासान के दिखाई देंगे जिनकी टोपियाँ काली तथा वस्त्र श्वेत होंगे। (संभावना है ये झन्डे वालों की तारीफ हो या ये अर्थ हो कि झंडों के ईपर का भाग काला तथा नीजे का श्वेत होगा) और उस समूह के आगे एक व्यक्ति जिसका नाम शेएब इब्ने सालेह और जो बनी तमीम से होगा ये सुफियानी के साथियों को पराजित करेगा यहाँ तक कि बैयतुल मुकृद्दस तक पहुँच जायेगा और अपना शासन व सत्ता इमाम मेंहदी को समर्पित करेगा और उनकी सहायता करेगा। शाम के 300 व्यक्ति तथा शोएव इब्ने सालेह के उठने और ईमाम मेहदी को सत्ता समर्पित करने में 72 मास का अंतर है।
टिप्पणीः
कुछ स्थानों में तिहत्तर दिन हैं मगर मास अधिकतर अनुमान से समीप है तथा किसी कथन के अंत में है कि इस समुदाय के साथ अमालका अर्थात कुर्दों के अलम तथा झंडे होंगे। वास्तव में अमलका अमलीक़ इब्ने आदम इब्ने साम इब्ने नूह की संतान है जो ईरान व तुर्कों व ईराक़ की सीमा पर उपलब्ध है इसके अतिरिक्त अन्य स्थानों पर भी मगर संभवतः यह ईरानी कुर्द का बोध है जो शोएब इब्ने सालेह के साथ होंगे।
तुर्कों का आगमन तथा उनका मार्गः-
मक्होल ने कहा कि पैग़म्बर का कथह है कि तुर्क दो बार उठेंगे एक बार आज़रबाईजाना की ओर से तथा दूसरी बार उनकी सेना फुरात नदी से गुज़रेगी इसके पश्चात् तुर्क शेष न रहेगा।
टिप्पणीः
यहाँ पर दो बातें विचारणीयें है कि वह कौन से तुर्क है , जो आज़रबाइजान की ओर से आयेंगे तो वह रूसियों के अतिरिक्त और कोई नहीं दूसरी ये कि उनके बाद रुसी न आयेंगे या वह समाप्त हो जायेंगे यहाँ पर तुर्क का शब्द यद्यपि स्वतंत्र है मगर आज़रबाइजान और फुरात नदी ने प्रसंग उत्पन्न कर दिया तथा अन्य हदीसें इस उद्देश्य की सहायक हैं अतः मेरे विचार में रुस ही का तात्पर्य है।
अरब में तुर्कः होज़ेफ़ा यमानी ने कहा जब तुम प्रथम बार तुर्कों को द्वीप (अरब) में देखो तो उनसे युद्ध करो यहां तक कि उन्हें परास्त कर दो , ईश्वर की सहायता तुम्हारे साथ होगी अन्यथा वह तुम्हारे सम्मान को अस्त व्यस्त कर देंगे औऱ ये लक्षम है पश्चिम वालों के उठने का औऱ उनके राज्य छिन्न-भिन्न हो जाने का।
आक्रमणकर्ता तुर्कों का हुलियाः अबु हुरैरा के माध्यम से कथन है कि हुजूर ने कहा प्रलय उस समय तक ह होगी जब तक कि तुर्कों से युद्ध न हो जुके और वह तुर्क लाल मुखड़े छोटी आँखे व चगटी लाक वाले होंगे और उनके मुखड़े पिटे हुए लोहै की भाँति कठोर होंगे।
हुजूर ने कहा कि तुर्क तीव्रता से फ़रात नदी की ओर बढ़ेंगे मानों मै उनकी तीव्र गति वाली पीलापन लिये हुए सवारियाँ फ़रात नदी पर पैर जमाये हुऐ देख रहा हूँ।
अन्यः
मैं तुर्कों को देख रहा हैँ जो छोटो कान वाले घोड़े पर सवार हैं यहाँ तक कि उन्होंने उन घोडों को फ़रात नदी के किनारे बाँध दिया।
तुर्कों की अन्य पहचानः
पैग़म्बर ने कहा कि मेरे अनुयायियों को ऐसी जाति से टक्कर लेनी होगी जिनके चेहरे चौडें आंखे छोटी और मुखमुंडल कर्कश व उद्दन्ड हैं उस जाति से तीन बार अरब द्वीप में आमना सामना होगा। प्रथम बार तो मरे अनुयायी भागने के कारण मुक्ति पा जायेंगे दूसरी बार के आमने सामने में कुछ की मृत्यु हो जायेगी और कुछ मुक्ति पा जायेंगे तीसरी बार वह जाति उन पर विजय प्राप्त करेगी। वह तुर्क होंगे और सौगन्ध है उस ब्रहम की जिसके अधिकार में मेरा जीवी है कि उनकी सवारियाँ मुसलमानों की मस्जिद के परिसर के निकट बाँधी जायेगी और मेरे अनुयायीयों की ये दशा होगी कि वह इन तुर्कों के आगमन से व्याकुलता एंव घबराहट के कारण अपनी यात्रा सामग्रियाँ दो-दो तीन-तीन सवारियों पर लेकर भागेंगे।
तुर्क एंव कुर्दः-
इमाम हसन अलै 0 का कथन है कि पैग़म्बर है कहा है कि प्रलय के लक्षण ये है कि तुम एक ऐसी जाति से युद्ध करोगे जिन् मुखमंडल चपटे लोहै के समान होंगे फिर उस जाति से युद्ध करे जिसके जूते बालों के बुने हुऐ हैं। बस उनमें के पहले तुर्क व दूसरे कुर्द हैं।
तुर्कों का पतनः काब का कथन है कि पैगंम्बर ने कहा कि तुर्क अरब देश में प्रवेश करेंगे यहा तक कि उनकी सेनायें फ़रात नदी से पानी पि.येंगी तब भगवान उन पर ताऊन बा देगा तथा उनकी हत्या की जायेगी यहाँ तक कि उनमें से एक भी न शेष रह जायेगा। दूसर हदीस यह भी है कि दजला नदी के बायें तट पर तुर्की आयेंगे जो ईराक़ में है एंव वहाँ पर हिमपात व ताऊन से बड़ी संख्या में मर जायेंगे।
बनु क़ंतुरा (चीन वाले) का अरब में प्रवेशः
अब्दुल्ला इब्ने उमर ने व्याख्या की कि बनु क़ंतूरा (चानी लोग) खुरासन व सेजिस्तान वालों को बड़ी कड़ाई व अनादर के साथ भगायेंगे यहाँ तक कि उनकी सवारियाँ एल्ग के वृक्ष (विशेष प्रकार के पेड़ों के उगने का स्थान जो फिलिस्तीन के निकट हैं) के निकट रुकेंगी फ़िर वह यहाँ से बसरा वालों को सूचित करेंगे कि वह अपनी धरती खालप कर दें। तथा वहाँ से प्रस्थान कर जायें और फिर वह तीनों भांगों में विभक्त होकर अरब के चारों इस प्रकार फैल जायेंगे कि उनका एक भाग सउदी अरेबिया की ओर तथा दूसरा शत्रुओं से युद्ध में व्यस्त हो जायेगा औऱ ये उस समय होगा जब पृथ्वी पर मूर्ख अमीरों का शासन होगा।
बनु क़ंतुरा (चीनीयों का हुलिया)
अबु हुरैरा का कथन है कगि (अरब पर आक्रमणकर्ता वह लोग होंगे जिनकी आँखें छिपकली समान , मुखडे अत्यंत कठोर कर्कश होंगे इनके कारण तीन स्थानों पर युद्ध होगा पहले दजला व फ़रात के मध्या और फ़िर मज़हहमार (पूर्वी दमिश्क़ का एक गाँव) के समीप और फिर दजला दनी के किनारे यहाँ तक कि इधऱ से उधऱ पार करके दमिश्क़ तक जाने वालों को प्रातः सौ दीनारों का भुगतान करना पड़ेगा और दिन के अंत यह धनराशि और बढ़ जायेगी।
बनु क़ंतूरा से सम्बन्धित मुख्य सूचना तथा झंड़ों का युद्धः
हुजूर का कथन है कि उस समय जो बड़ा ध्वज उत्तोलक होगा वह दूसरे छोटे झंडों को जला देगा या फाड डालेगा और वह आमंत्रित करेगा उन आमंत्रितकर्ताओं के विरुद्ध जो दूसरे झंडे वाले होंगे यहाँ तक कि उनके मध्य फिर एक जाति आयेगी जिसके मुखड़े चौडे और आँखे छोटी होंगी जिनको बनु कंतुरा (चीनी) कहा जायेगा।
यह कसकर (दजला तट के निकट एक नगर कुर्दस्तान की ओर ईराक़ की भूमि बाबुल क्षेत्र में था) से गमन करेंगे और पहले उस क्षेत्र के निवासियों को एक विशेष प्रकार की उपजी घास वाले स्थान तक भगा देंगे। फिर अरबों को लड़ने हैतु आमंत्रित करेंगे। और उनकी अस्वीकृति के कारण (आदेशों की अवहैलना के फलस्वरुप) पुनः उनके प्रति घटनांए घटित होगी अर्थात इस प्रकार का युद्ध होगा कि यह हिंसक मार्गों का निर्जन कर देंगे कि उस पर चलने वाला कोई न दिखेगा फिर भूकम्प आयेगा धरती फट जायेगी एंव वह क्षेत्र धंस जायेगा। लोग इधर उधर भागने लगेंगे सर्वप्रथम बग़दाद नगर नष्ट होगा फिर मिस्त्र के पतन का आरम्भ होगा बत जब शाम में इस आतंक को देखो तो जान बो कि अब मृत्यु ही मृत्यु है। इस अवसर पर बनु असग़र (अंग्रेज) उठ जायेंगे और अरब क्षेत्र तक पहुँच जायेंगे तथा उनके साथ युद्ध का बाज़ार गर्म हो जायेगा।
चीनियों के संग घोर युद्ध तथा बनू कंतूरा का विस्तृत परिचयः
कथन है कि अरबों का शासन लपेट दिया जायेगा तथा यह बात पैग़म्बर साहब (स 0) ने तीन बार दोहराईओ कथनकर्ता ने पूछा कि अरब शासन को कौन लपेटेगा तो आपने उत्तर दिया (बनू कंतूरा) वह जाति चौड़े मुखड़े , चपटी नाक़ एंव छोटी आंख वाली है तथा उनके मुख़ड़े ऐसे चपटे है मानों पिटा हुआ लोहा यहाँ तक की वह घुस आयेंगे उस क्षेत्र तक जो अरबों का है बल्कि वह अरबों की भूमि में है उसे जबानतुल-लौन (यरुशल्म का उत्तरी भाग) कहते हैं यहाँ अरबों से उनका घोर युद्ध होगा। उस समय तुर्क कहेंगे कि तुम हमारे अजमी भाइयों को लौटा दो हम तुमसे युद्ध करना नहीं चाहते उस समय अरब अपने मित्रों (जिनके साथ उनका अनुबन्ध होगा अथवा जो अरबों का साथ देने वाले होंगे) वे कहेंगे जाओं अपने भाइयों से मिल आओं इस अवसर पर यह मल करने वाले कहेंगे कि खेद है तुम्हारे अनिश्वरवाल पर इसलाम स्वीकार करने अर्थात प्रण के पश्चात् मुकर जाने पर। फिर कहा कि तब वह मेल करने वाले युद्ध करेंगे तथा घोर युद्ध होगा और ईश्वर की कृपा से वे पराजित होंगे यहाँ तक कि उनमें से कोई सूचनाकर्ता भी शेष न बचेगा और उन मेल करने वालों को इस युद्ध में अधिक शत्रुघन (ग़नीमत) प्राप्त होगा तकम अरब अपने उम मित्रों साथियों और मेल करने वालों से कहेंगे कि इस शत्रुघन (माले ग़नीमत) से हमें भी दे दो तब वह उत्तर देंगे ईश्वर की सौगन्ध हम तुम्हे न देंगे तुमने तो हमें तिरस्कृत कर दिया।
टिप्पणीः
इन समस्त लेखों से यह बात स्पष्ट हो गची कि बनु क़ंतूरा अन्य है और बनु असग़र अन्य। किन्तु तुर्कों का शब्द इन दोनों जातियों के अतरिक्त प्रयोग हुआ है अतः तुर्क इन दोनों से भिन्न है।
तुर्कों का एतिहासिक अनुसंधानः
संदर्भित पुस्तक सलातीने तुर्किया द्वारा स्टेनले लेन पोल अनुवादित नसीब अख़तर ए 0ए 0 करांची तुर्कों के सम्बन्ध में यह समझना कि उसे वर्तमान तुर्की व्यक्तियों ही का बोध है असत्य है बल्कि तारीख़े फ़रिश्ता के अनुसार इतिहास की वास्तविकता यह है कि हज़रत नूह के पुत्र याफ़िस थे एंव उनके एक पुत्र का नाम तुर्क था उनके वंशज जिस जिस त्थान पर फैल वह तुर्की कहलाए हज़रत यफ़िस कहते के दूसरे पुत्र का नाम चीन था अतः चीन देश उनके नाम से नामित है। इस प्रारम्भिक खोज से यह बात स्पष्ट हो जाती है कि तुर्की और है तथा चीनी और उनकी प्रारम्भिक खोज यह है कि गोबी मरुस्थल में दो समुदाय बंजारों का जीवन व्यतीत कर रहे थे। जिनमें एक तुर्क थे दूसरा मंगोल किन्तु दोनों सम्बद्ध वंशज थे इनमें मगोलों को यवन कहा जाता रहा।
जिनके वंश दिक्षणी मध्य रुस तक पहुँचे। किनतु तुर्कों को विभिन्न नामों से पुकारा जाता रहा उदाहरणार्थ किशान और यूची इत्यादि परन्तु चीनी इन्हे यूची कहते रहे। तथापि इतिहास में इनका नाम तुर्क छठी शताब्दी के प्रारम्भ में प्रसिद्ध हुआ इनका एक वंशज पाँचवी शताब्दी हिजरी में आज़रबाईजान के क्षेत्र में बस चुका था लेकिन इतिहास के अनुसार इनका मुख्या निवास महान नामक एक गांव था जो वर्तमान रुस में तुर्किस्तान में रुस में मरो नगर के निकट था फिर यह वहाँ से स्वदेश परित्याग कर तुर्किया आदि चले गये वहाँ तुर्क शब्द उनके नाम का अंग रहा इसी कारण रुसी तुर्किस्नान चीनी तुर्किस्तान व वर्तमान तुर्किस्तान नाम मानचित्रों में दृष्टिगोचर है। हाँ चीनी क्षेत्र में जो तुर्क बसे थे उनका हुलिया नीली आँखे लाल बाल और लम्बा शरपर बताया गया है। परन्तु ये हुलिया चीन के प्राचीन और नये वंशज से मेल नहीं खाता पर वंशजीय मिलाप स्वरुप उन्हें भी तुर्क ही नाम से याद किया जाता है और चीनी वंशज बिल्कुल उनसे भिन्न हैं इसीलिये वर्तमान हदीसों में बनु कंतुरा की शारीरिक रुप रेखा वर्तमान चीनी वंशज से मेल खाती है वह और हैं तथा रुसी तुर्किस्तान वाले तुर्क लोगों को पूर्व वंशज विशेषता के कारण हदीसों में स्वतन्त्र शब्द तुर्क से संकेतिक किया गया है वह रुस वालों ही के लिये है , एंव बनु कूंतूरा जिन व्यक्तियों को कहा गया है वह चीनी है। रहे बनु असग़र तो उनके सम्बन्ध में उल्लेख किया जा चुका है कि उनसे अभिप्राय अंग्रेज है अतः समस्त हदीसें जो लक्षण से सम्बन्धित है उनमें इस अंतर को दृष्टिगत रखना अति आवश्यक है , भगवान को सब ज्ञान है। पुस्तक नूरुल अनवार के संकलनकर्ता ने भी तुर्क से रुसियों का बोध लिया है ये तथ्य भी स्मरणीय है कि पैग़म्बर के समय में चीन की जो सीमाऐं थी वह आज नहीं है। और चीनी तुर्किस्तान का क्षेत्र अब चीन मो सम्मिलिती है अतः हदीसों में उनका अन्तर हुलिया बताकर स्पष्ट किया गया।
तुर्क अरब द्वीप में एंव रुस वाले (अंग्रेज) फ़िलिस्तीन में
हज़रत मोहम्मद इमाम बाक़िर (अ 0) का कथह है कि तुर्क द्वीप में और रुस वाले रमला में प्रवेश करेंगे और उस समय समस्त धरती पर अत्यधिक मतभेद उत्पन्न हो जायेंगे यहाँ तक कि शाम नष्ट हो जायेगा और उसके विनाश का कारण शाम में तीन झंडों का एकत्र हो जाना होंगा , तथा उस वर्ष पश्चिम वालों द्वारा संपूर्ण भूमंड़ल में मतभेद उत्पन्न होंगे और सर्वप्रथम शाम नष्ट होगी और वहाँ सैय्यद हसनी के अमवी व क़ैसी तीन झंडों के कारण मतभेद व्याप्त होगा।
टिप्पणीः
मैं पहले कह चुका द्वीप से अभिप्राय अरब द्वीप है और रमला फिलिस्तीन क्षेत्र में एक स्थान का नाम है और आजकल इस्राइल के अधिकार में है तुर्कों के विषय में उल्लेख किया जा चुका है कि उनसे देखने में रुसी तुर्किस्तान के निवासियों का बोध है एंव रुस वालों से अंग्रेज (यूरोप वाले) तीत्पर्य है। हसनी जो ईरान से आयेंगे उमवी झंडा संभवतः शामियों का होगा , और किसी झंडा मिस्त्र से क़ैता वाले लायेगे।
तुर्क और रोम की और अधिक व्याख्याः
हज़रत इमाम मोहम्मद बाक़िर का कथन है ऐ , सम्बोधी जब तू ये लक्षण देखे तो अपने हाथ पाँव गतिरहित कर ले , प्रतिबंध ये कि तुम इन लक्षणों को पा सको और निश्चित ही तुम न पा सकोगे। अभिप्राय ये है कि तुम जीवित न रहोगे क्योंकि लक्षण अंतिम काल से सम्बन्धित है (फिर आपने कहना आरम्भ किया और कुछ कहने के मध्य ही कहा कि इन लक्षणों में एक तुरर्कों का अरब द्वीप में और रुम वालों का रमला में प्रवेश है और एक कथन में है कि रूमी (अंग्रेज़) फिलिस्तीन में प्रवेश करेंगे तथा दूसरा कथन में है कि उनके भाई तुर्कों का स्वागत करेंगे यहाँ तक कि वह अरब द्वीप में प्रवेश करेंगे (भाई का तात्पर्य सहायक एंव अनुबंध में सम्मिलित जो भाई समान है) और अधर्मी का स्वागत उनके भाई अर्थात रमला जो फिलिस्तीन में अर्थात यहूदी करेंगे। दूसरा कथन है कि तुर्कों की अधर्मी जाति द्वीप में और रूमियों की अधर्मी जाति रमला (फिलिस्तीन) में प्रवेश करेगी इस स्थान पर अधर्मी का शब्द मुख्य है (अभिप्राय ईश्वर को कथनानुसार व कर्मानुसार न स्वीकारने वाले) तथा द्वीप से अभिप्राय अरब द्वीप और रमला फ़िलिस्तीन के नगरों में से एक नगर है।
आकाश की चीख या एटमी धमाका और निजी सुरक्षा के सिद्धान्तः
इब्ने मसूद का कथन है कि हुजूर ने बताया कि जब रमज़ान मास में चीख उठे (ज़ोर का धमाका हो जाये) तो तुम सचेत हो जाना क्योंकि इसके बाद शब्बाल में उपद्रव उत्पन्न हो जायेंगे और जीक़ाद में गोत्रो (क़बीलो) में कटुता रोष हो जायेगा और रक्तपात आरम्भ हो जायेगी। ज़िलहिज्य में हत्या और विनाश , और मुहर्रम तो बस मुहर्रम है , और यहाँ आकर आपने तीन बार कहा अफ़सोस , अफ़सोस अफ़सोस क्योंकि इस काल में मनुष्यों का अधिकता से सामूहिक नरसंहार होगा। तब कथनकर्ता ने पूछा या रसूल अल्लाह ये आकाश की चीख क्या है। तथा कब होगी ? हुजूर ने बताया कि रम़जान मास में जुमे को ज़ोहर के समय उठेगी ओर जब तुम ऐसे रमज़ान माह की रात्रि को पालो तो समझ और जान लो तथा याद रखो कि चीख सोतो को जगा देगी और खड़े हुऐ व्यक्तियों को बैठा देगी बस जब जुमे के दिन सुबह की नमाज़ पढ़ लो तो अपने घरों में घुस जाओ दरवाज़ों को बन्द कर लो तथा दीवारों के झरोखों को पूर्णतः बंद कर लो , अपनी-अपनि साँस रोक लेना , कानों को बंद कर लेना बल्कि कानों में कुछ ठूँस लेना , बस जब इस चीख़ का तुम्हे आभास हो जाये तो तुरन्त खुद को ईश्वर के सिज़दे में गिर जाना और बारम्बार जाप करते रहना सुब्हान कुद्दूस रब्बनल कुद्दूस (प्रशंसनीय है महापवित्र भगवान पालनहार है महापवित्र भगवान) जो ऐसे करेगा मोक्ष प्राप्त करेगा और जो न करेगा उसका विनाश हो जायेगा।
आवश्यक टिप्पणीः
इस लक्षणों में दो बातें बड़ी विचारणीय है। प्रथम लक्षण हैतु हदीस में समय व दिन निर्धारित है जिसका स्मरण कठिन नहीं परन्तु ये आवश्यक ध्यान में रहे कि कथनकर्ता सऊदी अरब से संबंधित है और पृथ्वी के चक्कर के कारण चन्द्रमा के उदय व अस्त में विभिन्न स्थानों पर अंतर हो जाता है इसीलिये समान्यतः अरब में एक दिन पूर्व चंद्र दर्शन हो जाता है। और हमारे देश में बाद में अतः ध्यान रहे कि इस लक्षण हैतु जुमे का दिन है तो संभव हो हिन्दुस्तान , पाकिस्तान में हफ्ते का दिन हो। दूसरे थे कि हुजूर की हदीस में मध्य रमज़ान उल्लिखी है जब वे कि इमामों की हदीसों में इसकी व्याख्या में रमज़ान की तेहसवीं तिथि निश्चित है और संभवतः यही कारण है कि तेइसवी शब , शबे क़दर है जिसमें शब्बेदारी सुन्नत है और सामान्य रुप से मुसलमान व विशेष रुप से शिया वर्ग आराधना में व्यस्त रुते हैं तथा प्रातः काल तक जागते रहते हैं इस रात्रि में जागने व आराधाना में व्यत्त रहने के लिये विशेष निर्देश हैं। मुख्य बात ये भी स्मरणीय है कि इस युग में हगर सुरक्षा विभाग की ओर से युद्ध के समय जो निर्देश निर्गत किये जाते हैं। विशेष रुप से ऐसे युद्ध जिसमें गैस व बम प्रयोग किये जाये। उनके बचाव के जो निर्देश आज दिये जाते हैं उन्हें इस लक्षण में विस्तार से हुजूर ने बताया है अतः संदेह होता है कि में छिटक जायेगी संभव है , इस अवसर पर किसी ध्वनि का भी आभास हो जैसा कुछ कथनों से ज्ञात होता है भगवान ही को सब ज्ञान है किन्तु ये इस समय के युद्ध सम्बन्धी औजारों का ज्ञान था अन्यथा उससे बचने की वह विधि वह न बताते जो इस विज्ञान जगत में प्रचलित है।
चांद में मुखड़ा आकाश में हाथः-
पुस्तक “ मजालेसुल सनया ” में नोमानी के संदर्भ से हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ का कथन है कि आसमानी चीख से पूर्व रजब मास में एक और मुख्य लक्षण प्रकट होगा कथनकर्ता ने पूछा वह क्या ?
उत्तर मिला कि चांद में एक मुखड़ा चमकेगा तथा आकाश में एक हाथ दिखाई पड़ेगा।
टिप्पणीः-
ये लक्षण इस ओर संकेत कर रहा है कि मुख्य लक्षणों के पूरा होने से पूर्व मनुष्य चांद में पहुँच जायेगा इसलिये वर्तमान युग की उन्नति से हमें घबराने की आवश्यकता नहीं ये सूचनायें पहले दी जा चुकी है।
चौबीस दिन तक निरंतर वर्षाः-
अलमुफीद में सईद बिन जबीर के संदर्भ से कहा गया कि वह वर्ष जिसमें इमाम प्रकट होंगे उसमें चौबीस दिन निरन्तर वर्षा होगी जिससे भूमि अनउपजाऊ होने के पश्चात पुनः उपजाऊ होगी। दूसरी हदीस थोडे विस्तार से है कि ये वर्षा माह जमादिल आखिर की सोलहवीं तिथि से प्रारम्भ होकर दसवी रजब तक रहेगी और ये वर्षा ऐसी कि इससे पूर्व लोगों ने कभी देखी होगी।
टिप्पणीः-
कुछ कथनों से ज्ञात होता है कि ये वर्षा इमाम के प्रकट होने के उपरान्त होगी।
एक ही वर्ष में सुफ़यानी का उठना व इमाम का प्रकट होनाः-
इमाम मोहम्मद बाक़िर अलै0 का कथन है कि सुफ़ियानी और इमाम मेहदी का उठना एक ही वर्ष में होगी तथा कुछ कथनानुसार सुफ़यानी खुरासानी व यामानी सबका उठना एक ही वर्ष में है इमाम ने सुफ़यानी का उठना रजब में बताया है अन्य विस्तार पहले दिये जा चुके है।
अपवित्र झंडो का रंगः- अर्थात लाल , नीला व गहरा लाल।
टिप्पणीः-
विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है कि ये रंग किन-किन देशों ने अपना रखा है।
पाँच नगरों पर अधिकार प्राप्त करेगी दमिश्क़ , हुमुस , फिलिस्तीन उरदुन कैन्सरीन।
औफ़ असलमी का उठनाः-
इमाम हज़रत जैनुल आबिदिन का कथन है कि इमाम मेहदी के उठने के पूर्व औफ़ असलमी-नाम का व्यक्ति कोऐत द्वीप या तकरीत (पूर्वी ईराक़ी क्षेत्र) से उठेगी जो दमिश्क़ की मस्जिद में मारा जायेगा तत्पश्चात् शोएब इब्ने सालेह समरकंद से उठेंगे , फिर फ़िलिस्तीन से सुफ़यानी उठेगा (विस्तार पहले दिया जा चुका है)
पूर्वी आग का रंगः-
इमाम मो0 बाक़िर अलै0 का कथन है कि जब तुम पूरब में ऐसी आग देखो जिसमें पीलेपन के साथ लाली दिखाई दे तथा वह तीन दिन व सात दिन प्रज्जवलित रहे तो इमाम के प्रकट हो जाने की आशा करना।
टिप्पणी- एटम से जो आग उत्पन्न होती है उसका रंग बिल्कुल ऐसा ही होता है। तथा पीलेपन के साथ लाली झलकती है। इसलिये विचार है कि एटम का प्रयोग पूर्व में किया जायेगा।
प्रातः काल हज़री ईसा का प्रकट होनाः-
इमाम ने कहा कि हज़री ईसा बैतुल मुक़द्दस से प्रकट होंगे जब लोग नमाज़ की तैयारी कर रहे होंगें तब इमाम मेंहदी हज़रत ईसा के लिये अपना स्थान छोड देंगे और इमाम उपने दोनों हाथ कंधों के मध्य रखकर कहेंगे “ तक़द्दुम ” अर्थात आप बढ़ जाइये और आप ही नमाज़ पढ़ेगे। (ये हदीस सही है इस विषय की बहुधा हदीसें पुस्तकों में उपलब्ध हैं)
पूरब में दुमदार सिताराः-
जाबेरुल जाफ़ी ने इमाम जाफ़र सादिक़ के संदर्भ से बताया कि जब अब्बासी ख़लीफ़ा खुरासान पहुँचा था उस समय दुमदार सितारा उदित हुआ था जो सर्वप्रथम नूह की क़ौम को नष्ट करने हैतु प्रकट हुआ उस समय जब वह डूब गयी पुनः हज़री इब्राहिम के काल में प्रकट हुआ जब आपको आग में फेक़ा गया और उस वक्त जब फ़िरऔन तथा उसके साथियों को डुबाया गया फिर यहीया इब्ने ज़करिया की हत्या के अवसर पर चमका इसलिये जब तुम इसको देखना तो ईश्वर से क्षमा याचना करना विपत्ति व उत्पात के कारण ये सूर्य व चंद्रग्रहण के बाद चमकेगा फिर बिना अधिक समय बीते मिस्त्र में चितकबरा निकलेगा सफ़ेद व काला रंग मिला झंडा या नीला और सफेद मिला हुआ संकेत है कि किसी ऐसे देश का जिसके झंडे का रंग सफ़ेद काला अथवा नीला सफ़ेद मिला हो मिस्त्र में प्रवेश होने का और वह पृष्ठभूमि है उपद्रव के आरंभ होने की अन्य स्थान पर व्याख्या है कि ये तारा सफर मास में प्रकट होगा फिर दूसरे स्थान पर दुमदार सितारे के होने से पूर्व एक इस प्रकार दूमदार सितारा प्रकट होगा जिसके दो दुम (पूँछ) होगी तथा उसका प्रकाश धरती वालों के लिये ऐसा होगा मानों चौदहवीं का चाँद चमक रहा है।
टिप्पणीः-
वैसे तो दुमदार सितारे सामान्यतः निकलते रहते हैं और ज्योतिष विज्ञान के अनुसार इसके प्रभाव की प्रत्येक व्यक्ति को जानकारी है किन्तु इन दुमदार सितारों की सूचना चूँकि हदीसों में दी गयी है अतः महत्व बढ़ जाता है तथा इसका प्रकाश भी चंद्रमा तुल्य होगा सम्भवतः इससे पूर्व ऐसा कभी नहीं हुआ।
छः मास का निरंतर लक्षणः-
हुजूर का कथन है कि रमज़ान मास में आकाश में एक निशानी प्रकट होगी कि पृथ्वी व आकाश के मध्य लम्बवत रुप में प्रकाश स्थिर हो जायेगा शाबान मास में विपत्तियाँ व संकट आरंम्भ होंगे ज़ीकाद में उपद्रव ही उपद्रव होंगे ज़िलहिज्जा में हाजियों के काफ़िले लूटे जायेंगे , मार्ग अवरुद्ध किये जायेंगे तथा मुहर्रम तो बस मुहर्रम ही है।
शाम का विनाशः-
अब्दुल्ला इब्ने उमर के संदर्भ से कथन है कि हुजूर ने कहा कि संसार की समाप्ति होने का आरंभ इस प्रकार होग कि पहले लोगों की ख़ोपड़ी खटखटाई जायेगी और जब ये होगा तो फिर लोगों का विनाशा आरंभ हो जायेगा पूछा गया कि इससे क्या अभिप्राय हो आपने कहा कि शाम का विनाश , विनाश का श्रीगणेश शाम ही से होगा।
पूरब तथा पश्चिम में उपद्रव ही उपद्रवः-
हुजूर का कथन है कि उपद्रव इस प्रकार से बंदी बनायेगी जिस प्रकार रात्रि अपनी कालिमा से दिन को ढ़क लेती है इन उपद्रवों से मुसलमानों का कोई घर सुरक्षित न रह सकेगा चाहै वह पूरब में हो अथवा पश्चिम में। ये उपद्रव पूर्ण रुप से प्रवेश करेगा।
मिस्त्र देश में सुफ़ियानी का अन्याय व अत्याचारः-
हुज़ैफा यामानी का कथन है कि जब मिस्त्र देश में सुफ़ियानी का प्रवेश होगा तो वहाँ वह चार मास ठहरेगा तथा मिस्त्रवासियों की हत्या होगी स्त्रियां रोने धोने में व्यस्त होंगी बहुधा का रुदन तो अपनी मर्यादा के पट्टलन के बय में होगा। तथा बहुधा अपनी संतान की हत्या पर एंव अनेकों तिस्कार पर जो सम्मान के पश्चात विद्यमान होगा एंव बहुत सी क़ब्र में चले जाने पर रोती होंगी।
दूसरी हदीस में है कि सुफ़ियानी जब मिस्त्र में प्रवेश करेगा तो अपनी एक सेना मदीने की ओर भेजेगा और मदीने को इस प्रकार नष्ट-भ्रष्ट करेगा जैसा कि वह हर्रा काँड में भी न हुआ होगा किंतु जब वह सेना बेदा के स्थान पर मक्का मदीना के मध्या पहुँजेगी तो पृथ्वी धँस जायेगी।
टिप्पणीः- सुफ़ियानी माहै रजम में प्रकट होगा।
संपूर्ण विश्व में घोर अकाल (मुख्य)-
इमाम हज़रत मेहदी उस समय तक प्रकट न होंगे जब तक कि ऐसी स्तिथि न हो जाये कि स्त्रियाँ एक समय के भोजन के बदले में न बेची जाने लगे।
अकाल की अधिक व्याख्याः-
इमाम कथन है कि इमाम मेंहदी का निष्क्रमण उस समय तक संभव न हो पायेगा जब तक मनुष्य अपनी सुंदर रुपवाल अनुचारियों (लड़कियों) को निकाल कर लाये और ये घोषित करें कि कौन सक्षम है जो इस लड़की को एक समय के भोजन के बदले क्रय कर ले।
टिप्पणीः
अकाल की इन संक्षिप्त शब्दों में जो स्थिति उल्लेखित है मेरे विचार में अब इसके लिये अधिक हदीसों की व्याख्या की आवश्यकता नही।
इमाम मेहदी के शासन काल की सीमाः-
नईम के द्वारा कथन है कि बनी हाशिम का अंतिम खलीफ़ा जिसका नाम मेहदी होगा वह चालीस वर्ष शासन करेगा तथा उसके द्वारा कुस्तुनतुनियां और रुम के क्षेत्र पर विजय प्राप्त होगी जनाबे मोहम्मदे हनफ़िया के द्वारा भी इसी प्रकार का कथन है जिसमें बैतुल मुक़द्दस के पुनः निर्माण का उल्लेख है और आपने बताया कि कुस्तुनतुनया एंव रुम पर पुनः विजय प्राप्त करने के उपरान्त हज़रत ईसा प्रकट होंगे।
हिन्दुस्तान पर विजयः-
नईम के संदर्भ से कथन है कि हज़रत इमाम मेहदी दवारा एक सेना बैतुल मुक़द्दस से भारत भेजी जायेगी जो भारत पर विजय प्राप्त करेगी तथा यहाँ ज़मीन के ख़जानों पर अपना अधिकार प्राप्त करेगा और उसके द्वारा बैतुल मुक़द्दस का सज्जा श्रँगार होगा तथा ये भारत में उस समय तक जमी रहेगी जब तक दज्जाल उठ न जाये।
दज्जाल के साथ सत्तर हज़ार यहूदीः-
एक व्याख्या पूर्ण कथन है कि जब दज्जाल उठेगा तो उसके साथ सत्तर हजार सशस्त्र यहूदी होंगे किन्तु जब हज़रत ईसा की दृष्टि उन पर पड़ेगी तो वे ऐसे लुंज हो जायेंगे जैसे नमक पानी में घुल जाये अथवा सीसे को पिघला लिया जाये उस समय हज़रत ईसा द्वारा यहूदियों का वध होगा तथा सलीब तोड़ दी जायेगी खिन्ज़ीर की हत्या कर दी जायेगी अर्थात ईसाइयत और यहूदियत समाप्त हो जायेगी।
अब्दुल्ला इब्ने उमर के संदर्भ से उल्लेख है कि मोहम्मद के अनुयायियों पर पाँच घटत होंगी जिनमें से दो बीत गयी तथा तीन शेष हों जिनमें से पहली घटना रुसियों (तुर्को) के द्वारा दूसरी रोम (अंग्रेजों) द्वारा तथा तीसरी घटना दज्जाल के द्वारा घटित होगी। तथा उसके बाद कोई घटना न होगी किन्तु इन घटनाओं से भगवान के प्रणीजन चौपयों की भांति भंगते फिरेंगे तथा अधिक की हत्या होगी।
(1) हिजाज़ (सउदी अरब) में आगः-
अग्नि इस प्रकार प्रज्जवलित होगी कि उसके प्रकाश में बसरा अर्थात शाम के ऊँटों के समूह के गलों में बंधी घंटियाँ दिखाई पड़ेगी।
(2) अदन में आगः- विस्तृत हदीसों में है अदन की आग का उल्लेख इससे पूर्व अनेकों हदीसों में आ चुका है।
(3) पूरब में चीलीस दिन तक आग व धुआः-
कथन हो कि पूरब में आग व धुआ। निरन्तर चालीस रातों तक रहेगा (संभवतः इससे युद्ध का अभिप्राय है)।
(4) हबश वालों द्वारा काबे का अपमानः-
पैग़म्बर का कथन है कि हबश वाले काबे को इस प्रकार नष्ट करेंगे कि पुनः वह इस तरह आबाद न हो पायेगा तथा वह लोग वहाँ से बहुमूल्य उपलब्ध है कि मैं देख रहा हूँ कि काबे की छत पर एक हब्शी जिसकी टाँगे टूटी हुई है बैठा है और उसे गिराने हैतु प्रयासरत है।
टिप्पणी- ये लक्षण अंतिम काल से संबधित है संभव है कि इमाम मेंहदी के बाद का हो इसलिये कि काबे ते ही हज़रत प्रकट होंगे तथा उस समय तक काबा बिल्कुल सुरक्षित रहेगा।
5. पश्चिम से सूर्योदय के बाद एक सौ बीस वर्षः-
अब्दुल्ला इब्ने उमर के संदर्भ से कथन है कि पश्चिम से सूर्यों उदय होने के पश्चात 120 वर्ष तक मनुष्य इस भूमंडल में और आबाद रहेगा।
6. ये अनुयायी सब कुछ करेंगे- हुज़ूर का कथन है कि मेरे अनुयाई वह सभी कार्य करेंगे जो पूर्व के नबियों के अनुयायप कर चुके हैं।
7. भूकम्पों की अधिक्ताः-
हुजूर का कथन है कि तुम्हारे लिए इमाम मेंहदी की उस वर्ष मंगल सूचना है जब लोगों के मध्य अधिक मतभेद उत्पन्न हो जाये तथा भूकम्प अधिक आये।
8. पाँच नदियों पर नास्तिकों का अधिकारः-
हुज़ूर का कथन है कि जब इन पाँच नदियों पर नास्तिकों का अधिकार हो जाए तब इमाम प्रकट होंगे। वह नदियों मेंहून – जेहून- दजला- फ़रात – नील (मिस्त्र में) है।
(उर्दुन शासन की समाप्ति)
हज़रत अली (अलै0) का कथन है कि बनी हाशिम का शासन संसार से समाप्त हो जायेगा और अंत में एक बालक पदासीन होगा जो अनुभवहीन ज्ञानहीन तथा दूसरों पर आश्रित जीवन व्यतीत करने वाला होगा , आपकी कविता की कुछ पंक्तियाँ लिख रहा हूँ इससे उर्दुन शासन का बोध होता है क्योंकि देखने में अब संसार में मात्र केवल उर्दुन में ही बनी हाशिम का शासन है मुझे किसी अन्य शासन का ज्ञान नहीं। हज़रत अली ने अपने बेने को बताते हुए ये कहा है कि “ ऐ बेटा जिस समय तुर्क प्रभुत्व प्राप्त करें उस समय तू प्रतीक्षा कर इमाम मेंहदी के उत्तराधिकार एंव शासन की क्योंकि वह सत्य एंव न्याय स्थापित करेंगे ” । किंतु ये उस समय होगा जब संसार में बनी हाशिम के जितने भी सम्राट होंगे वह सब अपमानित हो जाये क्योंकि वह अपनी मनोकामना की पूर्ति का अनुकारण करने में लिप्त होंगे फिर अंत में एक बालक जो सूझ बूझ की सामर्थ से परे एंव प्रयास करने में असमर्थ हो गद्दी पर पदासीन होगा उसका अनुकरण व अनुसरण होगा जब ऐसा समय आ जाये तो इमाम क़ायम प्रकट होंगे और तुम्होरा हित व न्याय का प्रदर्शन करेंगे तथा कोई अन्याय उस समय न होगा।
हज़रत अली (अ0) का कथन है कि इमाम मेंहदी के प्रकट होने के दस लक्षण हैं।
1. कूफ़े की गलियों में झंडों का जलना।
2. मस्जिदों का निलंबन।
3. हाजियों की राह अवरुद्ध होना।
4. कुछ क्षेत्रों का पृथ्वी में धंस जाना।
5. उनके स्थानों पर तीव्र भूकम्प आना।
6. लोगों का उकताकर अपनी बस्तियाँ छोड़ना।
7. अद्भुत प्रकार के दुमदार सितारे का उदय होना।
8. कुछ सितारों का एक स्थान पर एकत्र होना।
9. अन्याय व हत्याकाँड।
10. लोगों के माल का लूटा जाना व नष्ट होना। इनमें से दूसरे लक्षण पूर्ण होने तक आश्चर्य ही आश्चर्य है जब ये लक्षण पूरे हो जाये तब इमाम प्रकट होंगे।
इमाम जाफ़र सादिक़ अलै0 का कथन है कि जब आमोद प्रोमद अपना स्थान बना ले अर्थात व्याप्त हो जाये और शासक खाने पीने की वस्तुओं को एकत्र करने लगे चिकित्सा सामान्य रुप से शराब से की जाने लगे , तो जान लेना की भगवान की दया अब निकट है अपने उपकारकर्ताओं से अर्थात इमाम के प्रकट होने का समय समीप है।
औरतों का मिम्बर पर जानाः
“ रौज़उलकाफ़ी ” स्त्रियाँ अंतिम काल में सिंहासन पर जायेंगी और व्याख्यान देगी अनेकों स्थान पर स्त्रियों का शासन होगा जीविकोपार्जन में अपने पतीयों के साथ सम्मिलित होंगी और वाहनों पर सवार होगी पुरुषों की भाँति समितियाँ तथा क्लबें बनायेंगी , उनके सरों पर बाल ऊँट की कुहान की भाँति होंगे।
चंद्र दर्शन मतभेदः- “ बिहारुल अनवार ” ग्रन्थ 30 लोग चंद्र दर्शन पर मतभेद व्यक्त करेंगे यहाँ तक कि रमज़ान मास की पहली को रोज़ा न रखेंगे और ईद के दिन रोज़े से होंगे (इस लक्षण हैतु पाकिस्तान के कुछ बीते वर्ष स्मरणीय है)।
मक्के और मदीने में गाने बजाने की सामग्रीः-
“ इल्ज़ामुल नासिब ” पृष्ठ 183 मक्के व मदीने में गाने बजाने के उपकरण सामान्य रुप से देखें जायेंगे। ये बात कुछ ही वर्ष हुए प्रकट हुई है अन्यथा वहाँ टेलीफोन का भी रिवाज न था।
मनोरंजन हैतु हजः-
“ बहारुल अनवार ” धनवाल मनोरंजन स्वरुप हज करने पर प्रस्थान करेंगे मध्यम वर्ग वाले व्यापार हैतु तथा दरिद्र जो भीख माँगते हैं अपना पद स्थिति एंव नाम बढ़ाने हैतु हज करेंगे इसी कथन में मौसम के विपरीत वर्षा होगी और दुमदार सितारे प्रकट होंगे।
बैतुल मुक़द्दस और अक़बा की खाड़ीः-
“ इल्ज़ामुल नासिब ” अंतिम काल में समुदाय एक दूसरे से संघर्षरत होंगे तथा अक़बा के स्थान की भूमि रक्त से लाल हो जायेगी।
शाम के अस्थाई शासनः-
“ अलमलाहिम- वलफ़ितन ” शाम में जो उपद्रव होंगे व आरम्भ है बच्चों के खेल के समान अस्थाई किन्तु इस प्रकार यदि एक ओर समाप्त होंगे तो दूसरी और पुनः आरम्भ हो जायेंगे एंव उसकी कोई सीमा न होगी यहाँ तक कि आकाश से अमीर (इमाम) के आने की ध्वनि सुनाई दे जायेगी।
अमान की बिगड़ी दशाः-
ख़ुतबे बयानियाँ हज़रत अली अलै0 मुझे अमान वालें पर खेद है क्योंकि वे चारों ओर से घिर जायेंगे उनके बहुत से पुरुषों की हत्या हो जायेगी और स्त्रियाँ बन्दी बना ली जायेंगी।
मिस्त्र के मुख्य प्रशासन की हत्याः-
ग़ैबते नोमानी इमाम जाफ़र सादिक़ अलै0 का कथन है कि अंतिम समय में मिस्त्र देश में अरबों के सबसे बड़े अमीर का अस्तित्व होगा (अरबों के मेल वाले नेता की ओर संकेत है) किन्तु अरबों से शासन छिन जायेगा एंव अन्य लोग उन पर प्रभुत्व प्राप्त कर लेंगे और मिस्त्र वाले उपने अमीर का वध कर डालेंगे।
“ रै ” वालों (अर्थात तेहरान) का वधः-
इमाम जाफ़र सादिक़ का कथन है कि “ रै ” के लाखों निवासियों की हत्या होगी और उस समय धर्मज्ञान कुम में प्रदर्शित होगी और हमारे क़ायम के प्रकट होने के समय के निकट होगा।
बाढ़ , पानी , सर्प और टिड्डियों की बहुतायतः-
किताब “ नुरुल अनवार ” में उल्लेख है कि साधारण लक्षणों में संसार में टिड्डियों का अधिक निकलना (जैसे अरब में 1254 हिजरी ई0 ईरान 1267 हिजरी और भारत में आ चुकी है) इसके अतिरिक्त नदियाँ में बाढ़ और पानी में सर्पो की अधिकता भी लक्षण में सम्मिलित है।
टिप्पणीः-
पश्चिमी पाकिस्तान में 1973 ई0 की बाढ़ में ये लक्षण भली भाँति दृष्टिगोजर हुआ इसी प्रकार टिड्डियों का आक्रमण भी संभावित है।
भैंस का बोलना एंव शंख का गर्जनः-
हुजूर का कथन है जाबिर से “ ऐ जाबिर जब तुम सत्य के साथ रहोगे और ऐसी ही स्थिति में तुम्हारी वापसी होगी याद रखो ऐ जाबिर जब शंख बजने बगे (ईसाइयत का ज़ोर हो जाये) और जब समस्त संसार पर संपात हो जाये और भैंस बोलने लगे (अफ्रीका वालों में भी स्वतंत्रता की लहर दौड़ जाये) तो उस समय संसार में आश्चर्यचकित बाते होंगी आग प्रज्जवलित हो जायेगी (युद्ध का आग) , उसमानी का झंडा सौदा की घाटी में प्रकट होगा , बसरे में उथल पुथल होगा और कुछ व्यक्ति कुछ पर अधिकार प्राप्त कर लेंगे और एक समुदाय दूसरे पर चढ़ दौड़ेगा। सेनाये गतिशील होंगी और तालेसान के पेट से उत्पन्न शोएब इब्ने सालेह तमीमी का अनुसरण किया जायेगा और खोज़िस्तान में सईद मूसवी का अनुकरण किया जायेगा और कुर्द के बहादुरों का झंडा गाड दिया जायेगा (अन्त किताब बशारतुल इसलाम)
युगांडाः-
ईदी अमीन जहाँ के राष्ट्रपति थे , मानचित्रों में वहा की उत्तराधिकारी के लिये भैंस के आकार का प्रयोग है , आजकल वही अधिक कार्यशील हैं।
जमादिल अव्वल व रजबः-
नहरवान के युद्ध से लौटते समय हज़रत अली (अलै0) ने कहा कि मुझे आश्चर्य है व अत्यधिक आश्चर्य जमादिल आख़िर व रजब के मध्य जिसमें मतभेद विद्यमान होंगे और तलवारों से खेती काटी जायेगी और ध्वनि के पश्चात ध्वनि होगी।
नजफ़ में वर्षा व तूफ़ानः- हज़री इमाम जैनुलआबिदीन का कथन है कि जब तुम्हारे नजफ़ में (पहाडों में) जलवृष्टि और बाढ़ प्रकट हो जाये और हिजाज़ और अदन में क़ायम के प्रकट होने की आशा करो।
चन्द्रग्रहण व सूर्यग्रहणः-
हज़रत इमाम मोहम्मद वाक़िर अलै0 का कथन है कि दो निशानियाँ इमाम को प्रकट होने से पूर्व आवश्यक है “ सूर्य ग्रहण रमज़ान मास के मध्य में एंव चंद्रग्रहण अंतिम मास में और ऐसा आदम के समय से अब तक नहीं हुआ है इस अवसर पर समस्त ज्योतिषयों के हिसाब किताब समाप्त हो जायेंगे।
आकाश से रमज़ान मास में चीखः-
हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ अलै0 का कथन है कि आकाश की चीख़ जुमे की रात्रि की है और वह रमज़ान मास की तेइसवी तिथि होगी। हज़रत इमाम जाफर सादिक़ अलै0 का कथन है कि ख़ुरासानी , सुफ़ियानी और यमानी तीनों का उठना एक ही वर्ष एक ही मास एंव एक ही दिन होगा। इन में कोई यमानी तीनों का उठना एक ही वर्ष एक ही मास एंव एक ही दिन होगा। इन में कोई यमानी के अतिरिक्त पथ प्रदर्शन हैतु आमंत्रित नहीं करेगा।
प्रकट होने की पृष्ठबभूमि आकाश की आगः-
हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ अलै0 ने कहा जब तुम पूरब में आकाश में अधिक आग प्रज्जवलित देखो जो रात्रि में भी प्रकट रहे तो ये पृष्ठभूमि इमाम मेहदी अलै0 के प्रकट होने की है। और संसार के व्यक्तियों के संकटमुक्त होने का सूचना।
बग़दाद के सम्बन्ध में मुख्य शिक्षाप्रद सूचनायें- मुफ़ज्जल इब्ने उमर ने इमाम जाफ़र सादिक़ (अलै0) से पूछा कि “ ऐ मेरे सरदार , ज़ोरा किस स्थान का नाम है ? आपने उत्तर दिया , “ बग़दाद का तथा ये स्थान ईश्वर की यातना व प्रकोप का केन्द्र है खेद है कि उस स्थान पर पीले झंडे एकत्र होंगे और फिर अनेकों झंडे सुदूर व निकट के क्षेत्रों से वहाँ पहुँच जायेंगे तथा उस स्थान पर भगवान का ऐसा प्रकोप उतरेगा जैसे इसके पूर्व दृष्टिगोचर न हुआ होगा खेद है वहाँ के निवासियों पर बग़दाद अनेक बार नष्ट होकर आबाद होता रहेगा किन्तु अंत में वहाँ निक्रिष्ट कृतियों का बाहुल्य होगा फलस्वरूप ये प्रकोप विद्यमान होगे यहाँ तक कि अंत में वहाँ नौजवान हसनी (सैय्यद हसनी) दैलम कज़वीन की ओर से आयेंगे और उनके साथ सेना की एक टुकड़ी होगी जो सफेद घोड़ो पर सवार होंगे तथा उनका सेनापति बनी तमीम का शोएब इब्ने सालेह नामक जवान होगा। बस यहाँ दोनों मिलकर आतंक व अत्याचार की आग को ठंडा कर देंगे और अत्याचार का प्रतिकार (बदला) प्राप्त करेंगे ओर फिर यहाँ से कूफे को प्रस्थान कर जायेंगे। “
दो ताऊन के लक्षणों का क्रमः-
“ अबू बसीर ” ने इमाम जाफ़र सादिक़ (अलै0) से पूछा कि मेरी जान आप पर निछावर ये बताऐं कि इमाम मेंहदी का निष्कमण कब होगा तब आपने उत्तर दिया कि ऐ अबु मोहम्मद मैं रसूल के परिवार जनों में समय का निर्धारण करने वाले झूठे हैं परन्तु निष्क्रमण से पूर्व पाँच लक्षण अनिवार्य हैं। जिनमें सबसे पहले रमज़ान मास की आवाज़ , फिर सुफ़ियानी तत्पश्चात ख़ुरासानी का उठना , फिर नफ्से ज़किया की हत्या , फिर “ बेदा ” के स्थान का (मक्के से बहुत ही निकट का भाग) धरती में धंस जाना और समस्त संसार से बनी अब्बास के शासन की समाप्ति , किन्तु ऐ “ अबु मोहम्मद ” इन बातों के प्रकट होने के पूर्व दो ताऊन अर्थात सफ़ेद ताऊन और लाल ताऊन का फैलना आवश्यक है। अबु बसीर ने कहा मेरी जान आप पर वारी। ये दो ताऊन क्या है ? आपने उत्तर दिया सफेद ताऊन अत्याधिक मृत्यु है और लाल ताऊन हत्या , अत्याचार , व युद्ध , है और क़ायम का निष्क्रमण उस समय तक न होगा जब तक पुकारने वाला उनका नाम लेकर आकाश के मध्य आवाज़ न दे और ये वाणी रमज़ान की तेइसवीं की रात्रि को उठेगी जबकि तेइसवी रात्रि जुमें की रात्रि होगी तथा पुकारने वाले जिब्राइल होंगे।
वक़्ते मालूम निष्क्रमण का समय हैः-
किताब “ कमालूदीन ” में हुसैन इब्ने ख़ालिद के संदर्भ से लिखा है कि उन्होंने हज़रत इमाम रज़ा अलै0 वक़्ते मालूम क़ायम के निष्क्रमण का समय है। फिर पूछा आप रसूल के परिवार जनों में क़ायम कौन है ? उत्तर दिया मेरी संतान में से चौथा है जिसके द्वारा भगवान समस्त पृथ्वी को अत्याचार व अन्याय से पवित्र कर देगा और क़ायम वह है जिसके जन्म लेने में लोग संदेह करेंगे क्योंकि वह एक लम्बी विलुप्ति वाला होगा। परन्तु जब निष्क्रमण करेगा तो धरती उसके तेज से प्रकाशवान हो जायेगी तथा उसके आगमन की सूचना आकाश से एक वाणी द्वारा दी जायेगी जिसे समस्त भूमंडल वाले सुनेंगे तथा वह काबे के निकट से प्रकट होगा।
अधिक लोग आपके अस्तित्व को नकारेंगेः-
हज़रत इमाम रज़ा अलै0 ने इमाम मेंहदी के परिचय में और बताया कि वह इमाम हसन अस्करी के पुत्र होंगे जो क़ायम बिल हक़ और अलमुतजिर होंगे कथनकर्ता ने पूछा इनका ये नाम क्यों है , आपने उत्तर दिया कि बहुधा ऐसे महानुभाव जो इनके इमामत के स्वीकारने वाले होंगे वह मुरतद (विधर्मी) हो चुके होंगे फिर पूछा कि उनकी उपाधि मुन्तज़िर क्यों है तो कहा कि उनके लिये लम्बी विलुप्ति होगी जिसमें बहुधा उनके अस्तित्व को नकार जायेंगे किंतु उनके निष्क्रमण की प्रतीक्षा में मात्र विशेष जन ही शेष होंगे अधिकता से तो लोग उन उल्लेख की हँसी उड़ायेंगे और बहुत से उनके समय के निर्धारण में झूठ बोलेंगे इस बारे में जल्दी करने वाले समाप्त हो जायेगे और मूल मुसलमान मोक्ष प्राप्त करेंगे।
इरशाद नामक पुस्तक में प्रकट होने के लक्षणः-
जितने चिह्न व लक्षण हज़रत क़ायम अलै0 के निष्क्रमण के वर्णित है एंव जिन घटनाओं का उल्लेख है उनमे से विशेष ये हैः सुफ़ियानी का निष्क्रमण , हसनी की हत्या , दुनिया के शासन में बनी अब्बास का मतभेद रमज़ान मास में सूरज ग्रहण तथा उसी मास की अंतिम तिथियों में चंद्रग्रहण जो नियम तथा प्रकृति के विपरीत है , बेदा के स्थान पर (जो मक्का और मदीना के मध्य है) भूमि का धंसना , पूर्वी भाग में पृथ्वी का धंस जाना और फिर पश्चिम में जुहर के समय सूर्य का आकाश में स्थिर हो जाना तथा उस काल तक उसी स्थिति में रहना एंव फिर पश्चिम से सूर्योदय होना , मस्जिदे कूफ़ा के पीछे एक सज्जन पुरुष (नफ़से ज़किया) का सत्तर सज्जन लोगों सहित मार डाला जाना , बनी हाशिम के परिवार के परिवार के एक व्यक्ति का रुकुन व मुक़ाम के मध्य वध होना , मस्जिदे कुफ़ा की दीवारों का गिर जाना , ख़ुरासान (ईरान) से काले झंडों का प्रकट होना , यमन से एक व्यक्ति का निष्क्रमण और मिस्त्र में एक पश्चिमी का प्रकट होना तथा वहाँ के क्षेत्र पर अधिकार प्राप्त करना और तुर्को (रुसियों) का अरब द्वीप में प्रवेश करना तथा अंग्रेजों का फ़िलिस्तीन में आ जाना , पूर्वी दिशा में एक पुच्छल तारे के इस प्रकार उदय मानों आकाश में चंद्रमा प्रकाशवान हो , फिर धीरे-धीरे उसके दोनों सिरों का सिमट जाना , आसमान में लालिमा फैल जाना पूर्व मध्य में एक लम्बे समय तक आग प्रकट होना और तीन या सात दिनों तक उसका प्रजव्वलित होना , अरबों का देश छोड़ना एंव अन्य का उनके नगरों पर अधिकार प्राप्त कर लेना , ईश्वर के सम्राज्यवाद का समाप्त होना , मिस्त्र वालों का अपने अमीर की हत्या करना , शाम का नष्ट होना तथा वहाँ तीन झंडों का एकत्र होना एंव उसके कारण मतभेद उत्पन्न हो जाना , मिस्त्र की ओर से बनी कैस के और अरब वालों के झडे प्रकट होंगे , दरे बनी क़न्दा के झंडे ख़ुरासान में एंव पश्चिम की ओर से एक बड़ी सेना आयेगी जो जबीरा पर से जायेगी , काले झेडे पूरब की ओर से आयेंगे , फ़रात नदी का पानी कूफ़े की गालियों तक आ जायेगा , साठ झूठे नबी होने का दादा करेगे , एंव बारह सैय्यद इमामत का , “ ख़ानेक़ीन ” के निकट बनी अब्बास के एक महाविशिष्ट व्यक्ति को जलाया जायेगा , बग़दाद में मुहल्ला कर्ख पर पुल का निर्माण और बाद में वहाँ प्रातः काल काली आँधी और भूकम्प आना यहाँ तक कि पृथ्वी का कोई भाग धंस जाये तथा कुल ईराक़ निवासी भयभीत हो जायें और फिर तीव्रता से मृत्यु होगी जान माल अधिकता से नष्ट हो जायेगा , एक जाति के मुख़डे रुप भ्रष्ट हो जायेंगे , अनुचर (गुलाम) सरदारों के देशों पर अधिकार प्राप्त कर लेंगे , आकाश में ध्वनि उत्पन्न होगी जिसे समस्त लोग अपनी भाषा में सुनेंगे , सूर्य के निकट एक मनुष्य का आकार प्रकट होना , क़ब्रे फट जायेंगी और बहुत से लोग जिंदा किये जायेगे , चौबीस दिन तक निरन्तर वर्षा होगी जिससे मरुभूमि पुनः जीवित (उपजाऊ) हो जायेगी और ये काल वह होगा कि इमाम मेहदी प्रकट हो चुके होंगे इनमें अटल भी है और अब भी ये ईश्वर ही को भली भांति जानकारी है कि कौन कब होगा।
साराँशः-
हदीसें व कथन जितने विभिन्न पुस्तकों में इंगित है उनमें प्रकट होने के लक्षण इतने है कि एक पुस्तक संक्षेप में उसे दर्शाने हैतु अपर्याप्त है। किन्तु मैंने इस पुस्तक में विशिष्ट लक्षण लिख दिया है जिनसे आवश्यकता रखने वाले लाभान्वित हो सकते हैं , मुख्यतः ऐसे लक्षण जिन्हें अभी तक सोचा भी नहीं गया है किंतु परिस्थितियाँ नित्य परिवर्तनशील है और इन लक्षणों के प्रकट होने की सम्भावनाये स्वतः ज्वलंत होती जा रही है। मैने जितने लक्षणों का अध्ययन किया है उनका सार संक्षेप में प्रस्तुत कर रहा हूँ आवश्यक नही क्रम यही रहे किंतु मेरा विचार है कि चंतन व मनन उपरान्त क्रमशः कथनों का उल्लेख किया गया है और कुछ ऐसे प्रमाण उपलब्ध हैं कि सम्भवतः क्रम इसी प्रकार रहे “ भगवान भली प्रकार ज्ञीन रखता है ” । स्थित कुछ ऐसी प्रतीत होती है कि अंतिम काल में इसलाम की दशा पूर्णतः बदल जायेगी और न मात्र इसलाम बल्कि संसार के समस्त धर्मों में बड़ा परिवर्तन होगा और लोग अधर्मता की ओर आकृर्षित हो जायेंगे सभ्यता और संस्कृति में परिवर्तन आयेगा आचरण पूर्णतः नष्ट भ्रष्ट हो जायेंगे और भगवान के आदेशों को छोड़ा जायेगा तथा ईश्वर द्वारा वर्जित बातों की ओर लोग आकर्षित होंगे इस प्रकार समस्त संसार अन्याय व अत्याचार से भर जायेगा और सत्य व न्याय का नाम भी न रह जायेगा पापों का इतना अधिक्य होगा कि भगवान ही बचाये अब इस समय ये सब कुछ हो चुका एंव संसार अत्याचार व अन्याय से भरपूर है अतः संसार वाले वास्तव में यातना के पात्र हैं। अब ईश्वर का कथन पूर्ण होकर रहेगा और उसका आरम्भ इस प्रकार होगा कि पूर्व मध्य मुख्यतः समस्त संसार में सामान्यतः उपद्रव की आग भड़काना प्रारम्भ हो जायेगी आकाश में कुछ अद्भुत प्रकार के तारों का संग्रह होगा जो अत्यंत ही दुखदायी होगा पुच्छल तारा पूरब में उदित होगा जिसका प्रकाश चंद्रमा तुल्य होगा वास्तव में ये उन लक्षणों का आरम्भ होगा जिनके प्रकट होने की सूचना दी जा चुकी है।
टिप्पणीः-
इसके विस्तार पूर्व में प्रस्तुत किये जा चुके हैं। तुर्क अर्थात रुस वाले पूरब मध्य के मामलों में हस्तक्षेप करेंगे और रुम वाले (अंग्रेज) फ़िलिस्तीनी क्षेत्र वाले के साथी बन जायेंगे और इन दोनों के सहयेग से पूर्व मध्य रणक्षेत्र बन जायेगा। शनैः शनैः समस्त भूमि पर अग्निशिखा भड़कना आरम्भ होगा और पूरब मधय का बड़ा क्षेत्र नष्ट-भ्रष्ट हो जायेगा संभवतः इसी भूमि पर एटम का प्रयोग होगा अनेक स्थानों की पृथ्वी धंस जायेगी लोग व्याकुल व तितर बितर हो जायेंगे भूकम्पों का अधिक्य होगा बस्तियाँ निर्जन हो जायेंगी कई इसलामी देश मुख्यतः और समस्त संसार सामान्यतः इन घटनाओं से प्रभावित हुए बिना न रह सकेंगे कुछ समय तक युद्ध का ये क्रम चलकर महायुद्ध का आकार धार लेगा , मिस्त्र का क्षेत्र पूर्णतः नष्ट हो जायेगा , बसरा नष्ट भ्रष्ट हो जायेगा , सऊदी अरब से आग की लपटें उठेंगी , और पेट्रोल के संग्रेह में आग लग जायेगी तथा इस विश्व युद्ध के फलस्वरूप समस्त संसार की लगभग 1/3 जनसंख्या नष्ट हो जायेगी। हानिकारक शस्त्र प्रयोग होंगे अनेंकों प्रकार की गैसों से अंतरिक्ष भर जायेंगे और वास्तव में चीन वालों का हस्तक्षेप इस विनाश की पृष्ठभूमि सिद्ध होगा जिनका हुलिया हदीसों में बता दिया गया है और बनु क़ंतूरा के नाम से उन्हें चाद किया गया है इस महायुद्ध के प्रभाव इतने भयावह होंगे कि उसके पश्चात भूमण्डल में विशेष रुप से ताउन आदि और इन रोगों से भगवान के प्राणी मरने लगेंगे चूँकि बहुधा क्षेत्र नष्ट हो चुके होंगे अतः आकाल पड़ जायेगा तथा प्राणी जन अत्याधिक कठिनाईयों व विपत्तियों में घिर जायेंगे। लगभग एक तिहाई लोग इन रोगों मुख्यतः ताउन व आकाल की भेंट चढ़ जायेंगे अब संपूर्ण संसार में 1/3 जनसंख्या शेष रह जायेगी चुँकि और चीनवासियों के युद्ध के फलस्वरुप यूरोप व अमेरिका का क्षेत्र भी नष्ट हो जायेगा किन्तु इससे पूर्व रजब मास में मनुष्य की उन्नति इस स्तर तक हो जायेगी कि संसार का कोई देश चंद्रमा तक किसी मनुष्य को पहुँचा चुका होगा क्योंकि लक्षणों में हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ ने कहा है कि चंद्रमा में मनुष्य का मुख़डा दिखाई देगा और आकाश में एक हाथ , संभवतः इसका अर्थ ये है कि आंतरिक्ष मैं मनुष्य के रुकने का प्रबन्ध हो जुका होगा किन्तु इस पृथ्वी व आकाश के उथल पुथल व युद्ध के फलस्वरुप समस्त संसार की वर्तमान उन्नति नष्ट भ्रष्ट होकर अवनति में परिवर्तित हो जायेगी। भूमंडल बेचैनी और यातना में लिप्त होगा , और शेष बचे ईश्वर के प्राणीजन विनाश के द्वार पर होगें , और विचार है कि घातक शस्त्रों के प्रयोग के कारण सूर्यमंडल की गी में अंतर पड़ जायेगा , विशेष रुप से पृथ्वी की गति में जिसके कारण एक दिन ज़ोहर के समय सूर्य चलते चलते स्थिर हो जायेगा या पृथ्वी की गति शांति में परिवर्तित हो जायेगी। और असर के अंतिम समय तक वही स्थिति शेष रहेगी और उसी दिन सूर्य पश्चिम की ओर से उदय होगा और इसी कारण प्रवृत्ति के विरुद्ध ग्रहण लगेगा मास के मध्य में सूर्य को तथा अंत में चंद्रमा , रमज़ान मास में तेइसवी रात्रि मेो जो अरब में जुमें की रात होगी एक आकाशीय चीख़ उत्पन्न होगी और प्रकट होने की ये प्रथम सूचना होगी इसकी व्याख्या पूर्व में की जा चुकी है। इसके पश्चात् आकाल के समय में पूरब मध्य में सुफ़ियानी का उपद्रव उत्पन्न होगा और अलज़जायर और मराकिश द्वीप के लोग पीले झंडों के साथ मिस्त्र की ओर जायेंगे (सुफ़ियानी का हाल लिखा जा चुका है) उसी काल में हज़रत इमाम हसन अलै0 के वंश के एक महापुरुष सैय्यद हसनी ईरान की भूमि से कज़वानी के क्षेत्र कस्बा “ तालेक़ान ” से निष्क्रमण करेंगे और अपने साथ एक सेना तैयार करेंगे जिनके घोड़े श्वेत रंग तथा उलके झंडों का रंग काला सफे़द होगा उलकी इस सेना के ध्वजाहक शोएब इब्ने सालेह तमीमी होंगे जो ईरानी होंगे चूंकि उस काल में अनेकों क्रान्तियाँ हो चुकी होंगी फिर भी अन्याय अत्याचार उपद्रव शेष रहेगा इसलिये ये महानुभाव स्थिति सुधार हैतु ईरान से उठेंगे और कृमान के मार्ग से होते हुए मुल्तान अन्तिम काल तक शेष रहेगा इस पूरे क्षेत्र को ये महानुभाव अपने आधीन करेंगे और यहाँ के तटवर्ती क्षेत्र से होते हुऐ बसरा तक पहुँचेंगे पुनः कूफ़ा तक आयेंगे। उस समय सुफ़ियानी सेना ने तबाही व बर्बादी फैला रखी होगी मिस्त्र , इराक व शाम उनका लक्ष्य होगा। ये काल नबी के परिवारजनों के अनुयायियों के लिये अंतिसंकट कालीन होगा यहाँ तक कि सुफियानी की सेना मदीने को नष्ट भ्रष्ट कर देगी और वहाँ से काबा को नष्ट करने की दृष्टि से गतिशील होगी। इस अवसर पर हज़रत इमाम मेंहदी अलै0 ख़ान – ए – काबा में प्रकट होंगे और इस उपद्रव से मुक्ति पाने तथा भगवान के घर को बचाने हैतु ईश्वर से प्रार्थना करेंगे उस समय आपके प्रकट होन की सुभाषी घोषणा आकाश से होगी और प्रत्येक व्यक्ति अपनी भाषा में उसे सुनेगा परन्तु तीसरे प्रहर पुनः वैसी ही वाणी उत्पन्न होगी जो शैतान की होगी इससे बड़ी संख्या में लोग भटक जायेंगे किन्तु समस्त ससार से कुल 313 व्यक्ति इस आवह्न पर (उपस्थित हूँ) कहेंगे और “ तेयुल-अरज़ ” से दूरी तय करके ख़ाने काबा पहुँच जायेंगे ये प्रातः काल होगा। सुफ़ियानी की सेना मक्के व मदीने के मध्य “ बैदा ” के स्थान पर धरती में धंस जायेगी मात्र दो व्यक्ति शेष रहेंगे जिनके मुख गर्दन की ओर फिर जायेंगे अब हज़रते हुज्जत मक्के से निष्क्रमण करेगे और दमिश्क़ तक पहुँचेंगे यहाँ सुफ़ियानी के उपद्रव का बोलबाला होगा यही हज़रत ईसा भी प्रकट होंगे आप इमाम मेहंदी अलै0 के पीछे नमाज़ पढ़ेंगे और हज़रत हुज्जत कूफ़ा पधारेंगे , यहाँ सैय्यद हसनी से भेंट होगी। और सैय्यद हसनी अपना अधिकार प्राप्त समस्त भूमि क्षेत्र तथा अपनी पूर्ण सेनाशक्ति हज़रत मेंहदी को समर्पित करेंगे तथा उनकी भक्ति की प्रतीज्ञा करेंगे। यमन के चार हज़ार हुज्जत पर ईमान नहीं लायेंगे अतः उनकी हत्या कर दी जाएगी। फिर हज़रत मेंहदी मस्जिदे सहला (कुफ़ा) में स्थान ग्रहण करेंगे तथा मस्जिदे कूफ़ा में सामान्य राजसभा होगी तत्पश्चात “ बैतुल मुक्क़दस ” को अपना वास स्थान एंव गन्तव्य स्थान बनायेंगे और संसार कि विभिन्न क्षेत्रों में अपने राज्यपाल भेजेंगे। चूँकि ईसाई तथा यहूदी मत समाप्त हो चुका होगा। अतः लोग आपकी आज्ञा पालन करेगे और समस्त शेष संसार एक धर्म का अनुयायी होगा एंव सत्य धर्म समस्त स्थानों में फैल जाएगा उसके बाद दज्जाल का उपद्रव होगा। यह भी संकट कालीन समय होगा किंतु अंत में समाप्त हो जाएगा। हज़रत हुज्जत का शासनकाल सम्भवतः सत्तर वर्ष रहेगा और शेष धरती त्राण व शान्ति का पालना हो जाएगी फिर उसके पश्चात् लम्बे समय तक नष्ट-भ्रष्ट भूमंडल स्थिर रहेगा किन्तु इसकी गति में अंतर आ चुका होगा। तत्पश्चात् इमामों का प्रत्यागमन होगा और दीर्घकाल उपरान्त फिर “ क़यामते - कुबरा ” (दीर्घ प्रलय) होगी जिसका ज्ञान ईश्वर को ही है इस प्रकार वर्णनों का सविस्तार उल्लेख कुरआन में है। फिर प्रलय प्रचार – प्रसार होगा तथा लेखे जोख के उपरान्त बैकुन्ठ व नरक पात्रता के आधार पर आवंटित होगा।
टिप्पणीः-
जिन स्थानों पर आपका शासन काल सात वर्ष लिख है वहाँ इसका भी उल्लेख है कि आपके काल का साल हमारे काल के दस वर्षों के बराबर होगा।
अमेरिका की एक सुप्रसिद्ध स्त्री मिसेज़ जेन डिक्सन विभावन पर आश्रित है। उन्होंने दूसरी विश्वयुद्ध से कुछ वर्ष पूर्व जरमनी के एक गाँव में जन्म लिया। बाल अवस्था में उलके माता पिता जन्मभूमि त्यागकर केलीफ़ोरनिया में बस गये। इस प्रकार वास्तव में वह जर्मन की पैदा है। जेन लाल काल से ही अत्यन्त ईश्वरमयी , धर्मवादी एंव सुह्रद स्त्री हैं। भगवान ने उन्हें भविष्यवाणी करने की दैवी प्रेणा दी है तथा इस सम्बन्ध में अंर्तराष्ट्रीय ख्याति की मालिक है। इनकी प्रसिद्ध भविष्यवाणियों में वेतनमान का युद्ध , राष्ट्रपति केनेडी की मृत्यु , राष्ट्रपति सूकारनु की पदच्युति , नहरु तथा महात्मा गाँधी की मृत्यु , कम्युनिस्ट चीन के अस्तित्व का प्रकट होना आदि-आदि ख्याति प्राप्त हैं। जैन डिकसन की हस्तरेखायें अद्भुत हैं जिनका अस्तित्व उनसे पूर्व नहीं गाया गया। चन्द्रमा के उभार पर चाँद का चिन्ह है और उस पर एक तारा , मस्तिष्क की रेखा दुहरी है। एक बंजारिन स्त्री ने उन्हें बाल अवस्था में देखकर बताया था कि वह विश्व में सुप्रसिद्ध होगी तथा इनकी सूझ-बूझ व बुद्धि असीमित है। उस बंजारन स्त्री ने एक बिल्लूर का गोबा उन्हें उपहार स्वरुप दिया था और कहा था तुम इसकी योग्य हो। अतः चिस समय मिसेज़ जेन विश्व के किसी मामले से संबंधित जानकारी प्राप्त करना चाहती है , उसी गोले में मर्म को उल पर स्पष्ट करते हैं। कभी-कभी स्वप्न में भी कुछ जानकारी हो जाती है और बहुधा वह ऐसी वस्तुयें देख लेती हैं जो अन्य को दृष्टगोचर नहीं होती उलके काल्पनिक दृश्य भी असत्य नहीं होते। वर्तमान काल में जेन की भविष्यवाणियाँ विश्व के समस्त देशों में प्रसिद्ध हैं और विभिन्न पुस्तकों में इस विषय पर अनेक भाषाओं में उपलब्ध हैं। इस प्रकार उर्दू भाषा में भी “ जेन डिक्सन की पेशीन गोई ” नामक पुस्तक 420 माला-रोड़ , लाहौर से कई मास पूर्व प्रकाशित हुई है। इसमें समस्त मुख्य भविष्यवाणियों का उल्लेख उपलब्ध है। पुस्तक बाज़ार में प्राप्त हो सकती है। इस पुस्तक में लिखा गया है कि अब भविष्य के सम्बन्ध में जेन डिक्सन यह कहती है कि 1968 ई0 में शस्त्र की दौड़ तेज़ हो जाएगी किन्तु अमेरिका को अत्यन्त विकार का सामना करना होगा। रुस सबसे पहले 1970 ई0 तक मनुष्य को चाँद पर उतार देगा , चीन रुसी सीमा पर आक्रमण करेगा और रुस अमेरिका का शपथधारी बन जायेगी , चीन भविष्य में कीटाँणुयुक्त युद्ध छेड़ेगा , तीसरा विश्वयुद्ध 1981 ई0 में आरम्भ होगा जो वर्षों तक चलता रहेगा।
किन्तु जेन की प्रसिद्ध भविष्यवाणी यह है कि 5 फरवरी 1962 में प्रातः 7 बजे पूर्व मध्य में एक कृष् के घर एक बालक का जन्म हुआ है , जो समस्त संसार में परिवर्तन लायेगा और उस पर शासन करेगा। जैन का कथन है कि उस बालक के नेत्रों में ज्ञान व कला के भंडार छिपे हुए दिखाई पड़ते हैं एंव बालक संसार में परिवर्तन का कारण होगा और वर्तमान शताब्दी के अंत में वह समस्त विश्व को एक ही विश्वास पर सहमत करेगा। इस बालक द्वारा नये धर्म का विश्व में अस्तित्व होगा जो भगवान की बुद्धिमता व नीति का पाठ सिखायेगा और समस्त व्यक्ति उस पर ईमान लायेंगे। संसार को उस महान पुरुष अध्यात्मिक शक्ति का अनुभव 1980 ई0 तक हो सकेगा एंव तत्पश्चात आने वाले दस वर्षों में संसार की दशा पूर्णतया बदल जायेगी। 1999 ई0 तक वह अत्याधिक शक्तिशाली हो जाएगा और संसार वाले इस कथन की सत्यता से अवगत हो जायेंगे।
जेन डिक्शन का कथन है कि जिस शान्ति की संसार को खोज है वह 1999 ई0 तक स्थापित हो सकेगी किन्तु उस समय लोगों में एक प्रकार का मुख्य अध्यात्मिक परिवर्तन आ चुका होगा। अमेरिका को चीन से युद्ध करना पड़ेगा , रुस और चीन की झड़पें तीव्र न होंगी , किन्तु अमेरिका अपनी अत्याधिक विलासता के फलस्वरुप नष्ट हो जाएगा और युद्ध के कारण अधिक लोगों की मृत्यु हो जायेगी। अन्तः एक पवित्र लपट विद्यमान होगी जो संसार हैतु दयालूता का एक संदेश होगी तथा संसार में पूर्ण शान्ति का कारण होगी। जेन कहती है कि 1980 ई0 में वह समस्त धरती पर शान्ति स्थापित करेगा तथा विश्वव्यापी का नायक हो जाएगा।
टिप्पणीः-
मूल अंग्रेजी भाषा से अनुवाद करने वाले असरार ज़ैदी और जलाल नक़वी ने इस बालक से हज़रत इमाम मेहदी का बोध लिया है।
टिप्पणीः-
“ मेरा निजी जीवन यह है कि जेन डिक्सन ” ने अपने बिल्लूर के गोले में इस शताब्दी के अंतिम समय की जो परिस्थियाँ देखी हैं उनके हिसाब से वह बालक जिसका जेन ने उल्लेख किया है अंतिम शताब्दी में लगभग 40 वर्ष की आयु का होगा , इस गणना से जेन ने विचार किया कि 1962 ई0 में उसने जन्म लिया होगा और चूंकि प्रकट होने के समय इमाम की भी यही आयू बताई गई है अतः अनुवाद कर्ताओं ने इस से इमाम मेहदी का अभिप्राय लिया सम्भव है , इमाम की बाल अवस्था की स्थिति जेन पर प्रकट हुई हो किन्तु मेरा विचार है कि जेन पर सैय्यद हसनी के जनम की प्रस्थिति व्यक्त हुई जो इरान में पैदा हुये होंगे और संसार के अधिक क्षेत्रों पर अपना अधिकार प्राप्त करके इमाम मेंहदी को समर्पित कर देंगे परन्तु जेन ने इस बालक की जो वंशावली का उल्लेख किया है अर्थात यह कहा है कि वह बालक फ़िरऔनी कुल से होगा ,यह उनके चिन्तन की त्रुटि करती है किन्तु दृश्य असत्य नहीं होता और यह तथ्य इसलिये भी सत्य है कि स्वंय इसलामी विश्वास के अनुसार कोई व्यक्ति विलुप्ति काल में इमाम के देखने का दावा कर ही नहीं सकता बल्कि मात्र तर्क वितर्क का दावेदार हो सकता है। इन दोनों में यह अन्तर है कि यह तो संभव है कि अपने जीवन काल में हमने इमाम को देखो हो किंतु यह न समझे हो कि यह इमाम हैं , यह स्थिति (मुनाज़रे) है परन्ते प्रत्यक्ष दर्शन (मुशहदा) किसी वस्तु की वास्तविकता को समझकर पहचानना कि जिसे देखा जा रहा है वह इमाम मेहदी ही है , यह है प्रत्यक्ष दर्शन (मुशाहदा) तो जेन में मात्र मुनाज़रे की स्थिति उत्पन्न हुई है अतः यदि उन्होंनें वंश गलत बताया तो यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है तथा विश्वास स्वरुप हम यह भी समझते हैं कि जब इमाम की विलुप्ति एक छिपा हुआ मर्म है तो उसके संकेत तो जेन को भगवान द्वारा प्रदत्त अध्यात्मिक शक्ति के कारण प्राप्त हो सकता है परन्तु वे अपने प्रत्यक्ष दर्शन में इमाम को सीमित नीहो कर सकती। दूसरे मेरा ये संदेह कि जेन ने इस बालक को 1962 ई0 में जन्मित देखा है ज्ञान की दृष्टि से स्वीकारणीय है कि इमाम मेहदी तो वह बालक हो ही नहीं सकते क्योंकि , इमाम जनम ले चुके हैं और लुप्त हैं जिसकी पुष्टि में सहस्त्रों हदीसों और कथन उपलब्ध हैं। अतः इससे किसी और बालक का बोध है और चूंकि सैय्यद हसनी भी पूरब मध्य में जन्म लेंगे और उनकी आयु भी लगभग यही होगी अतः जेन ने सैय्यद हसनी की उन्नति को देखा है उनकी उन्नति भी वास्तव में इमाम मेंहदी के ही लिये है और उनके अधिकार प्राप्त सम्पत्ति भी इमाम मेंहदी ही को समर्पित होगी अतः उन पर ये घटनायें सिद्ध होती हैं और चूंकि सैय्यद हसनी के निष्क्रमण का अंत भी इमाम के शासन के अस्तित्व चैन व शांति के स्थायित्व पर है इसलिये मेरा विचार है कि सैय्यद हसनी संभवतः जन्म ले चुके हैं। चूंकि परिस्थितियाँ तीव्रता से बदल रही है लक्षण निरन्तर पूर्ण हो रहे हैं , हम चूंकि ध्यान नहीं देते इसलिये आभास नहीं हो पा रहा है अन्यथा भगवान की शक्ति से दूर नहीं कि अति शीघ्र ये समस्त बातें पूर्ण हो जायें परन्तु ये तो हर प्रकार से निश्चित है कि जेन की भविष्यवाणियाँ सत्य सिद्ध होती है और वह वास्तव में एक अध्यात्मिक स्त्री हैं जिसे भगवान ने दैवीय प्रेरणा प्रदान की है और उनका ये कथन कि उसक बालक ने पूर्व मध्य में जन्म लिया है से सिद्ध है कि दैवीय अधिकार पूरब से संबंधित है और उसी क्षेत्र का कोई व्यक्ति संसार को पूर्ण रूप से बदल देगा और मेरे विचार से ऐसे व्यक्ति को पूर्व मध्य से सम्बद्ध करना ही जेन के सत्यवादी होने का प्रमाण है , अन्यथा वह क्षेत्रीय व धार्मिक पक्षपात की दृष्टि से अध्यात्मिक अधिकार का केन्द्र यूरोप व अमेरिका को बताती किन्तु जेन ने सत्यता और ईमानदारी से काम लिया है इसलिऐ उनका ये कथन ध्यान देने योग्य है क्योंकि इससे सत्यता प्रलक्षित होती है अब ये कि जिस बालक को जेन ने देखा वह कौन है उसको ईश्वर ही जानता है।
शाह साहब अत्यंत ही प्रसिद्ध व्यक्ति हैं आप बुख़ारा ईरान से हिन्दुस्तान भी पधारे और आज तक संसार उनकी पवित्रता के गुन गाता है। उन्होंने अनेक क़सीदे भविष्य की भविष्यवाणियों विषयक लिखे हैं। कथन है कि अगले क़सीदों में लोगों ने अधिक आप्रेशन कर दिये हैं नीचे उनके एक क़सीदे से उघृत कुछ पंक्तियाँ प्रस्तुत हैं जिनमें हज़रत इमाम मेंहदी के सम्बन्ध में संकेत उपलब्ध हैः-
1- कुदरते किरदिगार मी बीनम
हालते रोज़गार मी बीनम
मैं ईश्वरीय शक्ति देख रहा हूँ तथा मैं युग की दशा का अवलोकन कर रहा हूँ।
2- अज़ नज़म ई सुख़न नमी गोयम
बल्कि अज़ सिर्रे यार मी बीनम
मैं ज्योतिष विद्या के ज्ञान से ये बातें नहीं कह रहा हूँ वरन् भगवान के मर्म जो मुझ पर विदित हैं उनके आधार पर देख रहा हूँ।
3- जंग व आशेब व फ़ितनये बेदाद
अज़ यमीनो यसार मी बीनम
युद्ध , कोलाहल , अशांति व अत्याचार मेरे दाहिने एंव बायें अर्थात प्रत्येक दिशा में विद्यमान है तथा मैं उन्हें देख रहा हूँ।
4- ग़ारतो क़त्ल व लशकरे बिसयार
दरमियानो कनार मी बनिम
लूट , विनाश , हत्या एंव अत्यधिक सेना अपने मध्य आस पास अर्थात सभी ओर मैं देख रहा हूँ।
5- मज़हबो दींज़ईफ़मी मी बीनम
मुब्तदये इफ्तेख़ार मी बीनम
धर्म (मत) , दीन (जीवन व्यवस्था) को मैं दुर्बल देख रहा हूँ तथा निष्ठुर को मैं वर्तमान युग में प्रतिष्ठित देखता हूँ।
6- तुर्क ताजैक रा बहम दिगर
ख़समी व गरिदार मी बीनम
तुर्क (रुसी) एंव जैक (अंग्रेज) को मैं परस्पर शत्रु एंव युद्धरत देख रहा हूँ।
7- अन्देक अम्न अगर बूवद आरोज़
दर हदे कोहसार मी बीनम
इन परिस्थितियों में यदि तनिक शांति भी दृष्टिगोजर हो तो उसे मैं पर्वत समान अर्थात अत्याधिक देखता हूँ।
8- ग़म मख़ोर आकिमन दरीं तशवीश
हरमिये वस्ले यार मी बीनम
चिंता न कर क्योंकि इसमें शंका है मैं अपने अंतः पूरी में अपने मित्र के मिलन का आभास कर रहा हूँ।
9- बाद आसाल व चंद साल दिगर
आलमी चूँ निगार मी बीनम
इस वर्ष तथा बाद के कुछ वर्षों बाद इस संसार को मैं मान चित्र के समान देख रहा हूँ।
10- नायबे मेहदी आशकार शवद
बल्कि मन आशकार मी बीनम
भगवान की ओर से निर्धारित उत्तराधिकारी इमाम मेंहदी को प्रकट होना है उनके प्रकट होने को मैं दैख रहा हूँ।
11- बादशाह तमामदानाई
सरवरे बा वेक़ार मी बीनम
यह समस्त बुद्धिमानी के सम्राट होंगे और मैं एक प्रतिष्ठित सरदार को देख रहा हूँ।
12- बंदगाने जनाबे हज़रत ऊ
सरबसर ताजदार मी बीनम
उन महान पुरुष के अनुयायियों को मैं सर्वथा मुकुटधारी देख रहा हूँ।
टिप्पणीः-
इस क़सीदे में लगभग वही लक्षण बताये गये हैं जो मैं पूर्व में लिख चुका हूँ किन्तु इस से यह निष्कर्ष उपलब्ध होता है कि औलिया अल्लाह को भी इमाम मेहदी की प्रतीक्षा रही है तथा अब भी है। चूँकि वह घटनायें होंगी इसलिये बहुधा औलिय अल्लाह को भी इसका ज्ञान है।
हुजूर तथा अन्य इमामें ने हदीसों में पूर्व ही जानकारी कर दी थी कि इमाम क़ायम का उस समय तक निष्क्रमण न होगा जब तक कि साठ झूठे लोग नबी होने का दावा न कर लें। चूँकि यह कथन नबी का था इसलिए इसका पूर्ण होना अनिवार्य था और है। अब तो प्रमाण उपलब्ध है कि नबी के काल से यह क्रम चला है और अभी शेष है। हमारे विचार से तो सम्भवतः यह संख्या पूर्ण हो चुकी है किंतु यदि अब भी कुछ ऐसा दावा करने वाले शेष हैं तो वह भी अति शीघ्र इस लक्षण की पूर्ति हेतु प्रकट होंगे। परन्तु इस विषय में यह उल्लेख करना अति आवश्यक है कि बने हुए झूठे नबियों ने अपने धर्म का प्रदर्शन करते हुए और स्वंय को नबी सिद्ध करके जिस धर्म से संसार को अवगत कराया वह अधिक समय तक अनुकूल दशायें व वातावरण न होने के फलस्वरुप अधिक विख्यात न हो सका क्योंकि पुरातनकाल में लोगों में वास्तविक धार्मिक रुचि थी और सत्य धर्म की जानकारी से काम रहता तथा किन्तु समय के परिवर्तन एंव पश्चिम के अनुकरण को दृष्टिगत रखते हुए जब यह भावना समाप्त हो गई तो प्रत्येक बुलाने वाले के पीछे चल पड़ना स्वभाव बन गया तो कुछ ऐसे धर्मों को उन्नति का अवसर प्राप्त हो गया तथा उन्होंने कुछ ख्याति भी प्राप्त कर ली अतएव ऐेसे धर्म जो आज भी अधिक प्रसिद्ध हैं उनकी नींद ड़ालने वाले मिर्जा भ्रतगण थे जिनमें एक सज्जन ने ईरान देश से क्रम आरम्भ किया। उनका प्रचलित धर्म बहाइयत रुप से विस्तृत हो रहा है। दूसरे व्यक्ति भारत के अद्भुत व्यक्तित्व थे जिनका धर्म उनके देश के नाम से अधिक प्रसिद्ध है और लगभग हर स्थान पर इस धर्म को क़ादयनियत के नाम से जाना जाता है। इन लोगों ने अनोखे दावे किये और अच्छी ख्याति प्राप्त की उदाहरण स्वरुप बाबी वर्ग के उच्च पूर्वज अली मोहम्मद बाब ने पहले स्वंय को इमाम बताया , फिर नबी बताया और अन्त में जब और बुद्धि भ्रष्ट हुई तो ईश्वरत्व का दावा कर दिया और कुरआन की तुलना में एक पुस्तक भी “ अल बयान ” नामक प्रस्तुत कर दी। इस प्रकार भारत के दावा करने वाले ने भी पहले अपने को मेंहदी बताया अर्थात इमाम बने , फिर मरयम कहा एंव तत्पश्चात् अध्यात्मिक रुप से योनि भी परिवर्तित कर दी और महानुभाव मसीह बह गए। यह सब कुछ उनके ही स्वंय के लेखों में उपलब्ध है। चूँकि हर भटके हुए को कुछ मानने वाले मिल ही जाते हैं अतः यह लोग भी संसार से असफल नहीं गये बल्कि इनके अनुयाई भी आज संसार में अधिक मात्रा में उपलब्ध हैं। इन लोगों के अनुयाइयों का होना एंव उनका ख्याति प्राप्त करना हमारे लिए अधिक आश्चर्य का विषय इसलिए नहीं कि हमारा प्रत्यक्ष प्रदर्शन हैं कि आजकल बाज़ार में यदि कोई मदारी अपने करतब दिखाना आरम्भ करता है अथवा कोई अपने स्वास्थय के कार्यक्रम प्रस्तुत करता है तो उसके देखने हैतु भीड़ हो जाती है यद्यपि देखने वाले जानते हों कि उनका समय नष्ट हो रहा है और मायावी जिन करतबों का प्रदर्शन कर रहा है वह वास्तविकता से परे हैं किन्तु फिर भी देखने वाले देखते ही रहते हैं और कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाले की कुछ न कुछ प्रशंसा हो ही जोती है। तो फिर ऐसे व्यक्तियों के यदि कुछ अनुयाई हो जाये तो आश्चर्य क्या अब जबकि समस्त संसार साधारणत्या पथ-भ्रष्टता का परिचालक है और वास्तविक धर्म की जानकारी की जिज्ञासा पूर्णतया समाप्त हो गयी है। अस्तु ऐसे धर्मों के फलने फूलने का प्रर्याप्त अवसर प्राप्त है और फिर ऐसे धर्मों की पुष्टि धनवान एंव अधिकारीगण करते हैं तो किंचित मात्र आश्चर्य नहीं होता , किंतु हमें तो आश्चर्य उन व्यक्तियों के परीक्षण , गवेश्णाधा , प्रोक्ष दर्शन तथा उनके आदेशों पर होता है और उनके साहस की प्रशंसा किये बिना ह्रदय की संतुष्टि नहीं होती । अतः आप उनके प्रयत्नों को देखे तो इस निष्कर्ष तक पहुचेंगे कि यह लोग स्वंय को सत्यवादी सिद्ध करने तथा कम ज्ञान रखने वालों को मूर्ख बनाने हैतु मात्र यह पद्धिति अपनाते हैं कि अपने हितों को दृष्टिगत रखते हुए भगवान के आदेशों तथा पैग़म्बर अकरम की हदीसों की इच्छानुसार व्याख्या करते हैं और वास्तव में इस क्षेत्र में उन्हें एंव उनके अनुयाईयों को निपुणता प्राप्त है। किन्तु बहुधा व्याख्या तो ऐसी अद्भुत होती है कि पढ़कर हँसी आती है और बुद्धि रुदन में लीन हो जाती है और अचूक जीभ पर आता है “ बरी अक़्लों दानिश बेवायद गिरीस्त ” एैसी सूझबूझ व बुद्धि पर रोना हदीसों में ये उल्लेख है कि अन्तिम काल में दज्जाल प्रकट होगा तथा उसके हुलिये में ये मुख्य बात ये है कि उसके एक नेत्र होगा जो आँख के घेरे में होने के स्थान पर उसके ललाट पर (माथा पर) चमकती होगी तथा वह कई कई मेंहदी सिद्ध करने हैतु भारतीय मिर्ज़ा साहब ने उसकी व्याख्या की क्योंकि कथन क्रम विश्वसनीय था अतः उसकी उपेक्षा तो नहीं कर सके वरन् ये व्याख्या की कि मेरे प्रकट होने पर ये लक्षण पूरा हो गया अर्थात दज्जाल प्रकट हो गया लोगों ने पूछा श्रीमान दजाजाल क्या है ? आपने कहा “ इससे तात्पर्य रेलगाड़ी है देखो मेरे ही काल में ये भारत में दिखायी पड़ी और इसके मध्य में प्रकाश तथा ये 64 हाथ लम्बी है ” ये है ऐसे लोगों की नबुवत व इमामत! ऐसे अर्नगल कथनों से पुस्तके भरी हुई हैं किंतु हमें आश्चर्य नहीं क्योंकि इल लक्षणों की पूर्ति होना था और किसी न किसी को नबी होना का दावा करना ही था अतः उन्होने बड़ा उपकार किया कि इस लक्षण को पूरा करने में सहायता की किंतु खेद तो इस बात का है कि ऐसे लोगों ने अपने प्रकट होने और दावे के प्रमाण में हदीसे प्रस्तुत की है और अपने आगमन के जो चिन्ह बताये हैं वह अधिकता से शिया समुदाय के इमामों से सम्बन्धित हैं क्योंकि पैग़म्बर के बाद उन्ही लोगों ने इस विषय पर अधिक ध्यान दिया है और अल्लामा जौहरी के कथनानुसार कि क्यों न ध्यान देते ये तो मुख्य रुप से उन्ही के घर का मामला था इसलिये उन लोगों की और कही तो अपने उद्देश्य की सामग्री न दिखायी पड़ी बल्कि सब कुछ विस्तार से प्राप्त होता है मात्र इमामों के कथन में इसलिये इन लोगों ने उपनी प्रवृत्ति के अनुसार व्याख्या करके समस्त लक्षणों को अपनी ओर मोड़ लिया तथा व्याख्या की प्रणाली ऐसी अपनायी कि अच्छे भले पढ़े लिखे धोखा खायें और भटकने का एक नया द्वार खुल गया किन्तु इन बातों से मात्र वही लोख धोखा खाते हैं जिन्कों प्रकट होने के लक्षण का कुछ भी ज्ञान नहीं क्योंकि उर्दू भाषा में मुख्य रुप से ऐसी कोई पुस्तक न थी जिसमें प्रकट होने के लक्षण विस्तार से लिख हो अतः मैंने ये आवश्यक जाना कि इस प्रकार की एक पुस्तक संकलित कर दी जाये चूंकि मुझे भी बहुधा इन धर्मों के लेखकों से मिलने का सुअवसर प्राप्त हुआ है तथा अनेक विषयों पर तर्क वितर्क की भी अवसर मिला है। परन्तु मैने इन्हें सदा इसी बात पर लब देते देखा है कि जैसे भी हो सके कथनों , हदीसों तथा कुरान के अनुसार व्याख्या कर ली जाये और अपने उद्देश्य को जिस तरह भी हो सिद्ध कर दिया जाये। ये एक नियम है जो उन्हीं लोगो के लिये शोभायमान है।
तथापि मैने मात्र उल्लेखित आवश्यकता का आभास करते हुए ये पुस्तक संकलित कर दी और इसमें विश्वस्नीय हदीसों से लिये गये समस्त इमाम मेंहदी के प्रकट होने के लक्षणों को एकत्र कर दिया अब मात्र ये देखना है कि ये लोग किस-किस लक्षण की क्या क्या व्याख्या करते हैं तथा किस प्रकार करते हैं। दूसरे इस पुस्तक के पश्चात लगभग प्रत्येक मुसलमान को ये अधिकार प्राप्त होता है कि वह स्वंय भी मालूम करे कि इन उल्लेखित लक्षणों में से इन लोगों के निराधार दावों के समय कौन-कौन से लक्षण पूर्ण हुये उदाहरण हैतु कि सैय्यद हसनी ने कब निष्क्रमण किया , सुफ़ियानी का उपद्रव कब प्रकट हुआ , आकाश की चीख़ कम सुनी गयी , रुसियों और अंग्रेज़ी का युद्ध पूरब मध्य में कब हुआ , इन लोगों के आने का सुभाषीय ऐलान कब हुआ , सूर्य चलते चलते कब रुका , आदि – आदि।
अन्यथा इस पुस्तक से ये भी लाभ होगा कि ऐसे अज्ञानी और अधर्मी लोग जिन्हें धर्म से दूर का भी लगाव नहीं और फिर भी वह धार्मिक़ क्षेत्र में ख्याति प्राप्ति हैतु नान प्राकर की बेतुकी बातें करते रहते हैं। कभी भगवान के अस्तित्व से मुकरते हैं , कभी मुसलमानों के सर्व स्वीकार विश्वास अर्थात हज़रत मेहदी के अस्तित्व को नकारते हुए अपने विश्वास का प्रचार करते हैं तथा ये कहते हैं कि ये विश्वास यहूदियों का उत्पन्न किया हुआ है , इसलाम को इससे दूर का भी लगाव नहीं , न कोई मेहदी है और न कोई दज्जाल। मुझे विश्वास है कि अब उनका मुँह भी बंद हो जायेगा क्योंकि मैनें मुसलमानों की समस्त वर्गों की पुस्तकों से लिये गये लक्षणों को लिख दिया है इनमें ये लक्षण इस बात के साक्षी हैं कि यदि ओर आकर्षित क्यों किया गया है और मुसलमानों की पुस्तकों में इतनी अधिक सामग्री क्यों उपलब्ध है ? स्पष्ट है कि यदि इमाम मेंहदी का अस्तित्व न होता तो पैग़म्बर के सहाबी एगव इमामों को क्या आवश्यकता थी भगवान बचायें असत्य और मिथ्यारोपण की चेष्टा करते और प्रलय तक आने वाले मुसलमानों को पाप करने पर विवश करते परंतु चूंकि ये वास्तविक तथ्य है इसलिये इन महानुभावों ने रसूल के अनुयायियों तक इसे पहुँचाने में किसी प्रकार की कोताही न की वरन् इतनी सामग्री एकत्रित कर दी कि इमाम के प्रकट होने तक वह मिट नहीं सकती बल्कि हर स्तर पर सत्यता का स्तम्भ सिद्ध होगी और हर आस्तिक की आस्था में बढ़ोत्तरी का कारण बनेगी लक्षणों में ये है अधिकती से मुसलमान इमाम के अस्तित्व से मुकर जायेंगे अतः यदि आप विभिन्न क्षेत्रों से नकारने की बात सुनें तो आश्चर्य न करें क्रोध न प्रकट करें बल्कि प्रसन्नता का प्रदर्शन करें क्योंकि एक लक्षण और पूरा हुआ और स्पष्च है कि जितनी शीघ्र लक्षण पूर्ण हो जायेंगे उतनी ही शीघ्र इमाम के प्रकट होने की संभावना होगी तथा प्रकट होने के पश्चात अन्याय व अत्याचार से परिपूर्ण संसार सत्य और न्याय के धन से मालामाल हो जायेगी नर्क समान संसार बैकुन्ड का रुग धारेगा , भगवान का प्रण प्रत्चेक दशा में पूर्ण होकर रहेगा और झूठ दावा करने वाले इस ईश्वरीय प्रकाश को उत्कृष्ठ शिखर का प्रण है कि ईश्वरीय प्रण पूर्ण होकर रहेगा लोघ ईश्वरीय प्रकाश को अपनी फूकों से बुझाना चाहते हैं किन्तु भगवान इसके अतिरिक्त कुछ नहीं चाहता कि अपने प्रकाश को सफलता दे चाहै नास्तिक कितनी ही अप्रसन्नता व्यक्त करें ईश्वरीय धर्म समस्त मिथ्य धर्मों पर छा कर रहेगा। यद्यपि नास्तिकों को ये बुरा ही क्यों न लगे।
प्रकट होने के कुछ संकेतः-
हदीसों में इमाम प्रकट होने के समय को निश्चित करने वाले को झूठा एंव मिथ्यारोपी ठहराया गया है यही कारण है कि किसी भी व्यक्ति ने प्रकट होने के समय को निश्चित नहीं कियचा किन्तु कुछ महापुरुषों ने अपने विशेष ज्ञान के आधार पर प्रयास किया है तथा उन्होनें मात्र साकेंतिक रुप में कुछ बताया भी है। उन संकेतों का बोध करना चिन्तन तथा मनन कर्ताओं का कार्य है उदाहरणार्थ “ अल्लामा शेख ” मुहम्मद तूसी जो नाना प्रकार के ज्ञानों में दक्ष थे का कथन हैः-
दर दौर जुहल ज़हूरे मेंहदी
जूर्म दज्ल व जालिया अस्त
वास्तव में शनि काल में इमाम मेहदी का प्रकट होना कुकर्मियों के प्रतारण तथा प्रवंचन समान है।
दर आख़िरवाब अव्वल हमज़ा
चूँ नेक नज़र कुनी हमाअस्त
अंतिम “ वाब ” एंव प्रथम “ हमज़ा ” यही समस्त पुनीत दुष्टीकोण है।
पुस्तक “ मजमउल नूरैन ” में प्रकट होने के समय के सम्बन्ध में लिखा हैः-
दरसाले गज़्न मुल्क मुकद्दर गरदद
दरसलिंग गुर्सज़ेरोज़बर बरगरदद
ग़जन वर्ष में संसार मलीना होगा तथा गुरुस वर्ष में अति परिवर्तनशील होगा।
दरसाले ग़रा अगरबमानी ज़िन्दा
मुल्कव मुललो मिलल्तो दीं बरगरदद
गाज़ा वर्ष में यदि जीवित रह गए तो देश , राष्ट्र , दीन-धर्म सभी कुछ अस्त-व्यस्त देखोगे।
दर साले ग़ुर्फ ज़ेतूस आयद शख़्से
बरगरदद वाज़माँख़ुशतर गरदद
इन परिस्थितिोयं में ग़ुर्फ़ वर्ष में तूस से एक व्यक्ति आएगा जिसके आगमन से संसार सुखमय तथा प्रसन्न हो जाएगा।
शेख़ बहाई ने अपनी कशकोल में लिखा हैः
बीनी तु बक़ाये मुल्क मबरगश्ता
दर वक्ते ग़बतज़ेरो ज़बर बरगश्ता
मुझे दिख रहा है संसार का स्थायित्व छिन्न-भिन्न है तथा इस संकट युक्त युग में संसार में बड़ी उथल-पुथल है।
दरसाँ ग़लत अगरबमानी बीनी
मुल्क द मुलल द मज़हम व दीं बरगश्ता
लोग दूषित शिक्षा ग्रहण करते दिखाई देते हैं फलतः देश , राज्य , धर्म सम्प्रदाय सभी भ्रामक है।
आदि-आदि हज़ारों संकेत हिसाबों किताबों में लिखे हैं किन्तु चूंकि हमारे संकलन की नीति से परे है अतः हम उन्हें नहीं लिख रहे हैं।
प्रकट होने के समय तुरन्त इमाम के समक्ष उपस्थित होने वाले व्यक्तिः-
“ ग़ायतुल मुराम ” नामक पुस्तक में उल्लेख है कि अबूजाफ़र इब्ने जरीर तबरी ने “ मसनतदे-फ़ातेमा ” के संदर्भ से कहा कि अबुल हसन मुहम्मद इब्ने हारुन ने अनेक निरन्तर कथनकर्ताओं के संदर्भ से कहा कि अबूबसीर ने हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ से पूछा कि मेरी जान आप पर निछावर यह बतायें कि क्या हज़रत अली (अलै0) हज़रत क़ायम के साथियों के नामों की जानकारी रखते थे ? तो हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ ने कहा कि भगवान की सौगन्ध वह उनके नामों से परिचित थे तथा उनके पिता , उनके समुदाय एंव परिवार तथा उनके निवास स्थान का भी ज्ञान रखते थे और उनके स्थान को जानते थे और जो कुछ अली जानते थे वह हसन भी जानते थे , तदोपरान्त इमाम हुसैन को भी इन बातों का बोध था व तत्पश्चात अली इब्नुल हुसैन फिर मुहम्मद इब्ने अली एंव तदोपरान्त मैं स्वंय भी इन समस्त बातों का बोध रखता हूँ। तब अबु बसीर ने पूछा “ मौला क्या वह कहीं लिखे हुये हैं ? आपने कहा , हाँ , हमारी ह्रदय रुपी पुस्तक में जहाँ वह मिट नहीं सकते , तब अबू बसीर को उन व्यक्तियों के नामों की जानकारी प्राप्त करने की आग्रह पर इमाम ने शुक्रवार को नाम लिखवाये और ये कहा कि यह सब लोघ आकाशीय ध्वनि के सुनाई देने के तुरन्त बाद तत्काल मक्का में एकत्र होंगे तथा ये सब ही अत्यंत उपासक व सन्यासी लोग होंगे और भगवान ने उनके ह्रदय को वीरता एंव उत्साह प्रदान किया है तथा उनके अन्य गुणों का भी उल्लेख किया।
टिप्पणीः-
(अबु बसीर इमाम जाफ़र सादिक़ (अलै0) के प्रमुख सहाबियों (साथियों) में से है)
हम अपनी सक्षेप पुस्तक में नामों को पार्थक्य करते हुऐ मात्र उन नगरों के नाश लिख रहे हैं जहाँ के ये महापुरुष रहने वाले होंगे कुछ अन्य ख़ुतबों (व्याख्यानों) में अन्य नाम तथा स्थान उपलब्ध हैं किन्तु उन नगरों के नाम लगभग समस्त खुतबों में एक ही हैं अतः उनका उल्लेख करना उचित जाना जिज्ञासायुक्त व्यक्ति उनके नाम संदर्भित पुस्तक जैसे “ बशारतुल इसलाम ” या “ ग़यातुल मोराम ” में देख सकते हैं। हमने सुगमता हैतु नगरों के नाम वर्णमाला के क्रमानुसार लिख दिये तथा जिन-जिन नगरों के नाम लिखे हैं उनके जितने व्यक्ति हैं संदर्भित पुस्तकों में उनके नाम पिता के नाम सहित विद्यमान हैं देखे जा सकते हैं।
वर्णमाला क्रमाँक नाम नगर संख्या
(1) (2) (3) (4)
अलिफ़ 1 असफ़हान 1
,, 2 अहवाज़ 2
,, 3 अस्तख़र 2
,, 4 आतंकिया 2
,, 5 असवान 1
,, 6 एला 2
,, 7 आरमीना 2
,, 8 अबजज़ायेर 2 ए 14
बे 9 बाग़ा 1
बे 10 बसरा 3
,, 11 बहरैन 5
,, 12 बेरुत 2
,, 13 बोबेसंज 4
,, 14 बालबक 1
,, 15 बदाअ 1
,, 16 बुलुरिक बाबलूरा 1
,, 17 बलख़ 1
“ ते ” 18 तिरमिज़ 1
,, 19 तराफे़या 1
,, 20 तिरमज़ा 1
“ है ” 21 हलब 4
,, 22 हैरान 2
,, 23 हाएरुज़ान 3
,, 24 हैवान 1
,, 25 हार 1
,, 26 हलवान 2
,, 27 हिल्ला 2
,, 28 हुम्स 1 ए 6
“ ख़े ” 29 ख़ेलात 1
,, 30 ख़त 1
,, 31 ख़ैबर 1
“ दाल ” 32 दमिश्क़ 3
,, 33 दैलम 4
,, 34 दज़ीलया दनील 1 ए 4
“ रे ” 35 “ रे ” (तेहरान) 7
,, 36 रुक़ा 3
,, 37 रोबा 1
,, 38 रिंदा 1
,, 39 रोबात 1
“ सीन ” 40 सेजिस्तान 3
,, 41 सलीमा 5
,, 42 संजार 4
,, 43 सिंध (पश्चिमी पाक) 3
,, 44 समसात 1
,, 45 सारान द्वीप 4
,, 46 समरंकद 3
,, 47 सामरा 2
,, 48 समाबा 1
,, 49 सरबीज 1
,, 50 सलात 1 ए 36
“ शीन ” 51 शाम 2
,, 52 शीराज़ 1 ए 3
“ साद ” 53 सनाये 2
,, 54 साने आन 2
“ तो ” 55 ताज़ीनदुरशर्क 1
,, 56 तूस 1
,, 57 तालेक़ान 24
,, 58 तबरिस्तान 7
,, 59 तबरिया 7
,, 60 तराबलिस 1
“ ऐन ” 61 अकबरा 1
,, 62 अदन 1
“ फे ” 63 फ़िलिस्तीन 1
,, 64 फ़रगाना 1 ए 2
“ क़ाफ़ ” 65 कंधार 1
,, 66 क़रयात 1
,, 67 कुम 18
,, 68 क़सात 4
,, 69 क़िरुवान 2
,, 70 क़ज़ीवन 2
,, 71 क़ाली का 1
,, 72 क़लिस 1
,, 73 क़ुबा 1
,, 74 क़ादिस्या 1
“ कफ़ ” 75 कृमान 3
,, 76 कोशिया 1
,, 77 कूफ़ा 14
,, 78 करबला 3
,, 79 कोरिया 22
“ मीम ” 80 मक्का 4
,, 81 मदीना 2
,, 82 मरदूद 2
,, 83 मरो 12
,, 84 मूसल 1
,, 85 मूल्यान (मुल्तान) 1
,, 86 मदायन 8
,, 87 मबदानिया 1
,, 88 मोक़ान 1
,, 89 मऊद 8 ए 40
“ नून ” 90 निशापुर 8
,, 91 नसीबैन 1
,, 92 नवी 1
,, 93 नील 1
“ वाव ” 94 वादियुल कुरा 1
,, 95 वास्ता 1
“ है ” 96 हारिब एला सरदानियाँ 2
,, 97 हारिब मिन बलख़ 1
,, 98 हैरात 12
,, 99 हमदान 4
“ ये ” 100 येरम 1
,, 101 यमन 14
,, 102 असहाबे कहफ़ 7
,, 103 रुम में भागे मुसलमान 11
टिप्पणीः-
अंतकिया-
वास्तव में यह लोग किसी अन्य स्थान के हैं। एक मालिक दूसरा चाकर , उस समय यात्रा करते अंतकिया पहुँचेंगे कि आवाज़ आ जाएगी।
सरानद्वीपः-
वास्तव में यह ईरानी व्यवपारी है जो व्यापार हैतु यहाँ आये हुए होंगे।
क़रयातः-
या तो यह किसी स्थान का नाम है अथवा इससे तात्पर्य कंधार और मशहद के मध्य देहात है।
क़ालिकाः-
इस से कुरदिस्तान का बोध हो जो ईरान एराक़ का मध्य सरहदी क्षेत्र है क्योंकि अन्य स्थानों पर व्याख्या उपलब्ध है या सम्भवतः किसी स्थान का नाम है।
मूलियानः-
एक स्थान पर हदीस में मूलियात है , दूसरे स्थान पर मुल्तान है किन्तु अल्लमा हुसैन आलिम दारऊल मजालिसे सनीया ने मुलतान लिखा है और यही ठीक है।
हारिम एला सरदिनियाँ-
वास्तव में इसलामी नगर के लोग है जो भाग्यवश अपने देश को छो़ड़कर भाग जायेंगे और उस समय सरदानिया में होंगे।
हारिब में भागे हुये मुसलमानः-
ये ग्यारह व्यक्ति जो अपने मुसलमान शासक के अन्याय व अत्याचार से तंग आकर पूरब की ओर भाग गये होंगे किंतु उस समय रुम के किसी क्षेत्र में थे कि आवाज़ आ जायेगी और वह तुरंत सहायतार्थ उपस्थित हो जायेंगे।
इसके अतिरिक्त कथनों से ज्ञात होता है कि छःअब्दाल भी आपके साथ होंगे एंव कुय़ मवालियों के नाम भी आते हैं संभवतः इससे अभिप्राय मैलाई वर्ग के लोग हैं। और दूसरे स्थान पर ये उल्लेख है कि मक्का में आपके पास कुछ स्त्रियाँ भी एकत्र हो जायेंगी वास्तव में पूर्व संख्या उन में आपकी सेना बढ़कर 10,000 व्यक्तियों की हो जायेगी जिनमें विभिन्न स्थानों के लोग होंगे इनमें भारत के भी दो व्यक्तियों के नाम हैं एक दक्षिणी तथा दूसरा उत्तरी भारत का इनमें बहुधा के नाम दूसरी अनेकों पुस्तकों में हैं। अनुसंधान से ऐसे नामों की संख्या 1000 से अधिक हो सकती है। किन्तु हमारी संक्षेप पुस्तक इसकी सहनशीलता नहीं हो सकती प्रत्येक दशा में ये मानना पड़ता है कि हमारे इमामों ने इस विषय में कोई कसर उठा नहीं रखी। हर बात की विवेचना करके नकारने वालों का मुंह बंद कर दिया तथा ये समस्त सामग्री पुस्तकों में उपलब्ध है केवल हमारे अध्ययन की कमी है यदि आवश्यक समझा गया व ईश्वर ने चाहा तो भविष्य में इन विवेचनाओं को भी प्रकाशित कर दिया जायेगा।
वर्तमान काल में इमाम मेहदी से मिलनः-
आपने बार-बार देखा होगा कि कभी कभी ऋतु में गहरे काले बादल सूर्य को छिपा लेते हैं और देखने में संसार की दृष्टि में सूर्य लुप्त हो जाता है पर क्या वास्तव में सूर्य का अस्तित्व समाप्त हो जाता है कदापि नहीं बल्कि ऐसी दशा में बृद्धिमानों का निर्णय है कि किसी वस्तु का वाह्य कारणों से दृष्टिगोचर न होना उसके न होने का प्रमाण नहीं बन सकता ठीक उसी प्रकार इमाम का अस्तित्व भी इस समय लुप्त है। सृष्ठि पर अत्याचार अन्याय के अंधकार छा रहे हैं मनुष्य से संयम सदाचार दूर हो चुका है। किन्तु पिछले उदाहरणों के आधार पर इमाम का प्रत्यक्ष में दिखाई न देना नकारने वाले नीहं वरन् वह तो ये आभास करते हैं कि जिस प्रकार सूर्य घने बादलों के पीछे प्रकाशवान होता है और अत्यंत अंधकार के कारण भी संसार उससे लाभान्वित होता रहता है पूर्ण रुप से सूर्य से संबंध विच्छेद होने पर संसार की व्यवस्था अस्त-व्यस्त हो जाये और संसार जीवन मृत्यु की स्थिति से निकट हो जाये ठीक उसी प्रकार इमाम का अस्तित्व यद्यपि निगाहों से ओझल है किन्तु उनके अस्तित्व से संसार अवश्य ही लाभान्वित हो रहा है और सबसे बड़ा लाभ ये है कि यदि ऐसे अस्तित्व से धरती ख़ाली हो जाये तो फिर ये भूमंडल आँख झपकाते में नष्ट हो जाये और दैवीय उद्देश्य अपूर्ण रह जाये मेरे इस कथन के अनेकों प्रमाण हैं किन्तु ये संक्षेप पुस्तक इसकी सहनशीलता नहीं हो सकती।
मुझे विश्वास है कि इस उल्लेख से यह तथ्य स्पष्ट हो गचा कि इमाम का अस्तित्व तो विद्यमान हो किन्तु हम स्वंय ही खोये हुऐ हैं यदि आज हम स्वंय में वह क्षमता उत्पन्न कर लें और स्वंय पवित्रताबद्ध होकर सदाचारिता व शुद्ध ह्रदय से इमाम द्वारा बताये नियम का पालन करें तो कोई कारण नहीं कि हमको इमाम मेंहदी के दर्शन इस जीवन में न प्राप्त हो जायें हाँ ये सम्भव है कि मिलने के समय ये आभास न हो कि हम इमाम से मिल रहे हैं और बाद में पता चले। अतः इस संबंध में अनेको वृत्तात हज़रत का मिलन हो चुका है जिज्ञासायुक्त हमारी संदर्भित पुस्तकों में देख सकते हैं उर्दू भाषा में भी पुस्तकों में ऐसे उल्लेख हैं। इस विषय में मस्जिदे कुफ़ा या बृहस्पति की रात में मस्जिदे सहला में विनर्म ह्रदय से इसी निर्धारित उद्देश्य से अर्चना करे तो मिलन आवश्यक है। जो व्यक्ति नित्य प्रातः दुआये अहद का निरंतरता से जाप करे उसके पूरे जीवन काल में मिलन अनिवार्य है यह दुआ ईरान से मुद्रित पुस्तक मफ़तिहुल जिनान में उपलब्ध है।
अमाले आशूरा की पाबंदी करने वाले से भी जीवन में दर्शन होना आवश्यक है इसी प्रकार अन्य दुआऐ भी दूसरी पुस्तकों में उपलब्ध हैं और घटनायें इस बात का प्रमाण देती हैं कि इन कार्यों के निरन्तर पूरा करने से अनेकानेक प्रकार से इमाम के दर्शन हुये हैं। और किस-किस अवसर पर किस प्रकार से इमाम ने सहायता की है पुस्तकें इन विषयों से परिपूर्ण हैं। हाल ही में मौलाना सैय्यद मुहम्मद साहब मुजतिहिद अमरोहवी ने “ मुलाक़ाते इमाम ” के शीर्षक की एक पुस्तक प्रस्तुत की है उसमें इस प्रकार के वृत्ताँत पढे़ जा सकते हैं।
1. बग़दाद का पूर्णतया विनाश हो जाना
2. बसरे का डूब जाना
3. अरबों का निरंकुश हो जाना
4. मस्जिद बरसा काज़मैन व बग़दाद के मध्य का नष्ट हो जाना
5. इसलामी देशों का विस्तार व बाज़ारों का उसके निकट होना
6. समस्त इसलामी देशों में लोहै की पटरी की बिछ जाना।
7. नजफ़ के स्थान पर कुम नगर ईरान का ज्ञान केन्द्र होना तथा वहाँ से धार्मिक नियमों का विस्तार किया जाना।
8. आज़रबाइजान का युद्ध के कारण नष्ट हो जाना।
9. स्त्रियों का अत्यंत निर्लज्ज हो जाना।
10. समस्त संसार में जनतंत्र स्थापित होना।
11. अधिकता से व्यभिचारित संतान उत्पन्न होना।
12. ब्याज की सामान्य प्रथा होना।
13. अच्छे वंशों में व्याभिचारणीय स्त्रियों का जन्म लेना।
14. निम्न श्रेणी के लोगों का बड़े़-बड़े मकान बनवाना।
15. सज्जनों व आस्तिकों का मृत्यु की इच्छा व्यक्त करना।
16. बालकों एंव मूर्खों का मिम्बरे रसूल पर जाना।
17. ज्ञानियों की सांसरिक धन की ओर अभिरुचि।
18. मात्र जीविका उपार्जन हैतु विद्या अध्ययन करना।
19. लोभवश अपने धर्म व वर्ग को अधिकता से छोड़ना।
20. मिलने के समय सलाम के स्थान पर गालियों से संबोधन।
21. इसलाम धर्म का जर्जर व दुर्बल हो जाना।
22. पशुओं की भांति सामान्य स्थान पर स्त्रियों से संभोग करना।
23. स्त्रियों का बाल ऊँट की कुहान तुल्य होना।
24. क्रमशः पूरब पश्चिम व अरब द्वीप में ग्रहण लगना या धरती का धंस जाना।
25. स्त्रियों का अधिक पैदा होना।
26. गुदा मैथून व मदिरा का आम रिवाज होना।
27. भूकंपों का अधिकता से आना स्त्रियों का समितियाँ एंव क्लब बनाना और धनोपार्जन में पुरुषों के साथ सम्मिलित होना।
28. तीव्रगति के वाहनों का अविष्कार होना।
29. वाहनों द्वारा अधिकता से मृत्यु की घटनायें होना।
30. वस्त्रों का छोटो होना।
31. स्त्रियों का पुरुषों एंव पुरुषों का स्त्रियों का रुप धारण करना।
32. पुरुषों का पुरुषों से और स्त्रियों का स्त्रियों से साथ विवाह करना।
33. नजफ़ और कूफ़े मदीने में जनसंख्या का अधिक विस्तार।
34. पर्दे का समाप्तर हो जाना।
35. सावा नदी (कुम) में पानी का आ जाना।
36. मकर नक्षत्र के निकट एक पुच्छल तारे का उदित होना।
37. विश्व युद्ध का प्रचालन जिसमें अत्याधिक मृत्यु हो।
38. कुरान की और मस्जिदों की स्वर्णकारी होना।
39. पूरब दिशा में ऐसी भयानक आग दृष्टिगोचर होना जो तीन अथवा सात दिन तक निरंतर प्रजवलित रहे और लोगों के डर व भय का कारण हो जाये।
40. कूफ़े में नाना प्रकार के झंडों के एकत्र होने के फलस्वरुप उपद्रव का आरम्भ होना।
41. ईरान से सामराज्यवाद का समाप्त होना।
42. अरब देश में उपद्रव व आतंक का इस प्रकार आरम्भ कि अरब का कोई घर न सुरक्षित रहे वरन् समस्त इस्लामिक संसार उसकी चपेट में आ जाये।
43. पूर्ण संसार में नास्तिकता का विस्तार होना एंव मुसलमानों को शत्रुओं की सभ्यता व संसकृति का अनुसरण करना।
44. आकस्मिक मृत्यु का अधिकता से होना।
45. गाने बजाने के उपकरणों का इतना अधिक अविष्कार कि कोई स्थान सुरक्षित न हो।
46. इमाम मेहदी के अस्तित्व से नकारने वालों का प्रकट होना।
47. सूर्य के निकट एक आकार का उत्पन्न होना जिसकी ध्वनि पूरे संसार में पहुँच सके।
48. मनुष्य का चंद्रमा तक पहुँच जाना।
49. सुफ़ियानी का निष्क्रमण तथा उसके द्वारा अन्याय।
50. सैय्यद हसनी का ईरान से निष्क्रमण ओर इमाम मेंहदी तक पहुँचना और कृमान की राह से मुल्तान आकर उस पर विजय प्राप्त करना।
51. साठ झूठों का नबी होने का दावा करना।
52. हज़रत ईसा का आकाश से उतरना।
53. संसार के विभिन्न क्षेत्रों में अकाल व ताउन का फैलना।
54. नफ़स इब्ने ज़किया का काबे में वध किया जाना।
55. सूर्य का एक दिन के लिये पश्चिम से उदय होना।
56. रुसी तुर्कों का अरब में और अंग्रेजों का फ़िलिस्तीन में एकत्र होकर परस्पर युद्ध करना।
57. चीनियों का अरब में प्रवेश करना और उसे नष्ट-भ्रष्ट करना।
58. अनेकों नगरों का विभिन्न विपत्तियों में लिप्त होकर नष्ट हो जाना।
59. आकाश की चीख़।
60. दज्जाल का निष्क्रमण एंव संसार में धुँआ अधिकता से होना।
61. संसार में आग एंव धुआँ से होना।
62. बेसमय वर्षा का होना।
63. गर्मी का अधिक होना।
64. अदन की गहराई से तीर्व अग्नि का उदय।
65. कुछ मनुष्य जाति का रुप भ्रष्ट हो जाना।
66. मकर में कुछ सितारों का अद्भुत युग्म।
67. मिस्त्र देश के अमीर की हत्या।
68. चौबीस दिन निरन्तर जलवृष्टि होना।
69. समस्त सृष्टि में अधीरता विचलित व नष्ट भ्रष्ट नियुक्ति हो जाना आदि-आदि।
संसार का परिणाम तथा इमाम का प्रकट होनाः-
फ़िलिस्तीन (पूर्व मध्य) से दज्जाल का निष्क्रमण व मक्का से दाब्बातुल अर्ज का निष्क्रमण ख़तीबे मिमबरे सलूनी हज़रत अली (अलै0) का प्रसिद्ध वक्तव्य (ख़ुतबा)-
मुहम्मद इब्ने इबराहीम ने “ कमालहद्दीन ” नामक पुस्तक में विश्वसनीय प्रमाणों के संदर्भ से बताया कि इब्ने सबरा ने कहा कि हज़रत अली अलै0 ने इस प्रकार ख़ुतबा दिया कि सर्वप्रथम आपने ईश्वर की प्रशंसा की़ , फिर रसूल तथा उनके परिवारजनों पर दरुद भेजा , फिर कहा कि मुझसे जो पुछना चाहते हो पूछ लो , यह सुनकर सासा इब्ने सौहान उठ ख़ड़े हुए ओर कहा कि “ बताइये दज्जाल कब निष्क्रमण करेगा , आपने कहा बैठ जाओ , वह बैठ गए। तब आपने कहा “ भगवान ने तेरी बात सुन ली तथा जो तू चाहता था भगवान को उसका ज्ञान है। ईश्वर की सौगन्ध उत्तरदाई को प्रश्नकर्ता से अधिक जानकारी नहीं किन्तु इसके कुछ लक्षण हैं जिनमें से प्रत्येक लक्षण दूसरे के पश्चात् क्रमशः अटल विश्वास के साथ विद्यमान होगा। यदि तुम चाहो , तो मैं उन लक्षणों की सूचना दूँ ? उन्होनें कहा की अवश्य बताईये , तब हज़रत अली है कहा कि ” याद रख इसके प्रकट होने का लक्षण यह है कि लोग नमाज़ों को मुर्दा कर देंगे (बेपरवा होंगे) , धरोहर नष्ट किये जायेंगे , झूठ को उचित जाना जाएगा , मुस्लमान ब्याज खाने लगे , घूँस लेना सामान्य हो जाए , घरों की नींव बहुत दृढ़ रखी जाए (ऊँची-ऊँची इमारतें बनाई जायें) संसार के हाथों धर्म का सोदा किया जाए , तुच्छ एंव नीज वर्ग के बुद्धिमान व्यक्ति शासन करें वरन् स्वंय लोघ उन्हें अपने ऊपर नियुक्त कर लें (जनतंत्र एंव वोट द्वारा) , स्त्रीयों से पुरुष अनेक मामलों में राय लेंगे , दया समाप्त तथा मनोकामना का अनुकरण सामान्य हो जाए , रक्तपात हत्या व लूट को हल्का समझा जाएगा , ज्ञान दुर्बल तथा अन्याय सम्मानजनक हो जाएगा।
अधिकारी अवैज्ञाकारी , मन्त्री अत्याचारी होंगे , ज्ञानी कपटी , सूफ़ी व क़ारी अवैज्ञाकारी , झूठी साक्ष्य सामान्य हो जाए। दुराचार , कुकर्म आरोपित करना पाप , उदन्डता की वार्ता सामान्य होगी। कुरआन को आभूषण एंव सुनहरे तारों से संवारा जाएगा। मस्जिदों मे चित्रण एंव बेल बूटे बनाये जायेंगे तता उनकी बुरजियाँ अधिक ऊँची की जायेगी , गुण्डों , आतंकवादियों का आदर होगा , पंक्तियाँ अत्याधिक होगी( नमाज़ियों की अथवा सामान्य जनसंख्या की) किन्तु परस्पर ह्रदय में मतभेद होगा। प्रण तोड़े जायेंगे ऐसे समय में जब प्राण का समय निकट आ जाएगा।
संसार के लोभ लालच वश स्त्रीयाँ अपने पति के काम काज में सम्मिलित होगी। नास्तिकों एंव विधर्मियों के स्वर उच्चो होंगे तथा उनके वचन का आदर होगा। (नास्तिक , विधर्मी अर्थात् साभ्यवादी और विधर्मी जो मुसलमान होकर धर्म पर आपत्ति करें) उनकी बातें बड़े चाव से सुनी जायेंगी , जाति का पथप्रदर्शक व नेता उसका सबसे निम्न कोटि का व्यक्ति होगा , नास्तिक व अधर्मी से लोग उसके आतंक के फलस्वरुप भयभीत होंगे , झूठों की पुष्टि अपयोजक को विश्वसनीय समझा जाएगा , गाने बजाने के उपकरणों का अधिक्य होगा , इस समुदाय (उम्मत) के अंतिम काल के लोग बीते हुऐ व्यक्तियों को धिक्कारेंगे , स्त्रियाँ जीन पर पदासीन होंगी ( वाहन स्वंय चलायेगी) , स्त्रीयाँ पुरुषों के समान तथा पुरुष स्त्रियों का रुप धार लेंगे।
सत्य मामलों में साक्षी बिना बुलाये साक्ष्य देगा तथा दूसरा बिना ज्ञान अथवा घटना की जानकारी प्राप्त किये गवाही देगा , फ़ेक़ह (धर्मशस्त्र) का ज्ञान धर्म से हट कर प्राप्त किया जाएगा , लोग सांसारिक कार्यों को प्रलक संबंधी कार्यों पर वरीयता देंगे तथा भेड़ियों पर वरीयता देंगे तथा भेडियों के ह्रदय पर बकरियों के आवरण चढ़ाये होंगे , कप्टाचार ही कप्टाचार होगा , प्रत्यक्ष कुछ और तथा प्रोक्ष कुछ और होगा , उन व्यक्तियों के ह्रदय मृतक से अधिक दुर्गन्धात्मक होंगे और मुसब्बर से अधिक कड़वे बस उस समय शीघ्रता ही शीघ्रता है , रुकने का उस समय उपर्युक्त स्थान बैतुल मुकद्दस होगा , लोगों पर एक समय वह आयेगा जब इच्छा व्यक्त करेंगे कि यदि वह बैतुल मुक्द्दस के निवासी होते।
इस स्थान पर असबग इब्ने नबाता खड़े हो गए और पूछा “ या सायेद इब्ने सैद ” (शिकार का पुत्र शिकारी) , वह व्यक्ति दुष्टि है जो उसकी पुष्टि करे तथा वह सज्जन है जो उसके कथनों को झुठलाये। यह एक बस्ती से निष्क्रमण करेगा। जिसका नाम असबहान होगा। ऐसे क्षेत्र से जिसका नाम यहूदिया (इसराइल-फ़िलिस्तीन) होगा दज्जाल की दाँहनी आँख फूली तथा दूसरी उसकी ललाट पर इस प्रकार चमकती होगी कि जैसे प्रातः का तारा किन्तु उस पर र्कत युक्त लोथड़ा होगा , उसकी दोनों आँखों के मध्य नास्तिक लिखा होगा जिसको हर लिखा पढ़ा मूर्ख व ज्ञानी भी पढ़ सकेगा। वह समुद्रों को तैर कर पार कर लेगा। सूर्य उसके साथ-साथ चलेगा उसके समक्ष धूँऐ का बादल होगा और पीछे श्वेत रंग का पर्वत जिसे देखकर लोग यह विचार करेंगे कि वह खाना है। दज्जाल उस समय निष्क्रमण करेगा जब तीव्र अकाल का समय होगा। उसका वाहन एक लाल रंग का गदहा होगा , जिसका एक पघ एक मील का होगाष धरती की नीजाई-ऊँचाई उसके पग के नीये सिमटती चली जाएगी वह जिस जल के भाग को पार करेगा वह जल सर्वदा के लिए शुष्क हो जाएगा फिर वह तीव्र ध्वनि के साथ पुकारेगा जिसे समस्त पूर्व पश्चिम के मनुष्य व शैतानन सुनेंगे। वह कहैगा कि “ ऐ मेरे मित्रों मैं ही वह हूँ जिसने तुम्हे जन्म दिया है और तुम्हे सुदृढ़ बनाया एंव मात्रा निर्धारित कि मैं ही तुम्हारा विश्ंभर हूँ ”
ये भगवान का शत्रु बोलेगा। वह काना होगा और बाज़ारों में चलती होगा। ऐसी स्थिति कि तुम्हारा पालनहार न काना है और न चलता है और न ही उसका पतन होता है भगवान अत्यन्त ही उच्च व श्रेष्ठ है जान लो कि इसके बहुधा अनुयायी व्याभिचारियों की संतान होंगे तथधा वह लोग उस युग में हरा रेशमी वस्त्र पहने होंगे। भगवान शाम देश में अक़बा के स्थान पर उसका वध करेगा। अक़बा जिसका नाम अक़बतुल उफ़ीफ़ है , में उसकी हत्या जुमे के दिन तीसरे पहर दिन बीतने पर होगी उस व्यक्ति के द्वारा जिसके पीछे मसीह ईसा इब्ने मरियम नमाज़ पढ़ेंगे (हज़रत इमाम मेंहदी अलै) इसके पश्चात अतयन्त अद्भुत घटनायें होंगी।
सासा का कथन है कि हमने पूछा “ ऐ अमीरुलमोमनीन वह बात क्या होगी ” तो आपने बताया कि “ सफ़ाव मरवा ” की पहाड़ियों के मध्य दाब्तुल अर्ज का निष्क्रमण होगा जिसके पास सुलेमान पुत्र दाऊद की अँगूठी और हज़रत मूसा छड़ी होगी। वह उस अंगूठी को हर आस्तिक के मुखड़े पर रख देगा तो चिन्ह बह जाएगा , वह वास्तव में नास्तिक है (दाब्तुल-अर्ज़ आस्तिक व नास्तिक का मानक (मेयार) होगा) यहाँ तक कि आस्तिक कहैगा कि “ खेद है तुझ पर ऐ नास्तिक ” और नास्तिक कहैगा कि “ बधाई हो तुछको ऐ आस्तिक यदि मैं भी तेरे जैसा होता कि सफल हो जाता ”
फ़िर दाब्तुल अर्ज़ सर को उठायेगा तो ईश्वर की महिमा से पूर्व तथा पश्चिम की प्रत्येक वस्तु को देखेगा किन्तु यह घटना पश्चिम से सूर्य उदय के पश्चात होगी। उस समय पश्चाताप का समय समाप्त हो चुका होगा न किसी का पश्चाताप स्वीकार होगा और न कोई कार्य लाभदायक होगा उसके पश्चात आपने इस आयत की तेलावत की “ वला इनफ़ेह नफ़सन ” पुनः कहा कि इसके उपरान्त जो होगा , वह मुझसे मत पूछो , इसलिए कि मेरे मित्र रसूल अल्लाह से मेरा प्रण है कि , मैं इसकी सूचना अपने परिवारजनों के अतिरिक्त किसी को दूँ। इस कथन का कथनकर्ता तुरान इब्ने सबरा कहता है कि मै ने सासा इब्ने सौहान से पूछा कि अमीरुब मोमनीन का इस से क्या अभिप्राय था तो सासा ने उत्तर दिया कि “ ऐ इब्ने सबरा ” वह वयक्ति जिसके पीछे हज़रत ईसा नमाज़ पढ़ेगें अली के वंशज का नवाँ है और वास्तव में वही पश्चिम से सूर्य उदित करने वालो होगा जो प्रत्यक्ष रुकन व मुक़ाम के निकट भूमि को पवित्र करेगा और न्याय की तराजू को सुदृढ़ करेगा , फिर कोई व्यक्ति किसी पर अन्याय नहीं कर सकेगा ” ।
टिप्पणीः-
इस अदुभुत ख़ुतबे में चिन्तनकर्ताओं के लिए अद्भुत मर्म लुप्त है आचरण की गिरावट का चित्रण , फिर दज्जल की वास्तविकता एंव दाब्तुल अर्ज़ का परिचय अत्याधिक विचारनीय है। पुस्तकों का अध्ययन करें फिर ज्ञानियों से पूछें तब यह भैद स्पष्ट होगे। नीतिवश विवेचना उचिन नहीं समझता क्योंकि नौजवान व अज्ञानी इस व्याख्या को सहन नहीं कर सकते। मैंने ख़ुतबे का शाब्दिक अनुवाद प्रस्तुत किया है इसका मूल उल्लेखित पुस्तक में देखा जा सकता है तथा पुस्तक बशारतुल इसलाम मुद्रित बग़दाद में भी उपलब्ध है जो अतितुच्छ (मेरे पास) देखी जा सकती है (भविष्य में बैतुल मुक़द्दस की स्थिति अत्यंत ध्यान देने योग्य है।
क़मर ज़ैदी।
(कथन हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ पुस्तक मजलिसे तूसी मूल अनुवाद)
विभिन्न् विश्वसनीय संदर्भों से सुदैर सबरफ़ी के नाम से मजलिसे तूसी में उल्लेख है कि वह कहते हैं कि “ मैं हज़रत जाफ़रे सादिक के सम्मुख उपस्थित था उस समय आपके समीप कूफे वासियों का एक समूह उपस्थित था आपने उलकी ओर संकेत करके कहा कि “ हज करलो इसके पूर्व कि तुम हज न कर सको , इससे पूर्व हज के कर्तव्य को पूर्ण कर लो नहरों और शाद्वल के मध्य हैं वह गिरा दी जाए , हज कर लो इसके पूर्व के ज़ोर में लगा वृक्ष काट दिया जाए , जिस से मरयम ने ताज़ा खजूर प्राप्त किया था , इस के बाद तुम्हें हज से रोक दिया जाएगा विवश होकर हज कर सकोगे। यह उस समय होगा जब फल दोषपूर्ण उत्पन्न होंगे आतंक व संकट सामान्य हो जाएगा। समस्त संसार वस्तुओं की मँहगाई में पड़ा होगा। समराटों का अत्याचार नियुक्त होगा तथा उस समय तुम में महामारी , विपत्ती भुकमरी के साथ-साथ अत्याचार , अन्याय प्रकट होगा। उस समय समस्त दिशाओं से तुम्हें उपद्रव घेर लेंगे , मुझे खेद है तुम पर ईराक़ निवासियों , उस समय हैतु जब तुम्हारी ओर ख़ुरासान से झन्डे चलेंगे और खेद है कि रै वाले (तेहरान) पर तुर्कों की ओर से और खेद है शत की ओर से ” ।
सुदैर ने पूछा मौला शत क्या है तो आपने बताया कि वह एक जाति है जिसके कान छोटे तथा वस्त्र लोहै का है इनकी भाषा शैतानों समान है , इनकी आँखे छोटी और दाढ़ी के बाल कम होंगे , मैं इनके आतंक से भगवान की शरण चाहता हूँ , ईश्वर इनके द्वारा धर्म की विजय और सहायता का प्रबन्ध करेगा , क्योंकि यह हमारे इमाम मेहदी के प्रकट होने का कारण होंगे।
टिप्पणीः-
इस कथन का एक एक शब्द विचारनीय है मुख्यता इस युग में जबकि सामान्य अरब पर उपद्रव विपदाओं के बादल मड़ला रहें हैं। यहाँ साँकेतिक रुप से ईरानियों , ईराक़ियों तथा फारस की ख़ाडी वालों की दुर्दशा दर्शाई गयी है। इस कथन अन्य कथनों से विश्वास होता है कि तुर्क अर्थात रुसी ख़ुरासान से आयेंगे और तेहरान को नष्ट कर देंगे। वास्तव में रै वर्तमान तेहरान ही का क्षेत्र है तत्पश्चात इन्हीं के द्वारा ईराक़ वालों का दमन होगा।
1. शासकों के अन्याय के अतिरिक्त समस्त संसार में मँहगाई विशेष रुप से विचारनीय है।
2. शत शब्द से जाति का अभिप्राय है किन्तु मेरे निकट इस जाति का परिचय मुख की आकृति जो प्रस्तुत किया है , जो फ़ारस की ख़ाडी से गुज़रेगी और सम्भवतः यह चीनियों के ईराक़ में प्रवेश करने की ओर संकेत है। अन्य कथनों में व्याख्या उपलब्ध है।
3. शाद्रल भूमि तथा नहरों के मध्य मस्जिद से तात्पर्य मस्जिद बरासा है जो बग़दाद के निकट है।
4. हज पर प्रतिबन्ध एक अद्भुत लक्षण है किन्तु शब्द वरजानिया बरतानिया कह दिया और कुछ कोई अन्य जाति श्रीमान जौहरी जो मरे ज्ञानी सहायक है उनका विचार ईराक़ के ज्ञानियों से तर्क-वितर्क पश्चात् यह है कि मूल लेख सम्भवतः बदल गया है लेख इस प्रकार है “ कब्ल अन यमग़ोउल बरजानिया ” इसके पूर्व कि थल अपनी ओर से तुमकों हज करने से रोक दे अर्थात हज चुँकि इस युग में यह स्थिति प्रत्यक्ष है नियम है कि किसी भी समूह से सम्बोधन करके भविष्य की सूचनायें उपलब्ध कराते रहे हैं।
ज्योतिषशास्त्र और संकलनकर्ता का विश्वासः-
मेरा न ज्योतिष विद्या के निर्देशों पर विश्वास है , और न मैं उसका स्वीकारकर्ता एंव आबद्ध हूँष मैं ज्योतिषियों को भविष्य का जानकार नहीं समझता और न मैं ज्योतिषियों रम्मालों के कथनों को सत्य समझता हूँ परन्तु यह मेरा विश्वास है कि ईश्वर किसी के श्रम तथा प्रयासों को नष्ट नहीं करता। अतः इन ज्ञानों में प्रयासरत व्यक्ति भी खान (नामुराद) नहीं होते बल्कि इस ज्ञान द्वारा उनकी अभिवयक्तयाँ (इनकेशाफ़त) बहुधा ठीक सिद्ध होती है। तथा आज भी संसार की बड़ी संख्या उनके निर्देशों को सत्य मानती है एंव उनका पालन करती है अस्तु उचित जाना कि कुछे ऐसे व्यक्तियों की अभिव्यक्तियाँ भी सम्मिलित कर दूं जिनका मैं अध्ययन कर चुका हूँ ताकि यह अध्ययनकर्ताओं की अभिरुचि का कारण बनें तथा इस से मेरा यह भी उद्देश्य है कि अध्यनकर्ता स्वंय चिंतन करें कि इस ज्ञान के अन्य धर्म के विशेषज्ञयों ने आज जिन अद्भुत घटनाओं की अभिव्यक्तता की है , उन्हें हमारे पैग़म्बर और इमामों ने चौदह सौ वर्ष पूर्व बता दिया था क्योकिं उन महापुरुषों के अनुसंधान से पैग़म्बर की हदीसों तथा इमाम के कथनों की पुष्टि हो रही थी अतः अनका उल्लेख करना उचित समझा क्योंकि मेरे लिये श्रद्धा में वृद्धि का यह भी एक माध्यम है तथा इसलाम के मूल पथ प्रदर्शकों के सत्य होने का एक प्रमाण है। बहुधा ज्योतिषियों ने हुजूर के पधारने की सूचना दी थी जा पूर्णतया सत्य सिद्ध हुई तथा सबसे पहले उन्होंने हुजूर को पहजाना ठीक उसी प्रकार ज्योतिषियों ने नमरुद को हज़रत इब्राहिम की और फ़िरऔन को हज़रत मूसा की सूचना दी थी जो ठीक थी , उसी प्रकार आज भी संसार के सुप्रसिद्ध और प्रमुख ज्योतिषों तथा अध्यात्मवाद में रुचि रखने वाले तथा बहुधा ज्ञानी विशेष सूचना दे रहे हैं कि एक महान शक्ति ईसा मसीह तुल्य संसार में आने वाली है। और वह अवश्य इमाम मेहदी (अलै0) हैं। मैं उन अनेकानेक में से अति सूक्ष्म में मात्र कुछ ऐसे महानुभवों के कथनों को प्रस्तुत करता हूँ। इन समस्त के संदर्भ मेरे पास उपलब्ध हैं तथा आप स्वंय भी खोज कर उन्हें प्राप्त कर सकते हैं। प्रयास तथा खोज से ऐसा अधिक भंडार अध्ययह में आ सकता है इस पर विश्वास करने की यदि आवश्यकता नहीं है किन्तु यदि शत्रु भी किसी भलाई का पथ प्रदर्शन करे तो समझदार मनुष्य का उसकी और ध्यान देना कर्तव्य है। अस्तु मुझे आशा है कि यह लक्षण भी विशेष ध्यान का कारण बन सकेंगे। पिछले पृष्ठों पर आप रसूल अल्लाह तथा उनके परिवारजनों के कथन देख चुके हैं अब उन ज्ञानों के अभिव्यक्तियों से आन्नदरत् होकर उनके परिश्रम एंव जानकारी की प्रशंसा करें एंव आने वाले प्रतीक्षक की प्रतीक्षा की घड़ियों की लगन में उग्रता लायं क्योंकि उन महानुभावों की सूचनानुसार प्रकट होने का समय अधिक समीप दिखाई पड़ता है “ भगवान को ही ज्ञान है ” क़मर ज़ैदी
बेहारुल अनवार में काब इब्ने हसन का कथन है कि “ ज़जान ” समराट को किसी विषय में संदेह उत्पन्न हुआ तो उसने सुप्रसिद्ध ज्योतिषी सतीह को बुलवाया। जब सतीह उसके सम्मुख आया तो समराट ने उसके ज्ञान का अनुमान लगाने हैतु अपने पाँव के नीचे दीनार छुपा लिचा तथा सतीह को अपने निकट बुलाया तथा उससे प्रश्न किया कि “ बता मैंने कौन सी वस्तु छिपाई है ” ? तो सतीह ने सुभाषी स्वर में कहा कि “ मै बैतव हरम ” की ठोस पत्थर हजरे असवदकी , रात्रि की जब वह अंधेरी हो जाए तथा सवेरे की जब वह मुसकराने लगे एंव प्रत्येक सुभाषी की तथा कटुभाषी की सौगन्ध खाता हूँ कि तूने , मेरी परीक्षा हैतु अपने पैर के नीचे तथा पंगों के मध्य एक दीनार छिपाया है ” ।
समराट प्रसन्न हुआ और उसने पूछा कि “ सतीह यह बता तेरे पास यह ज्ञान कहाँ से आया ” ? उसने उत्तर दिया कि “ मेरा एक भाई है जो हर समय मेरे पास रहता है , वह मुझे ज्ञान देता है तथा मैं बताता रहता हूँ ”
तब समराट ने पूछा कि मुझे आने वाले काल में जो कुछ होने वाला है उसकी सूचना दे। यह सुनकर सतीह ने कहा “ ऐे समराट , सुन जब संसार से सज्जन पुरुष समाप्त हो जायें एंव अति क्रूर व्यक्ति उन्नति प्राप्त कर लें ईश्वर के प्रारब्ध (तक़दीर) के सम्बन्ध में झूठ बोला जाए नेत्र नीये हो जायें तथा दया का अन्त हो जाए , धनवानों का आदर बढ़ जाए तथा संसार से सम्मान उठ जाए , तो यब सब उस समय होगा जब एक तारा उदय होगा जिससे पश्चिम वाले भयभीत होंगे उसकी पूँछ पुच्छल तारे समान होगी , उसके पश्चात वर्षा रुक जाएगी , समस्स संसार में मँहगाई बढ़ जाएगी ” फिर बरबर वाले पीले झन्ड़ों के साथ श्वेत वाहनों पर सवार हकर मिस्त्र में आ जायेंगे , उस समय सख़र की संतान से एक व्यक्ति निष्क्रमण करेगा तथा वह काले झन्ड़ों को लोल में परिवर्तित कर लेगा , निशेधित को विशुद्ध मानेगा , स्त्रियों के वक्ष के बल लिटा दिया जाएगा। यह वह व्यक्ति है जो कूफ़े को नष्ट-भष्ट करेगा उस समय कितनी श्वेत पिंडली वाली स्त्रियाँ (सुन्दर स्त्रियाँ) ऐसी होगी तथा उनकी कमर टूट चुकी होगी , सतीत्व (इज्जत) लुट चुकी होगी , उस मसय नबी के पुत्र , इमाम मेहदी का निष्क्रमण होगा तथा यह समय होगा जब एक उत्पीड़ित की मदीने में हत्या हो चुकी होगी तथा उसका चचेरा भाई हरम , मक्का में मार डाला जाएगा , उस समय लुप्त वस्तु प्रकट होगी , यह उस समय होगा जब रुमी (अंग्रेज़) ज़ोर पकड़ेंगे तथा हत्या व अत्याचार का बाज़ार गर्म होगा उस समय के संसार में अनेक ग्रहण लेंगे तत्पश्चात पंक्तियं सुदृढ़ की जायेगी अर्थात् युद्ध की तैयारी होगी तब एक समराट यमन से निष्क्रमण करेगा जो रुई के समान श्वेत होगा और उसका नाम “ हसन ” या “ हुसैन ” होगा। उसके निष्क्रमण से उपद्रव समाप्त हो जायेंगे , तब वह बधाई पात्र इमाम मेहदी प्रकट होगा जो अलवी सैय्यद होगा। उस समय लोग ईश्वर की इस सुखद सामग्री के आगमन पर प्रसन्नता का आभास करेंगे तथा अति प्रसन्न होंगे , उनके तोज से अन्धकार समाप्त हो जाएगा , तथा लुप्त होने के उपरान्त पुनः सत्य प्रकट होगा , लोगों के मध्य धन का समान वितरण होगा , तलवार म्यान में रख दी जाएगी , लोग हर्ष एंव आन्नद का जीवन व्यतीत करेंगे , अधिकार अधिकारियों की ओर लौट आयेगा , लोगों में अतिथि सत्कार सामान्य होगा तथा उनके न्यायवश पथभ्रषटता का अन्त हो जाएगा , यह आने वाला धरती को न्याय एंव कृपायुक्त कर देगा , तथा रात्रि व दिन को प्रेम से परिपूर्ण कर देगा।
(भयानक युद्ध पूर्व मध्य का अन्त , मिस्त्र की दयनीय स्थिति एंव शाम का विनाश)
““ कशफ़उल-आसार ” नामी पुस्तक में “ काबउल अहबार ” का कथन है कि हज़रत इमाम मेहदी के निष्क्रमण से पूर्व एक तारा पूर्व में चमकेगा जिसकी पूँछ अत्याधिक चमकदार होगी। इस सूचना को अबू अब्दुल्लाह नईम इब्ने हमाद ने अपनी “ फ़ेतन ” नामी पुस्तक में लिखा है तथा मोहीउद्दीन इब्ने अरब ने इसका उल्लेख “ मुहाज़रतुल अबरार ” तथा “ मुसमरतुल अख़बार ” नामक पुस्तक में भी किया है। उन्होंने कहा कि इस्माईल इब्ने इब्राहिम अक़लानी किताबी ने कहा कि “ मुझसे मेरे पिता ने कहा कि मैनें इब्ने असमा की पुस्तक में पढ़ा है कि आकाश में दसवीं के रोज़ मसलसा तरबिया का क़ेरान होगा तथा जिसका आरम्भ 561 हिजरी से होगा उसमें अक़लीमें सालिस (तृतीय भूखड) व इक़लीमें राबा (चतुर्थ भूखण्ड) में तीन प्रकार की घटनायें घटित होगी। भगवान के ईश्वरीय संकल्प तथा भाग्य से ऐसा भाग्य जो तारों की चाल एंव आकाशों की गति पर इस प्रकार प्रभावित होगी कि जिस प्रकार बादल एंव वर्षा पर भूमि व वनस्पति पर तथा उसी प्राकर जैसे ईश्वरीय संकल्प समस्त रचनाओं पर संचारित हैं। इन घटनाओं में से भविष्य में घटित होगी एक यह है कि पूर्व व पश्चिम में एक समराट प्रकट होगा , जिसका शरीर बढ़ता चला जाएगा , जिसकी सूचना समस्त संरार में फैल जाएगी , उसकी भव्यता इतनी अधिक होगी कि उसकी दोनों भूजायें पश्चिम और क़िब्ला तक फैल जायेंगे वह अपने समस्त मामलों में अनुमोदक व विजयी होगा , अर्थात उसे ईश्वर की सहायता तथा अनुमोदन प्राप्त होगा। और यह सब उस युग के आरम्भ में होगा जब शनि व बृहस्पत ग्रह मकर राशि में होंगे और इनका यह युग औलोकिक होगा जो अंतिम काल तक रहेगा। उस समय यह समराट मिस्त्र राज्य पर अधिकार प्राप्त कर लेगा तथा उसे दुर्बल व शक्तिहीन कर देगा। और मिस्त्र वासियों को मृत्यु के घाट सतार देगा तथा उसके सहायकों को भी मृत्यु का स्वाद चखायेगा , तथा यह प्रारंभिक युग से चौथाई तक होगा फिर ईश्वर उसके द्वारा सूडान को नष्ट करेगा , यहाँ तक कि वह लोग उस समय तक विनाश से सुरक्षित न हो सकेंगे जब तक कि उनसे प्रत्यागमन (रुजू) न कर लें तथा उसकी शरण में न आ जायें फिर वह बनु असग़र (अंग्रेजों) पर प्रभुत्वशाली न हो जायें तता उसे तीन बार पराजित न कर लें अपने समय में अंग्रेज़ “ बलसीस ” नामक गाँव पर विजय प्राप्त कर लेंगे जिसमें अधिक संख्या में लोग हताहत होंगे।
तो जब युग का द्वीतीय चौथाई काल होगा तो प्रकोप के लक्षण विदित होंगे तथा उनका शासन तीन भागों में विभक्त हो जाएगा। इन तीनों भागों में से प्रत्येक तथा पर समुदाय उसी स्थान से जाएगा जहाँ से वह समराट अपनी सेना सहित पूर्व में जा चुका होगा। इन तीनों समूहों एंव वर्गों में एक बलवान तथा दो दुर्बल व निर्बल होंगे व समराट इन समूहों के पीछे आधे समय तक रहेगा।
फिर यह दोनों नक्षत्र (शनि व बृहस्पत) दबरान में परिवर्तित होंगे और यह युग (केरान) की तीसरी तिहाई होगी तो इस समय पश्चिम का मालिक (पश्चिमी शासक) अधिक शक्ति तथा अधिक सेना सहित गतिशील होगा , और उनकी सेनायें पूर्व पश्चिम आकर उतरेगी , नगर बहाल का पुनः एक एक इंच का निर्माण होगा। यह लोग क़ीरदान की नींव को भर देंगे। जब उसकी सूचना रोम वालों को प्राप्त होगी तो वह लोग बड़े युद्ध के बेड़ों के साथ चल खड़े होंगे और रेख़ान के तटवर्तीय भाग को जीत लेंगे जज़ीरतैन तथा असंकदरिया पर अधिकार प्राप्त कर लेंगे तो फिर कैवान व उसकी सेने ब्रजग़रबी से चलेगी तो उस समय पश्चिमी सेनायें भी गतिशील होंगी और यह लोग हजरे अबयज़ (श्वेत पहाड़) के निकट उतरेंगे तब यह सेनायें तीन भागों में विभाजित हो जायेगी फिर यह ऊँची भूमि की ओर बढ़ेंगी तथा एक समूह समुद्री मार्ग से चला जाएगा फिर यह सब नील मिसत्र पर एकत्रित होंगे उस समय बारह में सात रह जायेंगे (इसके शेष मार्ग अवरुद्ध हो जायेंगे) तब सागर शुष्क हो जाएगा तथा समस्त देशों के सोते भी शुष्क हो जायेंगे , मिस्त्र को तीन बार जलाया जाएगा तथा यहाँ सब कुछ वैध व उचित होगा , वहाँ के लोगों की सम्पत्ति वैध होगी तथा स्थिति अस्त व्यस्त हो जाएगी इनमें से बाहुल्य की मृत्यु हो जाएगी वह लोग पथभ्रष्टता की स्थिति में होंगे।
खेद है उन लोगों पर जो मिस्त्र को विभाजित करेंगे तत्पश्चात् ईश्वर केवान को सरतान (कर्क ग्रह) में यह क़ेरान (युग) का अंतिम चौथाई होगा तो जब बंनु-असग़र (अंग्रेज़) बड़ी शक्ति के साथ समुद्री बेड़ों में गतिशील होंगे तो यह दोनों द्वारों के मध्य से होकर “ असकंदरिया ” को प्राप्त कर लेंगे। तथा नगर में घुस जायेंगे यहाँ तक कि रैहान के बाज़ारों तक पहुँचेंगे तो अधिक लोगों की हत्या करेंगे फिर बनु असग़र (अंग्रेज़) शाम की और बढे़गे तथा वहाँ की एक-एक वस्तु को उख़ाड देंगे यहाँ तक कि तटों तक पहुँच जायेंगे। इनके निष्क्रम का कारण यह कारण होगा कि इन पर पूर्व का एक व्यक्ति अचानक निष्क्रमण करेगा , जिसका उन्हें ज्ञान न होगा। उस समय तुर्क (रुस) की सेना बैतुल मुक़द्दस और शाम पर आक्रमण करेंगी तथा वहाँ एक वर्ष से कुछ कम समय तक रहेंगी तो उस समय द्वीपों का समराट (इंग्लैन्ड व इन्डोनेशिया) गतिशील होगा जिसको लोग जुल अरब कहते हैं वह अपनी थल व जल सेना सहित निकलेगा उनमें से कुछ दरुफ़ की ओर जायेंगे तथा कुछ शाम की ओर एंव कुछ असकंदिया की ओर तथा समुद्री द्वीपों की ओर उनमें व तुर्कों (रुसियों) के मध्य पाँच युद्ध होंगे जिनमें उनका र्कत कुल्या (नहर) समान बहैगा। फिर उनके पीछे पश्चिमी सेनायें अपनी असीम शक्ति से विजयी होंगी लौटेंगी तब यह अपने पडा़व छोड़कर उसे असलन व तबरिया में स्थापित करेंगे। इन घटनाओं के पश्चात सुफ़यानी का निष्क्रमण होगा जो बड़ी संख्या के साथ होगा और वह उन सेनाओं की इस प्रकार हत्या करेगा कि उनमें से एक भी न शेष होगी। फिर सुफ़यानी दो सेनायें भेजेगा , एक कूफ़े की ओर तथा वह सेना इतना रक्तचाप करेगी कि वहाँ बहुत ही कम लोग रह जायेंगे फिर दूसरी सेना मदीने की ओर भेजेगा , वहाँ यह सेना तीन दिन तक लूटमार करेगी फिर मदीने के विनाश के पश्चात् सेना मक्के की दिशा में बढ़ेगी किन्तु यह बेदा के स्थान पर जो (मक्का से अति निकट है) पहुँचेगी तो कुल सेने धरती में धंस जाएगी , मात्र दो व्यक्ति शेष रह जायेंगे , जिनमें से एक जहीना के वर्ग का तथा यही वह व्यक्ति उस सेना के विनाश की सूचना देगा , फिर उसके बाद इमाम मेहदी अलै0 सलाम का निष्क्रमण होगा जो सुफ़यानी की हत्या करेंगे एक वृक्ष के नीचे जो दमिश्क नगर के बाहर होगा , इस प्राकर से कि जैसे किसी पशु को ज़िबह किया जाता है। इमाम मेहदी रुक्न तथा मुक़ाम के मध्य लोगों से अपनी भक्ति प्रतिज्ञा करायेंगे तथा धरती को न्याय व कृपायुक्त कर देंगे , तत्पश्चात् वह कुसतुनतुनिया पर आक्रमण करेंगे जिनमें इसहाक़ की संतान से सत्तर हज़ार व्यक्ति होंगे वहाँ पहुँचकर तकबीरनाद (नारये-तकबीर) लगाया जाएगा और एक तिहाई नगर नष्ट कर दिया जाएगा , तदोपरान्त कुल हगर नष्ट कर दिया जाएगा , फिर यह लोग हगर में प्रवेश करेंगे तथा असीम धन उन्हें प्राप्त होगा। इस घटना उपरान्त दज्जाल निष्क्रमण करेगा। तथा वह चालीस दिन रहेगा , उस समय का एक दिन सत्तर दिन के समान होगा (संकटों तथा दुख) के कारण तथा एक मास सत्तर महीनों के समान होगा एंव अन्य दिन साधारण दिनों की भाँति होंगे।
बस इन घटनाओं के उपरान्त ईसा इब्ने मरयम उतरेंगे , दो पीली चादरों में लिपटे हुए , सफे़द बुर्जियों के निकट , दमिश्क के पूर्वी क्षेत्र में , वह वहाँ असर की नमाज़ लोगों के साथ पढ़ेंगे और दज्जाल को अपने समक्ष बुलाकर बाबुल में उसकी हत्या कर देंगे फिर उसके पश्चात् याजूब माजूब का निष्क्रमण होगा “ अन्त में"
आवश्यक टिप्पणीः-
ज्योतिषविद्या में रुचि लेने वाले महापुरुषों के लिये यह लक्षण अत्यन्त ही ध्यान देने योग्य है शनि व मंगल का अंतिम युग (क़ेरान) अद्भुत घटनाओं का भार वाह् है , मैनें केवल इसलिए लिखा कि अनुमान हो सके कि पिछले ज्योतिषी भी इमाम मेहदी का प्रकट होना अनिवार्य जानते थे तथा उन्होंने लगभग उन्हीं समस्त घटनाओं का उल्लेख किया है जो अनेकों हदीसों में लिखी है और मैनें पूर्व पृष्ठों में लिख दिया , क्रम में अन्तर है जिसाक कोई महत्व नहीं।
हाँ महायुद्धों की जो दशा इन कथनों में दर्शित है वह मेरे ज्ञान से परे है किन्तु विचारनीय अवश्य है इसकी पुष्टी में ज्योतिष ज्ञानी एंव अन्य लोग ध्यान दे सकते हैं सम्भव है इनमें की अनेकों घटनायें आगे-पीछे बीत चुकी हो किन्तु इमाम का प्रकट होना , दज्जाल का निष्क्रमण , सुफ़यान की हत्या , अभी शेष है तथा इस प्रकार कुछ भयानक युद्ध भी अभी होना शेष है , “ भगवान को ही ज्ञान है"
वर्तमान युग के प्रसिद्ध ईसाई एंव हिन्दु ज्योतिषियों की सूचनायें इलस्ट्रेटेड वीकली आफ इन्डिया , बम्बई 31 दिसम्बर , 1961 व 14 जनवरी 1962 ई0 तथा 21 जनवरी , 1963 ई0 के अनुसार।
टिप्पणीः-
ज्योतिषी इस बात से भली भाँति परिचित हैं कि वर्ष 1962 ई0 में आठ ग्रहों का बड़ा अद्भुत मिलन हुआ , जिन पर चिंतनकर्ता ज्योतिषियों ने विचार किया तथा हिसाब लगाया , समाचार पत्रों तथा साप्ताहिकों में भी इस विषय में सूचनायें प्रकाशित हुई किन्तु उस काल के समस्त सुप्रसिद्ध ज्योतिषी जिस बिन्दु पर सहमत हुए , उनमें से कुछ का विस्तार हम निम्नवत् अंग्रेज़ी लिख के अनुवाद के रुप में प्रस्तुत कर रहे हैं , जिज्ञासा युक्त मूल लेख संदर्भित अंकों में देख सकते हैं। यह पाकिस्तान में उपलब्ध है तथा हमारे पास भी मूल लेख सुरक्षि हैं।
इस युग के सुप्रसिद्ध स्ट्रोलाजर (ज्योतिष शास्त्र ज्ञानी) मिस्टर पीटर हैफ़ीमैन इस युग के विषय में उल्लेख करते हैं कि यह बात बुद्धिगमय कर लेनी चाहिये के इन नक्षत्रों के सम्मेलन (क़ेरान) से पृथ्वी पर अद्भुत घटनायें प्रकट होंगी , सम्भव है उन घटनाओं के प्रभाव स्वभाविक न हों किन्तु एक विशेष घटना आवश्य प्रकट होगी जो मानव विचार में उथल-पुथल उत्पन्न कर दे।
इन आने वाली घटनाओं में मानव जाति के उपकार की अनेकों बातें हैं जो वास्तव में चौका देने वाली है। इनमें सबसे मुख्य एक ऐसे व्यक्तित्व का आगमन है , जिसकी दीर्घ काल से प्रतीक्षा है , यह प्रतीक्षक एंव मानवता का शिक्षक ईश्वर प्रदत्तक्षमता का मालिक होगा तथा ऐसा व्यक्तित्व होगा जो भगवान की ओर से 1400 हि0 या 200 ई0 से पृथ्वी पर नहीं भेजा गया है , यह अति वैज्ञानिक होगा जो धर्म को समस्त कुरीतियों से पवित्र कर देगा।
आगंतुक प्रतीक्षकः-
महानुभाव , अन्य स्थान पर , इस विषय में उल्लेखरत है कि यह अद्भुत युग वास्तव में आने वाले अति धार्मिक अग्रणी (पेशवा) एंव शिक्षक के आगमन की पृष्ठभूमि है आगंतुक धार्मिक पथपदर्शक इस वर्तमान युग की दुखी तथा व्यग्र मनुष्यता हैतु ईश्वरीय अनुकम्पा सिद्ध होगा।
अन्य प्रसिद्ध सट्रोलाजर मिस्टर सी0एम0 विलन्स , जोहन्सबर्ग व ने अपने विचारों को इन शब्दों में प्रकट किया है। नक्षत्रों के इस युग के सम्बन्ध में अनेक स्थानों पर , अनेकों भविष्यवाणियाँ मिलती हैं , किंतु मेरा विचार है कि वास्तव में यह युग , पृष्ठभूमि है मानवता के किसी नये शिक्षक के आगमन का , चाहै वह जन्म ले अथवा पूर्व में जन्म ले जुका है बल्कि इस समय , अपने आगमन की घोषणा करें।
मिस्टर चार्लस इ ओ कार्टर (स्ट्रोलाजर) ने इन शब्दों में विचार व्यक्त किया है कि “ मैं आभास करता हूँ कि अब आने वाला , एक महान वैज्ञानिक होगा" मिस्टर बलराम डी0 पथवाला के शब्द यह हैं कि , “ अब वह समय आ चुका है कि आने वाला समराट आए , और व्याकुल मनुष्यता को , संकट से मोक्ष प्राप्त करा दे यह ईश्वर का भेजा योगी , अपने प्रभाव में विश्व्यापी होगा , तथा उसकी यह शक्ति वर्ष 1792 ई0 तक पूर्ण हो जाएगी तत्पश्चात् भैतिकता का समापन प्रारम्भ होगा एंव मनुष्य शनैः शनैः पुनः अध्यात्मवाद की ओर आकर्षित होने लगेगा" मिस्टर सी0एम0घोष , अपनी पुस्तक “THE DAWN OF THE DARK AGES " (दि डान आफ़ दि डार्क एजेज़) के पृष्ठ 98 पर उल्लेखित है कि जब कीचड़ में रहने वाला मगरमच्छ या काँगों का क्षेत्र एक सन्त को जन्म दे सकता है , तो आने वाला भी पुनः धर्म को जीवित कर सकता है अतएव मेरे विचार में यह ईश्वर का भेजा हुआ , या तो ईसरायत का अनुसरण करेगा अथवा कोई ऐसा धर्म आरम्भ करेगा जो मूल ईसाइयत से अधिक एकरुपता रखता हो , यह ईश्वर वादी अमेज़न के तास स्थान पर उत्पन्न अथवा प्रकट हो सकता है तथा इन्डोनेशिया के सघन वनों में भी।
टिप्पणीः-
वास्तविक ईसाईयत के अनुसरण के तात्पर्य से कोई अन्तर नहीं पड़ता इसलिए कि भगवान के निकट धर्म मात्र इसलाम है तथा हज़रत आदम से हज़रत मुहम्मद तक समस्त नबियों का धर्म इसलाम ही रहा है। अतः मूल ईसाइयत भी ठीक इसलाम है प्रकट होने के स्थान की ओर जो महानुभव ने संकेत किया है वह भी विचारनीय है , इसलिये कि हमारी पुस्तकों में हज़रत मेहदी का संस्थापन इस समय ख़ज़रा द्वीप में बताया जाता है तथा कुछ स्थानों पर इसे द्वीपों की भूमि भी कहा गया है (मुलाक़ाते इमाम नामक पुस्तक के अनुसार मौलाना सैय्यद मोहम्मद मुजतहिद , अमरोहा के संदर्भ से) इस अवस्था को ज्योतिष विज्ञान द्वारा मिस्टर घोष ने ज्ञात करने की चेष्ठा की है तो उन्होनें भूमि व स्थान का विचार , अमेज़न के तास या इन्डोनेशिया के नाम से प्रस्तुत किया क्योंकि दोनों ही स्थानों पर हरयाली तथा द्वीप की भूमि है। महानुभव वास्तविक स्थान को नियत नहीं कर सकते थे किन्तु निर्णय से निकटतम है तथा यह भी उनके ज्ञानी होने का परिणाम है “ भगवान को ही ज्ञान है"
अनुवादः-
धन्यवाद सहित आग़ा मुहम्मद अतहरमिर्ज़ा साहैब , एम0 ए0 बी0 एड0 कराँची।
जामा …………………………… पद्य का अनुवाद
शाह गस्तसिप ने हकीम जामासप से पूछा कि संसार में मनुष्य तथा पशु को कब मोक्ष प्राप्त होगी ? तथा उसके लक्षण क्या है ? तो हकीम जामासप ने उत्तर दिया कि समराट एंव उसके मंत्री जान लें कि भविष्य काल भय में बीतेगा। तुर्किस्तान , भेडिया मुख वाले भेडिये ईरान पर चढ़ाई करेंगे तथा धार्मिक व्यक्ति दुर्लब हो जायेंगे तथा प्राणीगण अधिकता से मृत्यु की नींद में सो जायेंगे तथा जीवन दुर्लभ व कठिन हो जाएगा , संसार में अत्याचार व अन्याय इतना होगा कि इससे पूर्व कभी न हुआ होगा तत्पश्चात तुरकी , ताज़ी व रुमी दजला नदी के तट पर घोर युद्ध करेंगे , ऐसे अवसर पर धर्मात्मा समराट आएगा , उस भय व आतंक युक्त समय में भगवान से जो भी प्रार्थना की जायेगी वह स्वीकार होगी , ऐ समराट यह वह समय होगा जब दुराचार सामान्य होगा , पुरुष पूरुषों तथा स्त्री स्त्रियों पर निर्भर करेंगी , आकस्मिक मृत्यु अधिकता से होगी ऐसे भयानक काल में वह सज्जन व्यक्तित्व प्रकट होगा जिसके पथ प्रदर्शन तथा सहायता से ईरान से निकृष्टता व पथ भ्रष्टा समाप्त होगी तथा सत्य धर्म का चलह होगा , तथा जो उसके सत्य धर्म को स्वीकार न करेगा , उसे भयानक भूकम्प का सामना करना पड़ेगा , आकाश से रक्त बरसेगा , संसार में भयंकर अकाल व्याप्त होगा , तत्पश्चात् भगवान् की दया दृष्टि होगी सगरत ज्ञान भगवान हो (हकीम जमा सप पहलवी) हकीम ने ज्योतिष से अपने विभिन्न पद्याँश में अनेक काल का उल्लेख किरते हुए दज्जाल के निषक्रमण की जानकारी कराई है।
चूँ आइन्द दर रुस व कैवाँ बनूर
जुहल अज़बुवद फ़सले चास्म बदूर
रुस तथा कैवाँ देश शनि से चार श्रेणी दूर वृष के प्रभाव में होंगे।
हमा तीर सूज़ेद दर ज़ेरे महर
चींनी गोबन्द आकाखाने से पर
सूर्य के चक्र से प्रभावित सभी अपनी निर्धारित परिक्रमा कर रहें होंगे।
बमीज़ाँ बुवदज़ोहरा बा आफ़ताब
बुवद माह मिर्री ख़ज़े बुर्ज आफताब
तुला सहित शुक्र सूर्य के साथ तथा चन्द्रमा व मंगल भी सूर्य के चक्रम में होंगे।
कियक चश्म मरदुमज़े बूमें अरब
बेवायद कुनदा रोज़दीं अर चुशब
एक नेत्र वाला मनुष्य अरब के मुरुस्थल से प्रकट होगा जो धर्म रुपी दिन को रात्रि में परिवर्तित करेगा अर्थात धर्म को नष्ट-भ्रष्ट करेगा।
बगोयद नख़सतीं पैग़मबस्म
दिगर बार गोंयद कि ख़ुद दावस्म
सर्वप्रथम वह एक नेत्र वाल घोषित करेगा कि मैं नबी हूँ फिर दूसरी बार यह दावा करेगा कि मैं स्वंय ईश्वर हूँ।
फ़राबाँ कुनद़ ख़ल्के आलम हलाक
कियज़दाँ नदारद कसे तर्स व वाक
अत्यधिक व्यक्तियों की वह हत्या करेगा क्योंकि वह ईश्वर में विश्वास नहीं रखीत अतः ऐसा करने में उसे किसी प्रकार का भय व हिरास नही होगा।
पूर्व पंक्तियों में क़ेरान का संदर्भ देते हुए हकीम साहैब ने अदगत कराया है कि अरब भूमि से एक आँख वाला मनुष्य प्रकट होगा जो पहले स्वंय को नबी फिर ईश्वर बतायेगा और अधिक मात्रा में लोगों की हत्या करेगा , हदीसों में उसे दज्जाल कहा है।
दूसरे स्थान पर निरन्तर पद्यों में हकीम साहब कहते हैः-
चूँ आयद बसर बाज़ दौरे जुहल
शबद अज़ क़दीमें जहाँ मुबतदल
शनि से प्रभावित होने से जो समय आयेगा उसमें पूर्व काल की परिस्थितियाँ परिवर्तित हो जायेंगी।
बमीजा रसद दौर चूँ मुशतरी
जहाँरा दिरगूँ शवद दावरी
तुला से प्रभावरत जब समय क्रेता (बृहस्पत) तक पहुँचेगा तो शासन व्यवस्था विकृत हो जाऐगी।
शुदा चूँ हज़ार मदारे फ़लक
ज़े सी सद फ़जूँ बस लवद गिब्र व एक
इस प्रकार गगन के हज़ारों आवलंब अर्थात तीन सौ से अधिक संख्या में एक दूसरे में मिल जायेंगे।
ज़े तारीख़ खत्म मुलूके अजम
बंदी गून वाशद न बेशवन कम
उस समय अजम अर्थात ईरान से सामराज्यवाद समाप्त होगा इस कथन में कोई कमी बेशी नहीं है।
चूनी गुफ्त जमासप रविशे खाँ
बदानीद दौराने आख़िर ज़माँ
उस काल की वर्तमान दशा का वर्णन करते हुए हकीम जामासपका मत है कि फिर अंतिम काल में इस प्रकार होगा।
हमाँ कस शवन्द ग़ेर्फ मेहनत चुनाँ
चे दारिन्दा चे मरदुमे ख़ास व आम
ऐसी परिस्थितियाँ हो जायेंगी कि समस्त लोगों को अत्याधिक परिश्रम करना होगा। चाहै वह प्रमुख विशेष अथवा साधारण वर्ग वाला हो।
ब हशताद व हशतुम सिपाहै ज़ेचीं
बहदे समरकद व माँची वचीं
उस समय अठ्ठासी (88) सेनायें चीन से आयेंगी इस प्रकार समकद की सीमा तक चीनी ही चीनी दुष्टिगोचर होगे
बहशताद व नुह किशवरे नी मरोज़
सतानन्द ता दामने स्परोज़
नवासी (79) राज्य एक दोपहर के समय में सस्परोज़ के तट तक धावा बोल देंगे।
गही नज़्में तारीख़ ईरा नगर
कुनन्द पीनियाँ जुमला ज़ेरोज़बर
इस प्रकार ईरान के इतिहास के सम्बन्ध में यह पद्य पंक्तियाँ है जहाँ पर उस समय बड़ा ही उथल पथल होगा।
सरासर बरु बूम व पर राँ कुनद
सरासर बरुबूम व पर राँ कुनद
मकाने पलंगा व शेराँ कुनन्द
ईरान की दशा उस समय अति अस्त-व्यस्त होगी धरती मानो फाड़ खाने वाले सिंहों अर्थात् अत्याचारियों से भरी होगी।
वे क़हत दस्तोतंगी व ईरा ज़मी
कुजा लशकरे तुर्क व माचीं वचीं
ईरान में ऐसा अकाल व भूखमरी होगी तथा रुसियों व चीनियों की सेनायें भरी होंगी , दशा बड़ी चिन्तनीय होगी।
पर्याप्त पंक्तियों के पश्चात् कहते हैं।
शहै आयद अज़जानिबे मुल्के रुम
यगर्द सरे तख्त व तातर व रुम
उस समय एक समराट रुम में आकर तातार व रुम देश पर अपना अधिकार प्राप्त कर लेगा
ज़रायाज़दह माह शाही कुनद
कि मेहदीं साहबे ज़मा दर रसद
वह बहुत कम समय अर्थात ग्यारह (11) मास शासन कर पाएगा कि हज़रत इमाम मेहदी प्रकट हो जायेंगे।
सरासर पुर आबाद दारद ज़मीं
अज़ा पर कि आयद हमाँ शहै दी
जब इमाम मेहदी (अ0) का निष्क्रमण हो तो धरती पुनः आबाद हो जाएगी ऐसा मात्र उनके आगमन के फलस्वरुप ही होगी।
हज़ारों दरद्रों हज़ारों सलाम
ज़े माबाद बर रुहै पैग़म्बराँ
उन पर हमारा कोटि-कोटि नमस्कार (दरुद व सलाम) तथा उनके पूर्व के समस्त नबियों पर भी।
टिप्पणीः-
इस पुस्तक में जो फ़ारसी भाषा की पद्य पंक्तियाँ , अल्लामा तूसी , शेख बहाई तथा हकीम जामासप द्वारा इमाम मेहदी के प्रकटन सम्बन्धी लिखी है वह तकनीकी भाषा तथा गूढ़ ज्योतिष विज्ञान से परिपूर्ण है जिसका स्पष्ट व सरल अनुवाद हिन्दी भाषा में सम्भव नहीं अस्तु मात्र शाब्दिक अनुवाद प्रस्तुत है। सम्भवतः संकलनकर्ता श्री कमर ज़ैदी ने भी इस कारण उर्दू में अनुवाद न करके यथांवत छोड़ दिया , जबकि समस्त अरबी लेखों का अनुवाद किया गया है।
हिन्दी अनुवाद कर्ता सैयद गुलाम हुसैन ज़ैदी (सदफ़)
दूसरे पद्य में हकीम साहैब ने पूर्णतया अंतिम काल की सूचनायें लिखी हैं तथा ईरान की भूमि का विनाश और इमाम मेंहदी के प्रकट होने की सूचना इर प्रकार लिखी है। इन पद पंक्तियों में चीनियों के आक्रमण का विशेष रुप से उल्लेखित है।
संसार के सौ ज्योतिषियों का एकमत निर्णय व उनकी गणनानुसार इमाम मेहदी के प्रकटन की तिथिः-
(समाचार पत्र लीडर दि0 22 सितम्बर 1972 ई0 कराँची के संदर्भ से) 22 सितम्बर 1972 ई0 को जापान , दक्षिण कोरिया हाँगकाँग , भारत एंव अन्य देशों के सौ ज्योतिष सिविल कोरिया में एकत्र हुए तथा वह समस्त कुछ बातों पर एकमत है , उनमें से एक यह है कि 2020 ई0 में एक पुनीत व पवित्र वयक्ति प्रकट होगा जो हज़रत ईसा से अत्याधिक मिलता जुलता होगा , सम्भव है उसके प्रकट होने का स्थान कोरिया हो।
टिप्पणीः-
प्रकट होने के स्थान का ज्योतिषयों का अपना विचार है किन्तु मूल प्रकट होने का स्थान पूरब मध्य है सम्पूर्ण संसार में चूँकि प्रकट होने की सूचना होगी अतः प्रकट होने की गणना कर रहा है। इन ज्योतिषियों ने वर्ष सन् का निर्धारण किया है तथा इमामों का अपने ज्ञान से उस महान व्यक्तित्व के प्रकट होने पर सब एकतम हैं और इस लेख से हमारा उद्देश्य केवल यही है।
पूर्व मध्य का युद्ध विनाश दहन एंव हज़रत ख़लील के पुत्र का प्रकट होना , समाचार पत्र जहाँ दिनाँक 23 सितम्बर 1970 ई0 आदि आदि।
अमेरिका की प्रसिद्ध अध्यात्मिक स्त्री जिनके विषय में पूर्व में अपनी पुस्तक में बहुत कुछ लिख चुका हूँ अब इन पृष्ठों में उनकी कुछ अन्य खोजों का उल्लेख कर रहा हूँ , जो उन पर मेरी पुस्तक “ क़यामते सुग़रा ” प्रकाशित होने के पश्चात् प्रकट हुई है। विस्तार इस प्रकार है
जेन डिकसन अपने ध्यानोपासना की ईश्वरीय क्षमता से कहती हैं कि मुझे अपने अंतः प्रवृत्ति ज्ञान से दृष्टिगोचर होता है कि 2000 ई0 में चीनी एंव मंगोल सेनायें पूर्व मध्य पर निरन्तर आक्रमण कर रही हैं और उरदुन नदी के पूर्व में बड़ा विनाशकारी युद्ध हो रहा है , यह पूर्व का पश्चिम के विरूद्ध घोर युद्ध होगा , इस युद्ध में पूर्व मध्य का बड़ा घाटा होगा तथा मुझे विश्वास है कि पूर्व मध्य अफ्रीका और लातीनी अमेरिका में अतिशीघ्र भविष्य में भयानक टकराव होंगे , मुझे यह भी दिखाई दे रहा है कि न्युर्याकीय राजनीतिक मशीन अमेरिका में अत्याधिक धार्मिक व समाजिक निराज उत्पन्न करके एक आने वाले मसीही दज्जाल हैतु मैदान बना रही है जिसकी प्रकट होना अत्यन्त निकट है , यह दज्जाल समस्त संसार के ज्ञान का अपहरण करके राजनीतिक धार्मिक व दार्शनिक दृष्टिकोणें का एक बड़ा ही रोचक मबग़ोबा तैयार करके भूमंडल के विभिन्न जनसंख्या के ईमान , अथवा भगवान के उपासक व्यक्तियों को बड़े ही दुखद व संकट पूर्ण संघर्ष के भंवर में डाल देगा , इसका प्रभाव विश्व स्तर पर होगा और यह विश्वासन का (पेश रौ) पूर्वज होगा , जिसका अमेरिका एंव संसार के भ्रष्ट राज्य व्वागत करेंगे। किन्तु मैं यह भी देख रही हूँ कि 1962 ई0 में ख़लील का पुत्र जन्म ले चुका है जो विश्व में मानवता प्रिय उथल पुथल उत्पन्न करेगा तथा संसार के विभिन्न धर्म उसके हाथों पर एक होकर प्रभुत्वशाली बह जायेंगे। 1980 ई0 के उपरान्त संसार वालों को उस सज्जन पुरुष की असीम शक्तियों का आभास होगा तथा फिर उसका बोलबाला होता ही रहेगा , यहाँ तक कि वर्ष 1999 में वह इस भूमंडल का शासक बह जाएगा तथा उस समय तक संसार में एक विचित्र अध्यात्मिक आन्दोलन आ चुका होगा , पूरे संसार की कोई भी शक्ति उसके सम्मुख दम न मार सकेगी। उसकी नीति तथा शासन विश्वयापी होगा , इस बालक में हज़रत ईसा अलै0 की अनेकों एकरुपतायें होगी किन्तु उसका वाह्य धर्म हज़रत ईसा से भिन्न होगा , वह बालक इस समय हरे भरे , प्रफुल्लित एंव घने क्षेत्र में उपलब्ध हैं , उसके आस-पास कुछ कर्मठ शक्तियाँ है , जो उसकी रक्षा रकती है , अरब समाज में उसका आगमन एक अध्यात्मिक कंपन बना हुआ है , उस आने वाले का मुख्यालय बेरुश्लम होगा , वह भगवान् की भक्ति को भूमंडल में प्रभुत्वशाली बना देगा।
किन्तु उससे पूर्व येरुश्लम में एक तीव्र एंव भयानक भूक्मप आएगा जिससे वहाँ “ क़यामते सुग़रा ” (लघु प्रलय) प्रदर्शित हो जायेगा। वर्तमान शताब्दी के कुय और वर्षों में भूमि तथा आकाश के परिवर्तन देख रही हूँ कि इस शताब्दी में अत्याधिक भौगोलिक परिवर्तन भूमंडल का आकार बदल डालेंगे। भूकम्प अत्याधिक आयेंगे फलस्वरुप अधिक नदियाँ शुष्क हो जायेंगी तथा अगणित नदियाँ अपना मार्ग बदल देंगी तथा अनेक नई नदियाँ प्रकट हो जायेंगी तथा उनका प्रवाह अत्यन्त तीर्व होगा जो प्रत्येक वस्तु को नष्ट कर डालेगा , भले वह पहाडिया हो , वन हो या खुले मैदान हों सघन जनसंख्या वाले क्षेत्र , अमेरिका को 1977 ई0 में एक शेक पूर्ण युद्ध का सामना करना होगा। जिसके पश्चात् यहाँ का शासन परिवर्तित होगा तथा हमें इससे एक शोक जनक शिक्षा प्राप्त होगी।
वर्तमान वंश की स्थितिः-
(वर्तमान संकटों का समूह एंव कीटाँरिक युद्ध)
मुझे अभिव्यक्ति हुई है कि वर्तमान वंश के जवान , जिन्होंने अध्यात्मिक अधिपत्य (एक़दार) से पूर्णत्या विरोध का मार्ग अँगीकार किया है वह ऐसे असंख्या संकट , कष्ट एंव दुख सहन करेंगे जो न सुने गए हों ओर न ही देखें। वर्तमान वंश वाले जो अपने प्रयास से विषैली उपज तैयार कर रहे हैं उससे तैयार खेत वह स्वंय काटेंगे , मैं यह भी देख रही हूँ कि आने वाले दस वर्षों में अध्यत्मवाद की चर्चा अधिक बढ़ जाएगी , लोगों में मनोवैज्ञानिक शास्त्र से अधिक रुचि होगी किंतु इसके पूर्व हमें एक कीटार युद्ध का सामना करना होगा। जिसमें मनुष्यों तथा पशुओं के जीवन तथा उपज के विनाश का अनुमान करना कठिन है। इन सभी संकटों तथा दुखों की समाप्ति अध्यात्मिक अग्रणी के आगमन पर ही होगी।
अमेरिका के सुप्रसिद्ध व सुविख्यात भविष्यज्ञाता की अद्भुत तथा भयावह अभिव्यक्तियाँ-
श्रीमान क्रीसावल , जिनकी अब तक 86 प्रतिशत भविष्यवाणी सर्वथी सत्य सिद्ध हुई।
(अनुवाद क्रीसावल अत्यन्त ही विश्वास से 1972 ई0 में उल्लेख करते हैं कि आगामी दस वर्ष संसार वासियों के लिए हत्या , उपद्रव , विनाश एंव विगठन का संदेश लायेंगे , मानद जाति पर भौम्यी तथा आकाशीय आपत्तियाँ अवतीण (नाज़िल) होगी , पृथ्वी आग उगलेगी , भूमंडल के कठोर व ठोस आवरण को चीर कर विनाश के दानव गर्जन के साथ उबल पड़ेंगे , समुद्रों की तहों से अग्निशिखायें और दैत्य आकार चिनगारियों के झरने फूटेंगे आकाश की विशैली गैस संसार को आवरणयुक्त कर लेगी , दूसरे नक्षत्रों के निवासी पृथ्वी को अपना वास्थान बनायेंगे , नक्षत्र परस्पर टकराकर रात्रि को दिन की भांति प्रकाशवान कर देंगे तथा सूर्य का प्रकाश नक्षत्रों के टकराव से उत्पन्न होने वाली एटमी आग से मन्द पड़ जाएगा , पृथ्वी की विषैली गैस समस्त सब्ज़ी तरकारियों को विशैला बना देगी तथा एक पूरा जीता जागता नगर तीन दिनों में समाधि स्थल दिखाई पड़ेगा , न मानव रहेगा न पशु , फिर उस मृतक नगर के मृतक व्यक्तियों को ठिकाने लगाने हैतु उन्हें एटम बम द्वारा नष्ट कर दिया जाएगा , समुद्रों से ऐसी प्रचन्ड वायु चलेगी कि अब तक के समस्त समुद्री तूफ़ान उसके सामने तुच्छ होंगे , एशिया , जापान व आस्ट्रेलिया में इस समुद्री तूफ़ान से करोड़ों व्यक्ति मौत की नींद सो जायेंगे , नित्य नए रोग तथा महामारियाँ भारत से फैलेंगी और करोड़ों व्यक्तियों को काल कवलित कर देगी , मनुष्य , मनुष्य से घृणा करेगा , प्रेम व हित-चिंतन की भावना समाप्त हो जाएगी , अकाल ऐसी पड़ेगा कि माता-पिता अपनी संतान , तथा बलवान दुर्बलों को मारकर खा जाएगा और इस प्राकर से अपनी भूख मिटाने का प्रयास करेंगे , पृथ्वी अपनु धुरी से हट जाएगी , प्रत्येक देश के प्रमुख व्यक्तियों की हत्या की जाएगी , लूट की जाएगी , लूट मार , विनाश की ओर सामान्य झुकाव होगा , और बीसवीं शताब्दी का उन्नतशील , सुविधाओं एंव चैन में पला हुआ दुर्बल व कोमल मनुष्य इन कठिनाईयों ओर संकटों को न झेल पाएगा।
1980 तक दस वर्ष में होने वाली घटनायें और विनाश की हल्की सी झलक इन भविष्यवाणियों से स्पष्ट है , महानुभाव का कथन है कि “ मुझे खेद है कि मैं आने वाले दस वर्षों हैतु मानव समाज के लिए कोई प्रसन्नजनक भविष्यवाणी नहीं कर सकता। प्रत्येक दशा में मैंने आने वाले संकटों से सचेत कर दिया है। अब आप इसके पढ़िए तथा आने वाले संकटों हैतु तैयार रहिए।
हज़रत अमीरउल मोमनीन अली इब्ने अबी तालिब अबैह0 का ख़ुतबाः-
तीन सौ तेरह व्यक्तियों की व्याख्या जो हज़रते हुज्जत के समक्ष तुरन्त एक रात्रि में एकत्र होंगे।
हज़रत अली अलहै0 ने कहा कि जिस समय तुफ़यानी का निष्क्रमण होगा (सुफ़यानी की चर्चा पूर्व हो चुकी है) तो वह रसूल के परिवारजनों से शत्रुता के फलस्वरुप , उन लोगों की बड़ी संख्या में हत्या करेगा जिनके नाम अली – हुसैन – जाफ़र – मूसा – फ़ातिमा – जैनब – मरयम – खुदैजा – सकीना – रुक़ैया होगें। इसके बाद वह अपने लोगों को अनेकों हत्या करायेगा तत्पश्चात् कूफे की ओर आएगा ओर चौपायों की भाँति वहाँ सार्वजनिक हत्या होगी , यहाँ कुछ इस प्रकार के चिन्ह विद्यमान होंगे जिनके फलस्वरुप सुफयानी पर भय छा जाएगा अतः वहाँ से भागकर , शाम की ओर चला जाएगा जहाँ उसका तनिक भी विरोध न होगा। अस्तु अत्याचार अन्याय का बाज़ार गर्म होगा और स्त्रियों के पेट फाड़ करके बच्चों की खुले आम हत्या की जाएगी , किन्तु स्त्रियों के अपमान तथा बच्चो की हत्या पर किसी को अस्वीकार तथा आन्दोलन का साहस न होगा , इस अवसर पर भगवान के दूतों में आधारित उत्पन्न होगी और भगवान को क्रोध आयेगा और तुरंत हज़रते क़ायम पक्रट होंगे। जनाबे जिबरील बैयतुल मुक़द्दस के निकट उतरेंगे तथा संसार के व्यक्तियों को पुकारेंगे और घोषणा करेंगे जाऊल हक़ वज़े हकुल बातिल इन्नल बातेला काना जहुका “ सत्य प्रकट हुआ और असत्य नष्ट हुआ तथा असत्य तो नष्ट होने ही वाला था ” वह कहेंगे कि है धरती के वासियों सुनों इमाम मेहदी मक्के में प्रकट हो गये हैं अतः तुम उनकी सहायता करको तथा अनुकरण करो। जब हज़रत अली का ख़ुतबा इस स्थान तक पहुँचा तो कुछ दार्शनिक व विद्वान व्यक्ति उठ खड़े हो गये ओर कहा कि या अमीरुल मोमिनीन जरा आप इमाम मेहदी की विशेषतायें तो बतायें क्योंकि हमारे ह्रदय उनके उल्लेख सुनने हैतु अत्याधिक इच्छुक हैं तो हज़रत अली ने कहा कि वे चंद्ररुपी मुख़डे वाले तेजस्वी ललाट वालें हैं जब वे प्रकट होंगे तो उस व्यक्ति से बदला लेंगे जो हमारे अधिकार के ज्ञान को न स्वीकार करने वाला होगा उनका नाम पैगम्बर के नाम पर होगा तथा उनके पिता का नाम हसन इब्ने अली होगा जो फातिमा की संतान तथा इमाम हुसैन की संतान में से हैं , वास्तव में हम मूल ज्ञान हैं , और हम ही कुर्सीय इलाही है , हम ही कर्म का आधार हैं और हम प्रकृति के आवरणों मे से एक आवरण हैं , तथा मेहदी हम ही में से है जो संसार की सृष्टि व आचार में से अति उत्तम प्राणी हैं , वह जिस समय निष्क्रमण करेंगे तो उनके समक्ष तुरंत बद्र की संख्या के बराबर लोग एकत्र हो जायेंगे तथा ये बस साथी जनब तालूत के तुल्य होंगे जिनकी संख्या तीन सौ तेरह होगी इनके दिल लोहै समान कड़े होंगे यदि पहाड़ इनके मार्ग में आ जायें तो वह कुछ ध्यान न देंगे। भगवान आराधना के स्वर उठते रहते हैं , ये क़यामुल लैल “ रात्रि में जागने वाले ” ओर सायमुल निहार “ दिन में व्रत रखने वाले ” हैं। उनके ह्रदय प्रेम तथा शिक्षा पर बाकी हैं मैं उनके ह्रदय प्रेम तथा शिक्षा पर बाकी हैं मैं उनके नामों पर पुनः एक वर्ग खड़ा हुआ तथा उन्होंने पूछा कि ऐ रसूल के चचेरे भाई हमको इन नामों का ज्ञान करा दिजिए और उनके स्थान व लक्ष्य का भी परिचय करा दीजिए तब आपने कहा कि सुनो इनमें पहला बसरे का है ओर अंतिम अब्दाल में से है शेष क्रमशः वर्णमाला अनुसार इस प्रकार है।
1. अल्सर - मेकदादव हारुन
2. आरमीनिया – अहमद व हुसैन
3. अस्फहान – युनुस
4. अस्कन्दरिया हसन व सैय्यद
5. अफरन्ज यूरोप अली व मौहम्मद
6. बसरा – फयाली व मोहरिब
7. बरदआ – युयुफ दाऊद अब्दुल्लाह
8. बलख – असद का
9. बलसान – वारिस
10. बहरैन – नासिया , बकीर आमिर , जाफर ,
11. बलबीस – मोहम्मद
12. बैयतुल – मुकद्दस दाउद , बशर इमरान
13. बदद मिस्त्र – अजलान व ज़राअ
14. बदद मिस्त्र – अंजलान व ज़राअ
15. बदद अकील – सम्बा , जाबित , सरदन ,
16. बदद – शीबान – अनहराश
17. बदद – क़बा – ज़ाबिर
18. बदद – कलाब – मुतिर
19. जज़ायर महरुज व नूह
20. जद्दा इब्राहिम
21. जबलकाम – अब्दुल्ला व ओ बैदुल्ला
22. दसरार – अहमद व हैलाल
23. दुजील – मोहम्मद
24. दीना – शोएब
25. ददक- अब्दुल गफूर
26. हिज्र – मूसा व अब्बास
27. हमदान – खलिद मालिक नोफिल हरकुल इब्राहिम
28. हराश – नेहरविश
29. हुजुर – अब्दुल कद्दूस
30. वास्ता – अक़ील
31. जुबेदा – महमू फहद , हसन
32. जदरार “ बगदाद ” अब्दुल मुत्तलिब अहमद व अब्दुल्लाह
33. जेहाद – हुसैन अली जहाँ कसीर यगलम ताहिर सालब अहमद सालिम हिल्ला मोहम्मद अली
34. हमीर- मलिक नासिर “ हिजार ” आबिदुल कदीम
35. हबशा-इब्राहिम ईसा , मोहम्मद हमरान
36. तायफयमन- हैलाल
37. तौका – वासिल , फ़जल
38. तेहरान “ रै ” मजमा
39. तबरिया – फलीज
40. तायेफ़ – अली साबिर , जकरिया
41. तालेकान – सालेह , जाफ़र मोहम्मद , यहिया हुद सालेह दाऊद , जमील , फजल , ईसा , जाबिर , खालिद , अलवान , अबदुल्लाह , अय्युब , सलाएब , हमज़ा , अब्दुल , अज़ीज़ , लुकमान साद , फिज़जा मोहाजिर अब्दून , अबदुर्रहमान अली ,
42. यमामाँ – ताहिर व अक़ील “ यमन ” खबीर , हबश , मालिक काब
43. काशान- अबदुल्ला व औबैदुल्ला , “ अहमद ” शबआन , आमिर , हम्माद , फहैद , जोश , कुलसूम , जाबिर मोहम्मद ,
44. कन्दा – इब्राहीम
45. कृमान – अबदुल्लाह , मोहम्मद
46. कूफा- मोहम्मद हूद गयास अबाब “ करबला ” हसन हुसैन
47. कर्ख़ – बगदाद कासिम
48. लवीह कौसर
49. माजेमा – मोहम्मद , उमर , मालिक मआदा , सुईद , अहमद , मोहम्मद , हसन , हुसैन , याकूब , अबदुल्लह ,
50. मंसूरिया- अब्दुल्लाह ,
51. मक्का- इब्राहिम मोहम्मद अबदुल्लाह
52. मदीना- अली जाफ़र हम्ज़ा , अब्बास , ताहिर , हसन , हुसैन , कासिम , इब्राहिम , मोहम्मद
53. मराग़ा – असद क़ा
54. मूसल – हारुन फहैद
55. निशापुर अली वा मोहाजिर
56. नसीबैन – अहमद अली “ नजफ़ ” जाफर मोहम्मद अब्दाल
57. नजद – मरवान साद
58. सिंध – अबदुर्रहमान
59. सादावा – अहमद यहिया फलाह
60. समरकन्द अली , माजिद , उमर , युनुस मो आमिर
61. सामरा – मूरादी आमिर
62. सैलान – नूह हसन , जाफर
63. संजार – जेबान , अली
64. सरखस – हफस , नाफेह ,
65. सलामास – हारुन
66. समादा – जहीब शोएब , सादान
67. अफ़रगफ़्फार – अहमद
68. अबुकीन अबदुस्सलाम फारिस कलीब ,
69. अमान-मोहम्मद , सालेह , दाउद , हवायेल , कौसर , युनूस ,
70. अदन , औन , मूसा
71. अक्का – मुकर्रम
72. अस्कलान – मोहम्मद युसुफ , उमर फहद , हारुन
73. अम्बरा उमेर
74. अरफा – फरीक
75. आब्दान – हमजाशीबान आमिर , हम्माद , फहद , हज्जरश , कुलसूम , जाबिर मोहम्मद
76. समाआ- हुसैन जबीर , हमजा , याहिया सार-नसीर , सोला-मुअस्सिर , साद अली सालेह , सरफ-खलीफा , कन्धार इब्राहीम अहमद , कारना मलिक , करकूफ शोएब , बशीर , कजवीन , हारुन , अब्दुल्ला , जाफर सालेह , उमर , लैस अली , मोहम्मद , शलक , हसन , कुम-याकूब कादसिया हफीक , रकंतात फिरऔन , अहमद अब्दुस , समद , युहुस ताहिर , रक़ादम बहूरत , तालुत , रोबात-जाफर , शीराज-अब्दुलवहाब , शेरवान अब्दुल्लाह , सालेह जाफर , इब्राहिम शेकका हारुन मिगदाद शोश शीवान अब्दुलवहाब अश-शहीम जाफर खुरा सान नुकबा , शैल खत अम्बरेज मारक सगायेर , मलिक व यहिया अजज़ईफड आलिम व सुहैल तीन आदमी रसूल के परिवार जनों के अनुचरों में से हैं। अब्दुल्ला हनीफ अकबर नबियों क अनुचर-सबाह , सबीह मैमून , हूद।
सम्राटों में सेः- नासेह अब्दुल्ला
छः अन्य व्यक्ति ओर होंगे जिन सबके नाम अब्दुल्ला होंगे आपने कहा कि ये सब सूर्योदय से सायंकाल तक भगवान के आदेशानुसार एकत्र हो जायेंगे।
हज़रत इमाम जाफर सादिक अलै0 के कथनानुसार किताब गायतुल मुराम में लिखा है कि हज़रत इमाम जाफ़र सादिक अलै0 ने अबु बसीर से कहा कि तुम्हारे साहैब अर्थात इमाम मेंहदी (अ0) के ये असहाब होंगे जो उनकी सेवा सें अतिशीघ्र पहुँचेंगे ये अत्याधिक ईमानदार उपासक व सन्यासी तथा बलवान होंगे , इन सबको भगवान शीघ्र आपकी सेवा में एकत्र कर देगा , उनकी संख्या तीन सौ तेरह “ 313 ” होगी ये महानुभाव जिस स्थान के निवासी होंगे उसका नाम एंव उनके पिता के नाम नीये लिखे जाते हैं। शेष विस्तार कि ये किस स्थान से किस कारण औऱ किस प्रकार पहुँचेंगे इन समस्त बातों का विस्तार इस पुस्तक के अतिरिक्त बशारतुल इसलाम मुद्रित बगदाद तथा अन्य पुस्तकों में उपलब्ध है जिज्ञासा रखने वाले देख सकते हैं। सुविधा हैतु वर्णमाला के क्रम में नगरों के नाम इंगित कर दिये हैं।
क्रम स्थान नाम आत्मज सहित
1. आहवाज हम्माद इब्ने जमहर , ईसा इब्ने तमाम , जाफर इब्ने सईद।
2. असतख़र अलमुवकिल इब्ने उबैदुल्ला , हुश्साम इब्ने फाखिर।
3. अंताकिया मूसा इब्ने औफ , सुलेमान इब्ने हुर तथा उनका रुमी गुलाम।
4. एला यहिया इब्ने बदील , हवाश इब्ने फजल।
5. बागा या बाका सलाह इब्ने हारुन , सरही लुससादी।
6. बलबीस युनिस इब्ने सफर , अहमद इब्ने मुसलिम , अली इब्ने माद।
7. बसरा अब्दुर्रहमान इब्ने आतिफ , अहमद मलीह हम्माद इब्ने जाबिर।
8. बाबसंज ज़ाहिर इब्ने उमर , (जो असलह के नाम से प्रसिद्ध) उमर इब्ने
उमर , इब्ने हाशिम तलहा , हसन इब्ने हसन।
9. बालबक अनजाल इब्ने इमरान।
10. बदायबला बोरीन इब्ने जायदा।
11. बलमोरी औसाफ़ इब्ने सईद , अहमद इब्ने हमीद।
12. बाब उल अबवाब जाफ़र इब्ने अब्दुर्रहमान।
13. बलख़ नरादस इब्ने मुहम्मद।
14. बारुरद ज़्यादा इब्ने अब्दुर्रहमान , अब्बास इब्ने फ़ज़ल , सहीक़ इब्ने
सलमा नुलख़्ययात , अली इब्ने ख़ालिद , सलम इब्ने सलीम , महूबा इब्ने अब्दुर्रहमान , औज़ेर इब्ने रुसतम।
15. तवी हरब इब्ने सालेह , अम्मार इब्ने मुअम्मर , लक़ीद इब्ने फ़रात।
ज़िरजानः अहमद बिन हरक़द , ज़रार इब्ने जाफ़र अलहुसैन इब्ने अली हमीद इब्ने नाफ़े मु0 इब्ने ख़ालिद अलान इब्ने हमीद , इब्राहिम , इब्ने इंसहाक , अली इब्ने अलक़मा , सलमान इब्ने याकूब , उरबान उल इनहैक़ाल , शेबा इब्ने अली मूसा बिन करदूया।
16. हलब यूनिस इब्ने युसुफ़ , हमीद उल्ला क़ैस वसीम इब्ने मुदरिक ,
सालेह इब्ने मैमून , मुसलिम इब्ने जावर , मेहदी इब्ने हिन्द।
17. हरानु ज़कारियुससादी।
18. जावेज़ान कुर्द इब्ने हनीफ़ , आसिम इब्ने (ख़लीललुल ख़ैयात) ज़्यादा इब्ने
दरीन।
19. हलवान माहान इब्ने कसीर , इबराहीम इब्ने मुहम्मद।
20. जवीन शायद चीस हवा वकीर इब्ने अब्दुल्ला बिन अब्दूल वाहिद।
21. ख़लात वहब बिन हरनीद।
22. ख़ैबर सुलेमान इब्ने दाऊद।
23. दमिश्क़ नूह इब्ने जरीर , शोयेब इब्ने मूसा , रहजर इब्ने अब्दुल्लहुल
फ़रारी।
24. दमयात अली इब्ने ज़ायदे।
25. तहरान इसरइलुल क़हतान , अली इब्ने जाफ़र , उसमान इब्ने अली ,
मसकान इब्ने जबाल कुर्द इब्ने शीबान , हमदान इब्ने कुर्द , सुलेमान इब्ने दैलमी।
26. राबा अयाज़ इब्ने आसिम , मलीह इब्ने साद।
27. रक़्का अहमद इब्ने सलमान , नोफ़ल इब्ने उमर , अशअस इब्ने मालिक।
28. रबा कामिल इब्ने उज़ैर।
29. रब्जा हम्माद इब्ने मोहम्मद।
30. सीजिस्तान अलख़लील इब्ने नसर , तुरकी इब्ने शैबा , इब्राहीम इब्ने अली।
31. सलीमा अलक़मा इब्ने इबराहिम।
32. संजार उबैदुल्ला इब्ने ज़रीक , शहम इब्ने मतिर हैब तुलला अरबफ़ हबल
इब्ने कामिल।
33. सिन्ध शबाब इब्ने अबस , इब्ने मोहम्मद , नसर इब्ने मन्सूर।
34. समसात मूसा इब्ने जरक़ान।
35. सरन्दीप (लंका) जाफ़र इब्ने ज़करिया , दानियाल इब्ने दाऊद
36. सरदानिया अस्सारी इब्ने अग़लब , ज्याद तुल्ला रिज़्क उल्ला अबू दाऊद।
37. संदरा हूद इब्ने तरख़ान , सईद इब्ने अली , शाह इब्ने बरज़ख।
38. शाम मंज़र इब्ने जौद (एक सवार जो लुप्त होगा) , हुर इब्ने जमील ,
इबराहीम इब्ने सवाह , युसुफ़ इब्ने हिरमा (युसूफ़ दमिश्कीअत्तार) तथा इबराहिम मुहल्ला सुबक़ान का क़स्साब।
39. सेनआ फ़ैयाज इब्ने ज़राद , मैसरा इब्ने मनज़र।
40. सायज़ान अहमद इब्ने उसरुल ख़ैयात , अली इब्ने अब्दुस समदताजिर ,
ख़ालिद इब्ने सईद।
41. ताज़ीनद (शर्क़) बिन्द्र इब्ने अहमद सबका (सैलानी)।
42. तवाफ़ अब्दुल्ला इब्ने साअद।
43. तूस शहरु इब्ने हमरान , मूसा इब्ने मेहदी , सुलेमान इब्ने तलीक़ इब्ने
अलवाद (इमाम रज़ा की क़ब्र के पास वाला) अली इब्ने सनदी सैरफ़ी।
44. तालक़ान इब्ने राज़ी उलजबल्ली , अब्दुल्ला इब्ने उसर , इबराहीम इब्ने
उमर , सुहैल इब्ने मोहम्मद , मोहम्मद इब्ने जब्बार , ज़क़रिया इब्ने हबीबा , वहराम इब्ने सिरह , रिज़्कुल्ला , जिब्रील , उलहदाद , अली इब्ने अलीउल वदाक , ऐयारा इब्ने जम्हूर , जमील इब्ने आमिर ख़ालिद व कसीर (जरीद के गुलाम) अब्दुल्ला इब्ने फ़र्त , फ़ज़ारा इब्ने वहराम , माज इब्ने सालिम ख़लीद उत्तमार हमीद इब्ने इब्राहिम , जमयतुल क़रा , अफ़ीफ़ इब्ने अफ़सर , हमज़ा इब्ने अब्बास , काइन इब्ने जलीदुससनाय , अलक़मा इब्ने मुदरिक , महवीन इब्ने ख़लील , जुहूर (इब्राहिम का गुलाम) जमहूर इब्नुल हुसैन , रैयाश इब्ने साद।
45. तबरिया माँद इब्ने माद।
46. तरबिस जुरनूरैन अब्दा इब्ने अलक़मा।
47. तरबिस्तान हुशाद इब्ने करदम , बहराम इब्ने अली , अल अब्बास इब्ने
हदशम , अब्दुल इब्ने यहीया।
48. अतताई अलहबाब इब्ने साद , सालेह इब्ने तैफूर।
49. अकबरा ज़ायदा इब्ने हैबा।
50. ग़ारियात शहविया इब्ने हमज़ा , अली इब्ने कुलसूम
51. फ़िलिस्तीन सुएद इब्ने याहिया।
52. फुलजुम अलरीहा इब्ने उमर शाएब इब्ने अब्दुल्ला।
53. कुम ग़सान इब्ने मोहम्मद , अली इब्ने ख़ालिद , सुहैल इब्ने अली ,
अब्दुल अजाम इब्ने अबदुल्ला , मसका इब्ने हाशिम , अहवस इब्ने अहमद , यलील इब्ने मालिक , मूसा इब्ने इमरान , अब्बास इब्ने ज़फ़र , अल हुरैस इब्ने बशीर , मरवान बिन अलावा बिन जुजबुज (बड़ा प्रसिद्ध व्यक्ति) रंगीन सर वाला , सफ़र इब्ने इसहाक़ कामिल इब्ने हिशाम।
54. क़ेसात नसर इब्ने हवास , अली इब्ने मूसा , इब्राहीम इब्ने सफ़ीन , यहिया
बिन नईम
55. क़रिया अलहद सिया।
56. क़ीरदान अली इब्ने मूसा , अतबरा इब्ने क़रतबा।
57. क़ास मुहम्मद इब्ने मुहम्मद , अली इब्ने हमबया
58. क़मूस रबाब इब्ने जलदा , जलील इब्ने सैयद।
59. क़न्दायल उमर इब्ने फ़खा।
60. कोरिया हज़्र इब्ने जुज़वान।
61. कूफ़ा रबीया इब्ने अली , तमीम इब्ने इलयास , असर इब्ने ईसा , मुतरफ़
इब्ने उमर , हारुन इब्ने सालेह , दक्का इब्ने साद , मोहम्मद इब्ने दुआबा , हुर इब्ने अब्दुल्लाह औरतुलआम , खालिद इब्ने अब्दुल कुद्दूस , इब्राहिम इब्ने मसूद , इब्ने साद , अहमद इब्ने रेहान , गुरसुल अवाफ़ी।
62. करबला
63. मदीना हमज़ा बिन ताहिर , शरजील बिन जमील
64. मरदूवरदू जाफ़र इन्शाउल दायक़ (जौज़ हसीह का गुलाम)।
65. मख़ नवदरा इब्ने ख़लील अततार , मुहम्मद इब्ने उमर , सैदानी ग़रीब
इब्ने अली उबैदुल्ला (क़हतबा का गुलाम) सादरुमी सालेह इब्ने दजाल , माद इब्ने हानी , कुरुतुल अजवी उदूहूम इब्ने जाबिर ताशिफ़ इब्ने अली , फ़रआन इब्ने जैद , जाबिर इब्ने अली होशब इब्ने जरीर।
66. मूसल सूलेमान इब्ने सबीह।
67. क़ालीक कुर्दवीन इब्ने जाबिर।
68. मदायन मोहम्मद व अहमद , इब्नुल मुनाज़िर (दोनों नेक भाई) मैमून
इब्ने र्हस , मादा इब्ने अली , अलहर्स इब्ने सईद , जुहैर इब्ने तलहानसूर इब्ने मंसूर
69. मोलबार हैदर इब्ने इब्राहीम।
70. मौऊद मजमा इब्ने रजबूर , शाहिद व शहर इब्ने बिन्दार , दाऊद इब्ने
जरीर , ख़ालिद इब्ने ईसा , ज़्याद इब्ने सालेह , मूसा इब्ने दाऊद
(जिसकी उरफ़ियत बड़ी इब्ने कुर्द)
71. नेशपुर समआन इब्ने ग़ाखिर , अबूलबाब इब्ने मुदरिक , इबराहीम इब्ने
युसूफ , मालिक इब्ने हर्बज़रद , इब्ने सकिन , यहिया इब्ने ख़लिद , माज़ इब्ने जिबरील , अहमद इब्ने उमर , ईसा इब्ने मूसा , उस सवाक. यज़ीद इब्ने दौलत , मोहम्मद इब्ने हमाद , जाफ़र इब्ने तूफ़ान , अलान माहोब अबू मरयम , उमर इब्ने उमेर , यलील इब्ने वहाया।
72. नसीबैन दाऊद इब्ने महबूर , हामिद साहैबुल बवारी
73. नक़लबस मोहम्मद इब्ने ज़ैद हानी उत्तारवी , जवाद इब्ने बदर , सलीम
इब्ने वसद , फ़ज़ल इब्ने उमर।
74. लूक़ा नूहा अब्दुल्ला इब्ने मुहम्मद।
75. नील शाकिर इब्ने अबदा।
76. वादी उलक़रा अलहुर इब्ने रज्ज़ाक़।
77. हैरात सईद इब्ने उसमान , उसख़र बिन अब्दुल्ला (कंदी का ग़लाम
नाम से प्रसिद्ध) सआनुल क़साब , हारुन इब्ने इमरान , सालेह इब्ने जरीर , अलमारिया बिन मुअम्मर , अब्दुल अली इब्ने इबराहीम , नज़ल इब्ने हज़म , सालेह इब्ने हसीम , आदम इब्ने अली , ख़ालिदुक क़वास।
78. हमदान हारुन इब्ने इमरान , तैफ़ूर इब्ने मोहम्मद।
79. असहाबे कहफ़ अबान इब्ने मोहम्मद , अताब इब्ने मलिक , (सात व्यक्ति
कमसलीना व उनके साथी ख़ारजी ताजिर अंतकिया के मूसा व इब्ने औफ़ व सुलेमान इब्ने हुर तथा उनका रुसी गुलाम इसके अलावा अन्य व्यक्ति सहीब इब्ने अब्बास , जाफ़र इब्ने जलाल , ज़रार इब्ने हन्नान , जेबरान सुफ़यान।
80. शीराज़ के कुछ व्यक्ति तथा सरदानिया से भागे कुछ व्यक्ति
संजर अब्दुससमद क़बायली तथा कुछ नासेबीन से इस प्रकार कुल तीन सौ तेरह व्यक्ति होंगे।
संकलनकर्ता की टिप्पणीः- उपर्युक्त लिखित विस्तार में लिखावट की अत्यंत व अनेक त्रुटियाँ है। कुछ अक्षर बदल गये हैं , कुछ स्थानों के नाम समझ से बाहर हैं , कुछ का सुधार कर दिया गया है तथा कुछ के सुधार में अक्षम हू्ं जो मात्र मुल सूचना न प्राप्त होने के कारण है। ये वह महानुभव है जो धीरे-धीरे इमाम के समक्ष उपस्थित होंगे अंग्रेज़ी भाषा में क़यामते सुग़रा प्रकाशित हो चुकी है मूल्य 10 रुपये है।
विचारणीय टिप्पणीः- उल लक्षणों के संबंध में जो पूर्व पृष्ठों में लिखे जा चुके हैं।
1. आग व धुँआः आजकल इन दोनो का अस्तित्व संसार के लिये प्रमुख विषय बन गया है। 1965 ई0 1971 ई0 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में बमों का प्रयोग से वातावरण धूऐं से भर गया तथा पेट्रोल के समूह में आग लगर गयी फलस्वरुप कई दिन आकाश में धुआँ व लालिमा विद्यमान रही अतः विश्वास है कि भविष्य में बहुदा स्थानों पर यही स्थिति बढ़ती जायेगी तथा अनेकों प्रकार के पदार्थों से चलने वाले वाहनों की अधिकता और कल कारखानों की चिमनियों से भी कारोबारी नगरों में धुआँ ही धुआँ फैलती चला जायेगा तथा वातावरण दूषित होता रहेगा जो मनुष्य के जीवन हैतु अत्यंत हानिप्रद है। इसलिये हदीसों में इसकी ओर अधिका-अधिक ध्यान आकर्षित किया गया है।
2. धरती का धंसना- विभिन्न स्थानों पर ये भूकम्प की अधिकता से भी संभव है तथा हानिकारक युद्ध के शस्त्रों से भी चूंकि इसकी भी सूचना दी गयी है। अतः ऐसा ही अवशय होगा विशेष रुप से ये क्रम कि पहले पूर्वी क्षेत्र में ऐसा हो फिर अरब द्वीप मे , ईरान में हो चुका अब अरब की बारी है किंतु ये लक्षण ध्यान देने योग्य है।
3. पुरुषों को पुरुषों तथा स्त्रियों का स्त्रियों पर निर्भर होनाः-
लक्षण पूर्ण होना भी सामान्य रुप से शेष है। ऐसे कुकर्म प्रकट तो अवश्य हो रहे हैं किंतु सामान्य नहीं वाल में ये सब कुछ भी होगी।
4. स्त्रियों का स्त्रियों से विवाहः- 1973 में ये लक्षण पूर्ण हो चुका “ आग़ाज़ ” काराँची के संदर्भ से।
5. आस्तिक को भगवान की आराधाना से रोकनाः- ये लक्षण भी भली प्रकार से अभी पूरा नहीं हुआ अभी मात्र अस्तित्व की हंसी उड़ायी जाती है , परन्तु भगवा की आराधना से पूर्ण रुप से रोका नहीं जाता बाद में ऐसा भी होगा।
6. हज व ज़यारत का निलंबित होनाः- ये लक्षण भी भरपूर पूरा नहीं हो चुका अभी मात्र कठिनाइयाँ आरम्भ हुई हैं , मगर भविष्य की परिस्थियाँ संभवतः पूर्ण निलम्बन का कारण बन जायें।
7. आकाश पर प्रकोप के लक्षणः संसार वाले इल लक्षणों का अनुभव नहीं कर रहे हैं परन्तु उनका वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाता है। परन्तु शैनःशैन ऐसे लक्षण प्रकट होना आरम्भ होंगे जो भय का कारण होंगे।
8. मंहगाई का समस्त संसार में आधिक्यः- ये लक्षण आज बिल्कुल स्पष्ट है भविष्य में इसमें और अधिकता होगी।
9. “ मरगे मफ़जात ” (अकास्मिक मृत्यु) बवासीर सफ़ेद दाग़ की अधिकताः- ये लक्षण भी अति तीव्रता से पूरे होते जा रहे हैं।
10. अरब में घोर युद्धः- ये लक्षण भी अभी शेष है किन्तु संभवतः इनका समय अब निकट आ चुका है अतः ध्यान देने योग्य है।
11. काले , लाल व नीले रंग के झंडे संसार के विनाश का कारण व आतंक के उत्तरदायीः- संसार के झंड़ों की सूची देखिये तथा इस लक्षण पर विचार कीजिये कम्युनिस्ट देशों का रंग लाल अमेरिका व इज़राइल नीला और अरबों के अधिक रंग काले है संक्षेप में ध्यान देने हैतु लिख दिया अन्यथा एक एक लक्षण पर ध्यान आर्कषण हैतु विवेचना की जा सकती है अध्ययनकर्ता स्वंय ध्यान दें। मैंने पुस्तक के विस्तार के कारण छोड़ दिया।
धन्यवादः- मैं उन समस्त व्यक्तियों का ह्रदय तल से कृतज्ञ हूँ जिन्होंने किसी भी प्रकार से पुस्तक के मुद्रण में मुझसे सहयोग किया। ईरान में सम्राज्यवाद की समाप्ति जो एक अति मह्वपूर्ण लक्षण है 1979 ई0 में पूर्ण हो गया।
पुस्तक का समापन व संकलनकर्ता की विनतीः-
मैंने पुस्तक के आरम्भ में भी ये उल्लेख कर दिया कि समय से बदलती हुई दशा से प्रभावित होकर मेरे मित्रों ने अपनी आसारे क़यामत , इरफ़ाने इमामत नामक पुस्तकों के पुनः प्रकाशन हैतु आग्रह किया किन्तु मैंने ये उचित समझा कि यदि इस विषय पर नये सिरे से प्रयास किया जाये तो आशा है कि उसमें जितना समय व्यतीत होगी उसकी गणना आराधना में होगी अतः क्यों न किसी नवीन पुस्तक के संकलन का प्रयत्न किया जाये चूंकि इस युग में मेरे सम्मुख ये भी एक महत्वपूर्ण कर्तव्य था तथा उद्देश्य भौतिक उपलब्धि न था। अतः मैंने प्रयात किया फलस्वरुप 1956 में पुस्तक क़यामते सुग़रा पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करने का यश प्राप्त किया इसे मकतबे मेराजे अदब ने प्रकाशित किया।
समस्त आस्तिकगण ने इस पुस्तक को अत्याधिक पसंद किया तथा थोड़े ही समय में ये पुस्तक बाज़ार में समाप्त हो गयी एंव देश के अनेक भागों से इसकी मांग हो रही है मैं अपनी परिस्थियों वश पुनः इसका प्रकाशन शीघ्र न करा सका किन्तु स्वंय हज़रत हुज्जत ने प्रबंध करा दिया और श्रीमान डा0 मोहम्मद युनुस साहब नक़वी ने मकतबे मेराजे अदब की सहायता करके इस पुस्तक के पुनः प्रकाशन की व्यवस्था कर दी इस समय पुस्तक में उल्लेखित बहुधा लक्षण पूर्ण हो गये हैं। उदाहरण स्वरुप अग्निशस्त्र का प्रयोग अर्थात नेपाम बम आदि , औरत का औरत से विवाह , यौन संबंधी अनियमितताओं की वैधानिक आज्ञा (बरतानिया) बहन भाई का विवाह (बोन – जर्मनी , 1973) सहजातीय उपासना का वैधानिक संरक्षण (अमेरिका , बरतानियाँ 1973) पूरब-मध्य का युद्ध , थलमार्ग से हज पर प्रतिबंध , विभिन्न स्थानों पर भूकम्प की अधिकता , आकस्मिक मृत्यु का आधिक्य , वस्तुओं की मंहगाई , बाढ़ की अधिकता , आकस्मिक मृत्यु का आधिक्य , वस्तुओं की मंहगाई , बाढ़ की अधिकता आदि। अत एव अब इस पुस्तक की आवश्यकता का आभास हुआ मैंने भी अपनी व्यस्तता रोक कर कुछ बढ़ोत्तरी करना चाहा। चूंकि मेरे पास इस शीर्षक से संबंधित अभी पर्याप्त सामग्री उपलब्ध थी अतः आस्तिकों के नोदन (तक़ाजे) भी भिन्न-भिन्न थे अतः अधिक कठिनायी हुई कि क्या बढाऊँ और क्या रोक लूँ काग़ज़ की मंहगाई , पुस्तक की स्थूलता क्रयकर्ता की अनउपलब्धता , इन सभी बातों ने मुझे विवश कर दिया और मैं अत्यंत कम बढ़ोत्तरी कर सका जिसके हैतु खेद व्यक्त है।
यदि माँगे का जीवन अभी कुछ अवशेष है तो भगवान ने चाहा , तो हिम्मत नहीं हारुँगा अपने उद्देश्य को संचालित रखूंगा शेष सामग्री को इस पुस्तक के दूसरे भाग में प्रस्तुत करुगाँ मुझे प्रसन्नता एंव संतोष है कि मेरी पुस्तक के प्रकाशन के पश्चात् क़ादयानी , बहाई या किसी ऐसे स्वंय निर्मित धार्मिक पथ प्रर्दशक को साहतस न हो सका कि वह असत्य रुप से हदीसों की विवेचना कर सके , दूसरे ये तथ्य भी विदित हो गया कि हमारे नबी व इमाम ईश्वर की ओर से वह ज्ञान लेकर आये थे जो प्रलय तक की सूचनाओं पर व्याप्त थे , मेरी आत्मा को शांति एंव संतुष्टि है कि मैंने रसूल के परिवारजनों के ज्ञान की सूचनाओं के हल्के से चिह्न पुस्तक के रुप में प्रस्तुत किये और आस्तिकों के अतिरिक्त सामान्य मुसलमान , अन्य धर्मों के व्यक्तियों ने भी इनका रुचि तथा आश्चर्य से अध्ययन किया और उन महानुभवों की महिमा का सिक्का इनके ह्रदय पर स्थापित हो गया भले जिह्वा से उन्होंने न स्वीकार हो , किंतु गर्दन झुक गयी ओर ह्रदय स्वीकारने से मुकर न सकें। मैं अब भी अध्यन कर्ताओं से अनुरोध करुँगा कि इस पुस्तक को स्वंय पढ़े , तथा उसमें इंगित लक्षणों की ओऱ ध्यान देते हुये सुह्रदयता , दृढ़ प्रतिज्ञा स्वंय में उत्पन्न करते हुये प्रतीक्षा की घडियां हो जायें इसलिये कि देखने में अब समय अत्यंत ही निकट प्रतीत हो रहा है तथा अद्भुत परिवर्तन पृथ्वी एंव आकाश में संभावित है तथा हो रहे हैं।
अपने अतिरिक्त जहाँ तक संभव हो सके ये पुस्तक अन्य भाइयों को अवश्य पढ़वाऐ चाहे वह मुसलमान हों या बेमुस्लिम ताकि रसूल के परिवारजनों की सत्यता स्पष्ट हो सकें तर्क समाप्ति की अवस्था का अंत हो जाये।
यदि संभव हो तो अन्य भाषाओं में इस पुस्तक का अनुवाद करें तथा मेरी स्वीकृति प्राप्त कर लाभ प्राप्त के भय से निष्काम होकर प्रकाशित करें।
जहाँ तक मेरा संबंध है मैं तो अध्ययन कर्ताओं से मात्र इतना अनुरोध करता हूँ , कि अध्ययन के उपरांत यदि आपका ह्रदय स्वीकार करें और मेरे प्रयासों का तनिक भी ध्यान हो , तो केवल मेरे मृतक माता पिता की आत्मा को एक सूरऐ फ़ातेहा के यश से वंचित न करें तथा मुझ पापी को अपनी आराधनाओं में अवश्य याद रखें मैं स्वंय प्रार्थना हैतु हाथ उठाता हूँ कि ईश्वर समस्त आस्तिकों व अस्तिकाओं मुसलमान पुरुषों तथा स्त्रियों को इमाम अलैहिस्सलाम का ज्ञान प्रदान करें और इस भ्रष्ट युग में सही धर्म पर धैर्यवान रहने की क्षमता दे इसलिये कि हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ अ. का कथन है कि शीघ्र इसी संसार वाले संदिग्ध हो जायेंगे क्योंकि उनका इमाम उनके सम्मुख से विलुप्त होगा अतः यदि कोई संदेह से मोक्ष प्राप्ति चाहै तो उसके लिये अनिवार्य है कि वह “ दुआये ग़रीक़ ” से तल्लीन होकर प्रार्थना करें। कथनकर्ता ने पूछा कि नबी के बेटे “ दुआयें ग़रीक़ ” क्या है तो आपने उत्तर दिया कि इस प्रकार आराधना करो।
“ या अल्लोहों , या रहमानों , या रहिमों , या मुक़ल्लिबुल क़ुलुब सब्बित क़लबी अला दीनेका ”
है ईश्वर , है दयालु , है सब पर दयालु , है ह्रदय को बदल देने वाले , मुझे धर्म पर स्थिर रख।
अंत में ये स्वीकारना मेरे लिये अपरिहार्य है कि मैं मात्र एक तुच्छ विद्यार्थी हूँ तथा विद्यार्थी रहकर अपना जीवन समाप्त करना चाहता हूँ अतएव विद्यार्थी से त्रुटियों का होना आश्चर्यजनक नहीं अतः इस पुस्तक में जितनी भी त्रुटियाँ मुझसे हुई हैं उन्हें क्षमा करते हुये मुझे सूचित करें ताकि ये कर्म मेरे सुधार का कारण हो सकें। तथा पुस्तक अग्रतर एशीशन में त्रुटिमुक्त हो जाये।
मैं भगवान से अपनी त्रुटियों को स्वीकार करते हुऐ प्रार्थना करता हूँ कि भगवान मेरे इस तुच्छ प्रयत्न को स्वीकार करें तथा शीघ्रता-शीघ्र इमाम को प्रकट होने तथा दर्शन से अन्याय व अत्याचार से युक्त संसार को सत्य व न्याय के प्रकाश से प्रकाशवान कर दे।
आमीन! सुममा आमीन!
भगवान ऐसा कर , अवश्य ऐसा करे
अज्जललाहो ताला फराजहु व सहलललाहो मखर जहु वज अलना मिनर अन्सारतो व आवानतो ईश्वर शीध्रता करे इमाम के प्रकट होने में तथा उनके साथियों एंव सहायकों में हमें सम्मिलित करें।
समाप्त
जनसाधारण में अत्यंत तुच्छ
सैय्यद मोहम्मद अब्बास
कमर जैदी अलवास्ती
[{अलहम्दो लिल्लाह किताबः क़यामते सुग़रा पूरी टाईप हो गई। खुदा वंदे आलम से दुआगौ हुं कि हमारे इस अमल को कुबुल फरमाऐ और इमाम हुसैन (अ.) फाउनडेशन को तरक्की इनायत फरमाए कि जिन्होने इस किताब को अपनी साइट (अलहसनैन इस्लामी नेटवर्क) के लिऐ हिन्दी मे टाइप कराया। }]
13.4.2018
विषयसूची
आत्म निवेदन 2
श्रद्धार्पित 4
(इज़हारे ख़्याल) मन अभव्यक्ति 6
प्राक्कथन 11
प्रारम्भिक शब्द 22
इमाम की आवश्यकता 29
पैगम्बर साहब की हदीस 32
संसार के अन्य धर्म एंव इमाम मेहदी अल्लैहिसलाम क् अस्तित्व 35
आप का जन्मः- 36
हुलियाः- 37
मनन एंव चिन्तन हैतु आमंत्रण 40
अक़ीदये क़यामत (प्रलय का विश्वास) 47
आग और धुँआ- 48
दाबतुल अर्जः 48
इमाम मेहदी का उठनाः 48
प्रकटन का लक्षणः 50
हतमिया (अटल) लक्षणः 51
सामान्य लक्षण (उमूमी अलामात) 51
विशेष लक्षण (खुसूसी अलामात) 51
भविष्य के लक्षणः 52
सामान्य लक्षण या अन्तिम काल के लक्षणः 54
अन्तिम काल हैतु हुजुर का खुत्बा (वक्तव्य) अनुवाद 54
पचास स्त्रियाँ और एक पुरुष- 64
साठ झूठे नबीः 65
अंग्रेजों से युद्ध और तबाहीः 65
विशेष नगरों तबाही हजरत अली द्वारा वर्णितः 66
लाल मृत्यु एंव श्वेत मृत्युः 68
पीले झन्डों का शाम में प्रवेशः 69
कूफे का घेराव और मस्जिद के पीछे 70
नफ्से जकिया की हत्या 70
हज़रत अली (अ 0) के खुत्बउल इफ्तेख़रिया के दस लक्षण है 71
विश्व की जनसंख्या मात्र एक तिहाई रह जायेगी 71
ईरान में नरसंहारः 72
नियम विरुद्ध गहन लगनाः 72
भूचालों की अधिकता तथा अत्यधिक भयः 72
बारह सैय्यदों का झूठा दावाः 73
अरब दिवस पर कूफे में उपद्रवः 73
हतमिया (अटल लक्षण) 73
1. सुफ़यानी का उठनाः 74
2 .आकाशीय चीख 75
3. सूर्य ग्रहणः 76
4.प्रकृति एंव नियमों के विरुद्ध एक दिन पश्चिम से सूर्योदय 77
5.सूर्य व चन्द्रग्रहणः 78
6.दज्जाल का उठनाः 79
7.हज़रत ईसा (अ 0) का आकाश से उतरनाः 81
8.संसार में आग तथा धुऐं का फैल जानाः 82
9.बगदाद शहर का विनाशः 83
10.सैय्यद हसनी का उठना 84
टलने योग्य या शर्त पर आधारित लक्षणः 86
भविष्य में आने वाले लक्षणः 88
उक्तलिखित लक्षणों की व्याख्या तथा उनके प्रमाणः 104
पाँच घटनायेः- 125
बनी हाशिम का शासन 127
क्रमशः दस लक्षणः- 128
एकत्रीकरण व शराब से चिकित्साः- 129
अमेरिका की एक अध्यातमिक स्त्री और हज़रत इमाम मेहदी का विचारः- 145
शाह नेमतुल्लाह वली और इमाम मेहदी का प्रकट होनाः- 151
मिर्ज़ा भ्रातगण एंव इमाम मेहदी अलैहिस्सलाम 154
लक्षणों का संक्षेप उल्लेखः- 175
एराक़ वालों की विकट स्थिति और हज पर प्रतिबन्धः- 185
अरब भूमि के सुप्रसिद्ध ज्योतिषी , सतीह का आत्मवर्धक वक्तव्यः- 190
सुन्नियों की प्रसि पुस्तक एंव इमाम मेहदी के प्रकट होने के लक्षण ज्योतिष विज्ञान के आधार परः- 193
आकाश में आठ ग्रहों का मिलन तथा इमाम मेंहदी का प्रकट होनाः- 199
ईरान का नक्षत्रज्ञाता हकीम जामासप एंव इमाम मेहदी के प्रकट होने की सूचना या धार्मिक सम्राट का आगमनः- 202
अमेरिकी अध्यात्मिक स्त्री जेन डिकसन एंव भविष्यवाणियाँ 210
हज़रत इमाम जाफ़र अलैहिस्सलाम के साथियों “असहाब ” के शुभ नामः 223